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कोरबा

BALCO Reaffirms Commitment to Carbon Neutrality and Water Positivity on World Environment Day

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Drives Environmental Stewardship through Renewable Energy Mix, Water Conservation and Community-Led Initiatives

Balconagar: Bharat Aluminium Company Limited (BALCO), a part of Vedanta Aluminium, marked World Environment Day showcasing commitment to sustainability through strategic ongoing interventions encompassing adoption of renewable energy mix, replenishing water structures and afforestation. These initiatives align with the company’s vision of achieving Net Water Positivity by 2030 and Net Zero Carbon Emissions by 2050.

While practicing environmental responsibility in its core operations, BALCO expanded its usage of renewable energy mix contributing to a significant reduction of over 1.6 lakh tonnes of carbon emissions in FY ’25. Further advancing energy efficiency, the company introduced an improved relining design in its potlines, reducing energy consumption by 400 kWh per metric tonne (MT). Enhanced digitisation across logistics has facilitated data-driven fleet management, optimising the movement of raw materials and finished goods, further lowering emissions.

As part of its water conservation efforts, BALCO has recycled over 5.20 million cubic meters of water, achieving a 17% increase over the previous year. In its surrounding communities, the company has restored 28 water structures, including farm ponds and community reservoirs, with a total storage capacity of over 39,000 cubic meters, enhancing groundwater recharge and supporting local agriculture.

Speaking on the developing resilient ecosystem, Mr. Rajesh Kumar, CEO & Director, BALCO said, “Sustainability is central to our growth philosophy at BALCO. Through our focused interventions in environmental stewardship, renewable energy, and community development, we aim to create a resilient ecosystem that supports circular economy and industrial progress while safeguarding environment. Our initiatives are a testament to BALCO’s vision of transforming the planet, responsibly.”

BALCO also continued its afforestation initiatives, planting over 52,000 saplings across operational sites, including mines, ash dykes, and peripheral community areas. The deployment of electric forklifts in operations and electric vehicles for township waste management and movement, has further contributed to cleaner, energy-efficient operations with a lower carbon footprint.

In alignment with BALCO’s commitment to ‘Transforming the Planet’, the company has maintained ash-free operational spaces while actively channelling fly ash for constructive use across multiple industries, including brick and cement manufacturing, infrastructure development, road construction, mines backfilling and more.

Further strengthening its environmental stewardship in FY25, BALCO has undertaken several key sustainability initiatives, including:
• Development of plastic-free zones within plant premises
• Promotion of electric vehicle usage among employees
• Conduct of nature walks and cleanliness drives to raise awareness on local biodiversity
• Organisation of gardening competitions promoting native and exotic plant species
• Community campaigns celebrating the ecological richness of Chhattisgarh to foster environmental empathy

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कोरबा

प्रज्ञा संजीवनी वन औषधालय पाली में चिकित्सा शिविर को मिला लोगों का अच्छा प्रतिसादपारंपरिक चिकित्सा से हर बीमारियों का ईलाज-डॉ. पवन सिंह

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वैद्यराज रामफल पटेल का समाज में रचनात्मक कार्य सराहनीय

कोरबा/पाली। आरोग्य के देवता भगवान श्री धनवंतरी जयंती पर पाली स्थित प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय में पारंपरिक/आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। प्रात: 10.00 बजे जिला पंचायत कोरबा के अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह के मुख्य आतिथ्य में प्रज्ञा संजीवनी- वन औषधालय के संचालक वैद्यराज रामफल पटेल की अध्यक्षता एवं उपस्थित समाजसेवियों, ग्रामीणों की उपस्थिति में शिविर का शुभारंभ भगवान श्री धनवंतरी की पूजा अर्चना के साथ हुआ।

शिविर को सम्बोधित करते हुए जिला पंचायत कोरबा के अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा कि भारत में ही सबसे पहले चिकित्सा प्रारंभ हुआ और भगवान श्री धनवंतरी ने पूरे विश्व को आरोग्य का मंत्र, चिकित्सा विधि दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में सभी बीमारियों का ईलाज संभव है। उन्होंने वैद्यराज रामफल पटेल के रचनात्मक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि श्री पटेल द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ाया जा रहा है और पारंपरिक चिकित्सा से गंभीर बीमारियों का ईलाज करने के साथ लोगों के बीच जाकर नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, ताकि समाज स्वस्थ हो और एक आदर्श समाज की स्थापना हो।
पारंपरिक चिकित्सा में हर बीमारियों का ईलाज-वैद्यराज रामफल पटेल

कार्यक्रम की अध्यक्षता/संयोजक रामफल पटेल ने शिविर में उपस्थित लोगों को स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया और कहा कि स्वास्थ्य धन ही सबसे बड़ा धन है और लंबी तथा स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेद को अपनाएं। उन्होंने उपस्थित लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ दिया और नाड़ी परीक्षण कर बीमारियों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ आवश्यक आयुर्वेद दवाईयां वितरित की।
सैकड़ों लोगों ने लिया शिविर का लाभ

पाली बस स्टैण्ड स्थित प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय परिसर में आज भगवान धनवंतरी जयंती पर आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें संचालक वैद्यराज रामफल पटेल ने नाड़ी परीक्षण कर लोगों को स्वास्थ रहने के लिए आवश्यक उपाय बताए और स्वास्थ्य जांच भी किया। शिविर में पाली क्षेत्र के सैकड़ों लोग पहुंचे और शिविर का लाभ लिया।
चूंकि डॉ. पवन सिंह भी एक चिकित्सक हैं और उन्होंने भी यहां उपस्थित लोगों के चिकित्सा में अपनी सहभागिता निभाते हुए स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया।

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कोरबा

150 कर्मचारियों ने वेतन-बोनस के लिए SECL कार्यालय घेरा:गेवरा में प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने 6 नवंबर तक बोनस देने का आश्वासन दिया

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कोरबा। कोरबा के बंसल इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, गेवरा में कार्यरत करीब 150 कर्मचारियों के लंबित वेतन और बोनस भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारियों ने एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव किया। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन में कर्मचारियों ने नारेबाजी कर दीपावली से पहले बकाया भुगतान की मांग उठाई।

कर्मचारियों के समर्थन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन) के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल भी मौजूद रहे। प्रबंधन की ओर से 6 नवंबर तक सभी कर्मचारियों का बोनस भुगतान करने का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

लंबे समय से लंबित है वेतन और बोनस

कर्मचारियों का कहना है कि उनका वेतन और बोनस लंबे समय से बकाया है। भुगतान नहीं होने से उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दीपावली नजदीक होने के कारण कर्मचारियों ने त्योहार से पहले राशि जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि वेतन और बोनस नहीं मिलने से त्योहार की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।

एक घंटे तक कार्यालय का घेराव

बकाया भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी करते हुए प्रबंधन से तत्काल भुगतान की मांग की गई। प्रदर्शन में उमागोपाल ने भी कर्मचारियों का समर्थन किया।

प्रबंधन ने 6 नवंबर तक बोनस देने का दिया भरोसा

मामले को लेकर एसईसीएल प्रबंधन ने कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। इसके बाद प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि 6 नवंबर तक सभी कर्मचारियों के बोनस का भुगतान कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

मजदूरों के हितों के लिए आवाज उठाने की बात

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल ने कहा कि मजदूर दिन-रात मेहनत कर कंपनी और खदान के उत्पादन में योगदान देते हैं। ऐसे में त्योहार के समय उनका वेतन और बोनस रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को अपना हक पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। संगठन मजदूरों के हितों और अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा।

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कोरबा

धनतेरस पर कोरबा बाजार में बूम: सोना-चांदी से लेकर आटोमोबाईल, बर्तन, कपड़ों की बम्पर खरीदी

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कोरबा। धनतेरस के अवसर पर शुक्रवार को कोरबा बाजार में काफी रौनक दिखी। सराफा बाजार जहां गुलजार है, वहीं आटोमोबाईल से लेकर बर्तन और कपड़ों की बम्पर खरीदी-बिक्री हुई। खासकर सराफा बाजार में सोने-चांदी से लेकर डायमण्ड की बिक्री जमकर हुई। सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव के बीच ग्राहकों ने धनतेरस पर सोना खरीदी को शुभ मानते हुए सोने के जेवर, सिक्के खरीदे, वहीं चांदी के गहने से लेकर चांदी की मूर्तियां एवं सिक्के भी खरीदे।
कनक मंदिर ज्वेलर्स सहित कई दुकानों में ग्राहकों की भीड़

समाचार लिखे जाने तक सराफा बाजार गुलजार रहा। पावर हाऊस रोड स्थित कनक मंदिर ज्वेलर्स में सुबह से लेकर समाचार लिखे जाने तक ग्राहकों की भीड़ देखी गई। कनक मंदिर ज्वेलर्स कोरबा का सबसे प्रतिष्ठित सराफा दुकान है, जहां लोगों का विश्वास अमिट सा हो गया है। कनक मंदिर ज्वेलर्स के संचालक शंकर सोनी ने बताया कि धनतेरस में लोग आभूषण खरीदना ज्यादा शुभ मानते हैं और इस बार पिछली बार से कहीं अधिक सोने-चांदी के आभूषण, चांदी के सिक्के, चांदी की मूर्तियों की जमकर बिक्री हुई। उन्होंने बताया कि हमारे प्रतिष्ठान में आईएसआई मार्का ज्वेलरी और आधुनिकतम डिजाईन के मनमोहक आभूषण महिलाओं को काफी पसंद आ रहे हैं और हम ग्राहकों की संतुष्टि को ही असली कमाई मानते हैं। इसीलिए हमारा ध्येय वाक्य है- स्वर्ण धन-सुरक्षित धन…। सोने में निवेश आज की जरूरत है और समय आने पर स्वर्ण धन से करेंसी धन तुरंत मिल जाता है।
आटो बाजार एवं कपड़ा बाजार भी गुलजार

कोरबा में महिन्द्रा की गाड़ियों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। महिन्द्रा के नई वर्जन की गाड़ियां कोरबा के शो रूम आटो सेंटर टी पी नगर कोरबा में तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं, जिसके कारण महिन्द्रा की गाड़ियां लोगों को पसंद आ रही हैं। महिन्द्रा की गाड़ियां सुरक्षित एवं मजबूत होने के साथ-साथ कम्फर्टेबल होती हैं और आज के दौर में महिन्द्रा गाड़ियों की बिक्री में काफी उछाल आ रहा है।
दिवाली में लोग नए कपड़े पहनते हैं और आज धनतेरस में कपड़ों की खरीदी भी जमकर हुई। कपड़ा के कई बड़े-बड़े शो रूम ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
बर्तन दुकानों में भी भीड़ देखी गई, क्योंकि जो लोग जेवर नहीं खरीद सकते, वे धनतेरस में बर्तन खरीदकर धनतेरस में पूजा करते हैं।
सड़क पर रेलमपेल भीड़: पुलिस सड़क पर उतरी
सड़क पर धनतेरस में रेलमपेल भीड़ देखी गई और कई जगह दुकानों के सामने पार्किंग न होने के कारण लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी करते देखे गए, जिसके कारण कई जगह जाम की स्थिति निर्मित हो गई। सड़क में यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शहर में कोतवाली पुलिस, टी पी नगर में चौकी पुलिस, निहारिका क्षेत्र में सिविल लाईन पुलिस सड़क पर उतर कर व्यवस्था दुरूस्त करते नजर आई।

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BALCO Reaffirms Commitment to Carbon Neutrality and Water Positivity on World Environment Day

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Drives Environmental Stewardship through Renewable Energy Mix, Water Conservation and Community-Led Initiatives

Balconagar: Bharat Aluminium Company Limited (BALCO), a part of Vedanta Aluminium, marked World Environment Day showcasing commitment to sustainability through strategic ongoing interventions encompassing adoption of renewable energy mix, replenishing water structures and afforestation. These initiatives align with the company’s vision of achieving Net Water Positivity by 2030 and Net Zero Carbon Emissions by 2050.

While practicing environmental responsibility in its core operations, BALCO expanded its usage of renewable energy mix contributing to a significant reduction of over 1.6 lakh tonnes of carbon emissions in FY ’25. Further advancing energy efficiency, the company introduced an improved relining design in its potlines, reducing energy consumption by 400 kWh per metric tonne (MT). Enhanced digitisation across logistics has facilitated data-driven fleet management, optimising the movement of raw materials and finished goods, further lowering emissions.

As part of its water conservation efforts, BALCO has recycled over 5.20 million cubic meters of water, achieving a 17% increase over the previous year. In its surrounding communities, the company has restored 28 water structures, including farm ponds and community reservoirs, with a total storage capacity of over 39,000 cubic meters, enhancing groundwater recharge and supporting local agriculture.

Speaking on the developing resilient ecosystem, Mr. Rajesh Kumar, CEO & Director, BALCO said, “Sustainability is central to our growth philosophy at BALCO. Through our focused interventions in environmental stewardship, renewable energy, and community development, we aim to create a resilient ecosystem that supports circular economy and industrial progress while safeguarding environment. Our initiatives are a testament to BALCO’s vision of transforming the planet, responsibly.”

BALCO also continued its afforestation initiatives, planting over 52,000 saplings across operational sites, including mines, ash dykes, and peripheral community areas. The deployment of electric forklifts in operations and electric vehicles for township waste management and movement, has further contributed to cleaner, energy-efficient operations with a lower carbon footprint.

In alignment with BALCO’s commitment to ‘Transforming the Planet’, the company has maintained ash-free operational spaces while actively channelling fly ash for constructive use across multiple industries, including brick and cement manufacturing, infrastructure development, road construction, mines backfilling and more.

Further strengthening its environmental stewardship in FY25, BALCO has undertaken several key sustainability initiatives, including:
• Development of plastic-free zones within plant premises
• Promotion of electric vehicle usage among employees
• Conduct of nature walks and cleanliness drives to raise awareness on local biodiversity
• Organisation of gardening competitions promoting native and exotic plant species
• Community campaigns celebrating the ecological richness of Chhattisgarh to foster environmental empathy

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कोरबा

पटाखा बाजार में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल! 17 दुकानों के बीच खतरे का कारोबार, नियमों की अनदेखी पर प्रशासन मौन?

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कपड़ों के पर्दों से घिरी दुकानें, अग्निशमन उपकरणों की कमी और आपातकालीन इंतजाम नदारद होने के आरोप; खुशियों के त्योहार में कहीं लापरवाही भारी न पड़ जाए!

कोरबा/बांकीमोंगरा। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की खरीदारी के लिए बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। लेकिन इस रौनक के बीच पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस स्थान पर बारूद और ज्वलनशील सामग्री का कारोबार हो रहा है, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों में कथित लापरवाही सामने आ रही है।

मौके की तस्वीरें कुछ ऐसी व्यवस्था की ओर इशारा कर रही हैं, जहां सुरक्षा मानकों के पालन से ज्यादा दुकानें सजाने और कारोबार चलाने पर जोर दिखाई देता है। बाजार में करीब 17 दुकानें संचालित होने की जानकारी है, लेकिन अग्नि सुरक्षा के इंतजामों को लेकर स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आ रही।

दुकानों के बीच दूरी का सवाल, एक चिंगारी बन सकती है बड़ी मुसीबत

पटाखों की दुकानों के संचालन के लिए विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक नियमों के तहत निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है। दुकानें सुरक्षित दूरी पर हों और आग लगने की स्थिति में दूसरी दुकानों तक आग फैलने की आशंका कम रहे, इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

लेकिन यहां दुकानों को कतारबद्ध तरीके से पास-पास बनाए जाने की शिकायत है। यदि निर्धारित दूरी का पालन नहीं हुआ है तो यह स्थिति किसी अप्रिय घटना के दौरान बड़ा खतरा बन सकती है।

टिन शेड की जगह कपड़ों के पर्दे, सुरक्षा मानकों पर सवाल

पटाखा बाजार में दुकानों के चारों ओर कपड़े के पर्दों का इस्तेमाल भी सवालों के घेरे में है। ज्वलनशील सामग्री से घिरे ऐसे स्थान पर आग लगने की स्थिति में खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

दुकानों के प्रवेश द्वार आमने-सामने होने और पर्याप्त खुली जगह नहीं होने को लेकर भी जांच की आवश्यकता है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक दुकान निर्धारित लाइसेंस और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही संचालित हो रही है या नहीं।

17 दुकानों में महज 6 के सामने अग्निशामक यंत्र!

बाजार की अग्निशमन व्यवस्था पर नजर डालें तो स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। मौके पर कुल 17 दुकानों में से केवल 6 दुकानों के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र दिखाई देने की जानकारी मिली है।

वहीं पानी और सूखी रेत से भरी बाल्टियों की पर्याप्त व्यवस्था भी नजर नहीं आई। सवाल यह है कि बाकी दुकानों में आग बुझाने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या संबंधित विभाग ने इन व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया है?

आपातकालीन स्थिति में राहत कैसे मिलेगी?

पटाखा बाजार में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दमकल वाहन, प्राथमिक उपचार और एंबुलेंस की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस और दमकल वाहनों की मौजूदगी नजर नहीं आने की बात सामने आई है।

यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में प्रशासन को तत्काल आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।

दुकान के सामने ही पटाखों का प्रदर्शन!

नाबालिगों से दुकान संचालन कराने का आरोप

नियमों के तहत पटाखा बिक्री स्थल के आसपास धूम्रपान और खुली आग पर प्रतिबंध रहता है। इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाना भी जरूरी है।

इसके बावजूद दुकानों के सामने पटाखे फोड़कर ग्राहकों को नमूना दिखाने की शिकायत सामने आई है। यदि यह गतिविधि वास्तव में बिक्री परिसर में हो रही है तो यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का विषय है। इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।

अब प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने का समय

पटाखा बाजार में सामने आ रही इन परिस्थितियों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर दुकानें संचालित होने से पहले सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किसने किया? क्या सभी दुकानों के लाइसेंस और अनुमतियों की जांच की गई? क्या अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा इंतजामों को हरी झंडी दी है?

स्थानीय प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय और अग्निशमन विभाग को संयुक्त रूप से बाजार का निरीक्षण कर कमियों को तत्काल दूर कराना चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।

त्योहार खुशियों का प्रतीक है, जोखिम का नहीं। प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है। इसलिए जरूरी है कि किसी हादसे के बाद जांच बैठाने के बजाय उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और पटाखा बाजार को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा

गजरा नदी में रेत का खेल! नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का जमावड़ा, मौके पर लोडिंग की तस्वीरें आईं सामने

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बांकीमोंगरा में कथित रेत उत्खनन को लेकर फिर गरमाया मामला, नदी से बस्ती तक ट्रैक्टरों की आवाजाही पर सवाल; खनिज विभाग की निगरानी आखिर कहां?

बांकीमोंगरा। गजरा नदी में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी और उनमें रेत भरने की गतिविधियों की तस्वीरें सामने आने के बाद क्षेत्र में कथित रेत कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तस्वीरों में ट्रैक्टर-ट्रॉली के पास रेत की लोडिंग करते लोग दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि नदी क्षेत्र में चल रही इन गतिविधियों की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?

स्थानीय स्तर पर लगातार यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि गजरा नदी से रेत निकालकर ट्रैक्टरों के माध्यम से आसपास की बस्तियों और अन्य स्थानों तक पहुंचाई जा रही है। यदि यह उत्खनन और परिवहन नियमानुसार हो रहा है, तो संबंधित विभाग को इसकी अनुमति, निर्धारित मात्रा और परिवहन व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

नदी किनारे ट्रैक्टर, मौके पर लोडिंग; क्या विभाग को जानकारी नहीं?

सामने आई तस्वीरों में नदी किनारे ट्रैक्टर और ट्रॉली के साथ रेत भरने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों के आधार पर उत्खनन की वैधता या अवैधता का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है, लेकिन ये तस्वीरें खनिज विभाग के लिए जांच का आधार जरूर बन सकती हैं।

आखिर नदी क्षेत्र में किसकी अनुमति से रेत निकाली जा रही है? क्या संबंधित वाहनों के पास वैध परिवहन दस्तावेज हैं? क्या उत्खनन निर्धारित स्थान और निर्धारित मात्रा के अनुसार हो रहा है? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग को देना चाहिए।

नदी से बस्ती तक ट्रैक्टरों की आवाजाही, रहवासियों की बढ़ी परेशानी

गजरा बस्ती के रहवासियों की परेशानी भी कम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत से भरे ट्रैक्टर दिनभर बस्ती की संकरी गलियों और चौक-चौराहों से गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालकों को समझाइश देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। यदि संकरी गलियों में भारी ट्रैक्टरों की आवाजाही इसी तरह जारी रही, तो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रह सकती है।

खनिज विभाग के साथ एसडीएम और तहसीलदार भी लें संज्ञान

मामला अब केवल खनिज नियमों तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें आम नागरिकों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही भी जुड़ गई है। ऐसे में खनिज विभाग के अधिकारियों के साथ एसडीएम और तहसीलदार को भी मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।

सिर्फ कागजी जांच से काम नहीं चलेगा। नदी क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर उत्खनन की अनुमति, ट्रैक्टरों के दस्तावेज, ई-ट्रांजिट पास और परिवहन की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। साथ ही बस्ती के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही पर भी उचित नियंत्रण होना चाहिए।

सात ट्रैक्टरों की चर्चा, कारोबार के पीछे कौन?

क्षेत्र में सात ट्रैक्टरों के जरिए रेत परिवहन किए जाने की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर है। हालांकि इन वाहनों की संख्या, मालिकों और उनकी गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। प्रशासन यदि निष्पक्ष जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि कितने वाहन इस गतिविधि में शामिल हैं और उनके पास वैध अनुमति एवं परिवहन दस्तावेज हैं या नहीं।

सबसे अहम बात यह है कि जांच केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी प्रकार का अवैध उत्खनन प्रमाणित होता है, तो इसके पीछे शामिल वाहन मालिकों और कारोबार से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

अब कार्रवाई का इंतजार, आश्वासन से नहीं रुकेगा मामला

गजरा नदी और गजरा बस्ती का मामला अब प्रशासन के लिए गंभीरता से लेने का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

सवाल साफ है—क्या खनिज विभाग नदी में चल रही गतिविधियों की नियमित निगरानी कर रहा है? क्या एसडीएम और तहसीलदार बस्तीवासियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे? या फिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही सक्रिय होगा?

गजरा नदी के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और बस्ती के नागरिकों की जान-माल की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि तस्वीरों और शिकायतों के सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग कितनी जल्दी जांच और कार्रवाई शुरू करते हैं।

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नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा

पटाखा बाजार में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल! 17 दुकानों के बीच खतरे का कारोबार, नियमों की अनदेखी पर प्रशासन मौन?

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कपड़ों के पर्दों से घिरी दुकानें, अग्निशमन उपकरणों की कमी और आपातकालीन इंतजाम नदारद होने के आरोप; खुशियों के त्योहार में कहीं लापरवाही भारी न पड़ जाए!

बांकीमोंगरा/कोरबा। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की खरीदारी के लिए बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। लेकिन इस रौनक के बीच पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस स्थान पर बारूद और ज्वलनशील सामग्री का कारोबार हो रहा है, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों में कथित लापरवाही सामने आ रही है।

मौके की तस्वीरें कुछ ऐसी व्यवस्था की ओर इशारा कर रही हैं, जहां सुरक्षा मानकों के पालन से ज्यादा दुकानें सजाने और कारोबार चलाने पर जोर दिखाई देता है। बाजार में करीब 17 दुकानें संचालित होने की जानकारी है, लेकिन अग्नि सुरक्षा के इंतजामों को लेकर स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आ रही।

दुकानों के बीच दूरी का सवाल, एक चिंगारी बन सकती है बड़ी मुसीबत

पटाखों की दुकानों के संचालन के लिए विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक नियमों के तहत निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है। दुकानें सुरक्षित दूरी पर हों और आग लगने की स्थिति में दूसरी दुकानों तक आग फैलने की आशंका कम रहे, इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

लेकिन यहां दुकानों को कतारबद्ध तरीके से पास-पास बनाए जाने की शिकायत है। यदि निर्धारित दूरी का पालन नहीं हुआ है तो यह स्थिति किसी अप्रिय घटना के दौरान बड़ा खतरा बन सकती है।

टिन शेड की जगह कपड़ों के पर्दे, सुरक्षा मानकों पर सवाल

पटाखा बाजार में दुकानों के चारों ओर कपड़े के पर्दों का इस्तेमाल भी सवालों के घेरे में है। ज्वलनशील सामग्री से घिरे ऐसे स्थान पर आग लगने की स्थिति में खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

दुकानों के प्रवेश द्वार आमने-सामने होने और पर्याप्त खुली जगह नहीं होने को लेकर भी जांच की आवश्यकता है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक दुकान निर्धारित लाइसेंस और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही संचालित हो रही है या नहीं।

17 दुकानों में महज 6 के सामने अग्निशामक यंत्र!

बाजार की अग्निशमन व्यवस्था पर नजर डालें तो स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। मौके पर कुल 17 दुकानों में से केवल 6 दुकानों के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र दिखाई देने की जानकारी मिली है।

वहीं पानी और सूखी रेत से भरी बाल्टियों की पर्याप्त व्यवस्था भी नजर नहीं आई। सवाल यह है कि बाकी दुकानों में आग बुझाने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या संबंधित विभाग ने इन व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया है?

आपातकालीन स्थिति में राहत कैसे मिलेगी?

पटाखा बाजार में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दमकल वाहन, प्राथमिक उपचार और एंबुलेंस की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस और दमकल वाहनों की मौजूदगी नजर नहीं आने की बात सामने आई है।

यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में प्रशासन को तत्काल आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।

दुकान के सामने ही पटाखों का प्रदर्शन!

नाबालिगों से दुकान संचालन कराने का आरोप

नियमों के तहत पटाखा बिक्री स्थल के आसपास धूम्रपान और खुली आग पर प्रतिबंध रहता है। इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाना भी जरूरी है।

इसके बावजूद दुकानों के सामने पटाखे फोड़कर ग्राहकों को नमूना दिखाने की शिकायत सामने आई है। यदि यह गतिविधि वास्तव में बिक्री परिसर में हो रही है तो यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का विषय है। इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।

अब प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने का समय

पटाखा बाजार में सामने आ रही इन परिस्थितियों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर दुकानें संचालित होने से पहले सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किसने किया? क्या सभी दुकानों के लाइसेंस और अनुमतियों की जांच की गई? क्या अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा इंतजामों को हरी झंडी दी है?

स्थानीय प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय और अग्निशमन विभाग को संयुक्त रूप से बाजार का निरीक्षण कर कमियों को तत्काल दूर कराना चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।

त्योहार खुशियों का प्रतीक है, जोखिम का नहीं। प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है। इसलिए जरूरी है कि किसी हादसे के बाद जांच बैठाने के बजाय उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और पटाखा बाजार को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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