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कोरबा

शहर के पुष्पांजलि कॉम्प्लेक्स के समीप अतिक्रमण की शिकायत पर कलेक्टर ने कार्यवाही के दिए निर्देश

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अतिक्रमण विरोधी दस्ते को मौके पर जाकर जांच करने एवं स्थल को कब्जा मुक्त कराने हेतु किया निर्देशित

सेवानिवृत्ति उपरांत कर्मचारियों को ना हो अनावश्यक परेशानी, पेंशन ग्रेच्युटी सहित अन्य राशियों का समय पर हो भुगतान : कलेक्टर

एक वर्षीय आकांशा के आंखों के इलाज हेतु एम्स रायपुर में आवश्यक व्यवस्था कराने के सीएमएचओ को दिए निर्देश

पुनी बाई के पीएम आवास को तोड़ने की शिकायत का परीक्षण कर राहत पहुंचाने हेतु तहसीलदार को किया निर्देशित

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी आमजनों की समस्या, निराकरण के दिए निर्देश

कोरबा। कलेक्टर सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में आज कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के दूर दराज इलाको से अपनी परेशानियों एवं शिकायतों के निराकरण के लिए आए लोगों के आवेदनों को गंम्भीरता से सुना। उन्होंने सभी अधिकारियों को आवेदनों का जांच कर शासन के नियमानुसार निराकरण करने एवं आमजनों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर जनदर्शन में आज कोरबा नगरीय क्षेत्र अंतर्गत निहारिका की रहने वाली भुनेश्वरी चन्द्रा ने शहर के पुष्पाजंलि कॉम्प्लेक्स में आबंटित ठेला क्रमांक 11 के मालिक द्वारा स्थल में ठेला संचालन की अनुमति लेकर कांशीनगर के आम रास्ता व गली में अतिक्रमण कर पक्का निर्माण कराने की शिकायत प्रस्तुत की गई। कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को तत्काल मौके पर अतिक्रमण विरोधी दस्ते को भेजकर आवेदन की पूर्ण जांच करने एवं सही शिकायत मिलने पर सम्बंधित के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री वसंत के समक्ष ग्राम बिंझरा के रहने वाले श्री नागेश्वर सिंह मरावी द्वारा सेवानिवृत्ति उपरांत दी जाने वाली शेष राशि दिलवाने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वे पशु परिचारक के पद से 2023 में सेवानिवृत्त हुए है। तत्पश्चात् आज तक उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, फैमिली बेनिफिट छुट्टी आदि मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया गया है। 18 माह से अधिक समय होने के बाद भी कोई क्लेम नहीं मिलने के कारण उन्हें अत्याधिक परेशानी हो रही है। उन्होंने कलेक्टर से रूकी हुई सभी राशि दिलाने का आग्रह किया। इसी प्रकार कोरबा नगर निगम कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए समयपाल राजकुमार सिंह द्वारा आवेदन देते हुए बताया गया कि वह जून 2024 में सेवानिवृत्त हुए है एवं कार्यालय में आवश्यक सभी दस्तावेज जमा करने के बाद भी आज दिनांक तक उन्हें उपादान, परिवार कल्याण निधि, अवकाश नकदीकरण व एनपीएस की राशि प्रदान नहीं की गई है। कलेक्टर ने दोनों आवेदनों को टीएल में दर्ज कर सम्बंधित विभाग प्रमुखों को आवेदन का परीक्षण कर यथाशीघ्र निराकरण करने एवं आवेदको को राहत पहुंचाने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि सेवानिवृत्ति उपरांत कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी जैसी राशियों के भुगतान के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। समय पर सभी राशियों का भुगतान उन्हें होना चाहिए सभी अधिकारी इसका विशेष ध्यान रखें।

तरदा के इंदलभांठा की रहने वाली कामिनी कंवर ने अपनी एक वर्षीय पुत्री आकांशा के आंखों के ईलाज हेतु आवेदन देते हुए कहा कि उनकी बच्ची को जन्म से ही दिखाई नहीं देता, डॉक्टर द्वारा एम्स रायपुर में बच्ची के इलाज होने की बात कही गई है। कामिनी ने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, इस हेतु उसे बेटी के आंखों के ईलाज हेतु आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। कलेक्टर ने सीएमएचओ को बच्ची की आंखों का परीक्षण कर एम्स रायपुर में उसके ईलाज की व्यवस्था कराने हेतु निर्देशित किया।

करतला तहसील के ग्राम दमखांचा निवासी श्रीमती पुनी बाई पति सोनाऊ राम ने बताया कि उनके स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास के निर्माणाधीन मकान को गांव के लोगों द्वारा तोड़ दिया गया है जिससे उन्हें बहुत आर्थिक क्षति पहुँची है एवं ठंड के समय मे उन्हें अपने परिवार के साथ खुले में रात व्यतीत करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की मांग करते हुए सहायता पहुंचाने का आग्रह किया। कलेक्टर ने तहसीलदार करतला को प्रकरण की जांच कर पीड़ित को राहत दिलाने का निर्देश दिया।

जनदर्शन में आज वनाधिकार पट्टा, अतिक्रमण हटाने, सीमांकन, बंटवारा, रिकार्ड दुरुस्ती, मुआवजा राशि दिलाने, मजदूरी भुगतान, कानूनी सहायता दिलाने, पहुँच मार्ग की व्यवस्था कराने सहित अन्य समस्याओं के कुल 51 आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने सभी प्रकरणो को सम्बंधित अधिकारियों को आवेदन का परीक्षण कर समय सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत व अपर कलेक्टर दिनेश कुमार नाग, खाद्य, कृषि, समाज कल्याण सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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कोरबा

अपना बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर दूसरों को देना पड़ा भारी

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कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई

कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें

कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।

इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।

प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।

म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई

साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।

साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।

कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील

साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—

  • अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
  • अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
  • अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
  • किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
  • अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
  • किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।

कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा।

— जिला कोरबा पुलिस, छत्तीसगढ़

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कोरबा

SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध

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कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।

संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग

भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग

ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप

ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।

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कोरबा

भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए एसईसीएल ने गठित की उच्चस्तरीय समिति

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पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।

गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।

भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।

एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं।
कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।

एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।

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