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छत्तीसगढ़

माओवादियों का ऑडियो वायरल- हथियार छोड़ने को तैयार:कहा- जेल में बंद साथियों से बात करेंगे, आईजी-गृहमंत्री बोले- पहले लेटर की जांच करेंगे

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जगदलपुर,एजेंसी। नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी अब सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने राजी हो गई। CPI (माओवादी) ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि उनकी पार्टी फिलहाल अस्थायी तौर पर हथियारबंद संघर्ष को रोकने और शांति वार्ता के लिए तैयार है। संगठन ने साफ किया है कि वे सरकार से गंभीर और ईमानदार पहल की उम्मीद कर रहे हैं।

पार्टी ने कहा कि उसने 2024 से चल रहे अभियान में पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों का सामना किया है, जिसमें दोनों ओर से नुकसान हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि एक महीने तक सरकार से संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए और कैद माओवादी नेताओं को भी वार्ता में शामिल करने का अवसर दिया जाए।

नक्सली लीडर अभय का यह प्रेस नोट 15 अगस्त 2025 का है, जो अब वायरल हो रहा है। इसके साथ ही एक ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें भी नक्सली लीडर अभय ने यही बात कही है। प्रेस नोट में कहा गया है कि अगर सरकार वास्तव में वार्ता चाहती है, तो वह जेल में बंद माओवादी साथियों से भी विचार-विमर्श की अनुमति दे और इस दौरान संगठन पर पुलिस दबाव न डाले।

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों के लेटर की जांच कराने की बात कही, उनके मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सीएम साय इस पर फैसला लेंगे। इससे पहले बस्तर IG सुंदरराज पी ने दैनिक भास्कर से कहा कि फिलहाल नक्सलियों के इस पर्चे की जांच कर रहे हैं।

जब हम पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएंगे, उसके बाद ही कुछ प्रतिक्रिया दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्चे में जिस नक्सली की तस्वीर है वह नक्सली लीडर अभय है। IG सुंदरराज पी ने कहा कि यह फिर से स्पष्ट किया जाता है कि सीपीआई (माओवादी) के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या संवाद पर निर्णय के संबंध में सरकार फैसला लेगी।

वहीं इस पर दीपक बैज ने कहा कि नक्सल मामले में सरकार कन्फ्यूज है। गृहमंत्री का अलग बयान आ रहा है, मुख्यमंत्री का अलग बयान आ रहा है। सरकार पहले तय कर ले कहना क्या चाह रही है और करना क्या चाह रही है। नक्सलियों का पत्र आया है तो जांच होनी चाहिए। नक्सलवाद खत्म होने को लेकर कहा कि इस पर 26 मार्च 2026 के बाद ही बात करेंगे।

नक्सली लीडर अभय का यह प्रेस नोट 15 अगस्त 2025 का है, जो अब वायरल हो रहा है।

नक्सली लीडर अभय का यह प्रेस नोट 15 अगस्त 2025 का है, जो अब वायरल हो रहा है।

बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि फिलहाल नक्सलियों के इस पर्चे की जांच कर रहे हैं।

बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि फिलहाल नक्सलियों के इस पर्चे की जांच कर रहे हैं।

नक्सली लीडर अभय ने प्रेस नोट में लिखा है–

हथियारबंद संघर्ष को अस्थाई रूप से विराम घोषित करने का निर्णय लिए हैं। हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि भविष्य में हम जन समस्याओं पर तमाम राजनीतिक पार्टियों एवं संघर्षरत संस्थाओं से जहां तक संभव हो कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे। इस विषय पर केंद्र के गृह मंत्री और उनसे नियुक्ति व्यक्तियों प्रतिनिधि मंडल से वार्ता के लिए हम तैयार हैं।

लेकिन हमारे इस बदले हुए विचार से पार्टी को अवगत कराना पड़ेगा। यह हमारा दायित्व है। बाद में पार्टी के अंदर इस पर सहमति जताने वाले साथियों में से से एक प्रतिनिधिमंडल तैयार कर शांतिवार्ता में शिरकत करेंगे। वर्तमान में हमारे संपर्क में समिति कैडर और कुछ नेतृत्वकारी साथी संपूर्ण सहमति जता रहे हैं।

वीडियो कॉल के जरिए वार्ता का जिक्र

इसलिए केंद्र सरकार से हमारा अनुरोध है कि देशभर से अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे और जेल में बंद साथियों से सलाह मशविरा करने के लिए हमें एक माह का समय दें। नक्सली लीडर ने कहा कि इस विषय पर प्राथमिक रूप से सरकार के साथ वीडियो कॉल के जरिए विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए भी हम तैयार हैं।

इसलिए और एक बार हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि फौरन एक माह के लिए सीजफायर करें। अभियान को रोकें।

शाह ने कहा था- मार्च 2026 तक देश से खत्म हो जाएगा नक्सलवाद

24 अगस्त 2024 को रायपुर में नक्सली हिंसा पर समीक्षा बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था- मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा।

24 अगस्त 2024 को रायपुर में नक्सली हिंसा पर समीक्षा बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था- मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा।

24 अगस्त 2024: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने की बात कही थी। छत्तीसगढ़ के रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा के बाद उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मजबूत रणनीति के साथ रुथलेस रणनीति के साथ अंतिम प्रहार किया जाए।

शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं।

लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे

छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।

11 सितंबर 2025 को गरियाबंद मुठभेड़ में 1.80 करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर बालाकृष्ण समेत 10 नक्सली मारे गए।

इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था।

21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।

गरियाबंद में मारे गए 5 करोड़ के इनामी नक्सली

बीते 11 सितंबर 2025 को ही गरियाबंद जिले में जवानों ने एनकाउंटर में डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली मोडेम बालाकृष्ण समेत 10 नक्सली को मार गिराया था। सभी के शव हेलीकॉप्टर से गरियाबंद लाए गए। मोडेम बालाकृष्ण ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। मामला मैनपुर थाना क्षेत्र के मटाल पहाड़ी का है।

मिली जानकारी के मुताबिक मारे गए नक्सलियों में 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। सेंट्रल कमेटी सदस्य मनोज उर्फ ​​मोडेम बालाकृष्ण, ओडिशा स्टेट कमेटी सदस्य प्रमोद उर्फ ​​पांडू, ओडिशा स्टेट कमेटी सदस्य विमल उर्फ ​​मंगन्ना समीर, PPCM रजीता शामिल हैं।

इसके साथ ही टेक्निकल टीम PPCM अंजली, SDK ACM सीमा उर्फ ​​भीमे, ACM विक्रम, डिप्टी कमांडर उमेश और बीबीएम डिवीजन PM बिमला शामिल हैं। इनपर छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सरकार ने 5 करोड़ 22 लाख का इनाम घोषित किया था।

ये तस्वीर गरियाबंद जिले की है। मटाल की पहाड़ियों पर एनकाउंटर में 10 नक्सलियों को मारने के बाद जवान।

ये तस्वीर गरियाबंद जिले की है। मटाल की पहाड़ियों पर एनकाउंटर में 10 नक्सलियों को मारने के बाद जवान।

5 महीने पहले भी कही थी शांति वार्ता की बात

नक्सलियों के केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने 5 महीने पहले भी एक पर्चा जारी किया था। अभय ने लिखा कि, पिछले 15 महीनों में उनके 400 साथी मारे गए हैं। अगर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रुकती है, तो हम शांति वार्ता के लिए तैयार हैं।

इस पर छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि हमारी सरकार किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता के लिए तैयार है। बशर्ते इसके लिए कोई शर्त न हो। नक्सली वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं तो उन्हें वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा।

शर्मा ने कहा था कि वार्ता का स्वरूप ISIS जैसी किसी कट्टरपंथी विचारधारा की तर्ज पर नहीं हो सकता। अगर कोई चर्चा करना चाहता है, तो उसे भारतीय संविधान की मान्यता स्वीकार करनी होगी। संविधान को नकारते हैं और समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं, तो वार्ता का कोई औचित्य नहीं रहता।

कब छत्तीसगढ़ में किस घटना में कितने जवान शहीद हुए…

पिछले 25 सालों में बस्तर में पुलिस और नक्सलियों के बीच कुल 3366 से ज्यादा मुठभेड़ हुईं। अलग-अलग घटनाओं में 1324 जवानों की शहादत हुई है, जबकि, फोर्स ने 1510 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर कर दिया है।

साल 2022-23 के बाद से बस्तर की परिस्थितियां बदली हैं। पिछले 2 से ढाई सालों में 88 जवान शहीद हुए हैं। इनमें ज्यादातर जवान IED ब्लास्ट की चपेट में आए हैं।

2007 में 200 जवानों ने दी कुर्बानी

बस्तर में साल 2007 में नक्सलियों ने रानी बोदली में सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला किया था। इस घटना में जवानों ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया था। नक्सलियों से लड़ते हुए जवानों की गोलियां खत्म हो गई थी, जिसके बाद नक्सली कैंप में घुसे और पेट्रोल बम दागना शुरू कर दिए थे।

इस घटना में 55 जवान शहीद हुए थे। जगह-जगह लाशों के ढेर थे। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह बस्तर की पहली सबसे बड़ी नक्सल घटना थी। इस घटना ने पूरे देश को रुलाया था। इसी साल इस घटना के साथ ही अन्य घटनाओं में 200 से ज्यादा जवानों की शहादत हुई।

2010 में 171 जवान शहीद

साल 2010 में ताड़मेटला में देश की सबसे बड़ी नक्सल घटना हुई थी। यहां नक्सलियों ने जवानों को एंबुश में फंसाया था। माओवादियों ने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस घटना में 76 जवान शहीद हुए थे। घटना स्थल का मंजर ऐसा था कि जहां नजर पड़े वहां जवानों की लाश बिखरी पड़ी थी।

इसी साल नक्सलियों ने चिंगावरम में एक बस को IED ब्लास्ट कर उड़ाया था, जिसमें 20 जवान शहीद हुए थे। कुल मिलाकर 2010 में अलग-अलग नक्सल घटनाओं में कुल 171 जवानों ने अपना बलिदान दिया था।

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कोरबा

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बुंदेली में ई-कचरा न फैलाने विद्यार्थियों ने ली शपथ

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ई-कचरा प्रबंधन दिवस पर हुई कई गतिविधियां, निकाली जागरूकता रैली
कोरबा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं इको क्लब फॉर मिशन लाइफ के निर्देशानुसार शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बुंदेली में ई-कचरा प्रबंधन दिवस बहुत ही उत्साहपूर्वक मनाया गया।
बच्चों को ई-कचरा क्या होता है, यह क्यों खतरनाक है और इसका निपटारण कैसे किया जाना चाहिए, इस बारे में विस्तार से बताया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को खराब मोबाइल, चार्जर, बैटरी, की-बोर्ड, माउस, एलईडी बल्ब, टूटी हुई पेन ड्राइव आदि को दिखाया गया और समझाया गया कि इन्हें सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए।
विद्यालय में कराई गई प्रमुख गतिविधियाँ
पोस्टर, बैनर एवं स्लोगन निर्माण

कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन में बहुत ही आकर्षक पोस्टर और बैनर तैयार किए। बच्चों ने अपने हाथों से नारे लिखे –

  • ई-कचरा मत फैलाओ, धरती को स्वच्छ बनाओ
  • मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी
  • ई-वेस्ट को करो मैनेज, सुरक्षित होगा फ्यूचर हमारा
    इन पोस्टरों को विद्यालय की दीवारों पर प्रदर्शित किया गया।
    जागरूकता रैली
    विद्यालयीन गतिविधियों के पश्चात बच्चों ने हाथों में पोस्टर, बैनर और स्लोगन की तख्तियां लेकर शाला परिसर एवं ग्राम धनरास में जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान बच्चों ने ‘ई-कचरा हटाओ – पर्यावरण बचाओÓ के नारे लगाए और ग्रामीणों को भी ई-कचरा घर में न रखने की अपील की।
    ई-कचरा संग्रहण अभियान (मुख्य आकर्षण)
    इस दिवस की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि यह रही कि इससे एक दिन पूर्व ही सभी बच्चों को अपने-अपने घरों से एक अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक वस्तु लाने को कहा गया था।
    निर्देशानुसार प्रत्येक बच्चों ने अपने घर से एक-एक ई-कचरा लाया – जैसे किसी ने पुरानी बैटरी, किसी ने टूटा चार्जर, किसी ने खराब ईयरफोन, किसी ने सेल, किसी ने छोटा बल्ब लाया।
    विद्यालय में विशेष रूप से काले रंग का डस्टबिन शिक्षिकाओं के द्वारा बनाया गया था, जो ई-कचरे के लिए निर्धारित था। सभी बच्चों ने कतारबद्ध होकर अपनी लाई हुई सामग्री को उसी काले डस्टबिन में डाला। बच्चों को बताया गया कि इस एकत्रित कचरे को विकासखंड स्तर पर अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसी के माध्यम से उचित वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाएगा, ताकि यह मिट्टी और पानी को प्रदूषित न कर सके।
    इस प्रकार की गतिविधियां केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख दे गई।
    अंत में सभी बच्चों ने ई-कचरा न फैलाने और दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ ली। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधान पाठक सम्मेेलाल यादव, शिवनंदन लाल राजवाड़े CAC संकुल केंद्र बुंदेली, श्रीमती रेशमा ठाकुर, श्रीमती दिव्या साहू, श्रीमती प्रभा साहू, दीपक मिश्रा, श्रीमती चंद्रिका साहू आदि उपस्थित थे।

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कोरबा

SECL गेवरा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय मे कांग्रेस नेता अजय जायसवाल की अगुवाई मे हुई मीटिंग मे SECL प्रबंधन द्वारा PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत कर्मचारियों के विभिन्न मांगो को जल्द पूरा करने पर बनी सहमति

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कोरबा। SECL गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा वेतन, बोनस, दो माह से लंबित वेतन, भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय बेरोजगारों को पहली प्राथमिकता सहित अन्य मांगो को लेकर 27/10/2026 को खदान मे 6 घंटे काम ठप कर पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा अजय जायसवाल के नेतृत्व मे आंदोलन किया गया था।

SECL प्रबंधन के द्वारा 29/10/2026 को SECL गेवरा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय मे 12 बजे मीटिंग आहूत की गयी थी जिसमे आज अजय जायसवाल सहित भू विस्थापित श्रमिक गेवरा CGM कार्यालय पहुंचे जहाँ मुख्य महाप्रबंधक के अनुपस्थित होने पर प्रबंधन के द्वारा मीटिंग करने की बात कही गयी, जिसको लेकर अजय जायसवाल के द्वारा अपमान बताकर मुख्य महप्रबंधक के उपस्थिति मे मीटिंग करने को लेकर वही गेट मे श्रमिकों के साथ धरने पर बैठ गए और महाप्रबंधक का इंतजार करने लगे। आनन फानन मे महाप्रबंधक को कार्यालय आने पर मजबूर होना पड़ा, तत्पश्चात 1 घंटा बाद महाप्रबंधक के आने तक गेट जाम रखा गया फिर महाप्रबंधक के आने पर मीटिंग मे शामिल हुए।

प्रबंधन और कंपनी के अधिकारी उपस्थित रहे जहाँ हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, कंपनी के द्वारा भू विस्थापितो के ऊपर किये जा रहे शोषण, दो माह से लंबित वेतन, सुरक्षा, आई कार्ड पेमेंट स्लिप भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय लोगो को प्राथमिकता सहित अन्य मुद्दों पर बात हुई जिसमे SECL गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक अशोक कुमार को अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा के द्वारा उक्त सभी समस्याओ का कड़ाई से पालन करने और भू विस्थापित श्रमिकों के वेतन विसंगती सहित श्रमिकों के ऊपर हो रहे शोषण की पुनरावृति होने पर दोबारा खदान बंद करा आंदोलन करने की चेतावनी दी। तत्पश्चात मुख्य महाप्रबंधक गेवरा द्वारा भू विस्थापित श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, पेमेंट स्लिप प्रदान करने, सुरक्षा उपकरण प्रदान करने दिवाली से पहले सभी कर्मचारियों को बोनस प्रदान करने और भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय भू विस्थापित को पहली प्राथमिकता देने पर सहमति बनी उक्त मीटिंग मे मधु सूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, शेत मसीह, सांसद प्रतिनिधि, कमलेश प्रजापति, गोविंदा सारथी,विक्की राज,अनिल कुमार, संतोष यादव, सुजीत महंत, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत सहित कंपनी मे कार्यरत कर्मचारी काफ़ी संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

एसईसीएल में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत ‘संकल्प सिद्धि समारोह’ आयोजित, प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं सेवानिवृत्त कर्मियों का सम्मान

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मुख्य वक्ता डॉ. निखिल कुमार कनोडिया ने सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर दिया जोर

बिलासपुर/कोरबा। आज दिनाँक 31 अक्टूबर 2026 केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत एसईसीएल में 26 अक्टूबर से 01 नवंबर 2026 तक आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आज एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में ‘संकल्प सिद्धि समारोह’ का आयोजन किया गया। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा इस वर्ष की थीम ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि (Probity for Prosperity)’ निर्धारित की गई है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. निखिल कुमार कनोडिया (भा.पु.से.), पुलिस महानिरीक्षक एवं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी संचालन) रमेश चंद्र महापात्र तथा निदेशक (तकनीकी योजना/परियोजना) नृपेंद्र नाथ सहित एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा एसईसीएल के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के निरीक्षण से हुई। यहां उन्होंने केंद्र की कार्यप्रणाली एवं डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात अतिथियों ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह (VAW) गैलरी का अवलोकन किया, जहां सतर्कता विभाग द्वारा संचालित विभिन्न पहलों, जागरूकता अभियानों एवं गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया था। इसके बाद ‘एक पेड़ सतर्कता के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। तत्पश्चात ऑडिटोरियम में दीप प्रज्ज्वलन एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर समारोह का शुभारंभ किया गया।

मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों एवं विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों का पौधा, शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया गया।

मुख्य वक्ता डॉ. निखिल कुमार कनोडिया ने अपने संबोधन में संस्थानों में सुशासन के लिए सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नैतिक आचरण को आवश्यक बताया। उन्होंने अपने दीर्घ प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यों में ईमानदारी एवं निष्पक्षता बनाए रखने तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने विशेष रूप से स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं और उनमें प्रारंभ से ही ईमानदारी, नैतिकता एवं सत्यनिष्ठा के संस्कार विकसित करना आवश्यक है।

निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कार्यस्थल पर सत्यनिष्ठा एवं नैतिक मूल्यों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ भी दिलाई।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। स्कूली विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं, एसईसीएल कर्मचारियों के लिए वाद-विवाद, निबंध, स्लोगन, कविता, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में एसईसीएल सतर्कता विभाग की वार्षिक पत्रिका ‘स्पंदन’ एवं ‘हैंडबुक ऑन सिस्टमैटिक इम्प्रूवमेंट मेजर्स (Handbook on Systemic Improvement Measures)’ का विमोचन किया गया। इन प्रकाशनों में संगठन की गतिविधियों एवं प्रणालीगत सुधार के उपायों को संकलित किया गया है।

समारोह के दौरान संगीत समूह एवं ओडिशी नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में मंच संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) पंकज पाणी पांडेय द्वारा एवं अंत में महाप्रबंधक (सतर्कता) संजय प्रसाद दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इसके साथ ही एसईसीएल से सेवानिवृत्त पांच अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके सेवाकाल में दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें देवेंद्र प्रसाद (महाप्रबंधक, उत्खनन) , श्रीमती प्रवीणा गांधी (प्रबंधक, मानव संसाधन कर्मचारी स्थापना विभाग), असीम जूलियस (सब स्टेशन अटेंडेंट, बसंत विहार), श्रीमती सुपर्णा दासगुप्ता (सीनियर डीईओ, बसंत विहार स्वास्थ्य केंद्र), प्रवीण कुमार दीक्षित (वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक, गुणवत्ता नियंत्रण विभाग) एवं शामिल रहे।

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