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कोरबा

स्मृति शेष : स्व. श्री रामगोपाल पांडेय: जी भर जीये… जी भर माँ भारती की सेवा की और उज्ज्वल विरासत छोड़ गए पं. राम गोपाल पाण्डेय

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जन्म: 15.09.1934 निधन: 01.03. 2025

कोरबा ।जीवन अनंत है। एक आता है, तो एक जाता है। ईश्वर को भी इहलोक गमन कर जाना पड़ा था, लेकिन उसी का जीवन सार्थक होता है, जो परिवार के साथ अपनी माटी का भी कर्ज चुकाए और समाज को कुछ देकर जाए। कोरबा के मूर्धन्य समाज सेवी और माँ भारती को समर्पित जीवन जीने वाले पंडित रामगोपाल पाण्डेय का जीवन कोरबा के लिए सेवा की एक पूरी किताब था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में काम करने वाले स्व. श्री पाण्डेय ने कोरबा को अपनी कर्मभूमि बनाया और वनवासियों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को मुख्य धारा में लाने के लिए आरएसएस के माध्यम से नशा से दूर रहने के लिए जागरूकता फैलाने के साथ-साथ उनके बीच जाकर जीवन का लक्ष्य समझाते थे।
हिन्दुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आरएसएस, जनसंघ, जनता पार्टी और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले जिले के अंतिम छोर तक पहुंचे। तब आदिवासियों को बर्गलाकर धर्मांतरण कराया जाता रहा, ऐसे धर्म से बड़ा कुछ नहीं… की सीख आदिवासियों को देते रहे और उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए शासन-प्रशासन तक बातें पहुंचाना, इनकी दिनचर्या में शामिल था। माँ भारती के सपूतों की एक ऐसी टीम थी, जो क्षमता के अनुसार और आरएसएस के राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश के अनुसार आदिवासी गरीब परिवारों तक दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी पहुंचाया करते थे। विश्व हिन्दू परिषद, बीएमएस जैसे संगठनों के लिए काम किया और विश्व की सबसे बड़ी गैर शासकीय शैक्षणिक संस्थान विद्या भारती के लिए उन्होंने जो काम किया, वह कोरबा के लिए अमिट हस्ताक्षर है।
कोरबा जिले में सरस्वती शिशु मंदिर /हॉयर सेकेण्डरी स्कूल का जाल जो बिछा है, वह रामगोपाल पाण्डेय एवं तत्समय की उनकी टीम का ही योगदान है। शिक्षा के माध्यम से बच्चों को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए शिक्षा के साथ-साथ संस्कार की पाठशाला सिर्फ सरस्वती शिशु मंदिर/ हायर सेकेण्डरी स्कूलों में ही संभव है। बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ नागरिक बनाना विद्या भारती का सबसे बड़ा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्व. रामगोपाल पाण्डेय के योगदान को कोरबा नहीं भूल सकता। सरस्वती शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सरस्वती शिशु मंदिर की विभिन्न शाखाओं का शुभारंभ किया और विद्या भारती के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को जन सुलभ बनाया और जिले में अधिक से अधिक लोगों तक, यहां तक बीहड़ वनांचल क्षेत्रों तक एकल विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, वनवासी आश्रम, जैसे प्रकल्पों को धरातल पर उतारा।
उन्होंने वनांचल क्षेत्रों में प्रवास कर प्रचारक की भूमिका में कई ऐतिहासिक कार्य किए। खासकर आदिवासियों को नशा मुक्ति अभियान से जोडक़र उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए जो प्रयास किया, वह अतुलनीय और ऐतिहासिक है।
भारतीय जनता पार्टी को कोरबा में स्थाापित करने के लिए स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय, स्व. बंशीलाल महतो, बनवारी लाल अग्रवाल और ऐसे कई दिग्गजों ने जमीनी स्तर पर काम किया और कोरबा जिले में भाजपा का जो विराट स्वरूप दिख रहा है, यह सब ऐसे महामनिषियों की कर्मठता और कर्तव्य परायणता का प्रतिफल है। स्व. श्री पाण्डेय एकीकृत बिलासपुर जिला के समय कोरबा मण्डल अध्यक्ष का भी जिम्मा निभाया।
एक नजर : जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठ भूमि पर
हरदा (म.प्र.) की खिड़किया तहसील के दूरस्थ ग्राम पॅडवा- तारापुर में 15 सितंबर 1934 को जन्मे स्व. श्री रामगोपाल जी पाण्डेय के पिता स्व. भिखाजी पांडेय एक साधारण कृषक थे। स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय ने छिपावड़ जैसी छोटी सी जगह के सरकारी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर 1955 में हाईस्कूल (मेट्रिक) की परीक्षा हाईस्कूल हरदा से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। बचपन से ही मेधावी रहे स्व. श्री रामगोपाल जी ने संसाधनों के अभावों में भी मेट्रिक की परीक्षा गणित, विज्ञान एवं संस्कृत विषयों में विशेेष योग्यता प्राप्त कर पास की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आपकी नियुक्ति डाकतार विभाग के धमतरी (छतीसगढ़) आफिस में सन् 1956 में हुई। 1958 में रायपुर में पदस्थ रहते हुए आपका विवाह 1958 में ही सौ.का. रूक्मिणी पाण्डेय से हुआ जो पांजरा निवासी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाज संगठन के सक्रिय हस्ताक्षर स्व. श्री अमृतलाल मालवीय (ए.डी.आई.एस.) की छोटी बहिन हंै।
सन 1956 से सन 1963 तक डाकतार विभाग में कर्मठ कर्मचारी के रूप में कार्य करते हुए स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय जी ने कुछ नया कर गुजरने की सोच को लेकर शासकीय सेवाओं से त्यागपत्र देकर स्वयं का व्यवसाय शुरू किया तथा आर.एस.एस. से जुडक़र एक सक्रिय स्वयंसेवक के रूप में अपने शेष जीवन को समर्पित किया। इस दौरान आप कई राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के राजनेताओं के सम्पर्क में आये, जिनमें से श्री कैलाश जोशी (पूर्व मुख्य मंत्री म.प्र.), श्री प्यारेलाल खंडेलवाल, श्री मुरली मनोहर जोशी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे प्रमुख हैं। हिन्दुस्तान समाचार सहित कोरबा के कई ख्यातिलब्ध अखबारों के लिए कार्य करते हुए, संपादक का भी दायित्व निभाया और आपने एक निष्पक्ष एवं निर्विवाद संवाददाता के रूप में अपनी छवि बनाई। कर्मठ जीवन, लोगों के लिए संघर्ष करना, माँ भारती के लिए जेल की हवा खाना और कष्ट सहना, अति पिछड़े हुए एवं जनजाति समुदाय के लिए कार्य करना, हिन्दुत्व की परिभाषा समझाकर समाज में सद्भाव व एकता का पाठ पढ़ाना जैसे सुकृत्य से स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय का जीवन आबाद रहा और वे जी भरकर जिये और जी भर कर माँ भारती की सेवा की। वे कहा करते थे – पुरूषार्थ से धन कमाओ और उसका कुछ अंश समाज को समर्पित करो। यही सीख वे अपने परिवार के साथ समाज को दी और उनका सपना था समृद्ध भारत… समृद्ध कोरबा… समृद्ध वनवासी।
उत्तम से सर्वोत्तम बनने की सीख देते रहे स्व. राम गोपाल पाण्डेय


स्व. श्री राम गोपाल पाण्डेय विद्या भारती के सदस्य एवं सरस्वती शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापक का दायित्व वर्षों तक निभाते रहे। वे बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आजीवन सीख देते रहे और कहते रहे- उत्तम से सर्वोत्तम बनने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए और आजीवन जिसे भी सीख मिले… सीखते रहना चाहिए। उन्होंने पुस्तक को मित्र बनाने की सीख भी देते रहे।
मां भारती के लिए जेल गए, पदलोलुपता से रहे कोसों दूर


हिन्दुवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने वाली संस्था आर.एस.एस. के सक्रिय सदस्य होने के कारण आपने सन 1971 में बांगलादेश आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप आपको जेल जाना पड़ा। सन 1975 के आपातकाल के दौरान भूमिगत रहते हुए भी आपके अंदर छुपा हिन्दुवादी प्रेम आपको जनसंघ, विश्व हिन्दू परिषद, कल्याण आश्रम, कुष्ठ निवारण संघ जैसे सामाजिक व राजनैतिक संगठनों के बैनर तले सामाजिक उत्थान के प्रति सक्रियता कायम रखने में रोक नहीं सका। आपके इस राष्ट्रवादी प्रेम को देख आपातकाल के दौरान जनता पार्टी से विधायक के रूप चुनाव लडऩे हेतू आपके पास प्रस्ताव आया, जिसे आपने यह कहकर ठुकरा दिया कि मंै एक समर्पित कार्यकर्ता हूॅं और अपने वर्तमान कार्य से संतुष्ट हूॅं। आपकी इस निस्वार्थ सेवा भावना को देख सन 1978 में बाबाराव पौराणिक ने आपको तहसील कार्यवाहक बनाया।

सन 1984 से 1994 तक आपने आर.एस.एस. के तहसील संघचालक के पद पर रहते हुए कार्यकत्र्ताओं का कुशल मार्ग दर्शन किया। सरस्वती शिशु मंदिर कोरबा के संस्थापक एवं सन 1969 से लेकर सन 1992 तक व्यवस्थापक के पद पर रहते हुए, आपने सरस्वती शिशु मंदिर का निर्माण करवाया। आपकी हिन्दुवादी विचारधारा ने आपको बाबरी मस्जिद ढांचा ढ़हाने में सहभागिता हेतु प्रेरित किया। जिसके फलस्वरूप दिनांक 06.11.1992 को आपको गिरफ्तार किया गया। ठीक इसी तरह सन 1993 में भी दिल्ली में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में जाते समय आपको गिरफ्तार किया गया। चूंकि निस्वार्थ सेवाभावना आपके अंदर कूट-कूट कर भरी हुई थी। अत: आपने सन 1990 में साडा (विषेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के चेयरमेन के प्रस्ताव को ठुकराते हुए, उसका संचालक सदस्य बनना स्वीकार किया। लंबे समय तक आप 37 ग्रामीण विद्यालयों में अध्यक्ष रहे और निधन तक इसका निर्वहन किया। कोरबा में सर्वब्राहमण समाज के संरक्षक सदस्य रहे। आपका कुशल मार्गदर्शन पाकर रायपुर, जबलपुर, दुर्ग, भोपाल, इटारसी, होशंगाबाद आदि स्थानों में आयोजित स्थानीय श्री गौड़ मालवीय समाज के सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न होते आये हैं।
आप कोरबा (छत्तीसगढ़) में ही अपनी धर्म पत्नी श्रीमती रूक्मिणी पांडेय एवं तीन सुपुत्रों सुनील पाण्डेय, सुबोध पाण्डेय एवं पंकज पाण्डेय के साथ सामाजिक, राजनैतिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आपने सुपुत्रों द्वारा संचालित किराना दुकान एवं निर्माण कार्यो में मार्गदर्शन प्रदान करते रहे। आपकी एक मात्र सुपुत्री श्रीमती सुधा पुरूषोत्तम पारे जी (बी.एच.ई.एल.भोपाल से सेवानिवृत्त ) के संग एक कुशल गृहणी के रूप में भोपाल में सुखमय जीवन निर्वहन कर रही हैं। स्व. श्री रामगोपाल पांडेय एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी रहे। वे शिक्षा के साथ संस्कार की अनिवार्यता को जन-जन तक पहुंचाया और सुखद-समृद्ध भारत का सपना देखा।
सामाजिक सरोकार
स्व. श्री रामगोपाल पांडेय ब्राम्हण समाज के गौरव थे। उन्होंने सामाजिक कुरूतियों के खिलाफ थे और शादी विवाह में फिजूल खर्ची को रोकने के लिए सामुहिक विवाह को बढ़ावा दिया। वे स्थानीय ब्राह्मण समाज ( श्री गौड़) के सक्रिय सदस्य ही नहीं थे अपितु एक सफल राजनीतिज्ञ एवं सफल व्यवसायी भी रहे। कोरबा में रहते हुए भी आप होशंगाबाद, भोपाल, हरदा, इंदौर, इटारसी जैसे सभी स्थानों पर आयोजित समाज के हर कार्यक्रम में न केवल सम्मलित हुए अपितु सक्रिय भूमिका भी निभाते रहे है। भोपाल में निर्मित सत्कार भवन निर्माण में हर संभव सहयोग प्रदान करने वाले रामगोपाल पाण्डेय जी का सामूहिक विवाहों के आयोजनो में भी भरपूर सहयोग रहा। श्री गौड़ मालवीय ब्राहम्णोंत्पत्ति पत्रिका के प्रकाशक की भूमिका निभाई। आपके सामाजिक सरोकार से कोरबा को सेवा की नई परिभाषा मिली।
शिक्षा और संस्कार से समृद्ध और खुशहाल भारत का सपना


स्व.श्रीरामगोपाल पांडेय का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को कोई नहीं भूल सकता। वे शिक्षा और संस्कार के माध्यम से समाज में सत्व का प्रकाश फैलाने के लिए विद्या भारती के बैनर तले अभूत पूर्व कार्य किये। उनका कहना था कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता आती है और संस्कार ही एक ऐसा उपाय है, जिसके जरिये समाज को आदर्श बनाया जा सकता है। संस्कार से ही आपराधिक गतिविधियों में कमी आएगी।

रामगोपाल पाण्डेय का पूरा जीवन एक रोशनी थी

उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, आरएसएस के सर संघ चालक रज्जू भईया, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर जैसे व्यक्तित्वों के साथ काम किया और समाज सेवा के चरम को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। आज स्व. रामगोपाल पाण्डेय समाज सेवा के एक अमिट हस्ताक्षर बन गए।
कोरबा के लिए प्रेरणा थे रामगोपाल जी
शिक्षाविद सूर्य कुमार पांडेय ने कहा कि स्व. पांडेय जी मां भारती के ऐसे सपूत थे, जिन्होंने राष्ट्र जागरण के लिए काम किया। जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि विद्याभारती का जो विराट स्वरूप कोरबा में दिख रहा है, वह पांडेय जी की ही देन है।

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कोरबा

एक हाथ में लाश,दूसरे में सिगरेट और गुनगुनाता रहा गाना:न्यूज एंकर मर्डर-केस में चश्मदीद ने खोले राज,वारदात के पांच साल बाद मिली थी लाश

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कोरबा। गोद में शव…हाथ में सिगरेट…और होंठों पर वही गीत, जो कभी सलमा सुल्ताना का पसंदीदा था-“तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, हैरान हूं मैं…”। कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह डिंपल सिंह (काल्पनिक नाम) ने जो बयान दिया, उसने अदालत कक्ष को सन्न कर दिया।

गवाह के मुताबिक, साल 2018 में सलमा सुल्तान की गला घोंटकर हत्या करने के बाद जिम ट्रेनर मधुर साहू ने शव को बाएं हाथ से गोद में लिया हुआ था। दाएं हाथ से वह सिगरेट के कश ले रहा था और वही गीत गा रहा था। यह वही गाना था, जिसे सलमा बेहद पसंद करती थी।

2018 में हुई सलमा सुल्तान की हत्या की सुनवाई कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही है। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद गवाह डिंपल को सोमवार को पेश किया। डिंपल ने बताया कि वह प्रोटीन वर्ल्ड जिम में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थी, जहां मधुर साहू ट्रेनर था।

गवाह ने कोर्ट में यह भी स्वीकार किया कि मधुर ने उसे भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था। हालांकि, जब उसने कंप्यूटर में मधुर की अन्य लड़कियों के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें देखीं, तो उसने उससे रिश्ता खत्म करने की कोशिश की। इस पर मधुर ने उसे आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी और अपनी इच्छा के अनुसार काम करवाता रहा।

बाद में डिंपल को पता चला कि मधुर साहू के सलमा सुल्ताना सहित कई दूसरी लड़कियों से भी संबंध थे। गवाह ने बताया कि सलमा सुल्ताना और मधुर शारदा विहार स्थित घर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। सलमा को भी मधुर की इन गतिविधियों पर शक था, जिसके कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

क्या है पूरा मामला

25 साल की सलमा सुल्ताना कुसमुंडा के एसईसीएल कॉलोनी में रहती थी। वो धीरे-धीरे न्यूज के फील्ड में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही थी। उसका करियर तो परवान चढ़ ही रहा था, साथ ही जिम ट्रेनर मधुर साहू के साथ उसकी नजदीकियां भी। इसके बाद अचानक 2018 से वो लापता हो गई। यहां तक कि 20 जनवरी 2019 को जब उसके पिता की मौत हुई, तो उसमें भी वो शामिल नहीं हुई।

प्रेमी जिम ट्रेनर मधुर साहू और उसके दो सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।

प्रेमी जिम ट्रेनर मधुर साहू और उसके दो सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।

युवती लापता, परिजनों ने जिम ट्रेनर पर जताया संदेह

युवती की स्कूटी स्टेशन पर मिली थी, वहीं उसका मोबाइल स्विच ऑफ था। उससे संपर्क करने की हर कोशिश नाकाम हो गई। इसके बाद परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। परिजन ने पुलिस अधिकारियों से खोजबीन की गुहार लगाते हुए जिम संचालक मधुर साहू पर संदेह जताया था, लेकिन पूछताछ में मधुर साहू पुलिस को गुमराह कर देता था।

पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।

पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।

पार्टनर ने खोला हत्याकांड का राज

कई साल तक सलमा का किसी को पता नहीं चला तो मधुर साहू का एक राजदार भी ओवर कॉन्फिडेंस में आ गया था। उसने नशे में मधुर के पार्टनर के सामने सलमा हत्याकांड का राज खोल दिया था। मधुर और उसके पार्टनर का भी लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था।

लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद पार्टनर ने मधुर को सबक सिखाने के लिए पुलिस के पास पहुंचकर हत्याकांड का राज खोल दिया। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक तब एक बैंक से सलमा के नाम से लोन होने और अब तक उसकी किस्त जमा होने का पता चला।

खुदाई में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का भी सहारा लिया।

खुदाई में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का भी सहारा लिया।

पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो मधुर फरार हो गया। पुलिस ने उसके दोस्तों और परिचितों से बयान लिया। 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस किया, जिसमें अक्टूबर 2018 में शारदा विहार के एक मकान में मधुर साहू और सहयोगी ट्रेनर कौशल श्रीवास ने सलमा का गला घोंटकर हत्या करने और लाश को अतुल शर्मा की मदद से कोहड़िया पुल के आसपास दफनाने का पता चला।

इसके बाद पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।

मुख्य आरोपी मधुर साहू ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई।

मुख्य आरोपी मधुर साहू ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई।

साल 2023 में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का सहारा लिया। इसके बाद सड़क को खोदकर सलमा का कंकाल बरामद किया गया। डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि यह कंकाल सलमा का ही था। इसके बाद पुलिस ने मधुर साहू और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी मधुर ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई। आरोपी के पास से हार्ड डिस्क और लैपटॉप जब्त किया गया है। इसकी जांच में कुछ ऑडियो क्लिप के बारे में पता चला। जिस वाहन का इस्तेमाल लाश को दफनाने में किया गया था, उसे भी जब्त किया जा चुका है।

स्थानीय केबल चैनल में एंकर थी सलमा सुल्ताना। 2018 में हुई थी लापता।

स्थानीय केबल चैनल में एंकर थी सलमा सुल्ताना। 2018 में हुई थी लापता।

सलमा ने यूनियन बैंक से लिया था लोन

मार्च 2023 में राज्य स्तरीय ऑपरेशन मुस्कान में गुम इंसान महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी कड़ी में थाना कुसमुंडा के गुम इंसान सलमा सुल्ताना की केस डायरी की भी बारीकी से जांच की गई। परिजनों का बयान लेने पर पता चला कि यूनियन बैंक से सुल्ताना ने लोन लिया था। इस संबंध में यूनियन बैंक से पुलिस ने जानकारी ली, तो पता चला कि लोन की EMI समय पर भरी जा रही है।

यह पैसा EMI के तौर पर गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर मधुर साहू भर रहा था। पुलिस ने जांच तेज की, तो मधुर साहू फरार हो गया। इसके बाद सलमा के दोस्तों और परिचितों का बयान भी लिया गया। साथ ही उसके 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस भी किया गया।

गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर है मधुर साहू।

गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर है मधुर साहू।

पूछताछ में 2 महिलाओं औ 3 पुरुषों के बयान में विरोधाभाष मिलने पर पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया। सबसे कड़ाई से पूछताछ करने पर हत्याकांड का राज खुल गया। 21 अक्टूबर 2018 एलजी 17 शारदा विहार में मधुर साहू और कौशल श्रीवास के द्वारा सलमा सुल्ताना की गला घोंटकर हत्या करने का पता चला।

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आबकारी एक्ट में युवक गया जेल,कुछ घंटे बाद मां की मौत:पैरोल पर अंतिम संस्कार में शामिल हुआ बेटा

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कोरबा। कोरबा में आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए युवक अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को जेल भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद उसकी मां सावित्री श्रीवास (45) की मौत हो गई। मां सावित्री श्रीवास सीतामणी वार्ड नंबर 10, शनि मंदिर के पास रहती थी और बताया जा रहा है कि वह पहले से बीमार थी। पुलिस ने मंगलवार शाम को गोविंदा को जेल भेजा था।

बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलने पर बस्ती के लोग और वार्ड पार्षद बड़ी संख्या में गोविंदा के घर पहुंचे। उन्होंने अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को पैरोल पर रिहा करने और मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने देने की मांग की। इस मांग को लेकर वार्डवासी एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई।

आरोपी पैरोल पर हुआ रिहा, मां की अंतिम यात्रा में हुआ शामिल

पुलिस अधीक्षक से गुहार के बाद कोर्ट से अरुण उर्फ गोविंदा को पैरोल पर रिहा किया गया। वह अपनी मां की अंतिम यात्रा में शामिल हुआ और मोती सागर स्थित मुक्तिधाम पहुंचा। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।

इस मामले पर वार्ड के पूर्व पार्षद सुफल दास महंत ने घटना को दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य मार्ग पर खुलेआम शराब बेची जा रही है और गोविंदा के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए।

आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट में हुई थी कार्रवाई

कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि गोविंदा के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34/2 के तहत कार्रवाई की गई थी और उसे जेल भेजा गया था। परिजनों की पैरोल की मांग पर उसे जेल से लाकर मां के अंतिम संस्कार में शामिल कराया गया।

सीएसपी ने यह भी बताया कि सीतामणी में कुछ दिनों पहले हुई चाकूबाजी की घटना के बाद पुलिस नशे की प्रवृत्ति को कम करने के लिए अभियान चला रही है। इसी क्रम में उस दिन तीन लोगों को आबकारी एक्ट के तहत जेल भेजा गया था।

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कोरबा में सजेगा श्री हनुमान जी का दिव्य दरबार— धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सान्निध्य में श्री हनुमंत कथा, आयोजक स्वयं बजरंग बली

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प्रथम दिन की प्रथम आरती सफाई कर्मीयों द्वारा होगी
कोरबा। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक, हनुमान जी के अनन्य भक्त संत धीरेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में कोरबा की पावन धरा पर आयोजित होने जा रही दिव्य श्री हनुमंत कथा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को जश्न रिसॉर्ट में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इस विराट आध्यात्मिक आयोजन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। बैठक में समाजसेवी राणा मुखर्जी ने भावुक स्वर में बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन के आयोजक स्वयं श्री बजरंग बली होंगे, जबकि समाज की सेवा में समर्पित कोरबा के सफाई कर्मी इस महायज्ञ में मुख्य यजमान की भूमिका निभाएंगे— जो सामाजिक समरसता और सेवा-भाव का अद्भुत संदेश देगा।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि 28 मार्च से 1 अप्रैल तक दिव्य श्री हनुमंत कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके पूर्व 27 मार्च को 21 हजार माताओं-बहनों के साथ भव्य कलश यात्रा निकालने का संकल्प लिया गया है, जिससे पूरे नगर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बनेगा।

इस अवसर पर मंच से मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संभागीय सर संघचालक एवं विद्या भारती (मध्य क्षेत्र) के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान जी ने भक्ति, सेवा और समर्पण का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वही आज के समाज का मार्गदर्शन है। बजरंग बली के अनन्य भक्त धीरेंद्र शास्त्री अपनी वाणी से भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि विश्व को सनातन संस्कृति और राष्ट्रभाव की प्रेरणा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि “राम से बड़ा राम का नाम है और हम से बड़ा हमारा संगठन है। हम सब एक ही विचारधारा के यात्री हैं। श्री हनुमंत कथा का उद्देश्य समाज में समरसता, संगठन और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना है।” उन्होंने इस पावन कार्य के लिए सभी को चुने जाने पर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आयोजन को भव्य बनाने का आह्वान किया।
समाजसेवी सुबोध सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसहभागिता का महायज्ञ है। कोई समय देगा, कोई आर्थिक सहयोग करेगा, कोई अपने अनुभव और श्रम से योगदान देगा— तभी यह आयोजन ऐतिहासिक बनेगा। बैठक में नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर, ऋतु चौरसिया, सुबोध सिंह शिव कश्यप, विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष गौरव मोदी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे और अपने सुझाव दिए।

आयोजन की संगठनात्मक रूपरेखा भी घोषित की गई। संयोजक के रूप में अमरजीत सिंह, सचिव डॉ. पवन सिंह तथा कोर टीम में ऋषभ केशरवानी, तपिश, रवि गिडवानी, नवल गुप्ता, ऋषभ शुक्ला को जिम्मेदारी सौंपी गई। श्रद्धालुओं के लिए “भारत मां की रसोई” को सतत एवं निर्बाध रूप से संचालित रखने की जिम्मेदारी समाजसेवी प्रेम मदान ने ग्रहण की।
नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने भावुक अपील करते हुए कहा कि कोरबा में श्री हनुमान जी का दिव्य दरबार सजने जा रहा है और वे प्रतिदिन अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए अनुमानित बजट लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपये है। यदि एक लाख धर्मपरायण श्रद्धालु मात्र 280 रुपये का सहयोग दें, तो यह महायज्ञ सहज रूप से सफल हो सकता है। उन्होंने स्वयं जन-जन तक पहुंचकर सहयोग जुटाने का संकल्प लिया।

इस महाआयोजन के प्रमुख समन्वयक अपना घर सेवा आश्रम के अध्यक्ष राणा मुखर्जी ने बताया कि पूरी समय-सारणी तय कर ली गई है और आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए सभी विभागों में जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं कमला नेहरू महाविद्यालय समिति के अध्यक्ष किशोर शर्मा ने सुझाव दिया कि सहयोग के सभी मार्ग खुले रखे जाएं— बड़ी राशि देने वालों से लेकर सामान्य श्रद्धालु तक अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग कर सकें। इसके लिए डिजिटल माध्यम (क्यूआर कोड) जैसी सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री श्रीमती वैशाली रत्नपारखी ने महिलाओं से संबंधित व्यवस्थाओं की संपूर्ण जिम्मेदारी संभालने का दायित्व लेते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
बैठक के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि दिव्य श्री हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समरसता और सनातन चेतना का विराट अभियान बनेगी— जिसमें कोरबा का हर श्रद्धालु सहभागी बनेगा और यह आयोजन आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।

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