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कोरबा

न्याय किसी वर्ग का विशेषाधिकार नहीं बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है -प्रधान जिला न्यायाधीश एस. शर्मा

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कोरबा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान, छग राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशन एवं प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष संतोष शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के मार्गदर्शन में रविवार 09 नवम्बर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर न्याय जागरूकता विधिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गयी।

कार्यक्रम में प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष संतोष शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा, जयदीप गर्ग, विशेष न्यायाधीश एस.सी./एस.टी. कोरबा, गरिमा शर्मा, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, डॉ. ममता भेजवानी, अपर सत्र न्यायाधीश एफ.टी.एस.सी.(पॉक्सो) कोरबा, सोनी तिवारी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोरबा,सुश्री त्राप्ती राधव तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कोरबा, सुश्री ग्रेसी सिंह प्रथम अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कोरबा, डॉ. किरण, प्रचार्या ज्योति भूषण प्रताप सिंह लॉ कॉलेज कोरबा की गरीमामयी उपस्थिति में विधिक सेवा दिवस का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में प्रधान जिला न्यायाधीश ने विधिक सेवा दिवस कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए आमजन को कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, न्याय तक समान पहुंच सुनिश्ति करना, निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। उपरोक्त कार्यक्रम में अध्यक्ष/प्रधान जिला न्यायाधीश के द्वारा अपने उदबोधन में विधिक सेवा का साब्दिक अर्थ बताते हुए प्राचीन काल से कानून से संबंधित ज्ञान को सेवा के साथ न्यायिक प्रक्रिया मुगल काल, मगद काल के जमाने में त्वरित निर्णय प्रदान कर फैसला दिया जाता था जिसमें सुनवाई का अवसर नहीं मिल पाता था ऐसे में न्याय की पूर्ति नहीं हो पाती थी। कानूनों में सनैः सनैः विकास हुआ यह व्यवस्था बदलती गयी जब हमारा देश आजाद हुआ तब स्वतन्त्र न्यायिक व्यवस्था की स्थापना हुई उसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय, सभी राज्यों में उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय एवं व्यवहार न्यायालय की स्थापना के बाद भी एक आवश्कता महसूस की जाती रही। जिसके अंतर्गत यह देखा गया कि जो निर्बल पक्ष या गरीब पक्ष अपना उचित प्रकार से न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है। इसलिए जो न्याय प्रदान करने का प्रक्रिया था माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को जो खर्च वहन करने में सक्षम नहीं था संविधान में व्यवस्थाओं में संसोधन कर विधिक सेवा प्राधिकरणों का वर्णन है जो संविधान एवं उद्ेशिका में भी निहित है।

विशिष्ट अतिथि उद्बोधन में लॉ कॉलेज की प्राचार्य डॉ. किरण चैहान ने विधिक सेवा दिवस मनाने की आवश्यकता को बताते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विस्तार से बताया एवं इसकी आवश्यकताओं पर बल देते हुए निरंतर कानूनी विकास में मददगार बताया।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा कार्यक्रम का संचालन करते हुए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत न्याय के अधिकार को व्यवहारिक रूप देने के लिए विधिक सेवा दिवस का असली मकसद समाज की अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है उन्होंने कहा कि लोग अदालतें, निःशुल्क विधिक सहायता और विधिक साक्षरता अभियान समाज में न्याय की सुलभता सुनिश्चित करते है। कानूनी सहायता सबके लिए हर समय थीम पर आधारित लोगो में कानून के प्रति लोगो में गहरी रूची जगायी।

 उपरोक्त कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस कौंसिल कोरबा के अधिवक्तागण, विधि कॉलेक के विद्यार्थी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के समस्त कर्मचारीगण एवं पैरालिगल वॉलेण्टियर्स उपस्थित रहे।

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कोरबा

सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन

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220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।


अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।


कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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कोरबा

बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख

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कोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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कोरबा

सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत

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सुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल

कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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