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हिरबाश छत्तीसगढ़ पुरुष बास्केटबॉल टीम में कोच

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कोरबा। जिले के हिरबाश साहू को छत्तीसगढ़ पुरुष बास्केटबॉल टीम का नया कोच नियुक्त किया है। वे आगामी 76वीं जूनियर राष्ट्रीय बास्केटबॉल चैंपियनशिप में टीम का नेतृत्व और मार्गदर्शन करेंगे। यह प्रतियोगिता पुडुचेरी में 22 मई से 29 मई तक होगी। इस नेशनल स्पर्धा में हिस्सा लेने कोच हिरबाश अपनी टीम के साथ पुडुचेरी के लिए रवाना हो गए हैं।

लंबे समय से हिरबाश बास्केटबॉल खेल और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं और उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी इस नियुक्ति से कोरबा समेत पूरे प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी और उत्साह का माहौल है।

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कोरबा

कोरबा में मिली लाश का खुलासा:पुलिस हत्या मान रही थी, फोरेंसिक जांच में आत्महत्या निकली, मानसिक रूप से परेशान था मृतक

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कोरबा। कोरबा के सीएसईबी चौकी क्षेत्र स्थित कोहड़िया में 10 मई को सड़क किनारे मिली खून से सनी लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जिस मामले की जांच हत्या मानकर कर रही थी, वह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद आत्महत्या निकला।

बसंत पटेल (37) की रक्तरंजित लाश सड़क किनारे झाड़ियों में मिली थी। घटनास्थल पर खून के धब्बे और शव घसीटने जैसे निशान मिलने से हत्या की आशंका जताई गई थी।

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

टूटी बीयर बोतल से खुद पर किया हमला

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम को मौके पर बुलाया था। घटनास्थल से एक टूटी हुई बीयर की बोतल भी बरामद हुई थी।

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में हत्या के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच में सामने आया कि मृतक ने टूटी बीयर बोतल के धारदार कांच से खुद पर हमला किया था।

डॉक्टरों और फोरेंसिक टीम ने चोटों की जांच के बाद पुष्टि की कि सभी घाव स्वयं पहुंचाए गए थे।

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

मानसिक रूप से परेशान था मृतक

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बसंत पटेल मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, लेकिन किसी संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी नहीं मिली। इससे आत्महत्या की आशंका और मजबूत हुई।

फैक्ट्री कर्मचारी था मृतक

बसंत पटेल मूल रूप से मस्तूरी के सोनसरी गांव के निवासी थे। पिछले तीन वर्षों से वे सर्वमंगला बरमपुर में किराए के मकान में रह रहे थे और इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे।

9 मई की सुबह वे काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटे। अगले दिन 10 मई की सुबह उनकी लाश कोहड़िया इलाके में मिली थी।

मृतक शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि घटना से दो दिन पहले ही वे अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होकर गांव से कोरबा लौटे थे।

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तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव

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कोरबा। एमसीसीआर ट्रस्ट व यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से क्षेत्रीय संवाद और उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल रोग, बाल मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग और मातृ व शिशु स्वास्थ्य जैसे विषयों पर मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी व संवेदनशील बनाना था।

कार्यक्रम में संवाद व प्रशिक्षण सत्रों के दौरान डॉ. गजेंद्र सिंह ने बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों की चुनौती, उनकी जल्द पहचान, समय पर उपचार व उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी साझा की। साथ ही समुदाय आधारित स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों व जनसहभागिता की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। विशेषज्ञों ने कहा मीडिया केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। तथ्यात्मक, संवेदनशील व जनहितकारी रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है और लोगों को समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से सिकल सेल के जिला सलाहकार अरविंद भारती, यूनिसेफ की स्वास्थ्य विभाग से डॉ. गजेन्द्र सिंह व उनकी टीम, एमसीसीआर ट्रस्ट से डॉ. डीश्याम कुमार आदि उपस्थित रहे।

सामुदायिक सहभागिता पर जोर सिकल सेल रोग की समय पर जांच व नियमित उपचार, बच्चों में टाइप-1 मधुमेह के शुरुआती लक्षणों की पहचान, जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों के जल्द रेफरल व उपचार और मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त पूर्ण टीकाकरण, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, सामुदायिक सहयोग व बहु-विभागीय समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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डीजल संकट से थमे ट्रक-मेटाडोर के पहिए, बाहरी राज्यों से सब्जी की सप्लाई ठप

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कोरबा। डीजल संकट की सीधी मार अब शहरवासियों की थाली पर पड़ने लगी है। बुधवारी व इतवारी बाजार जैसी मुख्य थोक मंडियों में भारी वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है।

यहां की सब्जी मंडी में जिन बड़े ट्रकों और मेटाडोर के जरिए बाहरी राज्यों व दूर-दराज के इलाकों से सब्जियों की बंपर आपूर्ति होती थी, वे ईंधन की किल्लत के कारण अब यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। फिलहाल, शहर के लोगों की जरूरतों को पूरा करने सिर्फ आसपास के जिलों और स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों से ही सब्जियां आ रही हैं, जिन्हें छोटे वाहनों (जैसे पिकअप और ऑटो) के जरिए जैसे-तैसे लाया जा रहा है। खासकर बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और अंबिकापुर क्षेत्र से आने वाली सप्लाई पर निर्भर हो गई है।

यह स्थिति आगे भी बनी रही है तो सीमित सप्लाई के कारण हरी सब्जियों के दाम आसमान छू सकते हैं। अभी लोकल सब्जी की आवक अच्छी होने से कीमतों में अधिक उछाल नहीं आया है। सब्जी व्यवसायियों के अनुसार स्थानीय उत्पादक सब्जी की मांग को अधिक दिन तक पूरी नहीं कर पाएंगे। शहर की सब्जी मंडी में कटघोरा, कोरबा व करतला ब्लॉक से हरी सब्जियों की आवक काफी अच्छी बनी हुई है। स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियों में बरबट्‌टी, भिंडी, लौकी, डोड़का, करेला, लाल भाजी, पालक भाजी, कटहल, आम, पपीता, मूली पर्याप्त मात्रा में बाजार में पहुंच रही है।

बुधवारी मंडी के थोक विक्रेता रमेश बंजारे ने बताया महाराष्ट्र के नासिक, नागपुर व पुणे से बारहमासी सब्जियां विशेषकर प्याज, टमाटर, फूलगोभी, शिमला मिर्च की बड़ी खेप पहुंचती है। वहीं पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से हरी मिर्च, धनिया, आलू, लहसुन और मौसमी हरी सब्जियों की भारी आवक ट्रक और मेटाडोर के जरिए सीधे कोरबा मंडी में होती है। यही नहीं, आंध्र प्रदेश और ओडिशा से कमरख, मुनगा, नींबू और सीजनल सब्जियां कोरबा आती हैं। इनकी आवक अभी नहीं के बराबर है।

सब्जी विक्रेता अनिल पटेल ने बताया कि बाजार में अब टमाटर की आपूर्ति पूरी तरह से बाहर से आने वाली सप्लाई पर निर्भर हो गई है, क्योंकि स्थानीय किसानों के खेतों में टमाटर नहीं रह गया। इससे टमाटर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 15 दिन पहले 15 रुपए किलो में बिकने वाला टमाटर इन दिनों 40 से 50 रुपए तक पहुंच गया है, जबकि शेष सब्जियों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी ही हुई है। पटेल ने बताया कि 10 दिन बाद अन्य सब्जियों के दाम भी बढ़ जाएंगे, इससे इनकार नहीं कर सकते। बुधवारी सब्जी मंडी में दो दर्जन थोक विक्रेता हैं। इनका कहना है कि 10 दिन पहले तक ऐसी मंडी रोजाना 6 ट्रक सब्जी पड़ोसी राज्यों से पहुंचती थी, जबकि इतनी गाड़ियां इतवारी बाजार मंडी में आ रही थी। जबसे डीजल की किल्लत बढ़ी है, तब से मंडी से ये गाड़ियां गायब हो गई हैं। ट्रकों में वृद्धि का भी असर हुआ है। पुराने भाड़े पर ट्रक वाले अब सब्जी लाने तैयार नहीं हो रहे हैं, इसलिए आसपास के जिलों से बाहर से आने वाली सब्जियों की पूर्ति छोटे वाहनों से हो रही है।

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