रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की गिरफ्त में हैं। अब EOW (आर्थिक अपराध शाखा) भी उन्हें रिमांड में लेने की तैयारी कर रही है।
15 सितंबर को ED ने 7 हजार से ज्यादा पन्नों का पांचवां पूरक आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में दाखिल किया। जिसमें चैतन्य बघेल ने 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम को हैंडल किया, इस बात की पुष्टि हुई है।
वहीं, आरोप पत्र में ये भी खुलासा हुआ है कि इन पैसों की डील के लिए वॉट्सऐप में बिग बॉस ग्रुप बनाया गया था। वॉट्सऐप में बिट्टू (चैतन्य बघेल) ने कब किसे कॉल किया, कितनी देर बात की। सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोग कैसे पैसे की डील करते थे, आरोप पत्र में इसका स्क्रीनशॉट भी लगाया गया था।
मोबाइल चैट्स से खुलासा
ED ने जब अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच की तो चौंकाने वाले चैट्स मिले। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने तक की चर्चा पाई गई।
ED के पेश किए आरोप पत्र में क्या था
चार्जशीट के मुताबिक, चैतन्य बघेल ही इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था। इसमें से करीब 200 करोड़ रुपए की सीधी कमाई खुद की, जबकि 850 करोड़ रुपए कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए।
इस आरोप पत्र ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ED का दावा है कि चैतन्य ने ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर उसे सफेद दिखाने का काम किया। पैसे की पूरी डील वॉट्सऐप ग्रुप में होती थी।
‘बिग बॉस’ ग्रुप से चलता था पूरा सिंडिकेट
आरोप पत्र में बताया गया है कि इस घोटाले के संचालन के लिए ‘बिग बॉस’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। इसमें चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया और पुष्पक जैसे अहम लोग जुड़े थे।
इस ग्रुप के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी और निर्देश साझा किए जाते थे। इसके साथ ही पैसे आने और उसको किसको देना है? इसकी चर्चा भी ग्रुप में होती थी। वॉट्सऐप ग्रुप में चैट के कुछ स्क्रीनशॉट भी दैनिक भास्कर डिजिटल के पास मौजूद है।
कोर्ट में चालान कॉपी लेकर जाते हुए वकील।
पप्पू बंसल ने खोला राज
दुर्ग-भिलाई के शराब कारोबारी और भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश को मैनेज किया।
बंसल ने बताया कि यह रकम अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल, केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि तीन महीने की अवधि में ही उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले।
रियल एस्टेट में लगाया ब्लैक मनी
ED ने आरोप लगाया कि चैतन्य ने अपने विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में शराब घोटाले की रकम निवेश की। असल खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, लेकिन दस्तावेजों में मात्र 7.14 करोड़ दिखाया गया।
वहीं डिजिटल डिवाइस की जांच से पता चला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश में भुगतान किया गया, जिसका हिसाब रिकॉर्ड में नहीं था। इसी प्रोजेक्ट में त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने 19 फ्लैट खरीदे, लेकिन भुगतान खुद किया। ED के मुताबिक यह सब ब्लैक मनी को सफेद दिखाने के लिए किया गया।
भिलाई के बड़े ज्वेलर्स का नाम भी सामने आया
जांच में भिलाई के बड़े ज्वेलर्स का नाम भी सामने आया। ED ने दावा किया कि ज्वेलर्स ने चैतन्य की कंपनियों को 5 करोड़ रुपए का नकद लोन दिया और बाद में सिर्फ 80 लाख रुपए की कीमत पर 6 प्लॉट खरीद लिए।
एजेंसी ने इसे कैश को सफेद करने की साजिश बताया। ED ने साक्ष्य के रूप में आरोपियों से मिले चैट्स का इस्तेमाल किया है।
बचाव पक्ष का दावा- गैरकानूनी गिरफ्तारी
चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने आरोप लगाया कि उनके क्लाइंट की गिरफ्तारी गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि ED ने पप्पू बंसल के बयान के आधार पर कार्रवाई की, जबकि बंसल खुद फरार हैं और उनके खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी है।
रिजवी ने कहा कि चैतन्य ने जांच में हमेशा सहयोग किया, सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए, लेकिन एक बार भी बयान दर्ज नहीं किया गया। बिना समन दिए उनकी गिरफ्तारी कर ली गई।
साल 2023 में पीएम मोदी ने चैतन्य को बताया था सुपर सीएम
पीएम मोदी ने चैतन्य को बताया था सुपर सीएम
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का नाम पहली बार 2023 में कई घोटालों के संदर्भ में सामने आया था। उसी साल छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चैतन्य बघेल पर राज्य के संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कांग्रेस सरकार के दौरान चैतन्य बघेल ‘सुपर सीएम’ की तरह व्यवहार कर रहे थे और प्रदेश में एक कारोबारी नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने आरोप लगाया था, ‘भूपेश बघेल के बेटे ने ‘सुपर सीएम’ की भूमिका निभाते हुए जनता पर इस हद तक अत्याचार किए कि खुद मुख्यमंत्री के लिए भी दोबारा विधायक चुना जाना कठिन हो गया।’
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।
ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।
फरवरी 2019 में बना था सिंडिकेट
कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाने के लिए फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के 3 डिस्टलरी मालिकों को बुलाया। इस मीटिंग में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए।
साथ ही वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया पहुंचे।
मीटिंग में इनके अलावा एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे। मीटिंग में अनवर ढेबर ने तय किया कि डिस्टलरी से जो शराब सप्लाई की जाती है, उसमें प्रति पेटी कमीशन देना होगा।
कमीशन के बदले रेट बढ़ाने का आश्वासन डिस्टलरी संचालकों को दिया गया। पैसे का हिसाब-किताब करने के लिए आरोपियों ने पूरे कारोबार को ए, बी और सी पार्ट में बांटा।
कारोबारी अनवर ढेबर शराब घोटाले के आरोप में जेल में बंद है।
पूर्व मंत्री कवासी लखमा भी घोटाले के आरोप में जेल में बंद।
सरकारी कागजों पर रिकॉर्ड नहीं चढ़ाने की हिदायत
शराब की दुकान संचालकों को सरकारी कागजों पर शराब की खपत दर्ज न करने की सलाह दी गई थी। बिना शुल्क चुकाए दुकानों तक डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब पहुंचाई गई।
जांच एजेंसी ने आरोप पत्र में कहा है कि आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार फरवरी 2019 से शुरू हुआ था।
ऐसे हुई थी अवैध शराब बेचने की शुरुआत
शुरुआत में डिस्टलरी से हर महीने 800 पेटी शराब से भरे 200 ट्रक निकलते थे। एक पेटी 2840 रुपए में बिकती थी। उसके बाद, हर महीने 400 ट्रक शराब की आपूर्ति होने लगी।
शराब 3,880 रुपए प्रति पेटी बेची गई। EOW की शुरुआती जांच में पता चला है कि 3 साल में 60 लाख से ज़्यादा पेटी शराब अवैध रूप से बेची गई।
ई-कचरा प्रबंधन दिवस पर हुई कई गतिविधियां, निकाली जागरूकता रैली कोरबा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं इको क्लब फॉर मिशन लाइफ के निर्देशानुसार शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बुंदेली में ई-कचरा प्रबंधन दिवस बहुत ही उत्साहपूर्वक मनाया गया। बच्चों को ई-कचरा क्या होता है, यह क्यों खतरनाक है और इसका निपटारण कैसे किया जाना चाहिए, इस बारे में विस्तार से बताया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को खराब मोबाइल, चार्जर, बैटरी, की-बोर्ड, माउस, एलईडी बल्ब, टूटी हुई पेन ड्राइव आदि को दिखाया गया और समझाया गया कि इन्हें सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। विद्यालय में कराई गई प्रमुख गतिविधियाँ पोस्टर, बैनर एवं स्लोगन निर्माण कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन में बहुत ही आकर्षक पोस्टर और बैनर तैयार किए। बच्चों ने अपने हाथों से नारे लिखे –
ई-कचरा मत फैलाओ, धरती को स्वच्छ बनाओ
मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी
ई-वेस्ट को करो मैनेज, सुरक्षित होगा फ्यूचर हमारा इन पोस्टरों को विद्यालय की दीवारों पर प्रदर्शित किया गया। जागरूकता रैली विद्यालयीन गतिविधियों के पश्चात बच्चों ने हाथों में पोस्टर, बैनर और स्लोगन की तख्तियां लेकर शाला परिसर एवं ग्राम धनरास में जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान बच्चों ने ‘ई-कचरा हटाओ – पर्यावरण बचाओÓ के नारे लगाए और ग्रामीणों को भी ई-कचरा घर में न रखने की अपील की। ई-कचरा संग्रहण अभियान (मुख्य आकर्षण) इस दिवस की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि यह रही कि इससे एक दिन पूर्व ही सभी बच्चों को अपने-अपने घरों से एक अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक वस्तु लाने को कहा गया था। निर्देशानुसार प्रत्येक बच्चों ने अपने घर से एक-एक ई-कचरा लाया – जैसे किसी ने पुरानी बैटरी, किसी ने टूटा चार्जर, किसी ने खराब ईयरफोन, किसी ने सेल, किसी ने छोटा बल्ब लाया। विद्यालय में विशेष रूप से काले रंग का डस्टबिन शिक्षिकाओं के द्वारा बनाया गया था, जो ई-कचरे के लिए निर्धारित था। सभी बच्चों ने कतारबद्ध होकर अपनी लाई हुई सामग्री को उसी काले डस्टबिन में डाला। बच्चों को बताया गया कि इस एकत्रित कचरे को विकासखंड स्तर पर अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसी के माध्यम से उचित वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाएगा, ताकि यह मिट्टी और पानी को प्रदूषित न कर सके। इस प्रकार की गतिविधियां केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख दे गई। अंत में सभी बच्चों ने ई-कचरा न फैलाने और दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ ली। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधान पाठक सम्मेेलाल यादव, शिवनंदन लाल राजवाड़े CAC संकुल केंद्र बुंदेली, श्रीमती रेशमा ठाकुर, श्रीमती दिव्या साहू, श्रीमती प्रभा साहू, दीपक मिश्रा, श्रीमती चंद्रिका साहू आदि उपस्थित थे।
SECL गेवरा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय मे कांग्रेस नेता अजय जायसवाल की अगुवाई मे हुई मीटिंग मे SECL प्रबंधन द्वारा PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत कर्मचारियों के विभिन्न मांगो को जल्द पूरा करने पर बनी सहमति
कोरबा। SECL गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा वेतन, बोनस, दो माह से लंबित वेतन, भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय बेरोजगारों को पहली प्राथमिकता सहित अन्य मांगो को लेकर 27/10/2026 को खदान मे 6 घंटे काम ठप कर पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा अजय जायसवाल के नेतृत्व मे आंदोलन किया गया था।
SECL प्रबंधन के द्वारा 29/10/2026 को SECL गेवरा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय मे 12 बजे मीटिंग आहूत की गयी थी जिसमे आज अजय जायसवाल सहित भू विस्थापित श्रमिक गेवरा CGM कार्यालय पहुंचे जहाँ मुख्य महाप्रबंधक के अनुपस्थित होने पर प्रबंधन के द्वारा मीटिंग करने की बात कही गयी, जिसको लेकर अजय जायसवाल के द्वारा अपमान बताकर मुख्य महप्रबंधक के उपस्थिति मे मीटिंग करने को लेकर वही गेट मे श्रमिकों के साथ धरने पर बैठ गए और महाप्रबंधक का इंतजार करने लगे। आनन फानन मे महाप्रबंधक को कार्यालय आने पर मजबूर होना पड़ा, तत्पश्चात 1 घंटा बाद महाप्रबंधक के आने तक गेट जाम रखा गया फिर महाप्रबंधक के आने पर मीटिंग मे शामिल हुए।
प्रबंधन और कंपनी के अधिकारी उपस्थित रहे जहाँ हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, कंपनी के द्वारा भू विस्थापितो के ऊपर किये जा रहे शोषण, दो माह से लंबित वेतन, सुरक्षा, आई कार्ड पेमेंट स्लिप भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय लोगो को प्राथमिकता सहित अन्य मुद्दों पर बात हुई जिसमे SECL गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक अशोक कुमार को अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा के द्वारा उक्त सभी समस्याओ का कड़ाई से पालन करने और भू विस्थापित श्रमिकों के वेतन विसंगती सहित श्रमिकों के ऊपर हो रहे शोषण की पुनरावृति होने पर दोबारा खदान बंद करा आंदोलन करने की चेतावनी दी। तत्पश्चात मुख्य महाप्रबंधक गेवरा द्वारा भू विस्थापित श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, पेमेंट स्लिप प्रदान करने, सुरक्षा उपकरण प्रदान करने दिवाली से पहले सभी कर्मचारियों को बोनस प्रदान करने और भर्ती प्रक्रिया मे स्थानीय भू विस्थापित को पहली प्राथमिकता देने पर सहमति बनी उक्त मीटिंग मे मधु सूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, शेत मसीह, सांसद प्रतिनिधि, कमलेश प्रजापति, गोविंदा सारथी,विक्की राज,अनिल कुमार, संतोष यादव, सुजीत महंत, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत सहित कंपनी मे कार्यरत कर्मचारी काफ़ी संख्या मे उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता डॉ. निखिल कुमार कनोडिया ने सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर दिया जोर
बिलासपुर/कोरबा। आज दिनाँक 31 अक्टूबर 2026 केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत एसईसीएल में 26 अक्टूबर से 01 नवंबर 2026 तक आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आज एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में ‘संकल्प सिद्धि समारोह’ का आयोजन किया गया। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा इस वर्ष की थीम ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि (Probity for Prosperity)’ निर्धारित की गई है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. निखिल कुमार कनोडिया (भा.पु.से.), पुलिस महानिरीक्षक एवं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी संचालन) रमेश चंद्र महापात्र तथा निदेशक (तकनीकी योजना/परियोजना) नृपेंद्र नाथ सहित एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा एसईसीएल के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के निरीक्षण से हुई। यहां उन्होंने केंद्र की कार्यप्रणाली एवं डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात अतिथियों ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह (VAW) गैलरी का अवलोकन किया, जहां सतर्कता विभाग द्वारा संचालित विभिन्न पहलों, जागरूकता अभियानों एवं गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया था। इसके बाद ‘एक पेड़ सतर्कता के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। तत्पश्चात ऑडिटोरियम में दीप प्रज्ज्वलन एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर समारोह का शुभारंभ किया गया।
मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों एवं विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों का पौधा, शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ. निखिल कुमार कनोडिया ने अपने संबोधन में संस्थानों में सुशासन के लिए सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नैतिक आचरण को आवश्यक बताया। उन्होंने अपने दीर्घ प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यों में ईमानदारी एवं निष्पक्षता बनाए रखने तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने विशेष रूप से स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं और उनमें प्रारंभ से ही ईमानदारी, नैतिकता एवं सत्यनिष्ठा के संस्कार विकसित करना आवश्यक है।
निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कार्यस्थल पर सत्यनिष्ठा एवं नैतिक मूल्यों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ भी दिलाई।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। स्कूली विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं, एसईसीएल कर्मचारियों के लिए वाद-विवाद, निबंध, स्लोगन, कविता, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में एसईसीएल सतर्कता विभाग की वार्षिक पत्रिका ‘स्पंदन’ एवं ‘हैंडबुक ऑन सिस्टमैटिक इम्प्रूवमेंट मेजर्स (Handbook on Systemic Improvement Measures)’ का विमोचन किया गया। इन प्रकाशनों में संगठन की गतिविधियों एवं प्रणालीगत सुधार के उपायों को संकलित किया गया है।
समारोह के दौरान संगीत समूह एवं ओडिशी नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में मंच संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) पंकज पाणी पांडेय द्वारा एवं अंत में महाप्रबंधक (सतर्कता) संजय प्रसाद दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इसके साथ ही एसईसीएल से सेवानिवृत्त पांच अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके सेवाकाल में दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें देवेंद्र प्रसाद (महाप्रबंधक, उत्खनन) , श्रीमती प्रवीणा गांधी (प्रबंधक, मानव संसाधन कर्मचारी स्थापना विभाग), असीम जूलियस (सब स्टेशन अटेंडेंट, बसंत विहार), श्रीमती सुपर्णा दासगुप्ता (सीनियर डीईओ, बसंत विहार स्वास्थ्य केंद्र), प्रवीण कुमार दीक्षित (वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक, गुणवत्ता नियंत्रण विभाग) एवं शामिल रहे।