बीजिंग, एजेंसी। चीन और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी को अक्सर दो महाशक्तियों की सीधी लड़ाई के तौर पर देखा जाता है, लेकिन एक नए विश्लेषण में इससे कहीं बड़ी तस्वीर सामने रखी गई है। दावा है कि मामला केवल वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच टैरिफ युद्ध का नहीं है, बल्कि चीन की व्यापार नीतियों को लेकर दुनिया के कई देश अलग-अलग स्तर पर चिंता जता रहे हैं। चीन के विशाल व्यापार अधिशेष, सरकारी सहायता और सस्ते निर्यात को लेकर भारत से लेकर अमेरिका और यूरोप तक कई अर्थव्यवस्थाएं अपने कदम सख्त कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू में प्रकाशित रॉस बैबेज के विश्लेषण में तर्क दिया गया है कि चीन की मौजूदा व्यापार रणनीति को केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संघर्ष के रूप में देखना अधूरा होगा। उनके मुताबिक, चीन और दुनिया की कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार असंतुलन अब व्यापक बहस का विषय बन चुका है।
विश्लेषण में चीन के विनिर्माण क्षेत्र की तेजी का उदाहरण दिया गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2004 में चीन का विनिर्माण उत्पादन अमेरिका के करीब आधे स्तर पर था, जबकि लगभग दो दशक बाद यह अमेरिकी स्तर के करीब दोगुने तक पहुंच गया। बैबेज इस बदलाव के पीछे चार प्रमुख संरचनात्मक कारण बताते हैं। पहला, करीब 1.4 अरब लोगों का विशाल घरेलू बाजार, जिसने चीनी कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का अवसर दिया। दूसरा, सरकारी सहायता और सब्सिडी, जिनके स्तर को लेकर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बड़े अंतर की बात कही है।तीसरा मुद्दा चीन की मुद्रा का मूल्यांकन है। विश्लेषण में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आकलन का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीनी मुद्रा अपने वास्तविक मूल्य से 20 से 40 प्रतिशत तक कम आंकी गई हो सकती है। इससे चीनी निर्यात अपेक्षाकृत सस्ता और विदेशी वस्तुओं का चीन में प्रवेश महंगा हो सकता है।
चौथा आरोप चीन के व्यापक सरकारी तंत्र से जुड़ा है। विश्लेषण में औद्योगिक खुफिया गतिविधियों, बौद्धिक संपदा की चोरी, साइबर गतिविधियों, सूचना अभियानों और विदेशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का उल्लेख किया गया है। इन दावों की प्रकृति को लेकर अलग-अलग देशों और संस्थानों के आकलन अलग हो सकते हैं। इस पूरी तस्वीर का सबसे बड़ा आर्थिक आंकड़ा चीन का व्यापार अधिशेष बताया गया है। विश्लेषण के अनुसार, यह करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे ऐतिहासिक रूप से किसी एक देश का सबसे बड़ा वार्षिक व्यापार अधिशेष बताया गया है। चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के बढ़ते निर्यात ने कई देशों को अपनी व्यापार नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। विश्लेषण में अमेरिका, भारत, थाईलैंड, पाकिस्तान, मिस्र, कनाडा और इंडोनेशिया सहित कई देशों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए गए या प्रस्तावित शुल्क और प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। यूरोपीय संघ में भी चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते आयात को लेकर चिंता है। विश्लेषण के मुताबिक, दो वर्षों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के यूरोपीय निर्यात में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है। इसके बाद यूरोप में शुल्क और आयात सीमा जैसे उपायों पर चर्चा तेज हुई है।
विश्लेषण में हाल की G20 वित्त मंत्रियों की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें अत्यधिक और लगातार बने रहने वाले बाहरी व्यापार अधिशेष वाले देशों से उन नीतिगत विकृतियों को हटाने का आह्वान करने वाले संयुक्त बयान का प्रस्ताव रखा गया था। दावे के मुताबिक, 19 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि चीन ने अकेले इसका विरोध किया। यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार असंतुलन को लेकर चीन और कई दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद मतभेद को दिखाता है। चीन की व्यापार नीति का असर केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं है। विश्लेषण में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि महामारी के दौरान चीन द्वारा ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने व्यापारिक निर्भरता से पैदा होने वाले दबाव को सामने ला दिया था।
काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,453 हो गई है और 5285 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने शनिवार को यह जानकारी दी। एनडीआरआरएमए ने बताया कि अब तक 1,451 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य लोगों की इलाज के दौरान मौत हुई। उसने बताया कि अब तक कुल 13,795 लोगों को बचाया गया है। बचाए गए लोगों में से 1,113 लोग वर्तमान में 21 अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इनमें नुवाकोट के 187, रसुवा के 805 और धादिंग जिले के 121 लोग शामिल हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई थी। चीनी मीडिया के अनुसार, इस आपदा में तिब्बत में भी 43 लोगों की मौत हुई, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरआरएमए के अनुसार, नेपाल में सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक बाढ़ प्रभावित करीब 11,000 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है। उसने बताया कि बाढ़ में घायल सात लोगों का अभी इलाज चल रहा है। आपदा के एक महीने बाद भी मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, अब तक बरामद 1,453 शवों में से 112 की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बरामद शवों और अवशेषों से 1,329 डीएनए नमूने एकत्र किए गए हैं, जबकि लापता लोगों के परिजनों से 2,060 अन्य नमूने लिये गए हैं।
इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में शनिवार को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक आत्मघाती हमलावर ने पुलिस चौकी को निशाना बनाया, जिसमें दो महिलाओं और दो बच्चों समेत कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई तथा 18 अन्य घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा रेस्क्यू 1122 के अनुसार, यह घटना डेरा इस्माइल खान जिले की दराजिंदा तहसील में हुई, जो अशांत खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों की सीमा के पास स्थित है। क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी खान मुबाशिर मलिक ने बताया कि आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को अमन मेला पुलिस चौकी से टकरा दिया। उन्होंने बताया कि हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 18 अन्य घायल हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, मारे गए लोगों में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क विभाग के दो अधिकारी भी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जबकि मृतकों के शव भी वहीं पहुंचाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों की प्रकृति का पता लगाने के लिए बम निरोधक दस्तों को घटनास्थल पर भेजा गया है। सुरक्षा बलों ने हमले के बाद इलाके की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मामले की आगे जांच की जा रही है।
न्यूयॉर्क, एजेंसी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को UN में भारत को जंग की धमकी दी। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है।
कश्मीर का मुद्दा उठाने पर UN में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान को अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की हालत देखनी चाहिए।
पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने फील्ड मार्शल आसीम मुनीर के नेतृत्व में सटीक जवाब दिया।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने और युद्ध जैसी स्थिति टालने में उनकी भूमिका अहम रही।
शहबाज ने कहा कि ट्रम्प की कोशिशों से बड़ा टकराव टल गया। इसका 87 सेकेंड का वीडियो ट्रम्प ने शुक्रवार को बिना किसी टिप्पणी के ट्रुथ सोशल पर शेयर किया।
शहबाज ने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया में फिर से ऐसे हालात नहीं बनने चाहिए। उनके मुताबिक, इसके लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है।
शहबाज शरीफ के दावों पर भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास हंसते नजर आए।
सिंधु जल संधि पर भारत के कदम को बताया गैरकानूनी
शहबाज ने कहा कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद भारत ने इस संधि को एकतरफा रोक दिया, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
शहबाज ने दावा किया कि UN के विशेषज्ञों और स्थायी मध्यस्थता अदालत ने भी इस मामले में भारत के दावों और कदमों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान का रुख सही साबित हुआ है।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत का आरोप है कि हमले में शामिल आतंकियों को पाकिस्तान का समर्थन था।
इस्लामोफोबिया का भी मुद्दा उठाया
शहबाज शरीफ ने दुनिया में बढ़ते इस्लामोफोबिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को नफरत भरी बयानबाजी, भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। मस्जिदों पर हमले और कुरान के अपमान की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।
भारत का जिक्र करते हुए शहबाज ने आरोप लगाया कि सीमा पार RSS से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफरत को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि इसका असर मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों के रूप में दिखाई दे रहा है।
होर्मुज और बाब अल-मंदेब को खुला रखने की अपील
शहबाज ने होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब को दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ते बताया। उन्होंने कहा कि ये रास्ते खुले रहने चाहिए और इन्हें देशों के बीच टकराव का रास्ता नहीं बनने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन समुद्री रास्तों से दुनिया के कई देश जुड़े हुए हैं। अगर ये रास्ते बंद होते हैं तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत ने कहा- जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया।
भारत की UN में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के लोग लंबे समय से हो रही मनमानी हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। उनके बारे में भी सवाल किए जाने चाहिए।
भारत के जवाब की 5 बड़ी बातें
सीमा पार आतंकवाद पर नतीजे भुगतने होंगे-
सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे।
पाकिस्तान में रहता था ओसामा बिन लादेन-
भारतीय अफसर पेटल गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में रहने का जिक्र किया। उन्होंने कहा दुनिया ने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है। उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की सबसे बड़ी सैन्य अकादमी के पास रहता था।
पाकिस्तान के लोकतंत्र में सेना की भूमिका-
गहलोत ने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों और शासन व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में असली ताकत चुनी हुई सरकार के पास नहीं, बल्कि सेना के हाथ में है।
धार्मिक असहिष्णुता पर भारत ने अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया-
भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा उठाया। गहलोत ने ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और नफरत के पाकिस्तान के रिकॉर्ड का हवाला दिया।
पाकिस्तान सरकार फॉर्म 47 सरकार है-
गहलोत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान के लोग जिस सरकार को खुद ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं, उनसे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है। भारत ने उस देश से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर उपदेश सुने, जो इस समय अपने ही लोगों से सुरक्षा का खतरा है।
क्या है फॉर्म 47 सरकार
‘फॉर्म 47 सरकार’ पाकिस्तान में विपक्ष, खासकर PTI और उसके समर्थकों की ओर से शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक शब्द है।
इसका संबंध फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद उठे चुनावी धांधली के आरोपों से है। फॉर्म 47 चुनाव आयोग का आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र के संकलित नतीजे दर्ज होते हैं।
विपक्ष का आरोप है कि फॉर्म 47 में दर्ज वोटों का आंकड़ा मतदान केंद्रों के फॉर्म 45 से मेल नहीं खाता और नतीजे तैयार करते समय हेरफेर की गई, जिससे PTI समर्थित उम्मीदवारों को नुकसान हुआ।
इसी आधार पर विपक्ष शहबाज सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहता है। पेटल गहलोत ने भी इसी राजनीतिक आरोप के संदर्भ में यह शब्द इस्तेमाल किया।