श्रीनगर,एजेंसी। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर का हाथ ऊपर कर दिया और उन्हें गोली नहीं लगी।
अधिकारियों के मुताबिक फारूक जम्मू में एक शादी समारोह में पहुंचे थे। उनके साथ राज्य के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी भी थे। फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा-
मुझे ऊपर वाले ने बचाया है। शादी से निकलते समय मैंने कुछ आवाज सुनी, मुझे लगा कि यह पटाखा है। बाद में मुझे बताया गया कि एक आदमी ने पिस्तौल से दो गोलियां चलाईं। सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया, जिससे हथियार ऊपर की ओर हो गया और नुकसान होने से बच गया।
वहीं, हमलावर कमल ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था। हमलावर को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में फायरिंग की घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की और उनका हालचाल पूछा।
फारूक अब्दुल्ला ने ये भी बताया…
मेरे पास मेरी सिक्योरिटी की तारीफ करने के लिए शब्द नहीं हैं। लोकल पुलिस वाले, मेरे साथ रहने वाले सिक्योरिटी वाले और NSG के सदस्य शामिल थे, जो मेरी सुरक्षा के लिए मेरे सामने खड़े थे।
मैं उस आदमी को नहीं जानता, न ही किसी ने मुझे उसके बारे में कभी कुछ बताया। जहां तक उसके मकसद की बात है मुझे कैसे पता चलता कि वह क्या हो सकता था?
सवाल यह है कि इस शादी में कई जाने-माने लोग मौजूद थे, इसलिए पुलिस को सही सावधानी बरतनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस का कोई इंतजाम नहीं था।
सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस शादी में कई जाने-माने लोग आए थे। ऐसे इवेंट में प्रोटेक्शन होना जरूरी था, खासकर आज जिस तरह के माहौल में हम रह रहे हैं।
इस मामले की सही जांच होनी चाहिए। अब यह गृहमंत्री पर है कि वे जांच करें और पता लगाएं कि ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या कारण था। आजकल इस तरह की चीजें होती रहती हैं।
हमलावर को हमेशा फायदा होता है। उसे पता होता है कि वह आपको कहां टारगेट करना चाहता है। लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि सिक्योरिटी और बढ़ानी चाहिए। यह मुख्य मुद्दा नहीं है।
हमलावर कमल सिंह जमवाल को गुरुवार को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया।
हमलावर ने पहले कहा यही मकसद था, फिर बोला- गलती हो गई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने का आरोपी कमल सिंह जामवाल पर पूछताछ में कई बार बयान बदल चुका है। घटना के बाद रात में उसने दावा किया था कि पिछले 20 साल से वो फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था।
आरोपी ने कहा था कि यही मेरी जिंदगी का मकसद था। लेकिन घटना के बाद अगली सुबह उसने कहा कि हमसे गलती हो गई। अब पछतावा हो रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये घटना के समय थोड़ा नशे में भी था। गुरुवार को मेडिकल जांच के लिए ले जाते वक्त जामवाल ने कहा- मैंने किसी के कहने पर गोली नहीं चलाई। मैंने अपनी मर्जी से गोली चलाई है।
जांचकर्ताओं ने शुरुआती तौर पर ये माना है कि आरोपी फायरिंग करते समय कथित तौर पर शराब पी हुई थी। पुलिस सूत्रों ने कहा कि आरोपी अगले दिन पछतावे की हालत में लग रहा था और उसने ऐसे बयान दिए जो उसके पहले के दावों से उलट थे।
आरोपी ने पूछताछ के दौरान कई अलग-अलग बातें बताई हैं। इसलिए उससे अलग-अलग कई अधिकारियों ने बारी-बारी से पूछताछ की है। जिससे उसके असली वजह का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही पुलिस उसके 20 साल पुराने बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है। आरोपी के पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई है।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई घटना…
घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 70 साल के हमलावर कमल सिंह जामवाल ने पीछे से आकर फारूक के सिर पर रिवॉल्वर तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर का हाथ हटाया जिससे फायर हवा में हो गया।
हमलावर ने फारूक का पीछा किया
हमलावर कमल पीछे चलते हुए फारूक अब्दुल्ला के करीब आता है।
सिर पर रिवॉल्वर तानी
इसके बाद वह फारूक अब्दुल्ला के सिर के पास रिवॉल्वर लेकर जाता है और फायर करता है।
सिक्योरिटी गार्ड ने हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ उठाया
फायर करते ही सुरक्षाकर्मी कमल को पकड़कर जमीन पर गिरा देते हैं।
हमलावर को भीड़ ने पकड़ लिया
घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी और वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।
हमलावर के साथ मारपीट
कुछ लोगों ने आरोपी कमल सिंह को पकड़ने के बाद उसके साथ मारपीट भी की।
थाने में हमला करना कबूल किया
ये हमलावर कमल सिंह है। सुरक्षाकर्मी उससे पूछताछ कर हमले के कारणों का पता लगा रहे हैं।
जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
नेशनल कॉन्फ्रेंस के हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हाल ही में हुए हमले की निंदा करते हुए जम्मू में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पार्टी के झंडे, प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे और केंद्र और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी नेताओं ने इस घटना को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सीनियर नेता ने रैली को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा, हमारे नेता पर हमला मंजूर नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने प्रदर्शन किया।
पुलिस बोली- हमलावर के पास कई साल से लाइसेंसी हथियार
पुलिस के मुताबिक, हमलावर पिछले कई सालों से लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल कर रहा है। फारूक अब्दुल्ला, सुरिंदर चौधरी और दूसरे बड़े नेता नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल हुए थे। हमलावर सुरजीत सिंह का कजिन है। वह बिजनेसमैन है और उसकी पुराने शहर में कुछ दुकानें हैं।
CM उमर बोले- Z+ सिक्योरिटी में कोई करीब कैसे आया
फारूक के बेटे और जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने X पर लिखा कि एक आदमी लोडेड पिस्टल लेकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज में आ गया और गोली चला दी। अल्लाह का शुक्र है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। सवाल उठता है कि कोई Z+ NSG प्रोटेक्टेड पूर्व CM के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
घटना के बाद डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी ने कहा- पुलिस से पूछना चाहिए कि रॉयल पार्क में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। वहां लोकल पुलिस से कोई नहीं था। यह बहुत बड़ी सिक्योरिटी चूक है।
घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
फारूक अब्दुल्ला 3 बार CM रह चुके हैं
डॉं फारूक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता शेख अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री थे। फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला अभी राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
फारूक ने मेडिकल की पढ़ाई की और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में वे राजनीति में आ गए और अपने पिता की पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति करने लगे।
सीएम के रूप में फारूक का पहला कार्यकाल 1982 से 1984 तक रहा। 1986 से 1990 तक वे दूसरी बार और 1996 से 2002 तक तीसरी बार मुख्यमंत्री रहे। वे लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला 2009 से 2014 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग के अफसर मनीष गर्ग के कामकाज के विवाद पर अब नई जानकारी सामने आई है। RTI से खुलासा हुआ है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग लेटर लिखकर उनके कामकाज की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
RTI जवाब में बताया गया, कैबिनेट सचिवालय ने ये शिकायतें चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक नहीं मानीं। सचिवालय का मानना था कि इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसे संवैधानिक संस्था के काम में दखल माना जा सकता है।
यह जानकारी RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को दी गई। गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज को बदलने वाला आदेश जारी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने उनके आदेश को पलट दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के काम के बंटवारे से जुड़ा आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, निर्देश दिया कि आयोग में किसी बदलाव पर सहमति बनने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
गर्ग 2024 में चुनाव आयुक्त में नियुक्त हुए
मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त बनाने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पद संभाला। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे।
पहले भी विवादों में आया मनीष गर्ग का नाम
मनीष गर्ग का नाम मतदाता सूची के आईटी सिस्टम के संचालन और अधिकारियों को उसकी पहुंच मिलने से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर पर निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था, जिससे मतदाता सूची से जुड़े उनके वैधानिक काम प्रभावित हो सकते थे।
दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई थी
25 सितंबर: इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इसमें मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी नहीं दिए जाने के मुद्दे भी शामिल थे।
26 सितंबर: चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मनीष गर्ग के काम के बंटवारे संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे और IT विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी।
3 अक्टूबर: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मनीष गर्ग की भूमिका और आयोग के IT सिस्टम से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाए थे।
21 अक्टूबर: RTI से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और आगे संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। पत्रों में क्या था, यह सामने नहीं आया था।
मुंबई, एजेंसी। अमिताभ बच्चन और पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ को शुक्रवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े को यह धमकी भरा ई-मेल भेजा गया।
इसमें अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की बात लिखी गई। कहा गया कि 31 अक्टूबर से 27 नवंबर के बीच कभी भी बंगले को निशाना बनाया जा सकता है। हमला 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का बदला होगा।
इसी मेल में गायक दिलजीत दोसांझ को भी आत्मघाती हमले में मारने की धमकी दी गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह मेल तब आया है, जब 5 दिन पहले रविवार को एक्टर टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में फायरिंग की गई। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी।
ई-मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे
मुंबई मेयर को भेजे गए मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे गए हैं। इसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों का भी जिक्र है। मेल में कहा गया कि दिलजीत ने अमिताभ बच्चन के पैर छूए थे इसलिए उस पर हमला किया जाएगा। मेल में लिखा है कि 27 नवंबर को दिलजीत को महालक्ष्मी रेस कोर्स में आत्मघाती हमले में मारना है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद मुंबई पुलिस, पुलिस की डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड की टीमें बीएमसी मुख्यालय पहुंचीं। मेयर और डिप्टी मेयर कार्यालय सहित विभिन्न चैंबर्स की भी तलाशी ली। मुंबई पुलिस और साइबर सेल ईमेल की जांच में जुटे हैं।
बीएमसी में मेयर के ऑफिस की जांच करती हुईं जांच टीमें ।
रविवार को टाइगर श्रॉफ पर हुई थी फायरिंग
शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर 5 राउंड फायरिंग की थी।
मुंबई में 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई। टाइगर फुटबॉल खेलने के बाद जुहू इलाके से निकल रहे थे, तभी उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं। इस घटना में टाइगर को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।
इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हरियाणा के 7 आरोपी, उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं और बिहार का एक युवक शामिल है।
मुंबई के कई स्कूलों को भी मिले धमकी भरे मेल
इसके साथ ही मुंबई के दादर स्थित कई प्रमुख स्कूलों को भी धमकी भरे ईमेल मिले हैं। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह दादर के करीब 4 स्कूलों को ये ईमेल मिले। सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत स्कूलों की तलाशी ली।
तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हालांकि, इन धमकी भरे ईमेल के कारण कुछ समय के लिए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल रहा। पुलिस फिलहाल ईमेल भेजने वालों की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है।
सीवान, एजेंसी। बिहार के सीवान में पटाखा बनाने के दौरान हुए ब्लास्ट में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत 7 की मौत हो गई।
जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव के एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक धमाके होने लगे। इस धमाके में पूरा मकान उड़ गया। लोगों के शव सड़क पर बिखर गए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे।
धमाके के बाद क्षतिग्रस्त मकान।
दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश
घटना की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो, गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है। अधिकारी घटनास्थल की जायजा ले रहे हैं।
एसडीपीओ ने बताया कि दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। आग पर काबू पाने के बाद मामले की जांच की जाएगी।
एसपी भारत सोनी ने बताया कि अब तक शवों की पहचान नहीं हो सकी है। जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह घनी आबादी वाले इलाके में है।
हादसे की तस्वीरें
धमाके के बाद मकान के बाहर बिखरे शव।
धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद DM और SP मौके पर पहुंचे।