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कोरबा

भाजपा के महापौर प्रत्याशी श्रीमती संजू देवी राजपूत की प्रचंड जीत: जनता का जताया आभार, दिया ह्दय से धन्यवाद!

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कोरबा। गत शनिवार को छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय चुनाव का परिणाम निकला। पूरे प्रदेश में भाजपा की सुनामी ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। सभी 10 नगर निगमों में भाजपा के महापौर विराजेंगे। सबसे बड़ी जीत के रूप में रायपुर के बाद कोरबा का नंबर आया। यहां भाजपा प्रत्याशी श्रीमती संजू देवी राजपूत ने 48 हजार 116 वोट से चुनाव जीता। इस अपार समर्थन के लिए नवनिर्वाचित महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने कोरबा की जनता का आभार जताया और कहा कि इस अपार स्नेह, आशीर्वाद के लिए क्षेत्र के सभी बड़ों को प्रणाम करती हूं और मेरे भगवान तुल्य कार्यकर्ताओं का ह्दय से आभार मानती हूं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं अपने वरिष्ठ नेताओं को प्रणाम करती हूं, जिन्होंने मुझ साधारण कार्यकर्ता को महापौर का टिकिट दिया और कड़ी मेहनत कर मुझे प्रचंड लीड के साथ जीताया। उन्होंने कहा कि मैं सदा जनता का ऋणि रहूंंगी और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने का प्रयास करूंगी। मैं विश्वास दिलाती हूं कि मतदाताओं के एक-एक वोट का सम्मान करूंगी और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और उनके मार्गदर्शन से कोरबा विधायक एवं प्रदेश के केबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में चहुंमुखी विकास के लिए टीम भावना के साथ प्रयास करेंगे। जनता ने हमें चुना है और हम जन सेवक बनकर उनके लिए सर्वोत्कृष्ट करने का प्रयास करेंगे। एक बार पुन: सभी का ह्दय से धन्यवाद!

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कोरबा

SECL एम्प्लॉईज कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी, कोरबा में करोड़ों रुपये के खर्च पर गंभीर सवाल, सदस्यों ने उठाई निष्पक्ष जांच और ऑडिट की मांग

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कोरबा। एसईसीएल एम्प्लॉईज कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (SECL Employees Cooperative Credit Society) कोरबा में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि कर्मचारियों और मजदूरों की मेहनत की कमाई से चलने वाली इस संस्था में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव दिख रहा है ।

हाल ही में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष द्वारा बुलाई गई आम बैठक को लेकर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई है। सदस्यों का आरोप है कि इस बैठक की सूचना न तो किसी कार्यालय में चस्पा की गई और न ही उचित माध्यम से सभी सदस्यों को दी गई। बैठक में पहुंचे सदस्यों ने जब संस्था की बैलेंस शीट (Balance Sheet) का अवलोकन किया और विभिन्न खर्चों का विस्तृत ब्योरा मांगा तो प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका ।

बैलेंस शीट की इन मदों पर उठे गंभीर सवाल

  1. गिफ्ट पर्चेज (Gift Purchase) रू.59,01,000/- :- सदस्यों के अनुसार उन्हें केवल रू.150 से रू.200 मूल्य की चादर या उपहार ही दिए गए हैं, ऐसे में लगभग 59 लाख रुपये की विशाल राशि किस आधार पर और कहां खर्च की गई?
  2. ड्यूटीज एवं टैक्सेस (Duties & Taxes) रू.46,17,899/- :- इतनी बड़ी राशि किन विभागों या संस्थाओं को भुगतान की गई? इसका मदवार ब्योरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
  3. कंप्यूटर व्यय (Computer Expenses) रू.7,66,247.20/- :- कागजों पर कंप्यूटर खरीद के मद में साढ़े सात लाख से अधिक का खर्च दिखाया गया है, जबकि भौतिक रूप से इनकी उपलब्धता और खरीद पर भारी संदेह है ।
  4. कार्यालय व्यय (Office Expenses) रू.10,97,216.64/- :- एक वर्ष के भीतर लगभग 11 लाख रुपये का ऑफिस खर्च किन-किन कार्यों में हुआ? इसके सभी वाउचर प्रस्तुत किए जाने चाहिए ।
  5. मीटिंग व्यय (Meeting Expenses) रू.2,65,000/- :- बैठकों के नाम पर दिखाई गई इस राशि की स्वीकृति संबंधित बिल और भुगतान विवरण पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई ।

इसके अलावा स्टाफ सैलरी, प्रिंटिंग, फर्नीचर एवं अन्य व्ययों के विस्तृत ब्योरे पर भी प्रबंधन मौन बना हुआ है। उपलब्ध बैलेंस शीट के अनुसार कुल राशि रू.39,66,31,059.22 दर्ज है सदस्यों का तर्क है कि जब राशि इतनी बड़ी है तो संस्था के प्रत्येक रुपये का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए ।

सदस्यों की प्रमुख मांगें

  1. बैलेंस शीट की सभी संदिग्ध मदों गिफ्ट, टैक्स, कंप्यूटर, ऑफिस खर्च आदि का बिल वाउचर और रजिस्टर सदस्यों के समक्ष रखा जाए ।
  2. कंप्यूटर खरीद का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) एवं स्टॉक रजिस्टर की जांच कराई जाए ।
  3. संपूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा की किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराई जाए ।
  4. जांच में गबन या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा गबन की गई राशि की वसूली हो ।

सदस्यों का कहना है कि यह क्रेडिट सोसाइटी किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि हजारों कर्मचारियों के पसीने की कमाई से बनी है। यदि शीघ्र ही निष्पक्ष जांच और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो सदस्य अपने अधिकारों और न्याय के लिए आंदोलन का रास्ता सहित सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने को बाध्य होंगे l

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कोरबा

डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट की आधिकारिक यात्रा सम्पन्न, सेवा कार्यों को लेकर लीनेस सदस्यों को किया प्रोत्साहित

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कोरबा। ऑल इंडिया लीनेस क्लब्स के अंतर्गत कोरबा में डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट चार्टर लीनेस रश्मि अग्रवाल, रीजन ऑफिसर लीनेस भगवती अग्रवाल एवं डिस्ट्रिक्ट एडवाइजर लीनेस शबाना नाज की आधिकारिक यात्रा गरिमामय समारोह के साथ सम्पन्न हुई। इस अवसर पर विभिन्न लीनेस क्लबों के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अतिथियों का सदस्यों द्वारा ढोल-ताशों के साथ उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद सभी उपस्थित सदस्यों ने सामूहिक राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना के लिए सदस्यों ने कुछ क्षण मौन धारण किया। लीनेस रेखा केंवट ने लीनेस प्रार्थना प्रस्तुत की, जबकि लीनेस सुमन श्रीवास्तव ने स्वागत गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।

कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इस दौरान कोरबा क्लब की अध्यक्ष लीनेस सविता पाठक सहित माधुरी सिंह, हरितिमा, रेखा केंवट (दादर गोल्डन) तथा हेमा शर्मा (कुसमुंडा) ने अतिथियों का अभिनंदन किया। डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट रश्मि अग्रवाल एवं रीजन ऑफिसर लीनेस भगवती अग्रवाल ने सभी क्लबों के सेवा कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने क्लबों के स्क्रैपबुक, एल्बम एवं रजिस्टर का अवलोकन करते हुए सेवा गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने और सभी सदस्यों के साथ मिलकर समाजसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर सभी क्लबों के अध्यक्षों ने मंचस्थ अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कोरबा क्लब की संरक्षिका PDP चित्रलेखा चंदेल, PDP उषा अरोरा, रीजन ऑफिसर भगवती अग्रवाल, रीजन एडवाइजर ममता रानी वासन, रीजन सचिव अनीमा प्रसाद, एरिया ऑफिसर गीता श्रीवास, एरिया ऑफिसर लीनेस सुमन श्रीवास्तव सहित चारों क्लबों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन ममता रानी वासन एवं अनीमा प्रसाद ने किया। आधिकारिक यात्रा के दौरान अतिथियों ने क्लबों द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी ली और भविष्य में सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को और अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के समापन के बाद सभी सदस्यों ने विभिन्न व्यंजनों का आनंद लिया। पूरे आयोजन में सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना देखने को मिली।

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कोरबा

जटराज के ग्रामीणों का आरोप: बिना बसाहट मकान ढहाने की तानाशाही, प्रशासन व एसईसीएल के खिलाफ खोला मोर्चा

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4 अलग-अलग जगहों पर विस्थापित करने पर जताया ऐतराज, मूलभूत सुविधाओं की कमी

मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा न करने और मकान ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक की मांग

कोरबा। तहसील दर्री क्षेत्र के ग्राम जटराज के ग्रामीणों ने एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भू-अधिग्रहण और पुनर्वास नीति को लेकर कड़ा विरोध जताया है। इस संबंध में रविवार को प्रभावित भूविस्थापित जोगीराम पटेल, दिलहरण सारथी, बृजेश श्रीवास समेत अन्य ग्रामीणों ने कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि बिना पूर्ण बसाहट, प्लाट आबंटन और मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराए बलपूर्वक उनके मकानों को ध्वस्त कर बेदखली की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
1978 से चल रहा अधिग्रहण, अब आनन-फानन में बेदखली
ग्रामीणों के अनुसार, एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा ग्राम जटराज का अर्जन 4 चरणों (वर्ष 1978-79 CBA, 1983 MPLRC, 1984 MPLRC पूरक और 2010 CBA Sec 9(1)) में किया गया। पूर्व के तीन चरणों में ग्रामीणों का आवास प्रभावित नहीं हुआ था, लेकिन 2010 के अंतिम चरण के अर्जन के बाद अब 16 साल बाद (अगस्त-सितंबर 2026) आनन-फानन में गांव खाली कराने के लिए प्लाट आबंटन और मकान तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

चार अलग-अलग स्थानों पर बसाने का विरोध
प्रेस वार्ता में बताया गया कि पूरे गांव को एक साथ बसाने के बजाय चार अलग-अलग स्थानों (सर्वमंगला नगर, 14 नंबर डम्प स्थल, वैशाली नगर/खमहरिया और 14 नंबर डम्प के दूसरे छोर) पर विस्थापित किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का सामाजिक सौहार्द, रीति-रिवाज और सामुदायिक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं।

बसाहट स्थल पर सुविधाओं का अभाव व सुरक्षा का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्लाट आबंटित किए जा रहे हैं, वहां पेयजल, बिजली, सड़क, नाली, मुक्तिधाम, खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। 14 नंबर डम्प स्थल स्थित प्लाट के पास पोखरी में पानी भरा है, जहां सुरक्षा बाउंड्रीवाल न होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, डम्प स्थल पर भूस्खलन की आशंका है और सामुदायिक भवन की दीवारों में अभी से दरारें आ चुकी हैं।

एकतरफा शपथ पत्र और मुआवजा राशि में गड़बड़ी का आरोप
ग्रामीणों का यह भी गंभीर आरोप है कि प्रबंधन द्वारा एकतरफा तैयार किए गए शपथ पत्र पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जिसमें मुआवजा राशि कम आंकने और भविष्य में बदलाव न करने जैसी अनुचित शर्तें शामिल हैं। जो ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा करने का डर दिखाया जा रहा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
बिना पूर्ण बसाहट और मूलभूत सुविधाओं के मकान तोड़ने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सभी प्रभावितों को एक ही स्थान पर सभी नागरिक सुविधाओं के साथ आबंटन दिया जाए।
बारिश के मौसम में मकान खाली कराने और 3 दिन की दी जा रही मोहलत को तुरंत रोका जाए।
मुआवजे का पारदर्शी और सही आकलन किया जाए।

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