नई दिल्ली, एजेंसी। 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। चुनाव आयोग (EC) ने शुक्रवार को यह ऐलान किया। इस चुनाव में NDA को राज्यसभा की एक सीट गंवानी पड़ सकती है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को तीन सीटों का फायदा होने की उम्मीद है।
जिन कुल 26 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 और कांग्रेस के पास चार सीटें हैं, जबकि एक सीट JMM के पास और तीन सीटें YSRCP के पास हैं।
इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलेगी। 244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं।
अब राज्यवार जानिए NDA और विपक्ष को कितना फायदा-नुकसान…
महाराष्ट्र और तमिलनाडु में उपचुनाव, NDA की एक सीट कम होगी: महाराष्ट्र में NCP की सुनेत्रा पवार और तमिलनाडु में AIADMK के सीवी षणमुगम के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होंगे। महाराष्ट्र की सीट एनडीए के खाते में आ सकती है। वहीं तमिलनाडु की AIADMK की सीट सत्ताधारी पार्टी TVK को मिल सकती है। TVK को कांग्रेस का समर्थन है।
आंध्र प्रदेश में 4 सीटें, चारों NDA को: आंध्र प्रदेश की चारों सीटें TDP के पास हैं, वह चारों सीटें फिर जीत सकती है। यानी NDA को कोई नुकसान नहीं होगा।
गुजरात में 4 सीटें, चारों NDA को: गुजरात में BJP चारों सीटें भाजपा के पास हैं, जिन्हें वह फिर अपने नाम करेगी। यानी NDA को यहां भी कोई नुकसान नहीं होगा।
झारखंड में 2 सीटें, दोनों INDIA को: झारखंड में दो सीटें हैं। दोनों सीटें JMM के पास है। JMM-कांग्रेस गठबंधन को यह सीटें फिर मिलने की संभावना है। लेकिन BJP के पास 21 विधायक हैं। चार विपक्षी सदस्यों की क्रॉस वोटिंग अगर हो गई तो वह एक सीट जीत सकती है।
मध्य प्रदेश में 3 सीटें, दो BJP, एक कांग्रेस को: मध्यप्रदेश में तीन सीटें हैं। जिसमें से दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास हैं। यहां रिजल्ट फिर ऐसा ही हो सकता है।
राजस्थान में 3 सीटें, दो BJP, एक कांग्रेस को: राजस्थान में भी तीन सीटें हैं। जिसमें से दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। मध्य प्रदेश की तरह यहां भी रिजल्ट ऐसा ही आ सकता है।
कर्नाटक में 4 सीटें, कांग्रेस को तीन, बीजेपी को एक: कर्नाटक में अभी कांग्रेस और एनडीए के पास दो-दो सीटे हैं। चुनाव में कांग्रेस तीन सीटें जीत सकती है। वहीं NDA को केवल एक सीट मिलेगी।
मणिपुर-अरुणाचल में भाजपा के खाते में दो सीटें: मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक सीट खाली हो रही हैं। दोनों भाजपा के पास हैं, पार्टी फिर इन्हें हासिल कर सकती है। मिजोरम में अभी मिजो नेशनल फ्रंट के पास एक सीट है, जो जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी अपनी सीट बचाने में कामयाब हो सकती है।
खड़गे, देवगौड़ा समेत 24 सांसद रिटायर हो रहे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल 25 जून 2026 तक है।
रिटायर हो रहे सदस्यों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सीनियर लीडर दिग्विजय सिंह, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा समेत 24 सांसद शामिल हैं। इन सभी सीटों से मौजूदा सदस्य 21 जून से 19 जुलाई के बीच रिटायर हो रहे हैं।
इनके अलावा, दो रिक्त सीट पर भी उपचुनाव होगा। ये सीटें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के नेता सीवी षणमुगम के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं।
16 मार्च: राज्यसभा की 11 सीटों में से 9 पर कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स जीते
हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए थे। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की थी।
राज्यवार सीटों की बात करें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर NDA प्रत्याशी विजयी रहे थे। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 NDA और 1 बीजद उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।
ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव
राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।
राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।
महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं
राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं।
कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।
नई दिल्ली, एजेंसी। परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं पर सख्त रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों को और मजबूत करने जा रही है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट, 2024 में संशोधन के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संशोधित विधेयक को मिली मंजूरी
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठकों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। इस बैठक में संशोधित पेपर लीक विधेयक के मसौदे पर चर्चा की गई और उसे मंजूरी दे दी गई। सरकार अब इस विधेयक को अगले सप्ताह शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है।
पेपर लीक माफिया पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर फैसला सुनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
बता दें कि इस फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार मजबूत कानूनी व्यवस्था लागू करेगी।
CJP और केंद्र सरकार के बीच हुई अहम बैठक
इधर, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक हुई। इस वार्ता को आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक से पहले CJP ने मंत्रियों के सरकारी आवास या कार्यालय में बातचीत से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बैठक की मांग की थी, जिसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को वार्ता स्थल बनाया गया।
CJP ने रखीं ये प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई।
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे 25 जुलाई (शनिवार) को ज़िला स्तर पर कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करें। यह आयोजन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के समर्थन में और विरोध कर रहे छात्रों पर कथित “बर्बर हमलों” की निंदा करने के लिए किया जाएगा। सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्षों को लिखे एक पत्र में, AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशन में आयोजित किए जाने चाहिए।
वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, “माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशानुसार, आपसे अनुरोध है कि आप अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रत्येक ज़िला कांग्रेस कमेटी (DCC) को शनिवार शाम, 25 जुलाई, 2026 को एक विशाल कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करने का निर्देश दें।” पत्र में कहा गया है कि मार्च महात्मा गांधी या डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा की ओर बढ़ना चाहिए और वहीं समाप्त होना चाहिए, साथ ही छात्रों और युवाओं के समर्थन में सत्याग्रह आयोजित किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करने का भी निर्देश दिया। पार्टी ने परीक्षा की शुचिता के “पूरी तरह से ध्वस्त होने” और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता का आरोप लगाया। पत्र में कहा गया, “हमें परीक्षा की शुचिता के पूरी तरह से ध्वस्त होने और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की भी स्पष्ट रूप से मांग करनी चाहिए।”
पार्टी ने PCC, DCC, ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, फ्रंटल संगठनों, विभागों, सेल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और नागरिक समाज के सदस्यों की भागीदारी का आह्वान किया। PCC अध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया कि मार्च और सत्याग्रह “शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावी ढंग से” आयोजित किए जाएं और उन्हें व्यापक मीडिया और सोशल मीडिया कवरेज मिले।
पत्र में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और डराने-धमकाने, दमन और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस की यह घोषणा NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आई है। इस बीच, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच एक बैठक हुई।
CJP बातचीत के लिए तब सहमत हुई जब सरकार ने कथित तौर पर उसकी दो शर्तें मान लीं — कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और हाल ही में परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, CJP प्रधान के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग पर अड़ी रही। CJP प्रतिनिधि अभिजीत दिपके ने कहा, “हमें (केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के) इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा।” यह घटनाक्रम तब हुआ है जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा के मुद्दे और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रणालीगत सुधारों के संबंध में केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी घोषणा की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ऐसे मसौदा विधेयक पर विचार करेगा जिसमें पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान होगा।
नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर, एजेंसी। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में शुक्रवार को उदयपुर-किलाड़ सड़क पर कडू नाला के पास लैंडस्लाइड हो गई। इसकी चपेट में टाटा सूमो टैक्सी आ गई। गाड़ी में 15 लोग सवार थे, 13 की मौत हो गई।
उधर गुजरात में भारी बारिश से कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। वलसाड के उमरगाम तालुका में 16 घंटों में 43 इंच बारिश हुई, जिससे निचले इलाके डूब गए हैं।
नवसारी में बाढ़ में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। अहमदाबाद, सूरत में पानी भर गया। वाव-थराद जिले में बाजार डूब गए।
यूपी में पिछले 10 दिनों से हो रही बारिश के चलते गंगा, यमुना समेत 10 नदियां उफान पर हैं। सीतापुर में पानी सड़क पर भर गया। ग्रामीण नाव से आ-जा रहे हैं।
वहीं, राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर समेत 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है।