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अमेरिका में 4 करोड़ लोगों की फूड सप्लाई बंद:लाखों बेरोजगार, कर्ज लेकर घर चला रहे, ट्रम्प की जिद से लगा सबसे लंबा शटडाउन

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वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुए सरकारी शटडाउन का आज 36वां दिन है। यह अमेरिका के इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में 35 दिनों तक सरकारी कामकाज ठप रहा था।

शटडाउन की वजह से 42 मिलियन (4.2 करोड़) अमेरिकियों की फूड स्टैंप (SNAP) सहायता रुक गई है। अमेरिका के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट (USDA) के पास इस कार्यक्रम के लिए सिर्फ 5 अरब डॉलर का रिजर्व फंड है, जबकि नवंबर में फूड स्टैंप जारी रखने के लिए 9.2 अरब डॉलर की जरूरत होगी।

वॉशिंगटन स्थित बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर के मुताबिक अब तक 6.7 लाख सरकारी कर्मचारी छुट्टी पर भेजे जा चुके हैं, जबकि 7.3 लाख कर्मचारी बिना सैलरी के काम कर रहे हैं। इस तरह लगभग 14 लाख लोग कर्ज लेकर घर चला रहे हैं।

ट्रम्प हेल्थ केयर प्रोग्राम की सब्सिडी बढ़ाने को तैयार नहीं हैं, इस वजह से अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में फंडिंग बिल पास नहीं हो पा रहा है। इस बिल पर अब तक 14 बार वोटिंग हो चुकी है, लेकिन हर बार बहुमत के लिए जरूरी 60 वोट नहीं मिल पाए।

25 राज्यों ने ट्रम्प के खिलाफ मुकदमा किया

फूड सप्लाई प्रोग्राम रुकने के बाद न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स समेत 25 राज्यों ने इस फैसले के खिलाफ ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि लाखों लोगों की फूड सप्लाई रोकना गैरकानूनी है।

वहीं, शटडाउन से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) के मुताबिक अब तक 11 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) का नुकसान हो चुका है। अगर शटडाउन जल्द खत्म नहीं हुआ तो देश की GDP में चौथी तिमाही में 1% से 2% की गिरावट आ सकती है।

हर दिन 3300 करोड़ की सैलरी का नुकसान

CBO के मुताबिक, जबरदस्ती छुट्टी पर भेजे गए कर्मचारियों (फर्लो कर्मचारी) की करीब 400 मिलियन डॉलर (₹3,300 करोड़) प्रतिदिन सैलरी का नुकसान हो रहा है।

CBO के डायरेक्टर फिलिप स्वैगल ने कहा कि शटडाउन के कारण सरकारी खर्च में देरी हो रही है और इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। यह असर कुछ हद तक खत्म हो जाएगा, लेकिन पूरी तरह नहीं।

अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप पड़ने (शटडाउन) के चलते हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। देशभर के कई हवाई अड्डों पर उड़ानें देर से चल रही हैं या रद्द की जा रही हैं।

परिवहन विभाग ने चेतावनी दी है कि 11,000 एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को वेतन नहीं मिला है और अगर यह स्थिति जारी रही तो हवाई यातायात पर गंभीर असर पड़ेगा।

16,700 से ज्यादा उड़ानें देरी से चलीं

वहीं, फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) भारी तनाव और थकान से जूझ रहे हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं।

FAA की रिपोर्ट के मुताबिक 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच अमेरिका में 16,700 से ज्यादा उड़ानें देरी से चलीं और 2,282 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

FAA ने बताया कि उसके प्रमुख 30 एयरपोर्ट्स में से आधे में स्टाफ की भारी कमी है। न्यूयॉर्क क्षेत्र के हवाई अड्डों में तो 80% तक कर्मचारी मौजूद नहीं हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर इमरजेंसी सर्विस के तहत आते हैं। इसलिए वे काम पर तो आ रहे हैं, लेकिन 1 अक्टूबर से उन्हें तनख्वाह नहीं मिली है।

परिवहन मंत्री सीन डफी ने कहा कि हम सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। इसमें उड़ानों की देरी और रद्द होना शामिल है, लेकिन मैं एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को नहीं निकालूंगा, क्योंकि वे अपने परिवार को खिलाने के लिए दूसरी नौकरियां कर रहे हैं।

हेल्थ केयर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई

अमेरिका का फिस्कल ईयर यानी खर्च का साल 1 अक्टूबर से शुरू होता है। यह एक तरह से सरकार का आर्थिक साल होता है, जिसमें वह अपना पैसा खर्च करने और बजट बनाने की योजना बनाती है।

इस दौरान सरकार तय करती है कि कहां पैसा लगाना है, जैसे सेना, स्वास्थ्य या शिक्षा में। अगर इस तारीख तक नया बजट पास नहीं होता, तो सरकारी कामकाज बंद हो जाता है। इसे शटडाउन कहते हैं।

अमेरिका के दोनों प्रमुख दल डेमोक्रेट और रिपब्लिकन में ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम को लेकर ठनी हुई है। डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि हेल्थ केयर (स्वास्थ्य बीमा) की सब्सिडी बढ़ाई जाए।

रिपब्लिकन को डर है कि अगर सब्सिडी बढ़ाई गई तो सरकार को खर्च करने के लिए और पैसे की जरूरत पड़ेगी, जिससे बाकी सरकारी काम प्रभावित होंगे।

36 दिन के शटडाउन का असर

  • कर्मचारियों पर: करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी के छुट्टी पर हैं। सेना, पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जैसे जरूरी कर्मचारियों को बिना सैलरी काम करना पड़ रहा है।
  • हवाई यात्रा और फूड प्रोग्राम: उड़ानें देरी से चल रही हैं और लोअर इनकम वाले परिवारों को फूड सहायता न मिलने का खतरा बढ़ रहा है।
  • फूड प्रोग्राम रोका गया: 4.2 करोड़ अमेरिकियों की फूड स्टैंप (SNAP) सहायता रुक गई है। सरकार के पास जरूरी फंड नहीं है
  • एटमी हथियार एजेंसी: नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एजेंसी ने 1,400 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा है। एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने दो हफ्ते पहले कहा था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, इससे परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी संसद में फिलिबस्टर की कंडिशन बनी है

अमेरिकी संसद में इस समय फिलिबस्टर की कंडिशन बनी हुई है। इसके जरिए सांसद किसी बिल पर बहस को जानबूझकर लंबा खींच सकते हैं, ताकि उस पर वोटिंग देर से हो या बिल्कुल न हो पाए।

अमेरिकी सीनेट में किसी भी प्रस्ताव पर बहस खत्म करने और वोटिंग कराने के लिए ‘क्लोटर’ नाम की प्रक्रिया होती है। इसके लिए कम से कम 100 में से 60 सीनेटरों का समर्थन जरूरी होता है।

इसी वजह से ट्रम्प का फंडिंग बिल अटका हुआ है। विपक्ष इस नियम का इस्तेमाल सिर्फ कानून पास होने से रोकने के लिए करता है, भले ही मुद्दा कितना भी जरूरी क्यों न हो।

फिलिबस्टर का मकसद है अल्पसंख्यक दल को भी कानून निर्माण में अपनी बात रखने का अधिकार मिले। कोई भी पार्टी सिर्फ अपनी संख्या के दम पर तानाशाही न करे।

हालांकि इसमें नुकसान यह है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जाता है। 4 साल पहले जब बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में थी तब वे भी इसे खत्म करना चाहते थे। लेकिन ट्रम्प की रिपब्लिकन ने इसका विरोध किया था।

अमेरिका में शटडाउन के चर्चित मामले

  • 2013 में अमेरिका के साथ 8,891 किमी लंबी कनाडा सीमा की देखभाल करने वाला सिर्फ 1 शख्स था। उस पर ही पूरे बॉर्डर इलाके की साफ-सफाई की जिम्मेदारी थी। बाकी सारे कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया था।
  • अमेरिका के सवा लाख सैनिक (ज्यादातर पहले और दूसरे विश्वयुद्ध) दूसरे देशों में मारे गए हैं। ये दुनियाभर के 24 कब्रिस्तानों में दफन हैं। इनमें से 20 यूरोप में हैं। इनकी देखभाल का खर्च अमेरिकी सरकार उठाती है। 2013 में शटडाउन होने पर ये सारे कब्रिस्तान बंद कर दिए गए थे।
  • 2018 के शटडाउन में वेतन नहीं मिलने की वजह से कई कर्मचारी एयरपोर्ट पर काम करने नहीं जा रहे थे जिस वजह से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं।
  • 2018 के शटडाउन में FBI डायरेक्टर ने चेतावनी दी कि उनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं, जिस वजह से उनके काम में दिक्कतें आ रही हैं।

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नेपाल में फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड, 6 की मौत:घर-पुल बहे, हाईवे बंद, एक महीने पहले आई बाढ़ में 1453 मौतें, 5500 से ज्यादा लापता

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में लगातार बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। बागलुंग जिले में भूस्खलन से एक घर मलबे में दब गया। हादसे में एक महिला और उसके तीन बेटों की मौत हो गई। पाल्पा जिले में 2 लोग मारे गए हैं।

वहीं, बाढ़ और भूस्खलन से कई घर और पुल बह गए हैं। कई जगह हाईवे बंद होने से आवाजाही प्रभावित हुई है। बुटवल में बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 1453 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।

भारी बारिश के बाद नारायणी नदी में बाढ़ आ गई है।

भारी बारिश के बाद नारायणी नदी में बाढ़ आ गई है।

चितवन जिले में नारायणी नदी का पानी घाट पर बनी बुद्ध की मूर्ति को छू रहा है।

चितवन जिले में नारायणी नदी का पानी घाट पर बनी बुद्ध की मूर्ति को छू रहा है।

नारायणी नदी में पानी बढ़ने से कई घर बह गए हैं।

नारायणी नदी में पानी बढ़ने से कई घर बह गए हैं।

खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर बह रही नारायणी नदी

लगातार बारिश के कारण नेपाल की कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। देवघाट में नारायणी नदी रविवार सुबह 7:45 बजे 11 मीटर पर बह रही थी। यह खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर है। अधिकारियों ने नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई थी।

बुटवल में बाढ़ के खतरे को देखते हुए करीब 200 परिवारों को उनके घरों से हटाया गया। कई इलाकों में बाढ़ का पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बंद, फसलों को नुकसान

बाढ़ का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन रोकना पड़ा है। इनमें 140 मेगावाट का कालीगंडकी, 25 मेगावाट का अपर मादी, 44 मेगावाट का सुपर मादी, 20 मेगावाट का नामार्जुन मादी और 40 मेगावाट का सेती रिवर प्रोजेक्ट शामिल हैं।

220 किलोवोल्ट की कालीगंडकी कॉरिडोर ट्रांसमिशन लाइन के दो टावर गिर गए हैं। कई जगहों पर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों को भी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

मनांग जिले में हिमस्खलन से 10 लापता

नेपाल के मनांग जिले के नार-फू क्षेत्र में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल पर हिमस्खलन हुआ है। इसके बाद पर्वतारोहियों और सपोर्ट स्टाफ समेत 10 लोगों का पता नहीं चल रहा है।

एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी ने रविवार को घटना की पुष्टि की। भंडारी के मुताबिक, लापता लोगों में 2 इमेजिन नेपाल प्राइवेट लिमिटेड से और 8 हिमालयन हॉलीडेज नेपाल से जुड़े हैं।

नेपाल के पर्यटन विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने बताया कि विभाग स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। अधिकारी घटना से जुड़ी ज्यादा जानकारी जुटा रहे हैं और लापता लोगों का पता लगाने तथा उन्हें बचाने के प्रयासों की जानकारी ले रहे हैं।

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ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया:बोले- वे मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते, ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा हल

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है।

ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि युद्ध का हल सिर्फ बातचीत से निकल सकता है।

ईरान ने 7 दिन में होर्मुज खोलने का प्लान दिया था

ईरान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के जरिए कतर के जरिए अमेरिका को 7 दिन का रोडमैप भेजा था। इसमें लड़ाई रोकने और शर्तें पूरी होने पर होर्मुज खोलने की बात कही गई थी।

इस प्रस्ताव के तहत पहले लड़ाई रोकने और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की गई थी। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज को दोबारा खोलने और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की योजना थी।

ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग भी की थी। प्रस्ताव में लेबनान और यमन समेत पूरे क्षेत्र में संघर्ष-विराम की बात शामिल थी।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

रिपोर्ट- ट्रम्प चुनाव के बाद फिर शुरू कर सकते हैं बमबारी

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू कर सकते हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने की संभावना पर चर्चा की है।

अल जजीरा के पत्रकार माइक हाना ने भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत को लेकर ट्रम्प प्रशासन के बयानों में लगातार बदलाव दिख रहा है। कभी ट्रम्प बातचीत अच्छी चलने की बात करते हैं, तो कभी ईरान को तबाह करने की धमकी देते हैं।

हाना के मुताबिक, ट्रम्प फिलहाल इस गतिरोध को जारी रखने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। वहीं, अमेरिका में भी चिंता है कि ईरान के साथ संघर्ष एक और लंबे समय तक चलने वाली जंग में बदल सकता है।

अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था

अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया।

इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था।

28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।

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जयशंकर बोले- आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति:सीमा पार कोई सरकार इसमें शामिल तो उसे जिम्मेदार ठहराना होगा, यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।

सीमा पार कोई सरकार इसमें शामिल तो उसे जिम्मेदार ठहराना होगा। यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती है।

आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद फैलाने वाले को अपना रवैया बदलना होगा।

जयशंकर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सेशन को संबोधित कर रहे थे।

जयशंकर ने फिलिस्तीन के लिए अलग देश बनाने का समर्थन किया

जयशंकर ने फिलिस्तीन के लिए अलग देश बनाने का समर्थन किया। उन्होंने टू-नेशन सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान की बात कही। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन, दोनों के लिए अलग-अलग स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव है, ताकि दोनों के लोग शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है। जयशंकर के इस भाषण का वीडियो फिलिस्तीन भी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया।

जयशंकर की स्पीच की बड़ी बातें, कहा- समुद्र में जहाजों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं

संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता

संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में असमर्थता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा पैदा कर रही है। पूरी दुनिया में इसका असर देखा जा सकता है।

जहाजों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं

इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में एक संघर्ष देख रहे हैं, जो पहले से ही कठिन स्थिति को और गंभीर बना रहा है। हम आपस में जारी इस लड़ाई को लेकर बेहद चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

दुनिया लगातार खतरों का सामना कर रही

भारत इस स्थिति को सुधारने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है, खासकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में। हमें यह समझना होगा कि शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना करती रहेगी, तो हम वास्तव में एक खाई के किनारे खड़े होंगे।

पिछले 3 महीने में 7 भारतीयों की मौत, 1 लापता

8 जुलाई- ब्लैक सी में MV ओमोर्फी पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हुई।

19 जुलाई- MV गोल्डन लियो पर हमले में चार भारतीय नाविक मारे गए।

9 सितंबर- होर्मुज स्ट्रेट में एल गैया टैंकर पर हमला हुआ, जिसके बाद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया।

17 सितंबर- ओमान की खाड़ी में MV केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई।

जयशंकर ने एक दिन पहले पाकिस्तानी पत्रकार को फटकारा था

जयशंकर ने कहा, कल आतंकवाद के समर्थक देश से जुड़े एक व्यक्ति ने इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। इसलिए आतंकवाद के आधार पर बनी किसी भी समझ की समीक्षा स्वाभाविक रूप से होगी। आतंकवाद फैलाने वाले को अपना रवैया बदलना होगा।

दरअसल शुक्रवार को एक पाकिस्तानी रिपोर्टर ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

इस पर जयशंकर ने कहा, एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। रिपोर्टर के सवाल का जवाब देने के बाद वे मुस्कुराए और वहां से निकल गए।

भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद बड़ा विवाद

भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है।

भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में मौजूद या वहां से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और आतंकवाद की फंडिंग का मुद्दा भी उठाया है। वहीं, पाकिस्तान भारत के आरोपों को खारिज करता रहा है।

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