Connect with us

छत्तीसगढ़

रायपुर : पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

Published

on

डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही सुशासन की वास्तविक पहचान है: मुख्यमंत्री

प्रशासनिक सुधारों से बदल रहा छत्तीसगढ़: प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित

डिजिटल सुशासन के मॉडल के रूप में उभर रहा छत्तीसगढ़

उत्कृष्ट भूमि सुधार एवं एग्रीस्टैक के लिए केंद्र सरकार ने दिए रू.598 करोड़

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

भागवत बोले- संघ केवल हिंदुओं का नहीं, देश का है:कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए, BJP संगठन महामंत्री से की मुलाकात, जबलपुर रवाना

Published

on

बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है। संघ समुद्र की तरह है, जिसमें सभी सदस्य समाहित होते हैं।

उन्होंने कहा कि जिस तरह समुद्र की पहचान उसकी एक बूंद से होती है, उसी तरह सदस्यों से संघ की पहचान होती है। संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना है, इसलिए सदस्यों को संगठित और सजग होकर राष्ट्रहित में काम करना चाहिए।

दरअसल, RSS प्रमुख गुरुवार को कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि संघ हिंदुओं के भले के लिए काम करता है। लेकिन संघ केवल हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भले के लिए काम करता है।

RSS प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि संघ का मुख्य काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है, बल्कि शुद्ध सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर पूरे हिंदू समाज और राष्ट्र को एकजुट करना है। वहीं, आज (शुक्रवार) 2 सत्रों में बैठकें हुई।

पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों, युवा वर्ग को जोड़ने और RSS-भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव पर रणनीति तय हुई। दूसरे सत्र में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा नेता शामिल हुए। इस दौरान मोहन भागवत ने प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह से मुलाकात की। इसके बाद मोहन भागवत अमरकंटक एक्सप्रेस से जबलपुर के लिए रवाना हुए।

RSS प्रमुख सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए।

RSS प्रमुख सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए।

पहले उपेक्षा हुई, अब जय-जयकार हो रही

बौद्धिक वर्ग कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि 1925 में RSS की स्थापना के बाद शुरुआत में संघ की उपेक्षा हुई। फिर विरोध हुआ और अब जय-जयकार हो रही है। अब माहौल RSS के पक्ष में है, इसलिए स्वयंसेवकों को और सतर्क होकर काम करना है।

पिछले एक साल में शताब्दी वर्ष के तहत जो काम किए गए हैं, उन्हें आगे भी जारी रखना है। हर स्वयंसेवक को लक्ष्य दिया कि पहले किसी अनजान व्यक्ति को परिचित बनाएं। फिर उससे दोस्ती करें और दोस्त बनने के बाद उसे स्वयंसेवक बनाएं।

पानी के फॉर्मूले से समझाया स्वयंसेवकों और संघ का महत्व

मोहन भागवत ने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु (H2O) से पानी बनता है। उसी तरह स्वयंसेवकों से संघ बनता है। स्वयंसेवकों के बिना संघ की ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि हर स्वयंसेवक को डॉ. हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझना चाहिए। उनका व्यक्तित्व आदर्श था।

RSS प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को दी नसीहत

भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन या आंदोलन का मकसद केवल राजनीतिक हित साधना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए। आंदोलन हमेशा समाधान निकालने के लिए होने चाहिए। सभी काम संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के दायरे में रहकर किए जाने चाहिए।

कार्यक्रम स्थल के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।

कार्यक्रम स्थल के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से शाखाओं का विस्तार करें

मोहन भागवत ने कहा कि शताब्दी वर्ष के तहत किए गए कार्यक्रमों को भुलाना नहीं है। संपर्क बढ़ाने और शाखाओं का विस्तार करने का काम लगातार जारी रखना है। संघ के तीन आधार शाखा, कुटुंब और अपनत्व हैं। इन्हें लगातार मेहनत करके आगे बढ़ाना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के सभी आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जब उन्हें विचारों की जरूरत होती है, तब संघ मार्गदर्शन देता है। बौद्धिक वर्ग में क्षेत्र संघ चालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना, प्रांत संघ चालक टोपलाल वर्मा सहित संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विपक्ष के हमलों के बीच स्वयंसेवकों को सतर्क रहने का संदेश

मोहन भागवत के संबोधन में विपक्षी दलों की ओर से RSS पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता दिखी। उन्होंने स्वयंसेवकों से सतर्क रहकर राष्ट्रहित में काम करने का आह्वान किया, ताकि किसी स्वयंसेवक की गलती से पूरे RSS के खिलाफ माहौल न बने।

उन्होंने संघ की स्थापना के समय का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेज समझ गए थे कि यह देशभक्त बनाने वाली संस्था है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ उनके बच्चों के भी शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में विरोध के बाद यह प्रतिबंध हटाना पड़ा।

मोहन भागवत गोंडवाना इंटरसिटी एक्सप्रेस से गुरुवार को बिलासपुर पहुंचे थे।

मोहन भागवत गोंडवाना इंटरसिटी एक्सप्रेस से गुरुवार को बिलासपुर पहुंचे थे।

सालभर में 2311 नई शाखाएं खुलीं, अब संख्या 5500 हुई

बौद्धिक वर्ग से पहले संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें मुख्य शिक्षक, कार्यवाह, नगर, उपनगर और विभाग कार्यकारिणी से शताब्दी वर्ष में दिए गए कामों का लेखा-जोखा लिया गया। इस दौरान बताया गया कि सालभर में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। अब इनकी संख्या बढ़कर 5500 हो गई है।

रायपुर के कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने पावभाजी बेचने वालों के लिए रात में शाखा शुरू की थी। यह रात्रि शाखा का पहला प्रयोग है। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग जगहों पर नई शाखाएं खोलने की जानकारी दी।

मीडिया के साथ मोबाइल पर भी प्रतिबंध

RSS के बौद्धिक वर्ग में संघ से जुड़े सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हुए। इस दौरान मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध था। बौद्धिक वर्ग में शामिल होने के लिए पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। कार्यक्रम में जाने से पहले सभी सदस्यों के मोबाइल बाहर जमा करा लिए गए थे।

रेलवे स्टेशन से मोहन भागवत कार्यक्रम के लिए रवाना होते हुए।

रेलवे स्टेशन से मोहन भागवत कार्यक्रम के लिए रवाना होते हुए।

RSS प्रमुख की सुरक्षा में 100 से अधिक जवान तैनात

गुरुवार को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के आगमन पर रेलवे स्टेशन से कोनी तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सरस्वती महाविद्यालय परिसर और आसपास 100 से अधिक जवान तैनात किए गए थे।

सुरक्षा व्यवस्था में एडिशनल एसपी पंकज पटेल, एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह, डीएसपी स्तर के अधिकारी और आधा दर्जन से अधिक निरीक्षक तैनात रहे।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 50 ट्रेनें कैंसिल:27 नवंबर से 17 दिसंबर तक नहीं चलेंगी गाड़ियां, MP-महाराष्ट्र-ओडिशा के यात्री होंगे परेशान

Published

on

बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 50 एक्सप्रेस ट्रेनों को 27 नवंबर से 17 दिसंबर 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों में कैंसिल किया गया है। वहीं, आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला तक ही चलेगी, जबकि उत्कल एक्सप्रेस का रूट बदल दिया गया है। इसके अलावा कई लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित होंगी। आजाद हिंद एक्सप्रेस 14 दिसंबर को 2 घंटे देरी से रवाना होगी।

रेलवे के झारसुगुड़ा पैसेंजर यार्ड में काम के चलते ये फैसला लिया गया है। इसका असर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के यात्रियों पर पड़ेगा।

साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला तक ही चलेगी

13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस: 28 नवंबर और 4 से 15 दिसंबर 2026 तक यह ट्रेन राउरकेला स्टेशन तक ही चलेगी। राउरकेला से दुर्ग के बीच ट्रेन रद्द रहेगी।

13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस: 29 नवंबर और 5 से 16 दिसंबर 2026 तक यह ट्रेन राउरकेला स्टेशन से ही रवाना होगी। दुर्ग से राउरकेला के बीच ट्रेन रद्द रहेगी।

आजाद हिंद एक्सप्रेस 2 घंटे देरी से चलेगी

14 दिसंबर 2026 को पुणे से रवाना होने वाली 12129 पुणे-हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस 2 घंटे की देरी से चलेगी। रेलवे ने अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले ट्रेन की सही स्थिति और समय की जानकारी रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा NTES या हेल्पलाइन नंबर 139 से जरूर ले लें, ताकि परेशानी से बचा जा सके।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

20 लाख लोन चुकाने टीचर और उसके बेटे की हत्या:महिला का गला घोंटा, लड़के का पत्थर से सिर फोड़ा, सहेली का पति गिरफ्तार

Published

on

सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी मृतका की सहेली का पति है। उसने 20 लाख रुपये का लोन लिया था। इसकी किस्त चुकाने के लिए टीचर से पैसे मांगे थे। मना करने पर उसने हत्या कर दी। बेटे को घर में उसके आने की जानकारी थी, इसलिए उसे भी मार डाला।

मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर के घर के बाथरूम में शैंपू की बोतल से उनके सिर पर वार किया। बेसुध होने पर गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे को सुनसान जगह ले जाकर सीमेंट के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी।

बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।

बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।

महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।

महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

बेटे का शव सड़क पर मिला

जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।

मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।

मां का शव बाथरूम में मिला

देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।

मौके पर डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाया गया।

मौके पर डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाया गया।

पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी

रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।

मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।

सहेली के पति पर गया शक

जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।

रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल ।

रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल ।

पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या

पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।

आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।

9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।

बाथरूम में गला दबाकर मार डाला

पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।

आरोपी प्रवेश कुमार

आरोपी प्रवेश कुमार

सबूत मिटाने बेटे को मार डाला

आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।

आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।

सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा

सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां ग्रामीण सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।

सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677