छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों का समन्वित विकास जरूरी : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री नगरीय विकास के सोपान कार्यक्रम में हुए शामिल
विभिन्न नगरीय निकायों में 155 करोड़ 38 लाख रुपए के 813 कार्यों का शिलान्यास और 15 करोड़ 25 लाख रुपए के 70 कार्यों का किया गया लोकार्पण
क्लीन टायलेट कैम्पेन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के 14 नगरीय निकाय हुए सम्मानित
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता दीदियों के मानदेय में 800 रूपये की वृद्धि की घोषणा की : अब स्वच्छता दीदियों को हर महीने मिलेगा 8 हजार रूपये मानदेय
रायपुर।
मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। हमारी सरकार को अभी तेरह महीने ही हुए हैं। इस बीच हमने सुशासन के लिए, संवेदनशीलता के साथ, जनसेवा के अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के साथ ही हम लोगों ने सभी वर्गों के विकास के साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किया है। इससे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना का विकास, स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है। हमारा पहला साल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के विकास के लिए समर्पित रहा। प्रदेश ने विकास के नए आयाम स्थापित किए। सभी वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को एक साल के भीतर ही पूरा कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ’नगरीय विकास के सोपान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के मुखिया प्रधानमंत्री से लेकर गांव के सरपंच तक विकास की सोच रखने वाले जनप्रतिनिधि होंगे तो सबका साथ, सबका विकास मूलमंत्र के साथ छत्तीसगढ़ का सर्वांगीण विकास होकर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि गांव और नगरीय क्षेत्र का समन्वित विकास होना चाहिए, इसके लिए मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यक है। नगरीय निकायों में अनुकम्पा नियुक्ति के संबंध में लम्बे समय से मांग की जा रही थी। हमने संवेदनशीलता के साथ विचार कर इसके लिए नए पद भी स्वीकृत किए हैं। नगरीय विकास के सोपान कार्यक्रम में हम लोग आज 103 पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का आदेश पत्र अभी वितरण किए हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े और ज्यादा से ज्यादा युवा आत्मनिर्भर हों। हमारी सरकार ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और विभिन्न नगरीय निकायों में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 353 पदों की स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न नगरीय निकायों में 155 करोड़ 38 लाख रुपए के 813 कार्यों का शिलान्यास और 15 करोड़ 25 लाख रुपए के 70 कार्यों का लोकार्पण अभी यहां पर हुआ है। 6 नगरीय निकायों तखतपुर, रतनपुर, भानुप्रतापुर, छुरिया, मल्हार ओर खोंगापानी में अमृत मिशन-2.0 के तहत 270 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले जल प्रदाय योजनाओं का शिलान्यास भी हम लोगों ने यहां पर किया है। इन नगरीय निकायों में 20 हजार 511 निजी नल कनेक्शन दिए जाएंगे। इससे हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संकल्प मूर्तरूप लेने वाला है।
स्वच्छ भारत अभियान में सभी की सहभागिता से नगरीय क्षेत्रों में बड़ी सफलता मिल रही है। स्वच्छता को प्रोत्साहित करने के लिए हम लोग समय-समय पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी कर रहे हैं। ऐसे ही मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत क्लीन टायलेट कैम्पेन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के 14 नगरीय निकायों को आज हम लोग सम्मानित कर रहे हैं। अंबिकापुर, छुरा, छुरिया, डोंगरगढ़, कोरबा, महासमुंद, रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर, मंदिर हसौद और चंदखुरी आदि नगरीय निकायों को आज पुरस्कृत किया जा रहा है। इन्हें सम्मानित करके हम खुद भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में स्वच्छता और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने में स्वच्छता दीदियों का बड़ा योगदान है। इनके लगन और मेहतन से ही स्वच्छता मिशन सफल हो पा रहा है। स्वच्छता दीदियों का सम्मान, इनके योगदान को प्रोत्साहन देता है। हम इनका सम्मान करके खुद भी सम्मानित महसूस कर रहे हैं। राज्य के नगरीय निकायों में इस समय स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 9 हजार से अधिक स्वच्छता दीदी कार्यरत हैं। इन्हें 7200 रुपये मानदेय दिया जाता है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि स्वच्छता दीदियों के मानदेय में आज 800 रूपये की बढ़ोत्तरी की जा रही है। अब स्वच्छता दीदियों को हर महीने 8 हजार रूपये मानदेय मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी का सपना है कि कोई भी भारतीय खुले आसमान के नीचे नहीं सोएगा। हर नागरिक का पक्का मकान होगा। मोदी जी की गारंटी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 13 दिसंबर को हमारी सरकार बनते ही, हमने 14 दिसंबर 2023 को पहले कैबिनेट की बैठक में पहला निर्णय 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की मंजूरी का लिया। हमें प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए डबल इंजन की सरकार में भरपूर सहयोग मिल रहा है। बीते दिनों केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हमें दुर्ग में बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री आवास की सौगात दी। अगले वित्तीय वर्ष के लिए उन्होंने 3 लाख अतिरिक्त आवास की स्वीकृति भी दी है। प्रधानमंत्री आवास 2024 प्लस योजना में सर्वे का काम प्रारंभ हो गया है। इसका लाभ अब उन लोगों को भी मिलेगा, जिनके पास दोपहिया वाहन है। जिनके पास ढाई एकड़ तक सिंचित और पांच एकड़ तक असिंचित खेती है, उन्हें भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा। जिनकी मासिक आय 15 हजार रूपये तक है, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए ऑनलाइन और सुगम सर्वेक्षण की व्यवस्था भारत सरकार ने की है। अब घर बैठे ही मोबाइल एप के माध्यम से पात्रता संबंधी पंजीयन करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन चल रहा है। यह शुभ संयोग 144 साल बाद बना है। छत्तीसगढ़ के तीर्थयात्री भी इसका लाभ उठायें, इसके लिए हमारी सरकार ने मेला स्थल में विशेष व्यवस्था की है। हमारे प्रदेश से जो भी श्रद्धालु महाकुंभ में जा रहे हैं। वहां उनके लिए ठहरने की अच्छी व्यवस्था है। खाने और नाश्ते का भी इंतजाम किया गया है। आप सभी को हम महाकंुभ में स्नान के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
मोदी जी की एक गारंटी प्रदेश के पांच लाख से अधिक भूमिहीन श्रमिकों को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन श्रमिक योजना अंतर्गत 10 हजार रूपये देने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। आज के कार्यक्रम में माता-बहनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति है। यह इस बात का प्रमाण है कि इनके खाते में हर महीने एक-एक हजार रूपये सांय-सांय आ रहा है। इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिला है।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में काम करने वाली और सुशासन की सरकार है। विष्णु के सुशासन में किसी को निराश होने की जरूरत नहीं है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा प्रदेश के 23 नगरीय निकायों में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत लगभग चार लाख जनसंख्या को शुद्व पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके तहत माना कैम्प, कुम्हारी, मंदिर हसौद, सुकमा और कोंडागांव नगर पालिका तथा समोदा, चंदखुरी, कुंरा, नगरी, आमदी, फिंगेश्वर, गुण्डरदेही, अर्जुन्दा, बोदरी, राहोद, खरोद, शिवरीनारायण, सरिया, प्रेमनगर, भटगांव, झगराखंड, कुनकुरी और नरहरपुर नगर पंचायत में 1154 करोड़ रुपए की लागत की जलप्रदाय परियोजनाओं का योजनाबद्ध ढंग से क्रियान्वयन किया जा रहा है। वन मंत्री तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य में शहरी क्षेत्रों में लगातार विकास की गंगा बह रही है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायकगण राजेश मूणत, धर्मजीत सिंह, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, गुरू खुशवंत साहेब, अनुज शर्मा और इन्द्रकुमार साहू, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक आर. एक्का सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।