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छत्तीसगढ़

नोटा को जेसीसीजे प्रत्याशियों से ज्यादा मिले वोट

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छत्तीसगढ़ में 2 लाख वोटर्स को कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया, सबसे ज्यादा दंतेवाड़ा में नाराजगी

रायपुर , एजेंसी। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 54, कांग्रेस को 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को एक सीट मिली है। निर्वाचन आयोग से मिले आंकड़ों के अनुसार इस विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 1 लाख 97 हजार 678 मतदाताओं को किसी भी पार्टी का प्रत्याशी नहीं भाया है। इन मतदाताओं ने नोटा में बटन दबाकर अपना गुस्सा जाहिर किया है। आंकड़ों की बात करें तो ये कुल मतदान का 1.26 प्रतिशत है। हालांकि ये 2013 और 2018 के मुकाबले कम है। 2018 में 2 लाख 82 हजार 738 और 2013 में 4 लाख 1 हजार 58 मतदाताओं ने नोटा दबाया। सबसे ज्यादा 8438 वोट नोटा को दंतेवाड़ा में मिले हैं। कुछ पार्टियों के वोट प्रतिशत का ग्राफ भी इस चुनाव में गिरा है।

जेसीसीजे को मतदाताओं ने नकारा

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी के प्रत्याशियों को पसंद नहीं किया गया है। इस बार इस पार्टी का वोट प्रतिशत भी गिरा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जेसीसीजे को कुल मतदान का 2 प्रतिशत वोट मिला था। इस बार ये आंकड़ा 1.23 पर सिमटकर रह गया है, जो नोटा के प्रतिशत से भी कम है। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी के साथ मिलकर जेसीसीजे ने 7 सीटें जीती थी। इस विधानसभा चुनाव में जेसीसीजे अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। अकलतरा प्रत्याशी ऋचा जोगी को छोड़, पार्टी का कोई भी प्रत्याशी 10 हजार वोटों का आंकड़ा भी पार कर नहीं पाया। ऋचा जोगी को 16,464, कोटा से पूर्व विधायक रेणु जोगी को 8884 और अमित जोगी को पाटन सीट पर 4822 वोटों ही मिले।

इन पार्टियों को मिले इतने प्रतिशत वोट

विधानसभा चुनाव 2023 में बीजेपी के पक्ष में 72 लाख 34 हजार 968 मतदाताओं ने वोट किया है। वहीं, कांग्रेस को 66 लाख 2 हजार 583, जेसीसीजे को 1 लाख 92 हजार 406, बीएसपी को 3 लाख 19 हजार 903 से ज्यादा और बाकी पार्टियों को 8 लाख 67 हजार 63 मतदाताओं ने वोट दिया है।

30 हजार की ज्यादा लीड से जीतने वाले विधायक

इस विधानसभा चुनाव में 30 हजार से ज्यादा वोट की लीड लेने में बीजेपी प्रत्याशी आगे रहे। बीजेपी के 14 और कांग्रेस के 5 विधायकों को इस चुनाव में 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली है। निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार 30 हजार से ज्यादा मतों से जीतने वाले विधायकों की लिस्ट में बीजेपी से बृजमोहन अग्रवाल, ओपी चौधरी, विजय शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा भूलन सिंह मरावी, संपत अग्रवाल, मोतीलाल साहू, लक्ष्मी राजवाड़े, गजेंद्र यादव, चातुरी नंद, अरुण साव, डॉ रमन सिंह, अनुज शर्मा, रिकेश सेन और राजेश मूणत भी 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हैं। वहीं, कांग्रेस से संदीप साहू, द्वारिकाधीश यादव, इंद्रशाह मंडावी, अनिला भेंडिया और सावित्री मंडावी भी इस लिस्ट में हैं।

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कोरबा

बॉयफ्रेंड के हमले में घायल गर्लफ्रेंड की मौत:बिलासपुर से कोरबा आए थे दोनों, गर्लफ्रेंड के गले पर गोदा चाकू, फिर खुद भी गला रेता

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा में बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड के गले के चाकू घोंप दिया। इसके बाद उसने खुद का गला काट लिया। युवक की मौके पर मौत हो गई। जबकि गर्लफ्रेंड की आठ दिन बाद बुधवार 11 फरवरी को बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। हालांकि, अभी तक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

जानकारी के मुताबिक, बॉयफ्रेंड का नाम शुभम नायडू (28) है, जो कि पहले से शादीशुदा था और उसका एक बेटा है। जबकि गर्लफ्रेंड का नाम निशा उर्फ प्रतीक्षा (22) है। दोनों बिलासपुर के रहने वाले हैं। तीन फरवरी मंगलवार को दोनों बस से कोरबा पहुंचे थे। मंगलवार देर रात शुभम ने चाकू से निशा गले पर हमला कर दिया।

गंभीर रूप से घायल गर्लफ्रेंड ने किसी तरह वीडियो कॉल कर पुलिस और अपने परिजनों को इशारे से घटना की जानकारी दी। गर्लफ्रेंड को बिलासपुर रेफर किया गया था, जिसकी बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस की मानें तो प्रथम दृष्टया मामला अफेयर का है। मामला उरगा थाना क्षेत्र का है।

विवाद के बाद बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड के गले पर चाकू घोंपा।

विवाद के बाद बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड के गले पर चाकू घोंपा।

डॉक्टरों ने जांच के बाद बॉयफ्रेंड को मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टरों ने जांच के बाद बॉयफ्रेंड को मृत घोषित कर दिया।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के अनुसार, जूना बिलासपुर निवासी निशा श्रीवास पार्लर का काम करती थी। उसका सरकंडा के अशोक नगर निवासी शुभम नायडू से अफेयर चल रहा था। शुभम एक निजी बैंक में काम करता था और पहले से शादीशुदा था, जिससे उसका एक बेटा भी है। शादी के कुछ समय बाद से ही उसकी पत्नी के साथ विवाद चल रहा था।

दरअसल, तीन फरवरी मंगलवार शाम से दोनों लापता थे। निशा के लापता होने की सूचना परिजनों ने पुलिस को दी थी। ऐसे में बिलासपुर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इस बीच करीब 9 बजे रात को दोनों बस से कोरबा पहुंचे। संडैल नाला के पास दोनों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया।

इस दौरान बॉयफ्रेंड शुभम ने गर्लफ्रेंड निशा के गले में चाकू गोद दिया। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई और गिर गई। इसके बाद उसी चाकू से शुभम ने खुद का गला काट लिया। इधर, खून से लथपथ जमीन पर पड़ी निशा ने किसी तरह 112 पर कॉल किया। इसके बाद परिजनों को वीडियो कॉल करके घटना की जानकारी दी।

मामले की जानकारी मिलते ही एएसपी समेत अन्य पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे।

मामले की जानकारी मिलते ही एएसपी समेत अन्य पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे।

गर्लफ्रेंड की हालत गंभीर, बिलासपुर रेफर

युवती ने पुलिस को लोकेशन भी बताई। लोकेशन मिलने के बाद 112 की टीम मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल पहुंचाया। जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने शुभम को मृत घोषित कर दिया। वहीं, निशा की गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक इलाज के बाद उसे बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया।

आठ दिन बाद युवती ने दम तोड़ा

सिम्स में उसका लगातार इलाज चल रहा था। ऑपरेशन के बाद उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया था और उसकी हालत में सुधार भी होने लगा था। हालांकि, दो दिन पहले अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह कोमा में चली गई। डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद बुधवार दोपहर युवती ने दम तोड़ दिया।

डॉक्टरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर चीरघर में रखवा दिया। बुधवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया।

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छत्तीसगढ़

पिछले 13 सालों से नहीं बढ़ी RTE की राशि:इसी ड्यूरेशन में विधायक-कलेक्टर की सैलरी 255% तक बढ़ी, प्राइवेट स्कूल करेंगे असहयोग आंदोलन

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रायपुर,एजेंसी। शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र भेजकर प्रतिपूर्ति राशि में बड़ा इजाफा करने की मांग की है।

मांग पूरी नहीं होने पर असहयोग आंदोलन की चेतावनी भी दी है। यानी RTE के तहत प्रवेश पाने वाले स्टूडेंट्स का एडमिशन प्रभावित हो सकता है।

एसोसिएशन ने बताया कि, RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई। जबकि इसी अवधि में विधायकों की सैलरी 255%, IAS अधिकारियों की सैलरी 136%, राज्य और केन्द्र के ग्रेड 1 कर्मचारियों की सैलरी क्रमश: 158 और 136% तक बढ़ी है।

हाईकोर्ट ने 6 महीने में निर्णय लेने के दिए थे आदेश

पूरे मामले को लेकर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए HC बिलासपुर ने 19 सितंबर 2025 को अंतिम आदेश पारित किया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह के भीतर एसोसिएशन की मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।

प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की यह है मांग

एसोसिएशन ने मंत्री को भेजे पत्र में मांग की है कि, प्राथमिक कक्षाओं में प्रतिपूर्ति राशि रू.7,000 से बढ़ाकर रू.18,000 प्रति विद्यार्थी/वर्ष, माध्यमिक कक्षाओं में रू.11,500 से बढ़ाकर रू.22,000 और हाई व हायर सेकेंडरी में अधिकतम सीमा रू.15,000 से बढ़ाकर रू.25,000 किया जाए। साथ ही बढ़ी हुई राशि पिछले 3 वर्षों से एरियर सहित दिए जाने की भी मांग की गई है।

13 साल में सैलरी बढ़ी, लेकिन शिक्षा बजट जस का तस

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि, बीते 13 वर्षों में विधायकों की इन-हैंड सैलरी रू.45,000 से बढ़कर रू.1.60 लाख हो गई। आईएएस अधिकारियों की एंट्री लेवल सैलरी रू.45,000 से बढ़कर रू.1.06 लाख से अधिक हो गई।

राज्य और केंद्र सरकार के ग्रेड-1 अधिकारियों के वेतन में भी दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई इसके बावजूद गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च के लिए दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।

असहयोग आंदोलन की चेतावनी

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन असहयोग आंदोलन करने पर मजबूर होगी। संगठन का कहना है कि यह न केवल शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश की भी अनदेखी है।

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छत्तीसगढ़

मैनपाट बाक्साइट माइंस मुआवजा में गड़बड़ी,नपे तहसीलदार-पटवारी:कलेक्टर ने बनाई जांच टीम,जिनके नाम पर जमीन ही नहीं, उनके नाम भी बना लाखों का मुआवजा

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सरगुजा,एजेंसी। सरगुजा जिले के मैनपाट में बॉक्साइट खदान के लिए जमीन लीज के लिए मुआवजा निर्धारण में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। 19 करोड़ के मुआवजा वितरण में ऐसे लोगों के नाम मुआवजा का प्रकरण बनाया गया है। जिनकी मौके पर जमीन ही नहीं है।

लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे के नाम भी लाखों का मुआवजा प्रकरण बना दिया गया। कलेक्टर ने मामला उजागर होने के बाद मैनपाट के तहसीलदार और क्षेत्र के पटवारी को हटा दिया है।

जानकारी के मुताबिक, मैनपाट के बरिमा और उरंगा पंचायतों में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन को बाक्साइट खनन की लीज मिली है। इसके तहत प्रभावित किसानों को 7 साल का फसल मुआवजा दिया जाना है।

उरंगा के 220 लोगों और बरिमा के 24 लोगों के नाम पर मुआवजा प्रकरण तैयार किया गया है। उरंगा में 15 करोड़ से ज्यादा और बरिमा में 4 करोड़ से अधिक की राशि प्रस्तावित है। मुआवजा के लिए तहसीलदार और एसडीएम स्तर से मंजूरी भी मिल चुकी है।

कलेक्टर ने बनाई जांच टीम, गड़बड़ी का खुलासा

इस मामले में शिकायत की गई थी कि, कई ऐसे लोगों के नाम पर मुआवजा प्रकरण बना दिया गया है, जिनकी जमीन ही उक्त दोनों गावों में नहीं है। CG PSC घोटाले से जुड़े टामन सिंह सोनवानी के बेटे अभिषेक सोनवानी के नाम पर भी मुआवजा प्रकरण बना दिया गया है। मौके पर उनका फार्म हाउस बना हुआ है। डीके सोनी के रिसॉर्ट का भी मुआवजा प्रकरण बना दिया गया है।

जांच के लिए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने अपर कलेक्टर सुनील नायक के नेतृत्व में जांच टीम बनाई थी। अपर कलेक्टर सुनील नायक राजस्व अमले के साथ गांव पहुंचे और उन्होंने मौके पर जांच कर पंचनामा बनाया।

शुरुआती जांच में पता चला है कि, जिन लोगों की जमीन पर खेती नहीं हो रही थी। जिन लोगों की जमीन उरंगा और बरीमा ग्राम पंचायत में नहीं है। उनके नाम पर भी लाखों रुपए का मुआवजा प्रकरण बनाकर उन्हें देने की तैयारी चल रही थी।

तहसीलदार और पटवारी पर गिरी गाज

मुआवजा प्रकरण तैयार करने में गड़बड़ी का खुलासा होने पर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने मैनपाट के तहसीलदार ममता रात्रे और पटवारी को हटा दिया है। दोनों को कलेक्टोरेट कार्यालय में अटैच कर दिया गया है। फिलहाल मुआवजा वितरण पर प्रशासन ने रोक लगा दी है।

फार्म हाउस, रिसोर्ट का भी बनाया मुआवजा प्रकरण, कई फर्जी

जांच में पता चला कि टामन सिंह सोनवानी के बेटे अभिषेक सोनवानी के फार्म हाउस को भी कृषि की जमीन बताकर मुआवजा प्रकरण बना दिया गया, जबकि वहां पर रेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है। एक रिसोर्ट का मुआवजा प्रकरण बना दिया गया।

सात लोगों पुष्पा, चक्रधारी, बच्चू बाई, कविलासी, चित्रलेखा, रामसेवक एवं रामबली के नाम की कोई जमीन ही अधिग्रहण क्षेत्र में नहीं है। उनके नाम भी लाखों का मुआवजा प्रकरण तैयार कर दिया गया। उरंगा में एक किसान की डेढ़ एकड़ जमीन के बदले 23 एकड़ का मुआवजा प्रकरण बना दिया गया था।

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