शिवरीनारायण। छत्तीसगढ़ की पावन धरती अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं के लिए देशभर में विशेष पहचान रखती है। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है, शिवरीनारायण। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा यह नगर केवल एक धार्मिक तीर्थ ही नहीं, बल्कि संस्कृति, स्थापत्य कला, इतिहास और पर्यटन का अद्भुत केंद्र भी है। सदियों से यह स्थान वैष्णव परंपरा, रामायणकालीन मान्यताओं और लोक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।
शिवरीनारायण का उल्लेख छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान के रूप में किया जाता है। यह नगर विभिन्न राजवंशों की कला, स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए है। यहां के मंदिरों की भव्यता, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और धार्मिक मान्यताएं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
रामायणकालीन आस्था से जुड़ा शिवरीनारायण
शिवरीनारायण का संबंध रामायणकालीन घटनाओं से भी माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार यह वही पावन भूमि है जहां माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक जूठे बेर खिलाए थे। कहा जाता है कि शबरी की तपोभूमि होने के कारण इस स्थान का नाम शबरीनारायण पड़ा, जो समय के साथ शिवरीनारायण के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां स्थित शबरी देवी मंदिर आज भी भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। इस पावन स्थल की विशेषता यह है कि यहां केवल वैष्णव परंपरा ही नहीं, बल्कि शैव, जैन और बौद्ध संस्कृतियों का भी अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन गया है।
नर नारायण मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण
शिवरीनारायण का सबसे प्रमुख आकर्षण नर नारायण मंदिर है। लगभग बारहवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा शबर ने करवाया था। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान नारायण की अत्यंत सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जो खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। इसके समीप लक्ष्मण की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान विष्णु के दस अवतारों, नवग्रहों तथा विभिन्न देवी-देवताओं का अत्यंत आकर्षक चित्रण मंदिर की कला को विशिष्ट बनाता है। प्रवेश द्वार पर गंगा, यमुना और सरस्वती की मूर्तियों के साथ नाग, कच्छप और मगर जैसे प्रतीकों का अंकन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक दर्शन को दर्शाता है। मंदिर परिसर में स्थित स्तंभों पर की गई कलाकारी मध्यकालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है। यही कारण है कि नर नारायण मंदिर इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और कला प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
केशव नारायण मंदिर की भव्यता
नर नारायण मंदिर के सामने स्थित केशव नारायण मंदिर भी अपनी भव्यता और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। बारहवीं शताब्दी के इस मंदिर में भगवान विष्णु की अत्यंत प्राचीन और दिव्य प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की संरचना, स्तंभों पर उकेरी गई चित्रकारी तथा पत्थरों पर की गई नक्काशी इसकी कलात्मक समृद्धि को दर्शाती है। मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों का सुंदर चित्रण किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की महान परंपरा से भी परिचित होते हैं।
शबरी देवी मंदिर – भक्ति और समर्पण का प्रतीक
भगवान विष्णु के चरणों के समीप जिस स्त्री की प्रतिमा अंकित है, उसे माता शबरी का स्वरूप माना जाता है। पंचरत्न शैली में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बना एक सुंदर और प्राचीन मंदिर है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर विष्णु के चौबीस अवतारों का चित्रण इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और निष्कपट प्रेम का प्रतीक भी है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता शबरी की अटूट भक्ति को स्मरण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
चंद्रचूड़ महादेव और जगन्नाथ मंदिर
नर नारायण मंदिर के समीप स्थित चंद्रचूड़ महादेव मंदिर शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र है। चेदि संवत 919 में निर्मित यह मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। यहां प्राप्त कलचुरी कालीन शिलालेख इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। वहीं वर्ष 1927 में निर्मित जगन्नाथ मंदिर अपनी विशिष्ट संरचना और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के समीप स्थित विशाल वटवृक्ष को ‘कल्पवट’ या ‘माधव कटोरा’ कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसके पत्ते दोने के आकार के दिखाई देते हैं। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जो लगभग पंद्रह दिनों तक चलता है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
त्रिवेणी संगम: प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम दृश्य
शिवरीनारायण की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां का त्रिवेणी संगम। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों का संगम इस नगर को आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान करता है। संगम का स्वच्छ और शांत वातावरण पर्यटकों को अत्यंत आकर्षित करता है। नदियों के किनारे फैले खेत, हरियाली और शांत परिवेश प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय संगम का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। धार्मिक स्नान, पूजा-अर्चना और नौकायन जैसी गतिविधियां यहां के पर्यटन को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर: आस्था का प्राचीन केंद्र
शिवरीनारायण में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सिरपुर के सोमवंशी राजाओं ने करवाया था। मंदिर में प्राप्त शिलालेखों में तत्कालीन शासकों का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक बढ़ाते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित अद्भुत शिवलिंग को लेकर अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लोककथाओं के अनुसार लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते समय लक्ष्मण किसी रोग से पीड़ित हो गए थे। तब उन्होंने यहां भगवान शंकर की आराधना कर सवा लाख शिवलिंग स्थापित किए और रोगमुक्त हुए। आज भी श्रद्धालु यहां सवा लाख चावल के दाने अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
आसपास के धार्मिक स्थल
शिवरीनारायण के आसपास का प्राचीन शिव मंदिर भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां भगवान शिव की विशाल प्रतिमा की पूजा ‘दूल्हादेव’ के रूप में की जाती है। शिव के साथ शक्ति और कंकालिन देवी की पूजा ग्राम देवी के रूप में होती है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में स्थित अनेक छोटे-बड़े मंदिर और ऐतिहासिक स्थल इस पूरे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं रखते हैं।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
शिवरीनारायण केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन विकास का भी महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, परिवहन और रोजगार को नई गति मिलती है। धार्मिक मेलों और उत्सवों के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है, जिससे लोककला और लोकसंस्कृति को भी संरक्षण मिलता है।
सांस्कृतिक विरासत एवं समानता का जीवंत प्रतीक
शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और स्थापत्य वैभव का अद्भुत संगम है। यहां की प्राचीन परंपराएं, मंदिरों की भव्यता, त्रिवेणी संगम का शांत वातावरण और रामायणकालीन मान्यताएं इस स्थल को विशेष बनाती हैं। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और अध्यात्म की जीवंत विरासत है। शिवरीनारायण आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक गौरव और प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकता। यही कारण है कि शिवरीनारायण आज भी छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
कोरबा/पाली। प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय पाली के संचालक एवं पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ वैद्यराज रामफल पटेल आरोग्य के देवता भगवान श्री धनवंतरी के अनंत उपासक हैं और उनकी कृपा से ही वैद्यराज रामफल पटेल क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा के माध्यम से हजारों लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात दिलाई। इस वर्ष भी वैद्यराज रामफल पटेल 06 नवम्बर 2026 को आरोग्य के देवता भगवान श्री धनवंतरी जयंती पर पाली बस स्टैण्ड स्थित स्वयं की संस्थान प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय प्रांगण में विशाल आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन करने जा रहे हैं। वैद्यराज श्री पटेल ने बताया कि भगवान श्री धनवंतरी विश्व के प्रथम चिकित्सक हैं और सनातन काल में वे देवताओं का ईलाज दुर्लभ जड़ी बुटियों से करते थे। कलयुग में कई गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने के लिए ही उन्होंने आयुर्वेद का निर्माण किया, जिसमें सभी रोगों का ईलाज बताया गया है। वैद्यराज रामफल पटेल ने बताया कि आरोग्य के देवता होने के कारण उनकी पूजा मात्र से ही लोगों को आरोग्य की प्राप्ति होती है। शिविर के मुख्य अतिथि होंगे डॉ. पवन सिंह 06 नवम्बर को धनवंतरी जयंती पर पाली बस स्टैण्ड स्थित प्रज्ञा संजीवनी-वन औषधालय परिसर में विशाल आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नाड़ी परीक्षण के साथ आवश्यक आयुर्वेद दवाईयों का वितरण किया जाएगा और विभिन्न बीमारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी और उनके निदान का उपाय भी वैद्यराज रामफल पटेल द्वारा बताया जाएगा। इस चिकित्सा शिविर का शुभारंभ जिला पंचायत कोरबा अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह करेंगे। वैद्यराज रामफल पटेल की अपील वैद्यराज रामफल पटेल ने क्षेत्र के समस्त लोगों से अपील करते हुए चिकित्सा शिविर में शामिल होने का आग्रह किया है और चिकित्सा शिविर का लाभ उठाने की अपील की है। वैद्यराज रामफल पटेल ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से पुरानी से पुरानी बीमारी ठीक हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कैंसर जैसी लाईलाज बीमारी का ईलाज पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में संभव है।
कोरबा 04 नवंबर 2026। एकीकृत बाल विकास परियोजना पसान अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु आवेदन पत्र 11 नवंबर से 26 नवंबर 2026 तक आमंत्रित किये गये हैं। एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय पसान से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पसान के आंगनबाड़ी केन्द्र बोकमुड़ी एवं ग्राम तनेरा के आंगनबाड़ी केन्द्र बिलासपुर मोहल्ला में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु आवेदन पत्र मंगाये गये हैं। इच्छुक आवेदिका पोर्टल https://aww.e-bharti.in/ में पंजीयन कर आवेदन कर सकते हैं। निर्धारित तिथि के उपरांत प्राप्त होने वाले आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किया जायेगा।इस संबंध में अधिक जानकारी हेतु एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय पसान से संपर्क किया जा सकता है।
बुधवारी मैदान के पास रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने के विवाद में दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष, सीएसईबी चौकी पुलिस की त्वरित कार्रवाई में दोनों पक्षों के 10 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
रेत से भरे ट्रैक्टर को रोककर रेत खाली कराने की बात पर आधी रात को भिड़े थे दोनों गुट
ईंट-पत्थर, डंडे, बेल्ट एवं कड़े से एक-दूसरे पर किया गया था प्राणघातक हमला
दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर हत्या के प्रयास, बलवा सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर सभी आरोपियों को भेजा गया न्यायिक रिमांड पर
रेत खाली कराने की बात पर शुरू हुआ विवाद, दोनों पक्षों में हुई हिंसक झड़प
कोरबा। दिनांक 02 एवं 03 नवंबर 2026 की दरम्यानी रात बुधवारी दशहरा मैदान के पास रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने एवं रेत खाली कराने की बात को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर ईंट-पत्थर, डंडे, चमड़े के बेल्ट एवं अन्य वस्तुओं से हमला कर दिया, जिसमें कई लोगों को चोटें आईं।
दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर काउंटर मामला दर्ज
प्रथम पक्ष के प्रार्थी राजेन दास निवासी ढोढीपारा द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसके ट्रैक्टर चालक को यशवंत कश्यप उर्फ लक्की, संतोष चंद्रा एवं विक्रम कश्यप ने अपने साथियों के साथ रोककर रेत खाली करने की बात पर विवाद एवं गाली-गलौज की। चालक की सूचना पर जब राजेन दास अपने साथियों के साथ बुधवारी मैदान के पास पहुंचा, तो आरोपियों द्वारा एकजुट होकर ईंट-पत्थर, डंडा, चूड़ा एवं पंच से प्राणघातक हमला किया गया, जिससे राजेन दास सहित अन्य लोगों को चोटें आईं।
वहीं, द्वितीय पक्ष के प्रार्थी विक्रम कश्यप निवासी काशीनगर द्वारा भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि ट्रैक्टर से रेत खाली कराने की बात पर हुए विवाद के दौरान दीपक सिंह, सोहेब अहमद, गौरीलाल चौहान, पुरनदास महंत, आदित्य सिंघानिया, राजेन उर्फ राजेन्द्र दास एवं यश पाटले द्वारा एक राय होकर गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-मुक्का, चमड़े के बेल्ट एवं ईंट के टुकड़ों से हमला किया गया।
सीएसईबी चौकी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दोनों पक्षों के 10 आरोपी गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सहायता केंद्र (चौकी) सीएसईबी, थाना सिविल लाइन रामपुर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर पृथक-पृथक अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
प्रथम पक्ष की रिपोर्ट पर धारा 109(1), 296, 115(2), 351(3), 126(2), 3(5) बीएनएस तथा द्वितीय पक्ष की रिपोर्ट पर धारा 296, 351(3), 115(2), 109(1), 191(2) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया।
पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के कुल 10 आरोपियों को दिनांक 03.11.2026 को विधिवत गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त ईंट का टुकड़ा एवं चमड़े का बेल्ट जप्त किया गया। सभी गिरफ्तार आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी – प्रथम प्रकरण (03)
यशवंत कश्यप उर्फ लक्की पिता संतोष कश्यप, उम्र 26 वर्ष, निवासी काशीनगर नीलगिरी के पास, थाना सिविल लाइन रामपुर, कोरबा।
विक्रम कश्यप पिता संतोष कश्यप, उम्र 23 वर्ष, निवासी काशीनगर नीलगिरी के पास, थाना सिविल लाइन रामपुर, कोरबा।