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री-NEET रिजल्ट, तीसरा अटेंप्ट भी नहीं निकला, छात्रा का सुसाइड:छत्तीसगढ़ के शिप्रक और चार्वी स्टेट टॉपर, बोले-दूसरे एग्जाम जैसी ही परीक्षा थी

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रायपुर, एजेंसी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने री-NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। जगदलपुर में तीसरे अटेंप्ट में भी सफलता नहीं मिलने से परेशान एक 20 साल की छात्रा ने सुसाइड कर लिया है। बताया जा रहा है कि, इस बार भी चयन नहीं होने से वह मानसिक रूप से काफी परेशान थी। रिजल्ट देखने के बाद उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। मामला बोधघाट थाना क्षेत्र का है।

वहीं परीक्षा में छत्तीसगढ़ के रायपुर के शिप्रक गोयल और चार्वी अग्रवाल ने 99.99 परसेंटाइल हासिल किए हैं। दोनों को प्रदेश का संयुक्त स्टेट टॉपर घोषित किया गया है। शिप्रक गोयल ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 117 हासिल की है। वहीं, चार्वी अग्रवाल की ऑल इंडिया रैंक 136 रही। दोनों अभ्यर्थी अनारक्षित (UR) श्रेणी से हैं। समान परसेंटाइल होने के बावजूद टाई-ब्रेकिंग नियमों के कारण दोनों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग है।

अपने परिवार के साथ रायपुर के शिप्रक गोयल।

अपने परिवार के साथ रायपुर के शिप्रक गोयल।

यह दूसरे नॉर्मल परीक्षा की तरह ही

शिप्रक गोयल ने बताया कि, मैंने छत्तीसगढ़ में AIR-117 और रैंक 1 हासिल की। ​​मैं इस परीक्षा को किसी भी दूसरे नॉर्मल परीक्षा की तरह ही देखता हूं। अगर आप इसे कुछ बहुत खास समझते हैं, तो आप स्ट्रेस में आ जाएंगे और टेस्ट के दौरान गलतियां करेंगे।

8 से 10 घंटे पढ़ाई काफी

जहां तक मेरे पढ़ाई के घंटों की बात है, तो दिन में 16 घंटे पढ़ाई करने की जरूरत या खुद को थका देने तक काम करना पूरी तरह से घिसी-पिटी बातें हैं। मेरा मानना ​​है कि दिन में 8 से 10 घंटे पढ़ाई करना काफी है, बशर्ते आप इसे दो साल तक लगातार करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।

मुझे अपने परिवार और टीचरों से बहुत मोटिवेशन मिला

NEET री-एग्जाम और पेपर लीक पर कहा कि, NEET री-एग्जाम देना बुरा था, लेकिन असलियत को मानना ​​पड़ता है और काम पर वापस जाना पड़ता है। मुझे अपने परिवार और टीचरों से बहुत मोटिवेशन मिला, जो बहुत सपोर्टिव थे।

हमारे रेगुलर टेस्ट फिर से शुरू हो गए और दोस्तों से मिलने से मुझे अपनी एनर्जी वापस पाने में मदद मिली। डर जरूर था, लेकिन चिंता करने से कुछ नहीं होता। एग्जाम देना ही मेरे हाथ में है, आखिरी नतीजा भगवान पर है।

छत्तीसगढ़ के 45 हजार कैंडिडेट्स ने दी थी परीक्षा

छत्तीसगढ़ में इस परीक्षा में करीब 45 हजार कैंडिडेट्स शामिल हुए थे। पूरे प्रदेश में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जबकि रायपुर में 25 केंद्रों में परीक्षा हुई। NTA की गाइडलाइन के अनुसार कड़ी जांच के बाद स्टूडेंट्स को एंट्री दी गई थी।

ऐसे चेक करें स्कोरकार्ड

21 जून को आयोजित री-NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवार NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए एप्लिकेशन नंबर और पासवर्ड से लॉग इन करना होगा। लॉग इन के बाद स्कोरकार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।

परीक्षा शुल्क रिफंड की अंतिम तारीख बढ़ी

NTA ने 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क रिफंड की प्रक्रिया की अंतिम तारीख 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। शुल्क वापसी के लिए उम्मीदवारों को ऑनलाइन पोर्टल पर बैंक खाते की जानकारी दर्ज करनी होगी।

11.46 लाख उम्मीदवारों ने दी बैंक डिटेल

NTA के मुताबिक, अब तक 11.46 लाख उम्मीदवार अपने बैंक खाते की जानकारी जमा कर चुके हैं। जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक बैंक डिटेल नहीं दी है, वे 31 जुलाई तक यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

नहीं मिली सफलता, छात्रा ने किया सुसाइड

जानकारी के मुताबिक, जगदलपुर में आड़ावाल खासपारा निवासी सुरला हरिका राव नायडू (20) पिछले 3 सालों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। गुरुवार रात NEET परीक्षा का परिणाम जारी हुआ था। परिवार के लोगों के साथ भोजन करने के बाद वह अपने कमरे में चली गई और लैपटॉप पर रिजल्ट देख रही थी। देर रात करीब साढ़े तीन बजे उसकी मां कमरे में पहुंची तो दरवाजा खुला मिला।

अंदर जाकर देखा तो बेटी फंदे से लटकी हुई थी। परिजन तत्काल उसे नीचे उतारकर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

तीन साल से कर रही थी तैयारी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्रा डॉक्टर बनने का सपना लेकर लगातार NEET की तैयारी कर रही थी। उसने तीन बार परीक्षा दी, लेकिन हर बार सफलता नहीं मिली। इस साल भी परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आने से वह तनाव में थी। परीक्षा परिणाम और मानसिक दबाव को आत्महत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है।

पुलिस कर रही जांच, परिजनों के बयान दर्ज

प्रशिक्षु DSP सुमित चंद्रा ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शव का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का है। छात्रा NEET एग्जाम में पास नहीं हो पाई इसलिए तनाव में थी। परिजनों और करीबी लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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जांजगीर-चांपा की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत:2 ने इंदौर, तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ा

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इटारसी/जांजगीर-चांपा, एजेंसी। मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई। इंदौर के बेटमा थाना क्षेत्र में फूड पॉइजनिंग के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन 2 बच्चियों ने इंदौर और तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ दिया। तीनों एक ही परिवार की थीं।

बेटमा पुलिस के मुताबिक, तीनों बच्चियों की उम्र 10, 8 और 5 साल बताई गई है। इनमें से दो ने इंदौर में दम तोड़ा, जबकि तीसरी की तबीयत छत्तीसगढ़ ले जाते समय बिगड़ गई। उसे इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। तीनों बच्चियां मूल रूप से जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

रात में खाना खाने के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ी

परिजन के मुताबिक, पीथमपुर की एलएनटी कंपनी में कार्यरत नरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी अमरोतिन के परिवार ने रात करीब 2 बजे दाल, चावल, रोटी और सब्जी खाई थी। खाना खाने के तुरंत बाद उनकी तीनों बेटियों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।

तबीयत बिगड़ने पर बच्चियों को अस्पताल ले जाया गया। इंदौर के अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दो बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन दोनों के शव एंबुलेंस से पैतृक गांव जांजगीर-चांपा ले जाने के लिए रवाना हुए।

बिना पोस्टमॉर्टम कराए सौंप दिया गया शव

परिजन का आरोप है कि इंदौर के अस्पताल में दोनों बच्चियों के शवों को बिना पोस्टमॉर्टम कराए उन्हें सौंप दिया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में साथ मौजूद तीसरी बेटी की तबीयत भी बिगड़ गई। उसे रास्ते में इटारसी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मौत की वजह पोस्टमॉर्टम और बिसरा रिपोर्ट से होगी स्पष्ट

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। संदिग्ध फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि तीनों की तबीयत खाना खाने के तुरंत बाद बिगड़ी थी।

TI सौरभ पांडे ने बताया कि तीनों लड़कियों का पोस्टमॉर्टम इटारसी में किया जाएगा। इसके बाद, शव उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे। मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।

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पुलिस कस्टडी में मौत,CBI ने दर्ज की हत्या की FIR:सुप्रीम-कोर्ट ने 13 अक्टूबर से पहले मांगी जांच रिपोर्ट, रिश्तेदारों का दावा-36 घंटे तक पीटा

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में हुई मौत के मामले में अब CBI ने FIR दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद CBI ने यह कार्रवाई की है।

CBI ने 30 जुलाई 2026 को सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को अपनी जांच की मुख्य FIR माना है। इस मामले में CBI ने हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। फिलहाल CBI के दस्तावेजों में आरोपी के नाम की जगह अज्ञात व्यक्ति लिखा गया है।

जिम्मेदार अधिकारियों की भी हो रही जांच

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में है कि कहा कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई, CBI इसकी जांच करेगी। अगर जांच में कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश पर CBI के अधिकारी जांच कर रहे है। साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की।

कोर्ट के निर्देश पर CBI की टीम मामले की जांच कर रही है। साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, ग्राम मोहरा निवासी श्रवण सूर्यवंशी (35) खेती-किसानी करता था। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। इसके बाद 18 जनवरी को पुलिस ने 6 लीटर महुआ शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी का दावा किया।

पुलिस ने उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अगले दिन 20 जनवरी को जब परिजन उससे मिलने जेल पहुंचे, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

जेल पहुंचने के बाद बिगड़ी तबीयत, तीसरे दिन मौत

इस दौरान 21 जनवरी को जेल में अचानक श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उसका इलाज किया गया। इसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई।

जेल प्रबंधन के अनुसार, श्रवण को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले जेल अस्पताल और फिर सिम्स भेजा गया था। सिम्स पहुंचने के बाद देर रात उसकी मौत हो गई।

न्यायिक जांच में क्या सामने आया था ?

22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL रिपोर्ट समेत दूसरे दस्तावेजों की जांच की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रवण के शरीर में किसी तरह का रासायनिक जहर नहीं मिला था। मेडिकल जांच में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताई गई। जांच अधिकारी ने भी उपलब्ध दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर माना कि श्रवण की मौत सिर में लगी चोट की वजह से हुई थी।

पत्नी ने कहा- पुलिस श्रवण को लेकर गई थी

न्यायिक जांच में श्रवण की पत्नी लहराबाई सूर्यवंशी का बयान भी दर्ज किया गया। उसने बताया कि घटना के दिन थाना सीपत से पुलिसकर्मी श्रवण को अपने साथ लेकर गए थे। बाद में फोन से जानकारी मिली कि उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अगले दिन उसकी मौत की सूचना मिली। हालांकि, पत्नी ने यह भी कहा कि श्रवण की मौत कैसे हुई, इसकी उसे जानकारी नहीं थी।

श्रवण के पिता अमृतलाल ताम्र ने जांच में बताया कि 18 जनवरी की शाम करीब 6:30 बजे थाना सीपत की पुलिस उसे शराब के मामले में लेकर गई थी। 21 जनवरी की रात उन्हें सूचना मिली कि श्रवण को जेल से सिम्स अस्पताल भेजा गया है। अगले दिन सुबह करीब 6 बजे बेटे की मौत की जानकारी मिली।

13 अक्टूबर को रिपोर्ट पेश करेगी CBI

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। हालांकि, अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच के लिए पहुंची थी टीम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 अगस्त को CBI की टीम बिलासपुर पहुंची थी। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने से केस डायरी समेत अन्य जरूरी रिकॉर्ड हासिल किए।

इसके बाद टीम सेंट्रल जेल पहुंची, जहां जेल अधीक्षक और अन्य स्टाफ से पूछताछ कर घटना से जुड़ी जानकारी ली थी। CBI टीम केस डायरी और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच जारी है।

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त्रिकुंडा बांध में ग्रामीण को लीकेज ठीक करने उतारा, मौत:परिजन बोले- सिंचाई विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से गई जान, लाइफ जैकेट नहीं दी

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बलरामपुर, एजेंसी। बलरामपुर जिले के त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव में सिंचाई विभाग के जलाशय में लीकेज ठीक करने के दौरान 55 वर्षीय राजकुमार मरावी की डूबने से मौत हो गई। परिजनों ने सिंचाई विभाग के टाइमकीपर और चौकीदार पर राजकुमार को बिना लाइफ जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरण के करीब 22 फीट गहरे पानी में उतारने का आरोप लगाया है। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।

मामले में पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह और कांग्रेस नेता संतोष यादव ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

22 फीट गहरे पानी में उतरे मजदूर की डूबने से मौत

22 फीट गहरे पानी में उतरे मजदूर की डूबने से मौत

एक महीने से जलाशय में हो रहा था पानी का रिसाव

जानकारी के अनुसार, त्रिकुंडा जलाशय से पिछले करीब एक महीने से पानी का रिसाव हो रहा था। लीकेज को ठीक कराने के लिए सिंचाई विभाग के टाइमकीपर अनिल गुप्ता और चौकीदार अहमद अली मौके पर पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि जलाशय का निरीक्षण करने के बाद गांव के ही राजकुमार मरावी को काम के लिए बुलाया गया। परिजनों के मुताबिक, राजकुमार की तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने पहले जलाशय पर जाने से मना कर दिया था।

परिजनों का आरोप- बार-बार बुलाया, 5 हजार रुपए देने की बात कही

मृतक की बहू देवंती मरावी ने आरोप लगाया कि राजकुमार के मना करने के बावजूद उन्हें बार-बार लोगों को भेजकर बुलाया गया। परिजनों के अनुसार, पहले 500 रुपए, फिर 1000 रुपए और बाद में 5000 रुपए देने की बात कहकर उन्हें काम के लिए तैयार किया गया।

परिजनों का आरोप है कि इसके बाद राजकुमार को जलाशय के गहरे पानी में लीकेज ठीक करने के लिए उतारा गया।

बिना लाइफ जैकेट 22 फीट गहरे पानी में उतारने का आरोप

परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, राजकुमार को करीब 22 फीट गहरे पानी में बिना लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के उतारा गया था। कुछ देर बाद जब वह बाहर नहीं आए तो उनकी तलाश शुरू की गई।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस दौरान एक 15 वर्षीय बच्चे की कमर में रस्सी बांधकर उसे पानी में उतारा गया था। हालांकि बच्चा सुरक्षित बाहर निकल आया। घटना की सूचना पुलिस और एसडीआरएफ को दी गई। इसके बाद दोनों टीमों ने मौके पर पहुंचकर जलाशय में तलाश शुरू की।

अगले दिन नहर में मिला शव

राजकुमार की तलाश रात तक जारी रही। घटना के दूसरे दिन बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे उनका शव बांध की नहर में मिला। इसके बाद पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौके से चले गए। इसको लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है।

परिजन बोले- सुरक्षा इंतजाम होते तो बच सकती थी जान

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि जलाशय में जोखिम भरे काम के लिए राजकुमार को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि अगर उन्हें लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध कराए जाते तो हादसा टाला जा सकता था।

घटना के बाद ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के टाइमकीपर अनिल गुप्ता, चौकीदार अहमद अली और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पूर्व विधायक ने की एफआईआर की मांग

पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह और कांग्रेस नेता संतोष यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों और हादसे में जिम्मेदारी तय करने को लेकर जांच की मांग की जा रही है। घटना में सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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