मत्स्य पालन से 30-40 टन उत्पादन, 50 लाख तक पहुंची आय
23 सदस्यों को लाभांश और 20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
कभी केवल पानी के स्रोत के रूप में पहचाना जाने वाला ग्राम शंकरगढ़ का 10.70 हेक्टेयर जलाशय आज ग्रामीण आजीविका, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। यह कहानी है ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति मर्यादित, मनेन्द्रगढ़ की, जिसने पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे बढ़कर आधुनिक केज कल्चर तकनीक को अपनाया और जलाशय की क्षमता को आय के स्थायी स्रोत में बदल दिया। समिति के अध्यक्ष संतोष मांझी के नेतृत्व में 23 सदस्यीय समिति ने मत्स्य विभाग के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत जलाशय में 54 केज स्थापित किए। इन केजो में मोनोसेकस तिलिापया एवं पंगाशियस का वैज्ञानिक तरीके से पालन शुरू किया गया। आज यही 54 केज समिति की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बन चुके हैं।
पारंपरिक मत्स्य पालन से आधुनिक तकनीक तक ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति का पंजीयन 29 अक्टूबर 2021 को हुआ। समिति ने ग्राम शंकरगढ़ स्थित जलाशय को लीज पर लेकर मत्स्य पालन शुरू किया, लेकिन पारंपरिक पद्धति से उत्पादन सीमित था। समिति के सदस्यों ने महसूस किया कि उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग आधुनिक तकनीक के माध्यम से ही संभव है। इसी सोच के साथ समिति ने केज कल्चर को अपनाया। मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से 54 केज स्थापित हुए। इसके बाद मछलियों के बीज, आहार, स्वास्थ्य, वृद्धि और जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी शुरू हुई। वैज्ञानिक प्रबंधन से मत्स्य पालन अधिक व्यवस्थित हुआ और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
54 केजो से 30-40 टन मछली उत्पादन वर्तमान में समिति के 54 केजो में मोनोसेकस तिलिापया एवं पंगाशियस का पालन किया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित एवं प्रोटीन युक्त आहार और नियमित स्वास्थ्य निगरानी को उत्पादन का आधार बनाया गया है। मछलियों की उम्र, आकार और वृद्धि के अनुसार आहार की मात्रा तय की जाती है। केजो की नियमित देखभाल, जल की गुणवत्ता की जांच, मछलियों के स्वास्थ्य की निगरानी और समय पर प्रबंधन से उत्पादन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखा जाता है। इसी वैज्ञानिक पद्धति का परिणाम है कि समिति को वर्तमान में लगभग 30 से 40 टन मछली उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
50 लाख तक पहुंची आय, 8-12 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ समिति की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण इसके आर्थिक परिणाम हैं। बेहतर बाजार मूल्य मिलने पर मछलियों की बिक्री से समिति को लगभग 45 से 50 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इसमें लगभग 30-35 लाख रुपये का चारा, 2-3 लाख रुपये मत्स्य बीज, 4-5 लाख रुपये मजदूरी तथा 1-2 लाख रुपये दवाइयों एवं अन्य प्रबंधन कार्यों पर खर्च होते हैं। प्रमुख खर्चों के बाद समिति को लगभग 8 से 12 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस आय का सीधा लाभ समिति के 23 सदस्यों को मिल रहा है। प्रत्येक सदस्य को लगभग 34 हजार से 52 हजार रुपये तक लाभांश प्राप्त हो रहा है। इससे सदस्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और सहकारिता के प्रति उनका विश्वास भी बढ़ा है।
मछली पालन से गांव में रोजगार भी बढ़ा इस पहल का लाभ केवल समिति के सदस्यों तक सीमित नहीं है। केजो की देखभाल, मछलियों को आहार देने, स्वास्थ्य एवं वृद्धि की निगरानी, मछली निकालने, छंटाई, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने जैसे कार्यों में 20 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इस तरह जलाशय से बाजार तक तैयार हुई पूरी आर्थिक गतिविधि ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। मत्स्य पालन अब केवल पारंपरिक आजीविका नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाली संगठित गतिविधि बन गया है।
तकनीक, प्रशिक्षण और सहयोग ने दिखाई राह समिति की सफलता में मत्स्य विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। केज स्थापना से लेकर मत्स्य बीज संचयन, आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता, मछलियों के स्वास्थ्य और उत्पादन प्रक्रिया तक विभाग द्वारा आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया गया। समिति के सदस्यों ने प्रशिक्षण के माध्यम से वैज्ञानिक मत्स्य पालन की बारीकियां सीखी और उन्हें अपने दैनिक कार्य में अपनाया। इससे उन्हें मछलियों की वृद्धि और स्वास्थ्य के अनुसार प्रबंधन करने में मदद मिली।
सहकारिता की ताकत बनी आत्मनिर्भरता का आधार ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति की कहानी केवल उत्पादन और आय बढ़ने की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण है कि प्राकृतिक संसाधन, आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और सामूहिक प्रयास मिलकर ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। अध्यक्ष संतोष मांझी और समिति के 23 सदस्यों ने उपलब्ध जल संसाधन की क्षमता को पहचाना और उसे अवसर में बदला। आज यही जलाशय समिति के सदस्यों की आय बढ़ाने के साथ आसपास के ग्रामीणों को रोजगार भी दे रहा है।
सफलता की नई राह पर शंकरगढ़ का जलाशय आज ग्राम शंकरगढ़ का 10.70 हेक्टेयर जलाशय 54 केजों के माध्यम से 30-40 टन मछली उत्पादन, 45-50 लाख रुपये तक की आय और 8-12 लाख रुपये तक के शुद्ध लाभ का आधार बन चुका है। 23 सदस्यों को लाभांश और 20 से अधिक लोगों को रोजगार मिलना इस पहल के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है। समिति अब केज आधारित मत्स्य पालन को और विस्तार देने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति की सफलता यह संदेश देती है कि जलाशय केवल जल का भंडार नहीं, बल्कि यदि उसका वैज्ञानिक और योजनाबद्ध उपयोग किया जाए तो वह गांव की समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। शंकरगढ़ का यह जलाशय आज इसी बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुका है।
कोरबा, 17 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ राज्य में “बने खाबो-बने रिहबो 2.0” के अंतर्गत दिनांक 17 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक सात दिवसीय सघन खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। रक्षाबंधन पर्व को दृष्टिगत रखते हुए जिले में माह के प्रारंभ से ही विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का सतत निरीक्षण एवं खाद्य पदार्थों के नमूने संकलित किए जा रहे हैं। जांच में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जा रहा है तथा आवश्यकता अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा 06 अगस्त 2026 को कटघोरा स्थित अमृततुल्य दूध डेयरी से पनीर, 07 अगस्त को दीपका स्थित अन्नपूर्णा एवं शिवम डेयरी से दूध तथा टी.पी. नगर स्थित माँ कालिका डेयरी से पनीर एवं खोवा के नमूने लिए गए।
इसी प्रकार 11 अगस्त को गौमाता चौक, इमलीडुग्गू, कोरबा स्थित टाटा मिक्सचर फैक्ट्री से मिक्सचर तथा बुधवारी स्थित बुधवानी प्रॉडक्ट्स से मावा बर्फी का नमूना जांच हेतु लिया गया। 13 अगस्त को सांझा चूल्हा ढाबा से पका हुआ चावल एवं आटा का नमूना भी जांच के लिए संकलित किया गया।
इसी अभियान के तहत 17 अगस्त 2026 को गौमाता चौक, सीतामढ़ी स्थित मॉं सर्वमंगला डिस्ट्रीब्यूटर का निरीक्षण किया गया। यहां से नारियल लड्डू एवं मसूर पाक के नमूने जांच हेतु लिए गए। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के संबंध में संदेह होने पर लगभग 10 हजार रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थों को नियमानुसार सीज किया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा आगामी रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों में निरंतर निरीक्षण, नमूना संकलन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां जारी रखी जाएंगी। विभाग ने खाद्य कारोबारियों से खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पालन करने तथा आम नागरिकों से भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं पैकेजिंग संबंधी जानकारी देखकर ही खाद्य सामग्री खरीदने की अपील की है।
कोरबा 17 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्षन में जिले में उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास महा चौपाल एवं विविध जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। जिले के विभिन्न विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, शासकीय विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से साक्षरता को जन-जन से जोड़ते हुए शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान मशाल रैली, टॉर्च रैली एवं प्रभात फेरी निकालकर लोगों को साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने ‘उल्लास शपथ’ लेकर निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने तथा समाज में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। डिजिटल साक्षरता शपथ पत्र भी हुआ जारी
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले में डिजिटल साक्षरता शपथ पत्र भी जारी किया गया। इसके माध्यम से नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग करने, ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा तकनीक के माध्यम से शिक्षा एवं सशक्तिकरण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सेल्फी पॉइंट से लेकर खेल-कूद और रंगोली तक बनी आकर्षण का केंद्र
उल्लास महा चौपाल के दौरान सेल्फी पॉइंट लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। इसके साथ ही खेल-कूद प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकला एवं विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए साक्षरता के संदेश को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। ‘अंगूठे से कलम तक’ अभियान ने दिया सशक्तिकरण का संदेश
कार्यक्रम में ‘अंगूठे से कलम तक’ अभियान के माध्यम से नवसाक्षरों एवं निरक्षर व्यक्तियों को पढ़ने-लिखने की क्षमता से जोड़ने का संदेश दिया गया। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाना है।
स्वयंसेवी शिक्षकों और नवसाक्षरों का हुआ सम्मान उल्लास कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों एवं नवसाक्षरों को उनके उत्कृष्ट योगदान और उपलब्धि के लिए प्रमाण-पत्र एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इससे साक्षरता अभियान से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ा और अन्य लोगों को भी अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरणा मिली। जिला परियोजना अधिकारी साक्षरता श्रीमती ज्योति शर्मा ने कहा कि साक्षरता अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, नवसाक्षरों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सक्षम बनाने का माध्यम है।
कार्यक्रम में ग्रामीणों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित इन गतिविधियों से जिले में उल्लास-नवभारत साक्षरता अभियान के साथ डिजिटल साक्षरता को भी जनआंदोलन का रूप देने का संदेश मिला। संदेशः “अंगूठे से कलम तक, साक्षरता से डिजिटल साक्षरता तक-हर व्यक्ति बने सक्षम, हर परिवार बने सशक्त।”
कोरबा 17 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ शासन, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग रायपुर द्वारा प्रदेश में फसल क्षेत्राच्छादन, उत्पादन, उत्पादकता में वृद्धि करने, फसल कास्त लागत में कमी कर आय में वृद्धि करने, नवीन कृषि तकनीकी में निवेश को प्रोत्साहन, एवं बाजारोन्मुखी फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश में कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने हेतु कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराना आवश्यक है। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे समस्त कृषक, जिन्होने विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के बदलें अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने हेतु पंजीयन कराया हो, योजनांतर्गत पात्र होंगे। विधिक व्यक्तियों यथा ट्रस्ट/मण्डल/प्राईवेट लिमि. कंपनी/शाला विकास समिति/केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्थान/महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नही होगी।
योजनांतर्गत आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खातें में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से की जाएगी। विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के बदलें अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, उन्हे एग्रीस्टेक पर पंजीयन तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबें की पुष्टि उपरांत मान्य रकबें पर राशि 15 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। विगत वर्ष के फसल एवं रकबें की पुष्टि डिजिटल क्रॅाप सर्वे के डेटा से तथा जहां यह डेटा उपलब्ध नही हो, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति से गिरदावरी के डेटा से पुष्टि की जाएगी। पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबें की पुष्टि उपरांत मान्य रकबें पर पूर्ववत् राशि 10 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जिन क्षेत्रों में रकबें की पुष्टि हेतु डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध नही है, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति पर गिरदावरी से सत्यापित रकबें पर आदान सहायता राशि दी जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार खरीफ वर्ष 2026 में फसलवार, रकबावार, खसरावार शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित गिरदावरी/ई-गिरदावरी करने राजस्व एवं कृषि विभाग के मैदानी अमलें को भू-अभिलेख कोरबा द्वारा आदेश जारी किया गया है। भू-अभिलेख द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे करने हेतु सर्वेयरों की नियुक्ति किया जाकर तहसील स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। डी.पी.एस. कंवर, उप संचालक कृषि द्वारा जिलें के समस्त इच्छुक एवं पात्र कृषकों से अपील की गई है कि शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश में कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने हेतु कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराना सुनिश्चित करें। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन हेतु पात्र एवं इच्छुक कृषक आवश्यक दस्तावेज सहित नजदीकी सहकारी समिति से संपर्क करे। एग्रीस्टेक छ.ग. फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल में पंजीयन कराने के लिए किसानों को अपने साथ आधार कार्ड, भूमि का अद्यतन ऋण पुस्तिका/ब-1, खसरा तथा विशेष रूप से आधार कार्ड से लिंक मोबाईल नंबर लेकर नजदीकी लोक सेवा केन्द्र अथवा सेवा सहकारी समिति पहुंचना होगा। पंजीयन के दौरान आधार कार्ड लिंक मोबाईल नंबर पर ओ.टी.पी. प्राप्त होगी, जिसके जरिये ही सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी। तदोपरांत सत्यापन का कार्यवाही संबंधित क्षेत्र के पटवारी के लॉगिन से तथा अनुमोदन की कार्यवाही तहसीलदार लॉगिन से की जायेगी। एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन तथा समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन, कृषक उन्नति योजना, प्राईस सपोर्ट स्कीम, अंतर्गत पंजीकृत रकबें का समयावधि में गिरदावरी/ई-गिरदावरी/डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य के संबंध में अधिक जानकारी हेतु किसान अपने क्षेत्र के पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सेवा सहकारी समिति अथवा लोक सेवा केन्द्र से संपर्क कर सकते है।