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छत्तीसगढ़

रायपुर : प्रशासन में एआई के प्रयोग से पारदर्शिता के साथ ही घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान हुआ संभव: सोनमणि बोरा

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जनजातीय विकास में एआई और नई तकनीकों की भूमिका पर हुआ मंथन

जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के तहत राज्य स्तरीय ऑनलाइन संगोष्ठी संपन्न

जनजातीय विकास में एआई और नई तकनीकों की भूमिका पर हुआ मंथन

रायपुर। जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 अंतर्गत आदिम जाति विकास विभाग अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आज राज्य स्तरीय एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में पद्मश्री अजय मंडावी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आदिम जाति विकास विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग से पारदर्शिता, समय की बचत एवं घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान संभव हुआ है। छत्तीसगढ़ जनजाति संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक के प्रयोग में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। 

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि एआई का प्रयोग पारंपरिक ज्ञान को संजोने, रिमोट एरिया में स्वास्थ्य सुधार, लघु वनोपजों एवं कृषि मंडियों के डिजिटलीकरण, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं की अधिक सुगमता से जानकारी एवं लाभ इत्यादि में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनजातीय विकास में एआई का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। परन्तु एआई मनुष्य की संवेदनशील मानसिकता की प्रतिकृती नहीं कर सकती है। अतः आवश्यकता एवं उपयोगिता के आधार पर जनजातीय क्षेत्र में एआई का प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सबसे दूर, सबसे पहले के ध्येय वाक्य को सार्थक करना है।
संगोष्ठी में पद्मश्री अजय मंडावी ने कांकेर जेल मे बंद नक्सल आदिवासियों पर किए जा रहे उनके कौशल विकास के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनमें से 08 कैदियों द्वारा वंदे मातरम पर किए गए कार्य को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। उन्होंने सरकार को इनकी प्रतिभा पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि यदि ईमानदारी के साथ कार्य किया जाए तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी से जनजातीय विकास के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। 
टीआरटीआई के संचालक श्रीमती हीना अनिमेष नेताम ने कार्यशाला के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर अपर संचालक संजय गौढ़, संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम मौजूद रही। वहीं वीडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास तथा परियोजना प्रशासक जुड़े थे। 
एनआईसी डायरेक्टर के सत्येश शर्मा ने संगोष्ठी में बताया कि यूज ऑफ टेक्नेलॉजी और सर्विस डिलवरी देना दोनों अलग-अलग तथ्य है और चुनौती भी है। उन्होंने बताया कि टेक्नेलॉजी के गुणवत्तायुक्त डाटा संग्रहण प्रमुख पहलु है। उन्होंने डेटा का वेरिफिकेशन करने के साथ-साथ डेटा की कमी को पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा का सलेक्शन सही नहीं होने पर सर्विस डिलवरी में भी समस्या आएगी। उन्होंने बताया कि अगर डेटा का इनपुट सही नहीं होने से परिणाम बायस्ड् आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि एआई मशीन में आएगा तो सारा डिसीजन मशीन ही लेने लगेगा और हमें रिप्लेस करने की कोशिश करना होगा। 
आईआईएम के अमित कुमार जनजातीय उद्यमिता एवं र्स्टाटअप में एआई का उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने एआई के प्रयोग में स्थानीय लेग्वेंज को सबसे बढ़ी बाधा बताया। उन्होंने वास्तविक परिणाम के लिए बोली-भाषा के ज्ञान पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों में टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक तथा अनेक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता हेतु शासकीय स्तर पर भी अभियान चलाने के सुझाव दिए। 
समर्थन संस्था से देवीदास निम्जे ने कहा कि यदि हम स्थानीय स्तर पर एक गांव की बात करें तो किसान को खेती के संबंध में सब कुछ पता होता है, किन्तु नई तकनीकी की जानकारी के अभाव में गांव के दो-तीन लोगों पर ही केन्द्रित होना पड़ता है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के लोगों विशेषकर टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करते हुए नेटवर्क बढ़ने पर बल दिया।
 एनआईटी के डॉ. राकेश त्रिपाठी ने संगोष्ठी में एआई से स्थानीय ज्ञान को बढ़ाने, ज्ञान सैद्धान्तिक इस्तेमाल करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा ज्ञान को सुदृढ़ कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एआई के माध्यम से अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। 
आईआईआईटी नवा रायपुर के डॉ. रामाकृष्ण ने ड्रॉपआउट और पास पर्सनल, क्वालिटी ऑफ टीचिंग और लर्निंग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा मेनटेन करने साथ-साथ आम आदमी तक टेक्नोलॉजी की पहंुच पर जोर दिया। उन्होंने एआई युजर को प्रोटेक्ट करने बायस्ड् इंफॉरमेशन न मिले इस पर भी अपना विचार व्यक्त किया। 
जनजातीय विशेषज्ञ अश्वनी कांगे ने “जनजातीय नेतृत्व आधारित सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर अपना वक्तव्य दिया गया। कांगे अंदरूनी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी की पहुंच पर जोर दिया उन्होंने कहा कि जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को एक टूल में बाधंना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग के हर पहलु जैसे बीजा पण्डुम, कृषि रस्मों-रिवाज में ज्ञान समाहित है, जिस पर वृहद रूप से चर्चा करने की आवश्कता है। 
संगोष्ठी अंतर्गत विशेषज्ञों के द्वारा मुख्य रूप से गुणवत्तायुक्त डॉटा के संकलन पर जोर दिया। विशेषज्ञों को मानना है कि किसी विषय पर जितना ज्यादा डेटा उपलब्ध होगा, उतनी ही विश्वसनीयता और सहजता के साथ एआई को डाटा विश्लेषण कर सही प्रमाण देने में ज्यादा सक्षम होगा।
साथ ही एआई की मदद से जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा स्वास्थ्यगत समस्याओं के निवारण में बेहतर कार्य होगा। क्योंकि अंतिम छोर में माने जाने वाले जनजातीय समुदाय से विकास की गति को प्रारंभ करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में उनके ज्ञान को मूल रूप में सहेजते हुए उनकेे विचारों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक मूल्यों और आधुनिक तकनीकों में सामंजस्य बना रहे। संगोष्ठी में शामिल अन्य विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

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कोरबा

06 नवम्बर को भगवान धनवंतरी जयंती पर प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय पाली में चिकित्सा शिविर का होगा आयोजन

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कोरबा/पाली। प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय पाली के संचालक एवं पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ वैद्यराज रामफल पटेल आरोग्य के देवता भगवान श्री धनवंतरी के अनंत उपासक हैं और उनकी कृपा से ही वैद्यराज रामफल पटेल क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा के माध्यम से हजारों लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात दिलाई।
इस वर्ष भी वैद्यराज रामफल पटेल 06 नवम्बर 2026 को आरोग्य के देवता भगवान श्री धनवंतरी जयंती पर पाली बस स्टैण्ड स्थित स्वयं की संस्थान प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय प्रांगण में विशाल आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन करने जा रहे हैं।
वैद्यराज श्री पटेल ने बताया कि भगवान श्री धनवंतरी विश्व के प्रथम चिकित्सक हैं और सनातन काल में वे देवताओं का ईलाज दुर्लभ जड़ी बुटियों से करते थे। कलयुग में कई गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने के लिए ही उन्होंने आयुर्वेद का निर्माण किया, जिसमें सभी रोगों का ईलाज बताया गया है। वैद्यराज रामफल पटेल ने बताया कि आरोग्य के देवता होने के कारण उनकी पूजा मात्र से ही लोगों को आरोग्य की प्राप्ति होती है।
शिविर के मुख्य अतिथि होंगे डॉ. पवन सिंह
06 नवम्बर को धनवंतरी जयंती पर पाली बस स्टैण्ड स्थित प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय परिसर में विशाल आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नाड़ी परीक्षण के साथ आवश्यक आयुर्वेद दवाईयों का वितरण किया जाएगा और विभिन्न बीमारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी और उनके निदान का उपाय भी वैद्यराज रामफल पटेल द्वारा बताया जाएगा।
इस चिकित्सा शिविर का शुभारंभ जिला पंचायत कोरबा अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह करेंगे।
वैद्यराज रामफल पटेल की अपील
वैद्यराज रामफल पटेल ने क्षेत्र के समस्त लोगों से अपील करते हुए चिकित्सा शिविर में शामिल होने का आग्रह किया है और चिकित्सा शिविर का लाभ उठाने की अपील की है। वैद्यराज रामफल पटेल ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से पुरानी से पुरानी बीमारी ठीक हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कैंसर जैसी लाईलाज बीमारी का ईलाज पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में संभव है।

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कोरबा

परियोजना पसान अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिका पद पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित

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कोरबा 04 नवंबर 2026। एकीकृत बाल विकास परियोजना पसान अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु आवेदन पत्र 11 नवंबर से 26 नवंबर 2026 तक आमंत्रित किये गये हैं।
एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय पसान से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पसान के आंगनबाड़ी केन्द्र बोकमुड़ी एवं ग्राम तनेरा के आंगनबाड़ी केन्द्र बिलासपुर मोहल्ला में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु आवेदन पत्र मंगाये गये हैं।
इच्छुक आवेदिका पोर्टल https://aww.e-bharti.in/  में पंजीयन कर आवेदन कर सकते हैं। निर्धारित तिथि के उपरांत प्राप्त होने वाले आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किया जायेगा।इस संबंध में अधिक जानकारी हेतु एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय पसान से संपर्क किया जा सकता है।

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कोरबा

बुधवारी मैदान के पास रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने के विवाद में दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष, सीएसईबी चौकी पुलिस की त्वरित कार्रवाई में दोनों पक्षों के 10 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

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  • रेत से भरे ट्रैक्टर को रोककर रेत खाली कराने की बात पर आधी रात को भिड़े थे दोनों गुट
  • ईंट-पत्थर, डंडे, बेल्ट एवं कड़े से एक-दूसरे पर किया गया था प्राणघातक हमला
  • दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर हत्या के प्रयास, बलवा सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर सभी आरोपियों को भेजा गया न्यायिक रिमांड पर

रेत खाली कराने की बात पर शुरू हुआ विवाद, दोनों पक्षों में हुई हिंसक झड़प

कोरबा। दिनांक 02 एवं 03 नवंबर 2026 की दरम्यानी रात बुधवारी दशहरा मैदान के पास रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने एवं रेत खाली कराने की बात को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर ईंट-पत्थर, डंडे, चमड़े के बेल्ट एवं अन्य वस्तुओं से हमला कर दिया, जिसमें कई लोगों को चोटें आईं।

दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर काउंटर मामला दर्ज

प्रथम पक्ष के प्रार्थी राजेन दास निवासी ढोढीपारा द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसके ट्रैक्टर चालक को यशवंत कश्यप उर्फ लक्की, संतोष चंद्रा एवं विक्रम कश्यप ने अपने साथियों के साथ रोककर रेत खाली करने की बात पर विवाद एवं गाली-गलौज की। चालक की सूचना पर जब राजेन दास अपने साथियों के साथ बुधवारी मैदान के पास पहुंचा, तो आरोपियों द्वारा एकजुट होकर ईंट-पत्थर, डंडा, चूड़ा एवं पंच से प्राणघातक हमला किया गया, जिससे राजेन दास सहित अन्य लोगों को चोटें आईं।

वहीं, द्वितीय पक्ष के प्रार्थी विक्रम कश्यप निवासी काशीनगर द्वारा भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि ट्रैक्टर से रेत खाली कराने की बात पर हुए विवाद के दौरान दीपक सिंह, सोहेब अहमद, गौरीलाल चौहान, पुरनदास महंत, आदित्य सिंघानिया, राजेन उर्फ राजेन्द्र दास एवं यश पाटले द्वारा एक राय होकर गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-मुक्का, चमड़े के बेल्ट एवं ईंट के टुकड़ों से हमला किया गया।

सीएसईबी चौकी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दोनों पक्षों के 10 आरोपी गिरफ्तार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सहायता केंद्र (चौकी) सीएसईबी, थाना सिविल लाइन रामपुर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर पृथक-पृथक अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

प्रथम पक्ष की रिपोर्ट पर धारा 109(1), 296, 115(2), 351(3), 126(2), 3(5) बीएनएस तथा द्वितीय पक्ष की रिपोर्ट पर धारा 296, 351(3), 115(2), 109(1), 191(2) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया।

पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के कुल 10 आरोपियों को दिनांक 03.11.2026 को विधिवत गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त ईंट का टुकड़ा एवं चमड़े का बेल्ट जप्त किया गया। सभी गिरफ्तार आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

गिरफ्तार आरोपी – प्रथम प्रकरण (03)

  1. यशवंत कश्यप उर्फ लक्की पिता संतोष कश्यप, उम्र 26 वर्ष, निवासी काशीनगर नीलगिरी के पास, थाना सिविल लाइन रामपुर, कोरबा।
  2. विक्रम कश्यप पिता संतोष कश्यप, उम्र 23 वर्ष, निवासी काशीनगर नीलगिरी के पास, थाना सिविल लाइन रामपुर, कोरबा।
  3. संतोष चंद्रा पिता हेमलाल चंद्रा, उम्र 29 वर्ष, निवासी बुधवारी बाजार बजरंग चौक, चौकी सीएसईबी, कोरबा।

गिरफ्तार आरोपी – द्वितीय प्रकरण (07)

  1. दीपक सिंह पिता स्व. अनिल सिंह, उम्र 32 वर्ष, निवासी 15 ब्लॉक, चौकी सीएसईबी, कोरबा।
  2. सोहेब अहमद पिता अंसार अली, उम्र 30 वर्ष, निवासी शारदा विहार मानिकपुर, थाना कोतवाली, कोरबा।
  3. गौरीलाल चौहान पिता बड़कू चौहान, उम्र 44 वर्ष, निवासी तुलसीनगर, थाना कोतवाली, कोरबा।
  4. पुरनदास महंत पिता स्व. महेशदास महंत, उम्र 44 वर्ष, निवासी पम्प हाउस, चौकी सीएसईबी, कोरबा।
  5. आदित्य सिंघानिया पिता संतोष सिंघानिया, उम्र 31 वर्ष, निवासी सर्वमंगला रोड पटेलपारा, थाना कोतवाली, कोरबा।
  6. राजेन उर्फ राजेन्द्र दास पिता स्व. खीकदास, उम्र 30 वर्ष, निवासी ढोढीपारा, चौकी सीएसईबी, कोरबा।
  7. यश पाटले पिता अनिकेत पाटले, उम्र 19 वर्ष, निवासी तुलसीनगर, थाना कोतवाली, कोरबा।

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा

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