Connect with us

देश

शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स 964 अंक उछला, निफ्टी 24,330 के पार बंद

Published

on

मुंबई, एजेंसी। शुक्रवार (17 जुलाई) को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक चढ़कर 78,151.45 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 261.55 की बढ़त के साथ 24,334.30 के स्तर पर बंद हुआ। IT शेयरों में खरीदारी, वैल्यू बाइंग जैसे कई फैक्टर के कारण बाजार में आज रौनक दिखी।

शेयर बाजार में तेजी के कारण….

IT शेयरों में बढ़त

आईटी सेक्टर में मजबूत खरीदारी ने बाजार की तेजी को गति दी। Tech Mahindra के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, जिससे कंपनी के भविष्य के कारोबार को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा। Nifty IT इंडेक्स 1.29 प्रतिशत बढ़ा। टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयरों में 1.6 प्रतिशत, टीसीएस में 1.7 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 1.5 प्रतिशत और HCL Tech में 2.4 प्रतिशत की तेजी दिखी।

Jio Financial के नतीजों से शेयर में उछाल

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का शेयर 4 फीसदी उछला, कंपनी का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 156 प्रतिशत और रेवेन्यू 227 प्रतिशत बढ़ा। 

वैल्यू बाइंग से निवेशकों का भरोसा मजबूत

विश्लेषकों के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के शेयरों में वैल्यू बाइंग की। कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों में खरीदारी से बाजार का सेंटीमेंट सकारात्मक बना रहा।

Continue Reading

देश

शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं:यहां रहने का अधिकार सिर्फ नागरिकों को, घुसपैठिए भारत की सुरक्षा के लिए खतरा

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। यहां रहने का अधिकार केवल नागरिकों को है। घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं। हमारा लक्ष्य देश को इन घुसपैठियों से मुक्त करना है।

शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने पिछले आठ महीनों में सभी बॉर्डर स्टेट का दौरा किया है। उन्होंने इन राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा की रणनीति से जुड़ा दस्तावेज भी साझा किया।

शाह ने आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने और उसके 360 डिग्री नेटवर्क को तोड़ने के लिए PRAHAR रणनीति को रोज की कार्रवाई में उतारने की बात कही।

शाह के संबोधन की बड़ी बातें…

नक्सलवाद, आतंक और उग्रवाद की चुनौतियां खत्म- सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन बड़े केंद्रों- नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियां खत्म कर दी हैं। इसका श्रेय सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों को जाता है।

अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को गंभीर होने से पहले समझ लिया होता, तो देश को दशकों तक इनका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूरे कैडर को खत्म करना और एक ही रात में उस पर प्रतिबंध लगाना केंद्र और राज्यों के तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है।

सात साल में 274 भगोड़े विदेश से लाए गए- 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया है। सभी राज्य लक्ष्य तय करें कि विदेश में बैठे भगोड़ों को देश के कानून के दायरे में लाया जाए। मोदी सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को भी अपग्रेड किया है, ताकि यह कई स्तरों पर नतीजे देने वाला प्लेटफॉर्म बन सके।

एक साल में नए कानून 100% लागू होंगे- एक साल में तीनों नए कानून 100 फीसदी लागू होंगे। इससे आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में हो सकेगा और सजा की दर 25 फीसदी बढ़ेगी। NSS फोरम को 15 से 20 साल आगे की सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान लगाकर उन्हें बड़े खतरे बनने से रोकने की रणनीति बनानी चाहिए।

युवा अधिकारी डेटा को जोड़कर, उसका एनालिसिस करके और AI के जरिए अपराध करने के तरीकों की पहचान कर काम की खुफिया जानकारी तैयार करें। इससे भविष्य की चुनौतियों को रोका जा सकेगा।

नशामुक्त भारत के लिए 3 लेवल पॉलिसी- सभी राज्यों की पुलिस नशीले पदार्थों के खिलाफ नॉरकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को जमीन पर लागू करें। इससे युवा पीढ़ी को बचाने में मदद मिलेगी।

नशामुक्त भारत के लिए डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय यानी पता लगाना, रोकना और खत्म करना- तीन स्तरों की रणनीति अपनानी होगी। नशीले पदार्थों के खिलाफ सबसे सफल लड़ाई केवल भारत ही लड़ सकता है।

चुनौतियों को संकट न बनने दें- सुरक्षा नीति अलग-अलग नहीं बनाई जा सकती। इसमें वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन की रुकावट, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर युद्ध जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा।

घुसपैठ-बॉर्डर सिक्योरिटी पर शाह के पिछले 3 बयान

22 मई: ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे लगाएंगे- केंद्र सरकार अगले एक साल के भीतर पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी करीब 6000 किलोमीटर लंबी सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर सुरक्षा सिस्टम लागू करेगी। इसके तहत ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे और दूसरी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सीमा की निगरानी मजबूत की जाएगी, ताकि घुसपैठ और तस्करी को पूरी तरह रोका जा सके।

26 मई: जनसंख्या बदलाव की जांच के लिए कमेटी बनाई- केंद्र सरकार ने देश की आबादी में हो रहे असामान्य बदलाव की स्टडी के हाई-लेवल कमेटी बनाई। जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (रिटा) को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। यह कमेटी अवैध घुसपैठ और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसंख्या में बदलाव जांच करेगी।

28 मई: घुसपैठियों अपने देश लौट जाओ- ममता बनर्जी के शासनकाल में हर दिन घुसपैठ होती थी, लेकिन अब घुसपैठिए खुद ही वापस लौटने लगे हैं। मैं घुसपैठियों से कहना चाहता हूं कि समय रहते खुद से अपने देश वापस लौट जाओ।

Continue Reading

देश

शिवकुमार बोले-कर्नाटक में वंदेमातरम के 2 पैरे ही गाए जाएंगे:हम पार्टी के फैसले के साथ, भाजपा तुष्टीकरण की राजनीति करती है

Published

on

बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि राज्य में वंदे मातरम के सिर्फ दो छंद (पैरे) ही गाए जाएंगे। मैं पार्टी की विचारधारा में विश्वास रखता हूं और हम इस फैसले पर कायम रहेंगे। भाजपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करती है।

शिवकुमार बेंगलुरु में इंडिया टुडे के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने कहा- स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम उनकी जानकारी के बिना गाया गया था, लेकिन भविष्य में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में अब राष्ट्रगीत के दो ही छंद गाए जाएंगे।

दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC ने 19 अगस्त को ऐलान किया था कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा ही गाएगी।

यह फैसला 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गान को लेकर हुए विवाद के बाद आया। भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया था।

वंदे मातरम विवाद पर शाह और भाजपा अध्यक्ष के बयान

  • गृह मंत्री अमित शाह- कांग्रेस का वंदे मातरम पूरा न गाने का फैसला हैरान करने वाला और देशविरोधी है। 1937 में कांग्रेस ने जो फैसला लिया था, उसे पीएम मोदी ने सुधारा है। कांग्रेस ने 1937 में राष्ट्रगीत के दो टुकड़े कर मुस्लिम तुष्टीकरण किया था। उस फैसले से दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ।
  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन- कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है। कांग्रेस अब नई मुस्लिम लीग बन गई है। यह फैसला वंदे मातरम को अपने मन में रखकर बलिदान देने वाले शहीदों का अपमान है।

भाजपा का आरोप- कांग्रेस के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम नहीं हुआ

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के दौरान राहुल, खड़गे और सोनिया आपस में कुछ बात करते दिखे थे।

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के दौरान राहुल, खड़गे और सोनिया आपस में कुछ बात करते दिखे थे।

वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद 15 अगस्त को शुरू हुआ। BJP ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की। BJP ने इसका वीडियो भी X पर शेयर किया था और दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान परेशान दिखे।

कांग्रेस ने कहा था- खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं सोनिया

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने सफाई दी थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।

उनके मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं था। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं क्योंकि वे लंबे समय से खड़े थे।

वंदे मातरम पर नोटिफिकेशन और कानून क्या कहते हैं?

पहला नोटिफिकेशन: 31 जनवरी 2026

गृह मंत्रालय ने ‘ऑर्डर्स रिलेटिंग टू द नेशनल सॉन्ग ऑफ इंडिया’ जारी किया। इसमें ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंदों को आधिकारिक संस्करण बताया गया है। आदेश के मुताबिक जब राष्ट्रगीत गाया जाए, तो आधिकारिक यानी पूरा संस्करण गाया जाना चाहिए। इसकी टाइमिंग 3 मिनट 10 सेकेंड बताई गई है। साथ ही राष्ट्रगीत के गायन/वादन के दौरान सम्मान, शिष्टाचार बनाए रखने, साथ ही इसे सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़े होने का निर्देश है।

कानून: जुलाई-अगस्त 2026

प्रेवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल जुलाई 2026 में लाया गया। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई और लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को पास किया। 11 अगस्त को कानून बना। इसका मकसद ‘वंदे मातरम’ को 1971 के कानून के तहत कानूनी सुरक्षा देना है। संशोधन में कहा गया है कि जो व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या उसके गायन में शामिल सभा में रुकावट डालता है, उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

दूसरा नोटिफिकेशन: 9 जुलाई 2026

गृह मंत्रालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से जुड़े आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया कि दोनों के सही पाठ, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाएं, तो पहले राष्ट्रगीत और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। आदेश में इन निर्देशों के उल्लंघन के लिए कोई अलग सजा नहीं बताई गई है, बल्कि संबंधित संस्थानों और संगठनों को इन्हें सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं

इन तीनों से क्या निकला?

नोटिफिकेशन के मुताबिक वंदे मातरम के पूरे 6 छंद ही इसका आधिकारिक संस्करण हैं। जब राष्ट्रगीत गाया जाता है, तो इसी पूरे संस्करण को गाने का निर्देश है। हालांकि, दोनों नोटिफिकेशन में 6 छंद न गाने पर कार्रवाई करने की बात नहीं है। 2026 के कानून में भी यह साफ नहीं कहा गया है कि 6 छंद पूरे न गाने पर अपराध होगा। कानून में अपराध तब है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का गायन रोकता है या गा रही सभा में रुकावट डालता है।

Continue Reading

देश

चंपत बोले-चुनाव के चलते चढ़ावा चोरी की FIR नहीं कराई:नृपेंद्र मिश्रा ने 14 इंटरव्यू किसके इशारे पर दिए, असली भेदिया कौन? डायरी में खुलासे किए

Published

on

अयोध्या, एजेंसी। राम मंदिर के पूर्व महासचिव चंपत राय की डायरी की चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, डायरी में उन्होंने लिखा है कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के तुरंत बाद FIR इसलिए नहीं कराई, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि जांच में मामला लंबा खिंच सकता है। इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। कहा- उन्होंने मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में चढ़ावा चोरी को डकैती करार दिया। इससे समाज में गलत संदेश गया। इसलिए एक संत ने मुझसे बातचीत के दौरान नृपेंद्र मिश्र को खलनायक कहा था।

चंपत राय ने डायरी में सवाल उठाए हैं कि नृपेंद्र मिश्रा जैसे अनुभवी व्यक्ति ने चार दिनों में 14 चैनलों से बातचीत क्यों और किसके इशारे पर की। उन्होंने पिछले 6 साल में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों के दौरान व्यवस्थाओं या हिसाब-किताब पर कभी चर्चा नहीं की, तो अब इन पर बोलने का उनको क्या अधिकार है।

चंपत राय ने लिखा है कि अखिलेश यादव तक यह बात किस माध्यम से और किसने पहुंचाई। असली भेदिया कौन है? मेरे सामने सबसे बड़ा प्रश्न है। इसका पता लगना चाहिए।

तस्वीर 4 अगस्त की है। चंपत राय चढ़ावा चोरी सामने आने के 2 महीने बाद दिखे थे।

तस्वीर 4 अगस्त की है। चंपत राय चढ़ावा चोरी सामने आने के 2 महीने बाद दिखे थे।

चंपत ने लिखा- नृपेंद्र मिश्रा को बताई थी पूरी बात

डायरी के अनुसार, 7 जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के अगले दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NBCC) के पूर्व चेयरमैन अनूप कुमार अयोध्या पहुंचे थे। करीब 2 घंटे तक बातचीत हुई।

मैंने, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव ने घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी। नृपेंद्र मिश्र ने पूछा कि पुलिस में FIR क्यों नहीं कराई गई। इस पर मैंने उनसे कहा कि अगर पुलिस को मामला सौंप दिया जाता तो पूछताछ और कार्रवाई के सभी अधिकार पुलिस के पास चले जाते। उसका क्या परिणाम होगा, यह कहना मुश्किल था।

संतों को भी दी गई मामले की जानकारी

बैठक के बाद मैंने कई संतों से फोन पर बात की। उन्हें चढ़ावा चोरी के बारे में जानकारी दी। संतों को अयोध्या भी बुलाया। मंदिर परिसर के शेषावतार मंदिर में उनके साथ बैठक की। उन्होंने खबरों को निराधार बताते हुए संतों से उन पर ध्यान नहीं देने की अपील की।

संतों ने उनकी बात स्वीकार की। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से संत शामिल हुए थे, इसका जिक्र नहीं है। चंपत राय ने लिखा कि मामला सामने आने के बाद 3 दिनों तक 11-11 घंटे बैठकर चढ़ावा चोरी का काफी हिस्सा मैंने वापस प्राप्त किया।

तबीयत खराब होने के बाद भी भैयाजी जोशी से मिलने लखनऊ पहुंचा

डायरी के अनुसार, 9 जून को मेरी तबीयत खराब थी। इसके बावजूद मैं 10 घंटे मंदिर परिसर के पीएफसी भवन में बैठा रहा। 10 जून को मैं बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था। उसी रात गोपाल राव को भैयाजी जोशी का फोन आया। मुझे, अनिल और गोपाल को 11 जून की शाम तक लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया। गोपाल राव ने मेरी तबीयत खराब होने की बात कही। इस पर मैंने कहा कि मैं भी लखनऊ जाऊंगा, ताकि मामले से जुड़ी सभी बातें सही रूप में सामने आ सकें। हम तीनों लखनऊ गए। भैयाजी जोशी से मुलाकात की।

5 दिन पहले नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने कहा था- चंपत राय मेरी आचोलन नहीं कर सकते हैं।

5 दिन पहले नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने कहा था- चंपत राय मेरी आचोलन नहीं कर सकते हैं।

नृपेंद्र मिश्रा ने अचानक अयोध्या का टिकट क्यों कैंसिल किया?

चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्र को 6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक के लिए अयोध्या आना था। प्लेन का टिकट भी बुक हो चुका था। उन्हें रिसीव करने के लिए ड्राइवर राधेश्याम को भी सूचना दी गई थी, लेकिन 4 जुलाई को अचानक उनकी यात्रा रद्द होने का संदेश आया। वह बैठक में नहीं पहुंचे। चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र क्यों नहीं आए, यह भी सवाल है।

नृपेंद्र मिश्रा के बयानों में बदलाव क्यों आया?

डायरी में चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र के मीडिया में दिए बयानों का भी जिक्र किया। शुरुआत में उन्होंने कहा- उनका दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित है, लेकिन बाद में उनके बयानों में बदलाव आया। 23 जून के बाद नृपेंद्र मिश्र के बयान आने बंद हो गए।

डायरी में उन्होंने लिखा कि इसका कारण तलाशना होगा। 14 जुलाई को मैंने अनूप मित्तल से 2 घंटे तक मुलाकात की। मैंने उनसे कहा कि संत मुझसे पूछ रहे थे कि क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। संत के सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था। इसलिए मैं आपको मामले की जानकारी दे रहा हूं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677