छत्तीसगढ़
बेमेतरा हादसा…फैक्ट्री में खतरनाक एक्सप्लोसिव का निर्माण:जिनसे शरीर के चीथड़े होने में 0.10 सेकेंड लगते हैं;16 किलोमीटर तक सुनाई पड़ी ब्लास्ट की आवाज
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2 years agoon
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Divya Akashरायपुर, बेमेतरा, एजेंसी।
बेमेतरा जिले के पिरदा गांव में स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री में धमाका हुए 30 घंटे से ज्यादा का समय हो गया है। हैरानी ये है कि जिला प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन अब तक हादसे में मरने वालों का पता नहीं लगा पाए हैं। विस्फोट के दौरान फैक्ट्री में किन मजदूरों की ड्यूटी थी, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है।हालांकि प्रशासन ने रविवार को 7 मजदूरों के लापता होने की पुष्टि कर दी है। इनकी तलाश के लिए रविवार सुबह फिर मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। रात को अंधेरा होने के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था।
स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री देश बारूद सप्लाई करने के मामले में देश की टॉप-18 हाई एक्सप्लोसिव फैक्ट्री में शामिल है। यहां अमोनियम नाइट्रेट, PETN यानि पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट, TNT यानि ट्राइनाइट्रो टॉल्विन और डायनामाइट जैसे खतरनाक विस्फोटकों का निर्माण होता है।फॉरेंसिक विभाग के जॉइंट डायरेक्टर टीएल चंद्रा ने बताया कि ऐसे विस्फोटकों से शरीर के चीथड़े उड़ने में 0.10 सेकेंड से भी कम का समय लगता है। ऐसे हालात में फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद यहां काम करने आए मजदूरों को उनके परिजन ढूंढ़ रहे हैं। प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन से कोई जवाब नहीं मिला।
इस तरह से हुआ था विस्फोट
फैक्ट्री में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शनिवार सुबह 6 बजे की शिफ्ट में मजदूर काम करने पहुंचे थे। जिस फैक्ट्री में PETN यानि पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट, TNT यानि ट्रिनिट्रोटोल्यूइन और डायनामाइट स्ट्रीक जैसे खतरनाक विस्फोटकों का निर्माण होता है, वहां के यार्ड में लगी मशीन में सुबह 7.40 बजे आवाज आने लगी।
इसी दौरान मशीन का कुछ हिस्सा गिरा और चिंगारी से आग लगी। आग लगती देखकर वहां काम कर रहे मजदूर गेट की तरफ भागे। TNT यार्ड की तरफ से मजदूरों को दौड़ता देखकर परिसर में मौजूद बाकी लोग भी भागे और लगभग 7.50 बजे विस्फोट हो गया। विस्फोट की वजह से यार्ड के अंदर बाहर निकले 7 लोग घायल हो गया। घायलो को उपचार के लिए रायपुर भेजा गया, इस दौरान एक की मौत हो गई।
ब्लास्ट के बाद से लापता मजदूर
यहां सुबह 6 बजे की शिफ्ट में आए मजदूर ही हादसे का शिकार हुए हैं। ऐसे में अपनों की खैर-खबर लेने के लिए परिजन पूरे दिन भटकते रहे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। गबदा गांव से आए भूषण यादव अपने भाई लोकनाथ को ढूंढ़ रहे थे। सुबह से रात हो गई, लेकिन भाई का कोई पता नहीं चला।इसके बाद शंकर यादव, नारद और पुनाराम के परिजन देर रात तक फैक्ट्री के बाहर बैठे रहे, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया। ब्लास्ट के बाद भास्कर की टीम पहुंची, तब हमें यहां उस यूनिट की अटेंडेंस रजिस्टर का पहला पेज मिला, जहां ब्लास्ट हुआ था।इस लिस्ट के अलावा भी जो श्रमिक लापता है, उनके परिजन भी मौके पर मिले। ग्रामीणों और परिजनों ने बताया कि शनिवार की सुबह ये काम पर गए थे, लेकिन अब तक इनके बारे में कोई भी जानकारी नहीं है।कोई ये भी बताने को तैयार नहीं है कि उनके परिजन जिंदा हैं या धमाके में मारे गए। प्रबंधन की ओर से भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मजदूरों के रोते-बिलखते परिजन से मिलने तक नहीं पहुंचा। जिससे आक्रोशित परिजन और आसपास के ग्रामीण लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार सुबह से एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है।
मलबे का विजन एक्स-रे कर चलाया गया रेस्क्यू
ब्लास्ट के बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। फॉरेंसिक अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल में ब्लास्ट का डर था, इसलिए मलबे का विजन एक्स-रे किया गया। विजन एक्स-रे करने के बाद मलबे के अंदर बारूद या केमिकल नहीं होने की पुष्टि हुई, तभी खुदाई शुरू की गई। खुदाई के बाद मलबे से कुछ श्रमिकों के शरीर के हिस्से मिले हैं।
DNA जांच से मजदूरों का पता किया जा सकेगा
फॉरेंसिक एक्सपर्ट टीएल चंद्रा ने बताया कि ब्लास्ट की वजह से शरीर क्षत-विक्षत हालत में हैं। जांच में शरीर के कई चीथड़े मिले हैं, जिन्हें इकट्ठा किया गया है। अब इनकी DNA जांच की जाएगी। इसी के बाद पता चलेगा, कौन किसका परिजन है?DNA रिपोर्ट के आधार पर श्रमिकों के शरीर के हिस्सों को उनके परिजनों को सौंपा जाएगा। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फैक्ट्री के भीतर आखिर कुल कितने मजदूर थे।
16 किलोमीटर दूर तक सुनाई पड़ी ब्लास्ट की आवाज
बोरसी गांव के कोटवार बिहारी लाल ने बताया कि ब्लास्ट की आवाज सुबह 7.40 से 7.50 के बीच आई। धमाका इतना तेज था, कि घटनास्थल से 16 किमी दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। जिसने भी आवाज सुनी, वह फैक्ट्री की तरफ दौड़ पड़ा। कोटवार ने बताया, कि जब वो घटनास्थल पहुंचा, तो वहां पीले रंग का धुंआ उठ रहा था।इसके साथ ही केमिकल के कारण वहां पहुंचे सभी लोगों की आंखों और शरीर पर जलन हो रही थी। ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री के अंदर इतनी गर्मी थी, कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल भी काम नहीं कर रहे थे।
डेटोनेटर और चट्टान तोड़ने वाला बारूद बनता था
हादसे के बाद फैक्ट्री पहुंची भास्कर की टीम को फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में बारूद और केमिकल पेटियों में भरा मिला। मौके पर मौजूद पुलिस और फॉरेंसिक अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में डेटोनेटर और पत्थर-कोल माइंस में इस्तेमाल होने वाले बारूद का निर्माण किया जाता था।
इस बारूद की सप्लाई छत्तीसगढ़ के अलावा देशभर में होती थी। फैक्ट्री में निर्माण होने वाले बारूद को रक्षा विभाग के जुड़े संस्थानों को भी सप्लाई की जाती थी।
डेढ़ महीने पहले जिस घर में गूंजी थी शहनाई, आज वहां मातम

फैक्ट्री हादसे में प्रशासन ने जिसकी मौत की पुष्टि की है, वह मजदूर सेवक राम साहू हैं। सेवक राम फैक्ट्री के ही पास गांव पिरदा का रहने वाले थे। डेढ़ महीने पहले ही सेवक ने अपनी दो बेटियों की शादी की थी। भतीजे युवराज साहू ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि खुशियों के बाद मातम भी देखना पड़ेगा।
4 बेटियों के पिता, एकमात्र कमाने वाले
4 बेटियों के पिता सेवक राम अपने घर में एकमात्र कमाने वाले थे। सरकार ने मृतकों के लिए 5 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई बात करने ही नहीं आया। प्रबंधन की ऐसी संवेदनहीनता से परिजन बेहद आक्रोशित हैं।भतीजे युवराज का कहना है कि 24 साल सेक उनके चाचा सेवक राम इस फैक्ट्री में काम कर रहे थे, लेकिन इस हादसे में हुई मौत के बाद फैक्ट्री वालों ने जानकारी तक नहीं दी। परिजन खुद से अपनों की खैर-खबर लेने पहुंचे तब उन्हें पता चला कि सेवक राम की हादसे में जान जा चुकी है।
ब्लास्ट के समय वे घटना स्थल से दूर थे लेकिन विस्फोट के बाद उछला बड़ा पत्थर उनके सिर में आ गिरा और मौत हो गई।
हादसे की मजिस्ट्रियल जांच कराएगी सरकार
जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की ओर से पूरे मामले की दंडाधिकारी जांच कराने की बात कही है। दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम ने कहा, कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में बारूद फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद मलबे में दिखे कई बॉडी पार्ट्स, सुबह से रेस्क्यू जारी
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में शनिवार को एक बारूद फैक्ट्री में बड़ा धमाका हुआ। इसका CCTV वीडियो भी सामने आया है जिसमें गुबार कई मीटर ऊपर तक दिख रहा है। रात को अंधेरा होने के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोका गया है। 9-10 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
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एक हाथ में लाश,दूसरे में सिगरेट और गुनगुनाता रहा गाना:न्यूज एंकर मर्डर-केस में चश्मदीद ने खोले राज,वारदात के पांच साल बाद मिली थी लाश
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9 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashकोरबा। गोद में शव…हाथ में सिगरेट…और होंठों पर वही गीत, जो कभी सलमा सुल्ताना का पसंदीदा था-“तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, हैरान हूं मैं…”। कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह डिंपल सिंह (काल्पनिक नाम) ने जो बयान दिया, उसने अदालत कक्ष को सन्न कर दिया।
गवाह के मुताबिक, साल 2018 में सलमा सुल्तान की गला घोंटकर हत्या करने के बाद जिम ट्रेनर मधुर साहू ने शव को बाएं हाथ से गोद में लिया हुआ था। दाएं हाथ से वह सिगरेट के कश ले रहा था और वही गीत गा रहा था। यह वही गाना था, जिसे सलमा बेहद पसंद करती थी।
2018 में हुई सलमा सुल्तान की हत्या की सुनवाई कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही है। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद गवाह डिंपल को सोमवार को पेश किया। डिंपल ने बताया कि वह प्रोटीन वर्ल्ड जिम में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थी, जहां मधुर साहू ट्रेनर था।
गवाह ने कोर्ट में यह भी स्वीकार किया कि मधुर ने उसे भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था। हालांकि, जब उसने कंप्यूटर में मधुर की अन्य लड़कियों के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें देखीं, तो उसने उससे रिश्ता खत्म करने की कोशिश की। इस पर मधुर ने उसे आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी और अपनी इच्छा के अनुसार काम करवाता रहा।
बाद में डिंपल को पता चला कि मधुर साहू के सलमा सुल्ताना सहित कई दूसरी लड़कियों से भी संबंध थे। गवाह ने बताया कि सलमा सुल्ताना और मधुर शारदा विहार स्थित घर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। सलमा को भी मधुर की इन गतिविधियों पर शक था, जिसके कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

क्या है पूरा मामला
25 साल की सलमा सुल्ताना कुसमुंडा के एसईसीएल कॉलोनी में रहती थी। वो धीरे-धीरे न्यूज के फील्ड में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही थी। उसका करियर तो परवान चढ़ ही रहा था, साथ ही जिम ट्रेनर मधुर साहू के साथ उसकी नजदीकियां भी। इसके बाद अचानक 2018 से वो लापता हो गई। यहां तक कि 20 जनवरी 2019 को जब उसके पिता की मौत हुई, तो उसमें भी वो शामिल नहीं हुई।

प्रेमी जिम ट्रेनर मधुर साहू और उसके दो सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।
युवती लापता, परिजनों ने जिम ट्रेनर पर जताया संदेह
युवती की स्कूटी स्टेशन पर मिली थी, वहीं उसका मोबाइल स्विच ऑफ था। उससे संपर्क करने की हर कोशिश नाकाम हो गई। इसके बाद परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। परिजन ने पुलिस अधिकारियों से खोजबीन की गुहार लगाते हुए जिम संचालक मधुर साहू पर संदेह जताया था, लेकिन पूछताछ में मधुर साहू पुलिस को गुमराह कर देता था।

पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।
पार्टनर ने खोला हत्याकांड का राज
कई साल तक सलमा का किसी को पता नहीं चला तो मधुर साहू का एक राजदार भी ओवर कॉन्फिडेंस में आ गया था। उसने नशे में मधुर के पार्टनर के सामने सलमा हत्याकांड का राज खोल दिया था। मधुर और उसके पार्टनर का भी लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था।
लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद पार्टनर ने मधुर को सबक सिखाने के लिए पुलिस के पास पहुंचकर हत्याकांड का राज खोल दिया। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक तब एक बैंक से सलमा के नाम से लोन होने और अब तक उसकी किस्त जमा होने का पता चला।

खुदाई में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का भी सहारा लिया।
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो मधुर फरार हो गया। पुलिस ने उसके दोस्तों और परिचितों से बयान लिया। 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस किया, जिसमें अक्टूबर 2018 में शारदा विहार के एक मकान में मधुर साहू और सहयोगी ट्रेनर कौशल श्रीवास ने सलमा का गला घोंटकर हत्या करने और लाश को अतुल शर्मा की मदद से कोहड़िया पुल के आसपास दफनाने का पता चला।
इसके बाद पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।

मुख्य आरोपी मधुर साहू ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई।
साल 2023 में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का सहारा लिया। इसके बाद सड़क को खोदकर सलमा का कंकाल बरामद किया गया। डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि यह कंकाल सलमा का ही था। इसके बाद पुलिस ने मधुर साहू और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी मधुर ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई। आरोपी के पास से हार्ड डिस्क और लैपटॉप जब्त किया गया है। इसकी जांच में कुछ ऑडियो क्लिप के बारे में पता चला। जिस वाहन का इस्तेमाल लाश को दफनाने में किया गया था, उसे भी जब्त किया जा चुका है।

स्थानीय केबल चैनल में एंकर थी सलमा सुल्ताना। 2018 में हुई थी लापता।
सलमा ने यूनियन बैंक से लिया था लोन
मार्च 2023 में राज्य स्तरीय ऑपरेशन मुस्कान में गुम इंसान महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी कड़ी में थाना कुसमुंडा के गुम इंसान सलमा सुल्ताना की केस डायरी की भी बारीकी से जांच की गई। परिजनों का बयान लेने पर पता चला कि यूनियन बैंक से सुल्ताना ने लोन लिया था। इस संबंध में यूनियन बैंक से पुलिस ने जानकारी ली, तो पता चला कि लोन की EMI समय पर भरी जा रही है।
यह पैसा EMI के तौर पर गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर मधुर साहू भर रहा था। पुलिस ने जांच तेज की, तो मधुर साहू फरार हो गया। इसके बाद सलमा के दोस्तों और परिचितों का बयान भी लिया गया। साथ ही उसके 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस भी किया गया।

गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर है मधुर साहू।
पूछताछ में 2 महिलाओं औ 3 पुरुषों के बयान में विरोधाभाष मिलने पर पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया। सबसे कड़ाई से पूछताछ करने पर हत्याकांड का राज खुल गया। 21 अक्टूबर 2018 एलजी 17 शारदा विहार में मधुर साहू और कौशल श्रीवास के द्वारा सलमा सुल्ताना की गला घोंटकर हत्या करने का पता चला।

कोरबा
आबकारी एक्ट में युवक गया जेल,कुछ घंटे बाद मां की मौत:पैरोल पर अंतिम संस्कार में शामिल हुआ बेटा
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9 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोरबा में आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए युवक अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को जेल भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद उसकी मां सावित्री श्रीवास (45) की मौत हो गई। मां सावित्री श्रीवास सीतामणी वार्ड नंबर 10, शनि मंदिर के पास रहती थी और बताया जा रहा है कि वह पहले से बीमार थी। पुलिस ने मंगलवार शाम को गोविंदा को जेल भेजा था।
बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलने पर बस्ती के लोग और वार्ड पार्षद बड़ी संख्या में गोविंदा के घर पहुंचे। उन्होंने अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को पैरोल पर रिहा करने और मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने देने की मांग की। इस मांग को लेकर वार्डवासी एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई।

आरोपी पैरोल पर हुआ रिहा, मां की अंतिम यात्रा में हुआ शामिल
पुलिस अधीक्षक से गुहार के बाद कोर्ट से अरुण उर्फ गोविंदा को पैरोल पर रिहा किया गया। वह अपनी मां की अंतिम यात्रा में शामिल हुआ और मोती सागर स्थित मुक्तिधाम पहुंचा। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।
इस मामले पर वार्ड के पूर्व पार्षद सुफल दास महंत ने घटना को दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य मार्ग पर खुलेआम शराब बेची जा रही है और गोविंदा के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए।

आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट में हुई थी कार्रवाई
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि गोविंदा के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34/2 के तहत कार्रवाई की गई थी और उसे जेल भेजा गया था। परिजनों की पैरोल की मांग पर उसे जेल से लाकर मां के अंतिम संस्कार में शामिल कराया गया।
सीएसपी ने यह भी बताया कि सीतामणी में कुछ दिनों पहले हुई चाकूबाजी की घटना के बाद पुलिस नशे की प्रवृत्ति को कम करने के लिए अभियान चला रही है। इसी क्रम में उस दिन तीन लोगों को आबकारी एक्ट के तहत जेल भेजा गया था।

छत्तीसगढ़
गरियाबंद : दुर्लभ हॉर्नबिल संरक्षण की विशेष पहल :उदंती-सीतानदी में विकसित हो रहे प्राकृतिक उद्यान
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9 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akash
गरियाबंद। हॉर्नबिल दुनिया के सबसे आकर्षक और अनोखे पक्षियों में से एक हैं। इनका विशाल आकार, बड़ी चोंच, आकर्षक और रंगीन पंखुड़ियाँ और आमतौर पर शोरगुल भरा व्यवहार इन्हें हर जगह आसानी से पहचान दिलाते हैं। इनके घोंसला बनाने की विचित्र आदतें भी कई विशेषताओं में से एक हैं जो हॉर्नबिल को इतना दिलचस्प बनाती हैं। छत्तीसगढ के उदंती-सीतानदी में दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष प्राकृतिक उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” के रूप में तैयार किया जाएगा।
हॉर्नबिल को जंगल का किसान मानते हुए उनके विलुप्त होने के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक हैं कि हॉर्नबिल प्रजातियों के लिए घोंसलों की निगरानी, कृत्रिम घोंसले लगाने, अनुसंधान और स्थानीय समुदाय की भागीदारी (घोंसला गोद लेने का कार्यक्रम) के माध्यम से संरक्षण कार्य किया जाए। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहल कर रहा है।
यह रेस्टोरेंट किसी प्रकार का कृत्रिम निर्माण नहीं होगा, बल्कि जंगल और आसपास के क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का प्राकृतिक समूह विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत पीपल, बरगद तथा फाइकस प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे, जिनके फल हॉर्नबिल पक्षियों का प्रमुख आहार हैं। इस पहल का उद्देश्य इन पक्षियों को पूरे वर्ष प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना और उनके सुरक्षित आवास को बढ़ावा देना है। हॉर्नबिल को घोंसला बनाने के लिए जरूरी पेड़ों को लगाने और उनकी निगरानी करने के प्रयास।
उल्लेखनीय है कि सामान्यतः पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाए जाने वाले ये पक्षी अब उदंती-सीतानदी की अनुकूल जलवायु और हरियाली के कारण यहां अधिक संख्या में दिखाई देने लगे हैं। पहले जहां इनका दर्शन कभी-कभार होता था, वहीं अब सप्ताह में दो से तीन बार इनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। हॉर्नबिल पक्षियों को “फॉरेस्ट इंजीनियर” या जंगल का प्राकृतिक माली भी कहा जाता है, क्योंकि ये फल खाने के बाद बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे वनों का प्राकृतिक विस्तार होता है। समुद्र तल से लगभग 800 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उदंती-सीतानदी का पहाड़ी क्षेत्र इन पक्षियों के लिए उपयुक्त आवास सिद्ध हो रहा है।
इन दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए विशेष ट्रैकिंग टीमें गठित की गई हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ स्थानीय प्रशिक्षित युवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है, जो घोंसलों की सुरक्षा और नियमित निगरानी का कार्य कर रहे हैं। साथ ही ड्रोन तकनीक के माध्यम से शिकार गतिविधियों और वनाग्नि पर भी नजर रखी जा रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देगी, जिससे पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित दूरी से इन दुर्लभ पक्षियों को देख सकेंगे और क्षेत्र की जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।


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