कोरबा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा संचालित परीक्षा वर्ष 2026 के अंतर्गत 12वीं बोर्ड की परीक्षा प्रारंभ हो गया है। जिले में परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों पर नियंत्रण लगाने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तरीय निरीक्षण दल का गठन कर परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। 23 फरवरी को हायर सेकेडंरी स्कूल के राजनीति विज्ञान, रसायन शास्त्र, लेखा शास्त्र, फसल उत्पादन, एवं वस्तु चित्रण विषय का परीक्षा संपन्न हुआ। उक्त विषयों की परीक्षा हेतु कुल 9356 दर्ज बच्चों में से 9257 विद्यार्थी उपस्थित एवं 99 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। जिसमें राजनीति विज्ञान विषय में 3281 दर्ज बच्चों में 3228 उपस्थित व 53 अनुपस्थित, रसायन शास्त्र विषय में 3687 दर्ज बच्चों में उपस्थित 3664 व 23 अनुपस्थित, लेखा शास्त्र विषय में 2163 दर्ज बच्चों में उपस्थित 2149 व 14 अनुपस्थित, फसल उत्पादन विषय में 192 दर्ज बच्चों में से 183 उपस्थित व 9 अनुपस्थित तथा वस्तु चित्रण विषय में दर्ज एवं उपस्थित बच्चों की संख्या 33 रही। उक्त परीक्षा हेतु गठित जिला स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया। जिसके अंतर्गत दल क्रमांक 02 द्वारा शा.उ.मा.वि. पडनिया, सेजेस कुसमुंडा, सर. कुसमुंडा, शा.उ.मा.वि. भिलाईबाजार, शा.उ.मा.वि. कोरबी धतुरा का दल क्रमांक 03 शा.उ.मा.वि. नोनबिर्रा, शा.उ.मा.वि. सेन्द्रीपाली, शा.उ.मा.वि. बोतली, शा.उ.मा.वि. रामपुर का, दल क्र. 04 द्वारा सेजेस जमनीपाली, वि. गृह क्रमांक 2 दर्री, सेजेस छुरी, आदर्श कटघोरा, सेजेस बालक कटघोरा, कन्या कटघोरा, दल क्रमांक 05 द्वारा शास.उ.मा.वि. सिंघिया, शास.उ.मा.वि बिंझरा, शास.उ.मा.वि तुमान, शास.उ.मा.वि जटगा, शास.उ.मा.वि लैंगा का एवं नोडल अधिकारी द्वारा सर. सीतामढ़ी, ज्योति मिशन, शास.उ.मा.वि कोरबा, सर. बुधवारी, एनसीडीसी , वि.गृ. क्र.01 का, डीएमसी द्वारा शास.उ.मा.वि रजगामार, सेजेस कुदमुरा, शास.उ.मा.वि.कोरकोमा, सेजेस करतला एवं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कन्या बालको, बालक बालको सहित जिला स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा कुल 30 परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया। जिसमें सभी परीक्षा केंद्रों में शांतिपूर्वक परीक्षा संचालित हुआ एवं एक भी नकल प्रकरण नहीं रहा।
कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग, रायपुर द्वारा संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु आयोजित की जाने वाली प्राक्चयन परीक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। प्राक्चयन प्रवेश परीक्षा 01 मार्च 2026, रविवार को प्रातः 10ः00 बजे से 12ः00 बजे तक जिले के 05 परीक्षा केन्द्रों में आयोजित की जाएगी। प्रवेश हेतु ऑनलाईन कुल 2025 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें से 1977 आवेदन पात्र तथा 48 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। अपात्र अभ्यर्थियों की सूची का अवलोकन सभी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों, संबंधित विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों के कार्यालय तथा जिला कार्यालय के सूचना पटल पर किया जा सकता है। प्रवेश पत्र एकलव्य की आधिकारिक वेबसाईट https:// eklavya.cg.nic.in/ पर उपलब्ध रहेगा। जिलावासियों एवं अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि वे परीक्षा से संबंधित अद्यतन जानकारी के लिए शासन की वेबसाइट एवं सूचना पटल का अवलोकन करते रहें।
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में दूरस्थ ग्रामीण अंचलों एवं शहरी क्षेत्रों से अपनी समस्याओं के समाधान की के लिए पहुंचे नागरिकों की आवेदनों को गम्भीरता से सुना।
कलेक्टर ने प्रत्येक आवेदक की समस्या को सवेंदनशीलता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रकरणों का शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक समय पर पहुंचे, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। खम्हरिया सहित अन्य पंचायतो में खाद्यान्न वितरण में आ रही परेशानियों को लेकर पहुंचे ग्रामीणों को राहत पहुंचाते हुए कलेक्टर ने जिला खाद्य अधिकारी को संबंधित पंचायतों में स्वयं जाकर शिकायतों की जांच करने तथा पात्र हितग्राहियों को शीघ्र राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली सुचारु रूप से संचालित हो और किसी भी पात्र परिवार को खाद्यान्न से वंचित न रहना पड़े।
जनदर्शन में खाद्यान्न वितरण, फौती नामांतरण, सीमांकन, पीएम आवास, रोजगार, मुआवजा, पेंशन, नए आंगनबाड़ी भवन की मांग, दिव्यांगता कार्ड, ट्राई सायकिल एवं वनाधिकार पट्टा सहित कुल 119 आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने सभी आवेदनो का समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश नाग, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, ओंकार यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
522 घरों में नल कनेक्शन से पानी के लिए हैंडपंपों और कुओं पर निर्भरता खत्म
महिलाओं को अब रोज-रोज नहीं ढोना पड़ता पानी
कोरबा। भारत जैसे भौगोलिक विविधताओं से भरे देश में विषमताएं विकास की राह में अक्सर चुनौती बनती रही हैं। पठारी और पाट क्षेत्रों से घिरे दूरस्थ गांव पेयजल की समस्या से जूझते रहे हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन से दूरस्थ व दुर्गम अंचलों में भी सभी घरों में नल से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम मांगामार की तस्वीर अब बदल चुकी है। ढाई हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ 45 लाख 34 हजार रुपए की लागत से रेट्रोफिटिंग योजना क्रियान्वित की गई है। योजना के तहत 40 किलोमीटर क्षमता की एक उच्च स्तरीय पानी टंकी स्थापित की गई है। गांव के हर एक घर में पेयजल पहुंचाने के लिए 3700 मीटर पाइप लाइन बिछाकर 522 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
गर्मियों में विकराल हो जाती थी समस्या
मांगामार की श्रीमती समारिन बाई खाण्डेल बताती है कि पहले पेयजल के लिए हैंडपंप, कुओं और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर नीचे चला जाता था, जिससे पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती थी। कई बार सुबह-सुबह पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती थीं। महिलाओं को घर के कामकाज के साथ पानी लाने घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी।
अब हर घर में नल, बदली दिनचर्या
जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” की सुविधा मिलने के बाद अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है और नियमित रूप से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इससे न केवल जल संकट समाप्त हुआ है, बल्कि महिलाओं की दिनचर्या में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। अब महिलाओं को दूर-दूर तक पानी ढोने की मजबूरी नहीं रही। बचा हुआ समय वे परिवार, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आयवर्धक गतिविधियों में लगा रही हैं। स्वास्थ्य के स्तर पर भी सुधार देखने को मिल रहा है, क्योंकि स्वच्छ पेयजल से जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो गया है।
दूरस्थ अंचलों में विकास की नई धारा
जल जीवन मिशन ने मांगामार जैसे सुदूर गांवों में जीवन की बुनियादी आवश्यकता पेयजल को घर-घर तक पहुंचाकर विकास की नई इबारत लिखी है। अब बारहों महीने ग्रामीणों को घर पर ही शुद्ध पानी उपलब्ध हो रहा है। हैंडपंपों पर निर्भरता समाप्त हो चुकी है और मांगामार जल संकट से मुक्त हो गया है। जल जीवन मिशन दूरस्थ क्षेत्रों में न केवल लोगों, खासकर महिलाओं का जीवन आसान बना रही है, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार भी ला रही है।