छत्तीसगढ़
कोलवाशरी के भारी विरोध के बाद भी जनसुनवाई:नारेबाजी कर लोगों ने किया बहिष्कार, खाली रही कुर्सियां, कृषि क्षेत्र को इंड्रस्ट्रियल एरिया बनाने का विरोध
बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर जिले के सीपत-मस्तूरी क्षेत्र के NTPC के राखड़ डैम प्रभावित इलाकों के गांव के लोगों ने कोलवाशरी के लिए आयोजित जनसुनवाई का खुला विरोध किया। नाराज ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी करते हुए जनसुनवाई का बहिष्कार कर दिया।
हालांकि, इसके बाद भी प्रशासन और पर्यावरण प्रदूषण मंडल के अफसरों ने जनसुनवाई स्थगित नहीं की। इस दौरान लोगों ने कहा कि हम पहले से ही राखड़ डैम, कोलवाशरी और क्रशर खदान से परेशान हैं। एक और कोलवाशरी खुलने से हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा।

दरअसल, सीपत-मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम रलिया-भिलाई में अरपा कोल बेनिफिकेशन के नाम पर कोलवाशरी शुरू करने की तैयारी चल रही है। जयरामनगर के पास रलिया-भिलाई में कोलवाशरी का विरोध पहले से ही हो रहा था।
इसके बाद भी ग्रामीणों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए पर्यावरण विभाग के अफसरों ने जनसुनवाई की औपचारिकता पूरी कर ली। ग्रामीण कोलवाशरी के विरोध में हैं। वहीं, रलिया-भिलाई से लगे आसपास के 15 से अधिक गांव के लोगों ने जनसुनवाई का बहिष्कार कर दिया।

स्थानीय लोगों के विरोध के चलते जनसुनवाई में नहीं पहुंचे लोग।
वॉटर लेवल डाउन है, डैम का राखड़ किचन तक पहुंच रहा है
जनसुनवाई में पहुंचे जनप्रतिनिधियों के साथ ही स्थानीय लोगों ने कहा कि क्षेत्र की जनता पहले से ही परेशान हैं। जल प्रदूषण के साथ ही वायु प्रदूषण हो रहा है। जिसका विरोध कर समस्याओं का निराकरण करने के लिए प्रशासन से कई बार मांग की जा चुकी है।
लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है। वहीं, अब लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हुए एक और नया वाशरी खोलने की तैयारी चल रही है, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया।

NTPC के राखड़ डैम प्रभावित इलाकों में कोलवाशरी खोलने पर जताई नाराजगी।
जनसुनवाई में खाली रही कुर्सियां, केवल 181 आवेदन पहुंचे
ग्रामीणों ने पहले भी जनसुनवाई का विरोध किया था। यही वजह है कि सोमवार को जनसुनवाई के दौरान ज्यादातर ग्रामीणों ने इसका बहिष्कार कर दिया, जिसके चलते वहां कुर्सियां खाली पड़ी थी। वहीं, दूसरी तरफ, जिला प्रशासन की तरफ से प्रभारी के अधिकारी शिव बनर्जी ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण मंडल की ओर से जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जिसमें पक्ष और विपक्ष में लोगों ने आवेदन दिया है। इसके साथ ही मौखिक रूप से भी बातें रखी हैं।
जिला स्तरीय कमेटी इन आवेदन पत्र को लिपिबद्ध किया गया है, जिसे पत्र के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को भेजा जाएगा। हमारा काम जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करना था। आज की जनसुनवाई में 182 लोगों ने आवेदन दिए हैं, जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों आवेदन हैं। इसके साथ ही लोगों ने मौखिक रूप से भी अपनी बातें रखी है।

लोगों ने कहा कोलवाशरी खुलने से बढ़ जाएगी प्रदूषण की समस्या।
ग्रामीणों की आपत्ति को किया दरकिनार
जयरामनगर (खैरा) में सोमवार को आयोजित जनसुनवाई हुई। इस दौरान भी ग्रामीणों के साथ स्थानीय अफसर भी मौजूद रहे। ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों ने विरोध करते हुए कहा कि कोलवाशरी के आसपास के जमीन वाले किसानों की जमीन है। पहले से चल रहे कोलवाशरी से खेत बंजर हो गए हैं। डस्ट से उनका फसल बर्बाद हो रहा है। ऐसे में नया कोलवाशरी शुरू होने से प्रदूषण की समस्या और बढ़ जाएगी।
कृषि क्षेत्र को बनाया जा रहा इंडस्ट्रियल एरिया
ग्रामीणों की मानें तो जयराम नगर के भनेसर में कोलवाशरी के बाद क्रेशर प्लांट लगाकर कृषि क्षेत्र को इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जा रहा है, जिससे लोगों को लाभ नहीं, सिर्फ नुकसान होगा।
छत्तीसगढ़
रायपुर में सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़…6 गिरफ्तार:दिल्ली से चल रहा था सिंडिकेट, रैपिडो राइडरों और ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ से हो रही थी डिलीवरी
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सूखा नशा और सिंथेटिक ड्रग्स के अंतर्राज्यीय नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली से एमडीएमए सप्लाई सिंडिकेट चल रहा था। रैपिडो राइडरों और ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ से ड्रग्स डिलीवरी हो रही थी। पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि, ड्रग्स नेटवर्क का मास्टरमाइंड महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा हैं। दोनों दिल्ली में रहकर एमडीएमए ड्रग्स और पार्टी पिल्स सप्लाई का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। यह दोनों आरोपी पहले भी 2024 में ड्रग्स मामले में जेल जा चुके हैं।

यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल जोन) उमेश प्रसाद गुप्ता की संयुक्त निगरानी में एसीसीयू, एएनटीएफ और थाना तेलीबांधा पुलिस की टीम ने की है।

ड्रग्स नेटवर्क के मास्टरमाइंड महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा।
‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ से हो रही थी डिलीवरी
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि, आरोपी “Dead Drop System” का इस्तेमाल कर रहे थे। इस सिस्टम में ड्रग्स को सुनसान स्थानों पर रखकर उसकी लोकेशन और वीडियो ग्राहकों को भेज दी जाती थी। ग्राहक वहां से जाकर ड्रग्स उठा लेते थे।
रैपिडो राइडरों का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट के सदस्य कोरियर लॉजिस्टिक और रैपिडो बाइक सर्विस का इस्तेमाल करते थे। दिल्ली से कोरियर के जरिए ड्रग्स रायपुर भेजा जाता था। इसके बाद आरोपी कुणाल मंगतानी उसे रिसीव कर रैपिडो राइडरों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर रखवाता था।

पुलिस ने ड्रग्स भी बरामद किया है।
पहले 4 आरोपी पकड़े गए
29 मार्च 2026 को पुलिस ने तेलीबांधा क्षेत्र के काशीराम नगर में दबिश देकर तीन रैपिडो राइडरों को पकड़ा था। जिसमें सौरभ डोंगरे, शुभम राठौर, सौरभ यादव शामिल है। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने कुणाल मंगतानी को भी गिरफ्तार किया।

पुलिस ने तेलीबांधा क्षेत्र के काशीराम नगर में दबिश देकर तीन रैपिडो राइडरों को पकड़ा था।
दिल्ली से मास्टरमाइंड गिरफ्तार
पूछताछ में सिंडिकेट का खुलासा होने के बाद पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई। दिल्ली के पंचशील विहार इलाके में दोनों मास्टरमाइंड को ट्रेस कर उन्हें नोटिस देकर रायपुर बुलाया गया। पूछताछ में उनकी भूमिका सामने आने पर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
नाइजीरियन नागरिकों से खरीदते थे ड्रग्स
जांच में आरोपियों ने बताया कि, वे नाइजीरियन नागरिकों से ड्रग्स खरीदते थे और फिर उसे रायपुर समेत कई जगहों पर सप्लाई करते थे। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की आगे भी जांच कर रही है।

ड्रग्स सप्लाई में इस्तेमाल किया गया कोरियर बॉक्स जब्त किया गया।
अब तक 6 आरोपी गिरफ्तार, 10 लाख का सामान जब्त
अब तक इस मामले में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुणाल मंगतानी, सौरभ डोंगरे, शुभम राठौर, सौरभ यादव, महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा शामिल हैं। उनके पास से 48.03 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स (कीमत करीब 7 लाख), 8 पार्टी पिल्स, 9 मोबाइल फोन, बाइक (CG 04 NG 8529) और ड्रग्स सप्लाई में इस्तेमाल किया गया कोरियर बॉक्स जब्त किया है।
डेढ़ महीने की जांच के बाद पुलिस ने पकड़ा
पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला ने बताया कि, पिछले डेढ़ महीनों से आरोपियों के खिलाफ जानकारी मिल रही थी। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मोबाइल लोकेशन के आधार पर घेराबंदी की और सबसे पहले तीन पेडलर्स को दबोचा। इनकी निशानदेही पर दिल्ली के मास्टरमाइंड को नोटिस देकर रायपुर बुलाया गया और लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने युवाओं से की अपील
रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि, वे सिंथेटिक ड्रग्स के सेवन और इसके प्रसार से दूर रहें। साथ ही ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि नशा मुक्त समाज बनाने की दिशा में मिलकर काम किया जा सके।

छत्तीसगढ़
बिलासपुर में 331 मीटर टनल में अब नहीं टूटेगा सिग्नल:रेलवे ने भनवारटंक की सुरंग में पहली बार कम्युनिकेशन-सिस्टम किया इंस्टॉल,हादसों का जोखिम हुआ कम
बिलासपुर,एजेंसी। SECR ने सुरक्षा और तकनीक में एक नई सफलता हासिल की है। बिलासपुर रेल मंडल के भनवारटंक स्टेशन और इसके आस-पास के खतरनाक अप और डाउन 331 मीटर लंबे टनल में सिग्नल समस्या को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।
100 साल से भी अधिक पुराने दोनों हाई रिस्क टनल हैं, जिसमें रेलवे ने आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम की सफल कमीशनिंग की है। इस तकनीक के बाद अब पहाड़ों के बीच से निकलने वाली ट्रेनों और वहां काम करने वाले स्टाफ के बीच जीरो गैप कनेक्टिविटी रहेगी। इस सिग्नलिंग सिस्टम में पहाड़ों के बीच भी भरपूर सिग्नल मिलेगा।

दरअसल, ब्रिटिश शासन काल में भनवारटंक रेलवे स्टेशन के बाद दो पहाड़ों के बीच की 115 फीट की गहराई पर पुल बनाकर सुरंग बनाई गई है। छत्तीसगढ़ के सबसे ऊंचे पहाड़ों को काटकर बनाई गई सुरंग में ट्रेनों को 10 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से निकाला जाता है। ताकि हादसे का कोई खतरा न हो।
अब SECR के जीएम तरूण प्रकाश के मार्गदर्शन में रेलवे की यह प्रणाली सुरक्षित और स्मार्ट रेल परिवहन की दिशा में बड़ी सफलता है। इससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि रखरखाव कार्यों में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

भनवारटंक रेलवे स्टेशन।
क्यों खास है यह हाईटेक तकनीक
आमतौर पर रेल सुरंगों के भीतर जाते ही मोबाइल और वॉकी-टॉकी के सिग्नल फेल हो जाते हैं, जो आपात स्थिति में बड़ा खतरा साबित होता है। नई प्रणाली में लीकी केबल और ऑप्टिकल फाइबर का ऐसा जाल बिछाया गया है, जो रेडियो तरंगों को सुरंग के आखिरी कोने तक पहुंचाता है।
ऐसे काम करेगा यह डिजिटल कवच
स्टेशन पर एक मुख्य यूनिट यानी मास्टर यूनिट लगाई गई है, जो सिग्नल को कंट्रोल करेगी। सुरंग के भीतर रिमोट यूनिट्स लगाई गई हैं, जो ऑप्टिकल सिग्नल को फिर से रेडियो सिग्नल में बदलकर रेलकर्मियों के हैंडहेल्ड सेट तक पहुंचाएंगी। सिस्टम फेल न हो, इसके लिए हाई-कैपेसिटी यूपीएस और एडवांस ग्राउंडिंग सिस्टम तक लगाया गया है।

भनवारटंक रेलवे टनल।
वीएचएफ बैंड पर काम करेगा सिग्नल
यह सिस्टम 146–163 मेगाहर्ट्ज के वीएचएफ बैंड पर काम करता है। इस फ्रीक्वेंसी के जरिए दुर्घटना या खराबी की स्थिति में टनल के अंदर से भी तुरंत स्टेशन मास्टर और ड्राइवर से संपर्क साधा जा सकेगा हो सकेगा। किसी भी तकनीकी खराबी का पता सॉफ्टवेयर के जरिए दूर बैठे ही लगाया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़
गर्भस्थ शिशु की मौत, डॉक्टर्स पर भड़कीं मंत्री राजवाड़े:बोलीं- मेरा ब्लड ले लो, सूरजपुर अस्पताल में खून की कमी से रुका प्रसूता का ट्रीटमेंट
सूरजपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल में इलाज में लापरवाही की जानकारी मिलने पर महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल पहुंचीं। लापरवाही और दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सिविल सर्जन और डॉक्टरों को फटकार लगाई।
जानकारी के अनुसार, महिला को गंभीर हालत में शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद रविवार को पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है और उसका ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकालना आवश्यक था, लेकिन अस्पताल में ब्लड की कमी बताते हुए उसका इलाज शुरू नहीं किया गया, जिस पर लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मेरा ब्लड ले लो और इलाज करो।
इस मामले में सूरजपुर के सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा ने डॉक्टर निकिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जिला अस्पताल में अव्यवस्था पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल ने नाराजगी जताई।
शिकायत मिली तो सीधे हॉस्पिटल पहुंचीं मंत्री
सोमवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को मरीज का इलाज शुरू न होने की शिकायत मिली, जिसके बाद वे शाम को अस्पताल पहुंचीं। उनके पहुंचते ही सीएस डॉ. मरकाम सहित अन्य चिकित्सक मौके पर मौजूद हो गए।

मंत्री ने इलाज में लापरवाही पर सीएस को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे पूरी चिकित्सा व्यवस्था की छवि खराब हो रही है।
दरअसल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। शिकायत भाजपा नेताओं तक पहुंची तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया, जिस पर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा-मंत्री या विधायक को बुला लो, कुछ नहीं होगा।

लापरवाही पर मंत्री ने सिविल सर्जन और अन्य स्टाफ को जमकर फटकार लगाई।
मंत्री ने कहा- व्यवस्था सुधारें, यह बर्दाश्त नहीं
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पहले भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो मेरा ब्लड निकाल लो, लेकिन मरीज का इलाज तुरंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में फैली बदबू और गंदगी पर भी अपनी नाराजगी जताई।
पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
सूरजपुर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इलाज न करने और हालत बिगड़ने पर अंबिकापुर रेफर करने की दो घटनाओं में प्रसूता और नवजात की मौत हो चुकी है। इन मामलों में केवल नर्सों पर कार्रवाई की गई।
सीएमएचओ बोले- प्रसूता की हालत खतरे से बाहर
सूरजपुर सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा के अनुसार गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसमें खून की कमी थी। गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी थी, इसलिए अबॉर्शन के लिए ब्लड की जरूरत थी।
सीएमएचओ ने बताया कि महिला का अबॉर्शन कर दिया गया है और एक यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है। अब वह खतरे से बाहर है, हालांकि एक यूनिट और ब्लड चढ़ाया जाना है। डॉक्टर निकिता की ड्यूटी ब्लड बैंक में है। उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।

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