रायगढ़ , एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर डॉक्टर से 34.17 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने इंदौर से तीन युवतियों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि इंदौर के एक कॉल सेंटर से साइबर ठगी का नेटवर्क चल रहा था।
गिरोह के लोग म्यूल बैंक अकाउंट और सिम कार्ड के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन करते थे। आरोपियों में शामिल रायगढ़ के सूरज शर्मा ने अपने बैंक खाते में संदिग्ध रकम आने और अकाउंट होल्ड होने की शिकायत खुद साइबर थाने में की थी। जांच में उसके खाते के जरिए ठगी की रकम के लेनदेन और कमीशन मिलने की बात सामने आई।
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। जांच में यह भी पता चला है कि साइबर ठगी के लिए 140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, सोनकरपारा के डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई, 2026 को साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के जरिए उनकी पहचान सुनील नाम के व्यक्ति से हुई थी। उसने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर ज्यादा मुनाफा मिलने का लालच दिया और स्पार्टन ट्रेड कंपनी में पैसा लगाने के लिए कहा।
आरोपी ने डॉक्टर को वॉट्सऐप पर कंपनी का पोर्टफोलियो भी भेजा। इसे देखकर डॉक्टर को भरोसा हो गया कि उन्हें पैसा लगाने पर अच्छा रिटर्न मिलेगा।
इसके बाद 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से कुल 34 लाख 17 हजार 531 रुपए निवेश कराए गए। डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि कुछ अन्य लोग भी उनसे फोन पर संपर्क करते थे और अलग-अलग समय पर निवेश करने के लिए कहते थे।
पोर्टफोलियो में मुनाफा दिखा, लेकिन पैसे नहीं निकले
डॉक्टर को कंपनी के पोर्टफोलियो में लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा। इससे उन्हें लगता रहा कि उनकी रकम बढ़ रही है। लेकिन जब उन्होंने अपना पैसा निकालने की कोशिश की, तो रकम नहीं निकली।
इसके बाद भी उनसे और पैसा लगाने के लिए कहा जाने लगा। तब उन्हें ठगी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
आरोपी काॅल सेंटर से लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे
पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद की शिकायत
जांच के दौरान पुलिस को एक दूसरे मामले की जानकारी मिली। 27 सितंबर 2026 को रायगढ़ के पतरापाली स्थित हिल व्यू कॉलोनी के सूरज शर्मा ने साइबर पुलिस थाने में आवेदन दिया था।
उसने बताया कि उसके पंजाब नेशनल बैंक खाते में 12 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 18 बार में कुल 2 लाख 97 हजार 298 रुपए का लेनदेन हुआ था। रकम मिलने और नकद निकालने के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब में शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके बाद उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया।
सूरज ने पुलिस से खाते की जांच करने और उस पर लगी रोक हटाने की मांग की। उसने बैंक खाते के लेनदेन का ब्योरा भी दिया।
पुलिस ने जब मामले की जांच की, तो शक हुआ कि सूरज ने अपना बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए उपलब्ध कराया था। यानी पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने खुद ही शिकायत की थी।
कमीशन लेकर साइबर ठगी की रकम का लेनदेन
बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में पता चला कि विवादित रकम में से इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के जरिए सूरज शर्मा को कैश और यूपीआई से कमीशन मिला था।
पुलिस के मुताबिक, सूरज शर्मा का बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बदले उसे आर्थिक फायदा मिल रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस को गुमराह करने के लिए सूरज ने खुद ही शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के खिलाफ भी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मोबाइल नंबर से मिला इंदौर के आरोपियों का सुराग
दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस को एक कॉमन मोबाइल नंबर मिला। जांच में पता चला कि इस नंबर का इस्तेमाल इंदौर की तनिषा पाटिल (21) कर रही थी। पुलिस को सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के बीच संपर्क और साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियों के सबूत भी मिले।
संदिग्धों के मोबाइल नंबर इंदौर के अलग-अलग इलाकों में एक्टिव मिले। इसके बाद रायगढ़ साइबर पुलिस की विशेष टीम इंदौर रवाना हुई।
कॉल सेंटर में दबिश देकर तीन युवतियों को पकड़ा
पुलिस टीम ने इंदौर के पलासिया इलाके में एक कॉल सेंटर पर दबिश दी। यहां से गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल को पकड़ा गया।
इसके बाद पुलिस को ज्योति मालवीय (20) के विजय नगर क्षेत्र के मोहनीपुरा इलाके में होने की जानकारी मिली। टीम ने उसे भी पकड़ लिया।
ज्योति से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने परदेशीपुरा इलाके से तरुण नागर (25) निवासी राजगढ़, इंदौर को गिरफ्तार किया।
आरोपियों के फोन जब्त, बैंक खातों की जांच
इसी दौरान पुलिस को पता चला कि सूरज शर्मा इंदौर से खरसिया आकर अपने रिश्तेदार के घर रह रहा है। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद आरोपियों को इंदौर की अदालत में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस उन्हें रायगढ़ ले आई।
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन जब्त किए हैं। साथ ही, संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की भी जांच की जा रही है। इस तरह दोनों मामलों में कुल पांच लोगों को पकड़ा गया, जिनमें तीन युवतियां और दो युवक शामिल हैं।
मोबाइल फोन जब्त, बैंक खातों की जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों को इंदौर में अदालत के सामने पेश किया। ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें रायगढ़ लाया गया। आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
पुलिस अब संबंधित बैंक खातों, लेनदेन और मोबाइल फोन की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साइबर नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं। उनकी तलाश में दूसरे राज्यों में भी दबिश दी जा रही है।
अनजान लोगों के कहने पर निवेश न करें: एसएसपी
रायगढ़ के SSP शशि मोहन सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी शेयर ट्रेडिंग में ज्यादा मुनाफा देने का लालच देकर लोगों की मेहनत की कमाई ठग रहे हैं। लोगों को किसी अनजान व्यक्ति या कंपनी के झांसे में आकर निवेश नहीं करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अपना बैंक खाता, सिम कार्ड और पहचान से जुड़े दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। साइबर अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।
कता केवल देश की सीमाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से होती है
धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।
हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव
वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।
सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी
आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।
लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।
सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।
विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत
भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ
देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।
युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।
राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी
राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।
राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।
राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।
कुर्मी समाज मनाएगा भारत रत्न सरदार पटेल की 151वीं जयंती, सुबह 10:30 बजे होगा गरिमामय आयोजन
कोरबा। देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को कोरबा में कुर्मी समाज द्वारा सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा में आयोजित होगा। इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से देश की एकता को नई मजबूती प्रदान की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें ‘लौह पुरुष’ के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
कुर्मी समाज द्वारा आयोजित इस जयंती समारोह का उद्देश्य महान राष्ट्रनायक के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में एकता, आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। सरदार पटेल का जीवन संदेश देता है कि सामूहिक एकजुटता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
समाज की ओर से जयंती समारोह को सादगी और गरिमा के साथ संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। कुर्मी समाज के समस्त सम्माननीय पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजन: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती दिनांक: 31 अक्टूबर 2026, शनिवार समय: सुबह 10:30 बजे स्थान: तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा, छत्तीसगढ़
आर. के. वर्मा अध्यक्ष, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
पवन सिन्हा मीडिया प्रभारी, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
गांवों की समस्याओं और विकास की कहानियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे मीडिया में करियर के नए अवसर
संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के माध्यम से जमीनी पत्रकारिता को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। ग्रामीण अंचलों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और युवाओं को पत्रकारिता के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर और गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) के बीच ग्रामीण पत्रकारिता को सशक्त बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में पत्रकारिता शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और ग्रामीण पत्रकारिता ही जमीनी वास्तविकताओं को समाज के सामने लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों के साझा प्रयासों से ऐसे पत्रकार तैयार किए जाएंगे, जो संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ ग्रामीण विकास, स्थानीय समस्याओं तथा जनजीवन से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने लाएंगे।
गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे ने इस समझौते को ग्रामीण पत्रकारिता के संवर्धन और उन्नयन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
समझौता ज्ञापन पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने हस्ताक्षर किए।
एमओयू के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से संगोष्ठियों, सेमिनारों और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे। ये गतिविधियां ऑफलाइन, ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यमों से संचालित होंगी, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी, शिक्षक और पत्रकार भी इनका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही संयुक्त शोध, प्राध्यापक आदान-प्रदान, छात्र इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के माध्यम से ग्रामीण संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस शैक्षणिक साझेदारी से ग्रामीण युवाओं को आधुनिक पत्रकारिता की तकनीकों से परिचित होने, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने और स्थानीय मुद्दों को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनजातीय जीवन से जुड़े विषयों को पत्रकारिता की मुख्यधारा में अधिक स्थान मिल सकेगा।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा और डॉ. आशुतोष मंडावी सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।