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कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड:29 लड़ाकू विमानों ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन फॉर्मेशन बनाए, 90 मिनट की परेड में वंदे मातरम समेत 30 झाकियां

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नई दिल्ली,एजेंसी। देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया। राष्ट्रगान के बाद 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके बाद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

समारोह में पहली बार दो मुख्य अतिथि, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल हुए। 90 मिनट की परेड में अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की 30 झांकियां दिखाई गईं।

परेड में तीनों सेनाओं ने अपनी ताकत दिखाई। एयरफोर्स के राफेल, जगुआर, मिग 29, सुखोई समेत 29 एयरक्रॉफ्ट शामिल हुए। इन्होंने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन और प्रहार फॉर्मेशन बनाए।

सेनाओं ने मिसाइलें, बैटल एयरक्राफ्ट, नई बटालियन और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल घातक वेपन सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इनमें ब्रह्मोस और आकाश वेपन सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर सूर्यास्त्र, मेन बैटल टैंक अर्जुन और स्वदेशी मिलिट्री प्लेटफार्मों और हार्डवेयर की सीरीज शामिल थीं।

पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।

90 मिनट की परेड

राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू सुबह 10:30 बजे बग्घी में राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ के लिए रवाना हुईं। मुख्य अतिथि एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी साथ थे।

राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू सुबह 10:30 बजे बग्घी में राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ के लिए रवाना हुईं। मुख्य अतिथि एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी साथ थे।

राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू अपने काफिले के साथ कर्तव्य पथ पर पहुंचीं। यहां उनका स्वागत पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति ने किया।

राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू अपने काफिले के साथ कर्तव्य पथ पर पहुंचीं। यहां उनका स्वागत पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति ने किया।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया।

पीएम मोदी ने मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया।

पीएम मोदी ने मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया।

पीएम मोदी ने मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का स्वागत किया।

पीएम मोदी ने मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का स्वागत किया।

पीएम मोदी ने उर्सुला को परेड की झाकियों के बारे में बताया। साथ में एंटोनियो कोस्टा।

पीएम मोदी ने उर्सुला को परेड की झाकियों के बारे में बताया। साथ में एंटोनियो कोस्टा।

ध्वज फॉर्मेशन में 129 हेलिकॉप्टर यूनिट के 4 Mi-17 1V हेलिकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हुए पुष्पवर्षा की।

ध्वज फॉर्मेशन में 129 हेलिकॉप्टर यूनिट के 4 Mi-17 1V हेलिकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हुए पुष्पवर्षा की।

एयरक्राफ्ट ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन फॉर्मेशन बनाए

वज्रांग फॉर्मेशन में 6 राफेल एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया। इन्होंने अंबाला एयरबेस से उड़ान भरी थी।

वज्रांग फॉर्मेशन में 6 राफेल एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया। इन्होंने अंबाला एयरबेस से उड़ान भरी थी।

IAF के दो राफेल, दो सुखोई, दो मिग-29 और एक जगुआर फाइटर एयरक्राफ्ट ने सिंदूर फॉर्मेशन बनाया।

IAF के दो राफेल, दो सुखोई, दो मिग-29 और एक जगुआर फाइटर एयरक्राफ्ट ने सिंदूर फॉर्मेशन बनाया।

अर्जन फॉर्मेशन में एक C-130 विमान लीड में और दो C-295 विमान 'विक्ट्री' फॉर्मेशन में एक साथ उड़ रहे थे।

अर्जन फॉर्मेशन में एक C-130 विमान लीड में और दो C-295 विमान ‘विक्ट्री’ फॉर्मेशन में एक साथ उड़ रहे थे।

फ्लाई पास्ट में सुखोई, C295 समेत 29 एयरक्राफ्ट ने वरुण, अर्जन, सिंदूर फॉर्मेशन बनाए। इन विमानों ने चंडीगढ़ से उड़ान भरी। वज्रांग फॉर्मेशन में 6 राफेल नजर आए। अर्जन फॉर्मेशन C295 एयरक्राफ्ट के जरिए बनाया गया।

IAF के दो राफेल, दो सुखोई, दो मिग-29 और एक जगुआर फाइटर एयरक्राफ्ट ने सिंदूर फॉर्मेशन बनाया। यह डिजाइन सिर्फ एयरोडायनामिक्स नहीं बल्कि भावना, परंपरा और संदेश को ध्यान में रखकर तय की गई। सिंदूर फॉर्मेशन आसमान में तिलक की तरह नजर आया।

परेड में राज्यों की 30 झाकियां, 2,500 कलाकार शामिल

देश में अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की 30 से ज्यादा झाकियां शामिल हुईं। इनमें 2,500 कलाकार शामिल हुए।

असम की झांकी से शुरुआत हुई। इसमें धुबरी जिले के आशारिकांडी गांव के प्रसिद्ध मिट्टी के कलाकारों को सम्मान दिया गया।

असम की झांकी से शुरुआत हुई। इसमें धुबरी जिले के आशारिकांडी गांव के प्रसिद्ध मिट्टी के कलाकारों को सम्मान दिया गया।

उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक यूपी की प्रगति दिखाई गई।

उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक यूपी की प्रगति दिखाई गई।

77वें गणतंत्र दिवस की थीम- वंदे मातरम

इस बार 77वें गणतंत्र दिवस की थीम वंदे मातरम थी। वजह-राष्ट्रगान वंदे मातरम को 150 साल पूरे हुए थे।

संस्कृति मंत्रालय ने 'वंदे मातरम' थीम पर झांकी पेश की।

संस्कृति मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम’ थीम पर झांकी पेश की।

गणतंत्र दिवस परेड खत्म होने के बाद पीएम मोदी कुछ देर पैदल चले और लोगों का अभिवादन किया।

गणतंत्र दिवस परेड खत्म होने के बाद पीएम मोदी कुछ देर पैदल चले और लोगों का अभिवादन किया।

वॉर मेमोरियल पर पीएम की श्रद्धांजलि की तस्वीरें…

पीएम मोदी सोमवार सुबह सबसे पहले नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे। शहीदों को सैल्यूट किया और दो मिनट का मौन रखा।

पीएम मोदी सोमवार सुबह सबसे पहले नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे। शहीदों को सैल्यूट किया और दो मिनट का मौन रखा।

पीएम मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल की डिजिटल साइन बुक में नोट लिखा। यहां वे 10 मिनट रहे।

पीएम मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल की डिजिटल साइन बुक में नोट लिखा। यहां वे 10 मिनट रहे।

परेड देखने राहुल गांधी-मल्लिकार्जुन खड़गे भी पहुंचे

शिवराज सिंह के पीछे तीसरी पंक्ति में बैठे राहुल गांधी। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी थे।

PM मोदी दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों के पास पहुंचे

परेड खत्म होने के बाद पीएम मोदी गैलरी में बैठे लोगों से मिलने के लिए पहुंचे। इस बीच लोग मोदी-मोदी कहते दिखाई दिए।

इसके बाद वे गाड़ी में बैठकर लोगों का अभिवादन करते हुए कर्तव्य पथ से रवाना हो गए।

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‘चंपत राय बेदाग-निष्कलंक, उनका भोलापन मुसीबत बना’:उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की – महासचिव गोविंद देव गिरि

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अयोध्या, एजेंसी। ‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’

‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’

ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।

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36,000km से तस्वीरें लेने वाला पहला भारतीय सैटेलाइट लॉन्च:पाकिस्तान-चीन पर लगातार नजर रखेगा, आपदा से पहले अलर्ट में मदद करेगा

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श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।

EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।

EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।

सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।

सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।

GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।

GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।

ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05

GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।

EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।

वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।

दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी

EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।

इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।

EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।

2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल

अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।

GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।

ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए

PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।

PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।

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श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो प्लेन पोल से टकराया:पार्किंग में ले जाते वक्त हादसा, अगला हिस्सा टूटा, यात्री सुरक्षित

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श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।

विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।

घटना से जुड़ी तस्वीरें…

खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।

खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।

विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।

विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।

पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…

  • विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
  • संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
  • पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
  • VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
  • विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
  • VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
  • विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।

आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।

विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है

विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।

विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।

टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।

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