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छत्तीसगढ़

कान्स फिल्म फेस्टिवल में छाई ‘RJ बस्तर’:’स्पेशल स्क्रीनिंग’ में दिखी मुश्किलों से लड़ती आदिवासी युवती के सपनों की कहानी, चंदन रॉय लीड रोल में

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘RJ बस्तर’ ने 79वें कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में खास पहचान बनाई है। कान्स में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। इस दौरान दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ इसका स्वागत किया। भावुक कहानी और मजबूत मैसेज के कारण फिल्म को खूब पसंद किया गया।

फिल्म का निर्देशन मनीष माणिकपुरी ने किया है, जबकि इसे पीकेएस प्रोडक्शन के बैनर तले पवन कुमार सिंह ने प्रोड्यूस किया है। पंचायत फेम चंदन रॉय मुख्य भूमिका में है।

फिल्म बस्तर की एक आदिवासी लड़की की कहानी दिखाती है, जो मुश्किल हालात और साधनों की कमी के बावजूद रेडियो जॉकी बनने का सपना देखती है। कहानी में संघर्ष, हिम्मत और सपनों को पूरा करने की जिद को बेहद सरल और असरदार तरीके से दिखाया गया है।

एक्टर चंदन रॉय ने कहा कि बेहद खुशी हो रही कि हमारी फिल्म RJ बस्तर कान्स में प्रदर्शित हो रही है। ये फिल्म छत्तीसगढ़ी में बनी है। जल्द ही फिल्म आप लोगों के बीच होगी। ये फिल्म जरूर आपका दिल जीतने में कामयाब होगी।

कान्स में मिली तारीफ के बाद अब फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ गया है।

कान्स में मिली तारीफ के बाद अब फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ गया है।

कान्स में दर्शकों ने की जमकर तारीफ

कान्स फिल्म फेस्टिवल में मौजूद दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों ने फिल्म की जमकर तारीफ की। खासकर गांव और आदिवासी जीवन के सच्चे चित्रण को लोगों ने काफी पसंद किया।

फिल्म को भारत के दूरदराज इलाकों की अनसुनी कहानियों को दुनिया के सामने लाने वाला सच्चा आईना बताया गया

फिल्म के निर्देशक मनीष माणिकपुरी ने स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

फिल्म के निर्देशक मनीष माणिकपुरी ने स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

चंदन रॉय समेत कई कलाकारों ने निभाई अहम भूमिका

फिल्म में ‘पंचायत’ वेब सीरीज से लोकप्रिय हुए चंदन रॉय मुख्य भूमिका में नजर आए हैं। उनके साथ चित्राशी रावत, नेहा साहू, हर्ष राजपूत, संजय महानंद, सुनील तिवारी, पुष्पेंद्र सिंह, पवन कुमार गुप्ता, संगीता निषाद, आरती नागरे, अनुनेय शर्मा और आशीष झा ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं।

फिल्म के गानों को शान, कृष्णा बेओरा और अनुराग शर्मा ने आवाज दी है।

फिल्म बस्तर के कई इलाकों और रायपुर में शूट हुई है।

फिल्म बस्तर के कई इलाकों और रायपुर में शूट हुई है।

रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर बढ़ा उत्साह

‘आरजे बस्तर’ को एक ऐसी फिल्म माना जा रहा है, जो गांव और आदिवासी युवाओं के सपनों और संघर्ष की आवाज बनकर सामने आई है। कान्स में मिली तारीफ के बाद अब फिल्म की रिलीज से पहले दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ गया है।

जानिए कान्स में ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’ का मतलब

कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में किसी फिल्म की ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’ का मतलब होता है कि उस फिल्म को फेस्टिवल के चयनित कार्यक्रम में ऑफिशियल तौर पर दिखाया जा रहा है, लेकिन वह मेन कॉम्पिटिशन में अवॉर्ड के लिए नहीं होती।

यह एक तरह का प्रतिष्ठित प्रदर्शन मंच है, जहां दुनिया भर के फिल्म क्रिटिक्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, प्रोड्यूसर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मीडिया मौजूद रहते हैं।

एक नजर कांस के बेहतरीन इतिहास पर-

हिटलर की तानाशाही के खिलाफ शुरू हुआ कांस

1938 में वेनिस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत की गई थी, लेकिन उस समय जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर और इटली के तानाशाह मुसोलिनी अपने पसंदीदा लोगों को अवॉर्ड बांट देते थे। इनकी तानाशाही से परेशान होकर कई ज्यूरी मेंबर ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल छोड़ दिया और एक फ्री फेस्टिवल शुरू करने का फैसला किया, जिसकी लोकेशन कांस, पेरिस तय हुई।

फ्रेंच सरकार ने उसके दस्तावेजों पर साइन कर उसे ऑफिशियल कांस फिल्म फेस्टिवल घोषित कर दिया। पहला फिल्म फेस्टिवल 1-20 सितंबर 1939 को होना था। एक दिन पहले गाला नाइट रखी गई, लेकिन 1 सितंबर को फेस्टिवल शुरू हुआ तो हिटलर द्वारा पौलेंड पर हमला करने से सेरेमनी में हंगामा मच गया और सेरेमनी 10 दिनों के लिए टालनी पड़ी।

माहौल सुधरने के बदले और बिगड़ गए जब फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के बीच युद्ध का ऐलान हुआ। दूसरे विश्व युद्ध से कांस फिल्म फेस्टिवल 6 सालों तक टला था।

वर्ल्ड वॉर 2 से 6 साल के इंतजार के बाद पहली सेरेमनी 20 सितंबर- 5 अक्टूबर 1946 को हुई, जिसमें 20 देशों ने हिस्सा लिया। 1947 में मैनेजमेंट खराब होने पर महज 16 देशों ने हिस्सा लिया।

अगले साल 1948 में बजट की कमी के कारण सेरेमनी हुई ही नहीं। 1949 में फिर इवेंट मैनेजमेंट से लोग निराश हुए। 1950 में खर्च न उठा पाने पर फिर फिल्म फेस्टिवल हुआ ही नहीं। 1951 से लेकर अब तक सिर्फ कोरोना महामारी के चलते 2020 में सेरेमनी रद्द की गई थी।

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कोरबा

कोरबा-रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस अब रोज दौड़ेगी:दो ट्रेनों का हुआ विलय, 1 अगस्त से एक ही नंबर 18249/18250 से मिलेगा दैनिक सफर

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बिलासपुर/कोरबा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर जोन ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए हसदेव एक्सप्रेस की सेवाओं का विलय कर इसे प्रतिदिन संचालित करने का निर्णय लिया है। अब ट्रेन संख्या 18249/18250 कोरबा-रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस 1 अगस्त से रोजाना चलेगी

अब तक 18249/18250 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में चार दिन और 18251/18252 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन संचालित होती थी। रेलवे ने दोनों सेवाओं का विलय कर एक ही ट्रेन नंबर के साथ इसे दैनिक कर दिया है।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी सुविधा

रेलवे के इस निर्णय से यात्रियों को अब अलग-अलग ट्रेन नंबर और उनके संचालन के दिन याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। 18249/18250 हसदेव एक्सप्रेस के प्रतिदिन चलने से यात्रा की योजना बनाना पहले की तुलना में अधिक आसान और सुविधाजनक होगा।

15 आधुनिक एलएचबी कोच के साथ चलेगी ट्रेन

रेलवे के अनुसार, दैनिक संचालन के दौरान हसदेव एक्सप्रेस में कुल 15 आधुनिक एलएचबी (LHB) कोच लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी।

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छत्तीसगढ़

चर्चित अफीम कांड में 939 पन्नों का चालान पेश:143 दिन की जांच पूरी, 8 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट, 79 गवाह बनाए गए

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। दुर्ग के बहुचर्चित अफीम खेती मामले में जेवरा सिरसा पुलिस ने 143 दिन की जांच पूरी करने के बाद गुरुवार को कोर्ट में 939 पन्नों की चार्जशीट पेश की। इस मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों को आरोपी बनाया गया है।

वहीं दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस ने इस केस में 79 लोगों को गवाह बनाया है। इनमें पुलिस, नारकोटिक्स, एफएसएल, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।

पुलिस ने जिन 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें विकास विश्नोई, विनायक ताम्रकार, मनीष ठाकुर, छोटूराम, रणछोड़ राम, सुनील देवासी, मदरूपा राम और सुखाराम के नाम शामिल हैं। वहीं, अचला राम और श्रवण विश्नोई अब भी फरार हैं।

दोनों पर 3-3 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस ने निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। अब मामले की सुनवाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और सबूत मामले में अहम भूमिका निभाएंगे।

दुर्ग के समोदा में मिली थी अफीम की खेती।

दुर्ग के समोदा में मिली थी अफीम की खेती।

चार्जशीट में 79 गवाह शामिल

पुलिस ने चार्जशीट में कुल 79 गवाहों को शामिल किया है। इनमें नारकोटिक्स विभाग के एक टीआई और एक एसआई, एफएसएल की वैज्ञानिक, तहसीलदार, तीन एएसआई, दो एसआई, तीन प्रधान आरक्षक, दो महिला आरक्षक और 14 आरक्षक शामिल हैं।

इसके अलावा जिस जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी, उससे जुड़े आवेदन और शपथ पत्र भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाए गए हैं। रायपुर निवासी प्रीतिबाला और मधुमति ताम्रकार से संबंधित दस्तावेज भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।

6 मार्च को हुआ था मामले का खुलासा

मामले का खुलासा 6 मार्च 2026 को हुआ, जब पुलिस को ग्राम समोदा में अवैध अफीम की खेती होने की सूचना मिली। इसके बाद सीएसपी कार्यालय के नेतृत्व में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), एफएसएल, राजस्व और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई।

अगले दिन टीम खेत पर पहुंची, जहां एफएसएल की जांच में पुष्टि हुई कि वहां अफीम की खेती की गई थी।

मक्के की फसल के बीच उगाई गई थी अफीम

जांच में पता चला कि करीब 5.609 एकड़ जमीन पर मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि किसी को संदेह न हो। मौके से विकास विश्नोई को हिरासत में लिया गया। उसकी पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।

एनसीबी की गाइडलाइन के अनुसार खेत का आकलन किया गया, जिसमें 14 लाख 30 हजार 100 अफीम के पौधे मिले। इनका अनुमानित वजन करीब 62 हजार किलोग्राम आंका गया। वहीं खेत के पास से 66.33 किलोग्राम अफीम डोडा भी बरामद किया गया।

पूछताछ में सामने आया पूरा नेटवर्क

पूछताछ के दौरान विकास विश्नोई ने विनायक ताम्रकार, मनीष ठाकुर, श्रवण विश्नोई और अचला राम के साथ मिलकर अफीम की खेती करने की बात स्वीकार की।

इसके बाद पुलिस ने विनायक ताम्रकार और मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान अफीम, अफीम के बीज, खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, हिसाब-किताब के रजिस्टर, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ट्रैक्टर, जेसीबी, हार्वेस्टर, मोटरसाइकिल, सिंचाई पंप, स्प्रिंकलर और सीसीटीवी कैमरे समेत कई सामान जब्त किए गए।

साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अफीम डोडा के कारोबार से जुड़े पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस कोर्ट में अपने गवाह और सबूत पेश करेगी।

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छत्तीसगढ़

उमेश पटेल का समर्थन करने पर कांग्रेस नेता को नोटिस:पूर्व अध्यक्ष को प्रभारी-महामंत्री ने दिया नोटिस, PCC अध्यक्ष पद की पोस्ट बनी विवाद की वजह

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC) के पद को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली दौरे से वरिष्ठ नेताओं के लौटने के बाद सोशल मीडिया पर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी।

पोस्ट में उन्होंने वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के नेतृत्व का समर्थन करते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की थी। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।

कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

पार्टी ने पोस्ट को माना अनुशासनहीनता

प्रदेश कांग्रेस संगठन ने सोशल मीडिया पर की गई इस सार्वजनिक पोस्ट को पार्टी अनुशासन के विपरीत माना है। संगठन का कहना है कि इस तरह की पोस्ट पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया का उल्लंघन करती है और इससे संगठन की छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी के चलते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री ने पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस नेता अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी।

कांग्रेस नेता अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी।

तीन दिन में मांगा जवाब

नोटिस में अरुण मालाकार से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने या जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस जारी करके तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।

नोटिस जारी करके तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।

नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज

प्रदेश कांग्रेस में नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच कई नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अलग-अलग नेताओं के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं।

अरुण मालाकार को नोटिस जारी होने के बाद इसे संगठन की ओर से पार्टी अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस तरह के मामलों पर कांग्रेस संगठन और सख्त रुख अपना सकता है।

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