कोंडागांव, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक सरपंच की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मोहपाल गांव के सरपंच मंगल सिंह मरकाम (56) का एक महिला से अफेयर था। जब यह बात महिला के पति को पता चली तो परिवार के 7 सदस्यों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया।
29 सितंबर को सरपंच घर लौट रहे थे, तभी जंगल में छिपकर बैठे आरोपियों ने उसे पकड़कर लोहे की रॉड और डंडे से पीटा। हाथ बांधकर थप्पड़ मारे और चप्पल भी बरसाए। आरोपियों ने करीब ढाई घंटे तक सरपंच को पीटा।
अधमरी हालत में उसे 60 मीटर दूर ले जाकर कंबल से ढंक दिया। रातभर आग जलाकर आरोपी वहीं बैठे रहे और सुबह भाग निकले। पुलिस मामला बड़ेडोंगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, सभी एक ही परिवार के हैं।
सरपंच का शव गांव के तालाब के पास मिला, जिस पर चोट के निशान थे।
खेत के किनारे रॉड और डंडे भी पड़े मिले।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, सभी एक ही परिवार के हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम मोहपाल के सरपंच मंगल सिंह मरकाम (56) का शव 30 सितंबर की सुबह गांव के तालाब के पास मिला था। सरपंच के शरीर पर चोट के निशान थे।
परिवार वालों ने बताया कि मंगल सिंह 29 सितंबर की शाम करीब 6 बजे घर से यह कहकर निकले थे कि वे पंचायत कार्यालय जा रहे हैं। देर रात तक उनके वापस नहीं लौटने पर परिवार को लगा कि वे गांव में मौजूद दूसरे घर में रुक गए होंगे।
अगले दिन सुबह तालाब के पास मंगल सिंह के संदिग्ध हालत में पड़े होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें फरसगांव अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
50 मीटर दूर मिली बाइक, खेत किनारे रॉड और डंडे
वहीं, घटनास्थल से करीब 50 मीटर की दूरी पर मंगल सिंह की बाइक मिली। वहीं खेत के किनारे रॉड और डंडे पड़े मिले। घटनास्थल पर खून के निशान और संघर्ष के संकेत मिलने के बाद परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका जताई थी।
घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूर सरपंच की बाइक मिली थी।
सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की जांच
30 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे सीएचसी फरसगांव से बड़ेडोंगर पुलिस को घटना की सूचना मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई। एफएसएल टीम, साइबर टीम, बड़ेडोंगर थाना और रक्षित केंद्र की टीम को घटनास्थल मौके पर पहुंची।
सरपंच का महिला से था अफेयर
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि सरपंच का एक महिला से अफेयर था। इसी बात को लेकर महिला के परिवार वाले सरपंच से नाराज थे, जिसके बाद उसे मारने की प्लानिंग की। पुलिस ने संदेही मिट्ठू राम नेताम से पूछताछ की जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
ढाई घंटे तक बेदम पीटा
29 सितंबर को सरपंच के गांव आने की जानकारी मिलने पर सभी आरोपी पगडंडी के रास्ते और नदी किनारे जंगल में छिपकर बैठ गए। जैसे ही सरपंच वहां पहुंचा, आरोपियों ने उसे पकड़ लिया और हाथ, थप्पड़, चप्पल, डंडे और लोहे के रॉड से मारपीट की। आरोपियों ने सरपंच को ढाई घंटे तक बेदम पीटा।
पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
अधमरा कर कंबल से ढका, रातभर बैठे रहे
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सरपंच के हाथ बांध दिए और उसके साथ फिर मारपीट की। अधमरा कर उसे घटनास्थल से करीब 60 मीटर दूर ले जाकर कंबल से ढंक दिया। आरोपी सड़क किनारे आग जलाकर रातभर वहीं मौजूद रहे। सुबह करीब 5 से 5:30 बजे के बीच सभी आरोपी वहां से फरार हो गए।
इधर, 30 सितंबर की सुबह जब परिजनों को तालाब के पास सरपंच मंगल सिंह के संदिग्ध हालत में पड़े होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे और सरपंच को घायल हालत में फरसगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज
इस मामले में बड़ेडोंगर थाने में अपराध क्रमांक 22/2026 के तहत बीएनएस की धारा 103(1) में केस दर्ज किया गया है। जांच के दौरान धारा 61(2)(क) और 191(2) बीएनएस भी जोड़ी गई है।
पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपियों के घर से डंडा और लोहे का रॉड बरामद किया गया।
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें। इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।
पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है। बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है। जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था। गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला। इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं। श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।