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बिज़नस

बेबी पाउडर विवाद: Johnson & Johnson ने 5.5 अरब डॉलर के समझौते का दिया प्रस्ताव

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका की हेल्थकेयर कंपनी Johnson & Johnson (J&J) ने अपने टैल्क-बेस्ड बेबी पाउडर और अन्य उत्पादों से जुड़े हजारों मुकदमों को खत्म करने के लिए 5.5 अरब डॉलर तक के समझौते का प्रस्ताव रखा है। इन मामलों में आरोप है कि कंपनी के टैल्क उत्पादों के इस्तेमाल से महिलाओं में ओवेरियन (अंडाशय) कैंसर का खतरा बढ़ा। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

कंपनी के लिटिगेशन मामलों के वाइस प्रेसिडेंट एरिक हास ने कहा कि लगाए गए आरोप वैज्ञानिक आधार पर सही नहीं हैं। उनका कहना है कि समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त करना है, ताकि कंपनी अपने मुख्य कारोबार और नई दवाओं व मेडिकल उपकरणों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर सके।

प्रस्तावित समझौते में करीब 76,000 मुकदमे शामिल हैं। इसे अंतिम रूप देने के लिए उन कानूनी फर्मों की मंजूरी आवश्यक होगी, जो ओवेरियन कैंसर से जुड़े लगभग 95% दावों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

Johnson & Johnson के टैल्क-बेस्ड बेबी पाउडर को लेकर कानूनी विवाद 2009 से चल रहा है। कई उपभोक्ताओं और उनके परिवारों ने दावा किया कि उत्पाद में एस्बेस्टस की मिलावट थी, जिसके कारण कैंसर हुआ। टैल्क एक प्राकृतिक खनिज है, जो अक्सर एस्बेस्टस के आसपास पाया जाता है। एस्बेस्टस को कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाला पदार्थ माना जाता है।

हालांकि कंपनी लगातार कहती रही है कि उसके टैल्क उत्पाद सुरक्षित हैं और उनमें एस्बेस्टस नहीं था। इसके बावजूद, Johnson & Johnson ने 2020 में अमेरिका में टैल्क-बेस्ड बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी। इसके बाद 2022 में कंपनी ने दुनिया भर में इस उत्पाद का उत्पादन और बिक्री पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया तथा इसका फॉर्मूला भी बदल दिया।

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टाटा केमिकल्स का पहली तिमाही का मुनाफा 81% घटकर 60 करोड़ रुपए पर

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नई दिल्ली, एजेंसी। टाटा केमिकल्स का चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही का एकीकृत शुद्ध मुनाफा 81 प्रतिशत घटकर 60 करोड़ रुपए रहा है। खर्चे बढ़ने से कंपनी का मुनाफा घटा है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में उसका शुद्ध मुनाफा 316 करोड़ रुपए था। शेयर बाजार को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 4,311 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 3,815 करोड़ रुपए थी। 

टाटा केमिकल्स ने बताया कि जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ”मुख्य रूप से कम प्राप्ति, कम अन्य आय और कम साझा उद्यम आय” के कारण घटा। परिणाम पर टिप्पणी करते हुए टाटा केमिकल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आर. मुकुंदन ने कहा कि कंपनी ने जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया, जिसमें ज्यादा बिक्री और उत्पादन मात्रा, मजबूत परिचालन क्षमता और अनुशासित लागत प्रबंधन का योगदान रहा। उन्होंने कहा, ”हालांकि, सोडा ऐश की कीमतों के लगातार कम रहने के कारण अमेरिका से दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यात पर दबाव बना रहा।” 

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HUL का पहली तिमाही का शुद्ध लाभ 3.17% घटकर 2,680 करोड़ रुपए रहा, बिक्री बढ़ी

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नई दिल्ली, एजेंसी। दैनिक उपभोग का सामान बनाने वाली (FMCG) कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 3.17 प्रतिशत घटकर 2,680 करोड़ रुपए रह गया। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 2,768 करोड़ रुपए था। कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में उत्पादों की बिक्री से राजस्व 10.26 प्रतिशत बढ़कर 17,149 करोड़ रुपए हो गया, जो एक वर्ष पहले की समान तिमाही में 15,552 करोड़ रुपए था। 

एचयूएल ने अपने आय विवरण में कहा कि यह पिछले 13 तिमाहियों की सर्वाधिक वृद्धि है। इस दौरान ‘अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ’ (यूएसजी) 10 प्रतिशत रही। कंपनी ने कहा कि अस्थिर कारोबारी माहौल के बावजूद अप्रैल-जून तिमाही में उसका ईबीआईटीडीए मार्जिन 23 प्रतिशत रहा, जो उसके अनुमानित दायरे के भीतर है। अप्रैल-जून तिमाही में कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) सालाना आधार पर आठ प्रतिशत बढ़कर 3,947 करोड़ रुपए हो गई। आलोच्य तिमाही में एचयूएल का कुल खर्च 10 प्रतिशत बढ़कर 13,822 करोड़ रुपए हो गया। अन्य आय सहित कुल आय 9.84 प्रतिशत बढ़कर 17,529 करोड़ रुपए रही।

एचयूएल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा, ”तिमाही के दौरान मांग का बुनियादी माहौल स्थिर रहा। इस पृष्ठभूमि में एचयूएल ने 17,184 करोड़ रुपए का कारोबार और 10 प्रतिशत यूएसजी दर्ज की जिसमें मात्रा एवं कीमत दोनों का समान योगदान रहा।” उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन एचयूएल के ब्रांडों की मजबूती, उसके उत्पाद खंड की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुशासित क्रियान्वयन को दर्शाता है। नायर ने कहा, ”अल्पकालिक कारोबारी चुनौतियों के बीच भी हमारा ध्यान मात्रा-आधारित राजस्व वृद्धि पर बना हुआ है।”

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क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी अब टैक्स विभाग को देंगे एक्सचेंज, CBDT ने जारी की नई गाइडलाइन

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नई दिल्ली, एजेंसी। वित्तीय मामलों से जुड़ी संसद की स्थायी समिति द्वारा हाल ही में सरकार को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने की सिफारिश के बाद, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने नया गाइडेंस नोट जारी किया है। इसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्रोकर और अन्य संबंधित इंटरमीडियरीज को अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी।

यह कदम ऑर्गनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) द्वारा विकसित क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के अनुरूप उठाया गया है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स से जुड़ी जानकारी का वैश्विक स्तर पर बेहतर आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था से टैक्स विभाग को निवेशकों के क्रिप्टो लेनदेन की सीधे एक्सचेंजों से जानकारी मिलेगी। इससे टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी और वास्तविक ट्रांजैक्शन का मिलान आसान होगा तथा एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को अधिक सटीक तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाले लाभ पर पहले की तरह 30% की फ्लैट टैक्स दर लागू रहेगी। इसके अलावा, क्रिप्टो ट्रेडिंग में हुए नुकसान को किसी अन्य आय या लाभ से समायोजित (ऑफसेट) नहीं किया जा सकेगा और न ही इसे भविष्य के वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जा सकेगा। क्रिप्टोकरेंसी को भारत में अभी भी वैध मुद्रा (लीगल टेंडर) का दर्जा प्राप्त नहीं है।

नई गाइडलाइन के तहत रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) को ग्राहकों की KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी, उनकी टैक्स रेजिडेंसी की पुष्टि करनी होगी और हर वर्ष लेनदेन का विस्तृत विवरण आयकर विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

Mudrex के CEO एडुल पटेल के अनुसार, CARF आधारित रिपोर्टिंग व्यवस्था भारत में क्रिप्टो एसेट्स को अधिक संगठित वित्तीय रिपोर्टिंग ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि इससे भविष्य में निवेशकों की सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाने वाली नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। 

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