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टेस्ला भारत में 8 चार्जिंग स्टेशन लगाएगी:इनमें एक बार में 252 गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी, टाटा-महिंद्रा से मिलेगी चुनौती

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नई दिल्ली,एजेंसी। टेस्ला का पहला शोरूम मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में खुल गया है। अभी कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी सबसे पॉपुलर कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मॉडल Y को उतारा है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 60 लाख रुपए से शुरू होती है। इसके अलावा कंपनी ने स्टोर से करीब 6 किलोमीटर दूर एक सर्विस सेंटर और गोडाउन भी खोला है।

कंपनी ने स्टोर ओपनिंग के साथ ही मुंबई और दिल्ली में 8 चार्जिंग स्टेशन सेटअप लगाने की घोषणा भी की है। इन स्टेशन्स पर एक बार में 252 इलेक्ट्रिक गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी। कंपनी भारत में अन्य मॉडल लॉन्च करने के साथ अन्य प्रमुख शहरों में स्टोर भी खोलेगी।

इसके साथ ही कंपनी ने अपनी अग्रेसिव अप्रोच से भारतीय बाजार में मौजूद बड़े प्लेयर्स को जता दिया है कि वह कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है। इस खबर में हम जानेंगे कि टेस्ला के आने से भारतीय EV मार्केट पर क्या असर होगा, टेस्ला दुनिया में क्यों पॉपुलर है, भारत में उसके सामने क्या-क्या चुनौतियां रहेंगी। साथ ही ये भी जानेंगे कि कौन-सी कंपनियां टेस्ला को टक्कर देंगी…

पहले दिन कंपनी की सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक SUV को लॉन्च किया गया।

पहले दिन कंपनी की सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक SUV को लॉन्च किया गया।

एक्सपीरियंस सेंटर के तौर पर काम करेगा टेस्ला का शोरूम

टेस्ला स्टोर लोगों के लिए एक एक्सपीरियंस सेंटर के तौर पर काम करेगा। यानी यहां न सिर्फ कंपनी की इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची जाएंगी, बल्कि लोग टेस्ला की टेक्नोलॉजी और फीचर्स को भी करीब से देख सकेंगे।

2024 में आई भारत की नई EV पॉलिसी के मुताबिक, अगर टेस्ला 4,150 करोड़ रुपए निवेश करता है, तो इम्पोर्ट ड्यूटी 70% से घटकर 15% जाएगी। इससे भविष्य में कंपनी की कारों की कीमतें कम हो सकती हैं।

कुछ समय पहले खबर आई थी कि टेस्ला गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में फैक्ट्री लगाने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल कंपनी भारत में सिर्फ इंपोर्टेड कारें बेचने पर ध्यान दे रही है।

टेस्ला के भारत में आने की बड़ी वजहें

1. ग्लोबल सेल्स में कमी से नए मार्केट की तलाश

साल 2024 में ग्लोबल मार्केट में; खासकर अमेरिका, यूरोप और चीन में टेस्ला की सेल्स गिरी हैं। जर्मनी और इटली में तो ये 76% और 55% तक गिर गई। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है और यहां EV का मार्केट शेयर सिर्फ 5% के आसपास है। इसलिए यहां टेस्ला को नए ग्रोथ अवसर नजर आ रहे हैं। भारत में EV डिमांड बढ़ रही है। भारत में 2024 में 19.93% की ग्रोथ के साथ 99,165 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकीं।

2. भारत की नई EV नीति

नई EV पॉलिसी ने आयात शुल्क को 100% से घटाकर 70% किया, बशर्ते कंपनी EV क्षेत्र में ₹4,150 करोड़ निवेश करे। तीन साल में लोकल लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने पर इसे 15% कर दिया जाएगा। इससे टेस्ला को मॉडल Y जैसी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को कम टैक्स के साथ इम्पोर्ट करने का मौका मिला।

3. प्रीमियम EV सेगमेंट में डिमांड

भारत में लग्जरी EV की मांग बढ़ रही है। टेस्ला की मॉडल Y (₹59.89-67.89 लाख) इस सेगमेंट को टारगेट करती है, जो BMW iX1 और मर्सिडीज EQA से टक्कर लेगी। भारतीय EV मार्केट को 2030 तक 28 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकने की उम्मीद है।

टेस्ला के भारत में आने से ऑटो मार्केट पर क्या असर होगा

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है और EV की मांग यहां तेजी से बढ़ रही है। सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में टेस्ला का आना इस सेक्टर में एक नई क्रांति ला सकता है।

शुरू में टेस्ला की ऊंची कीमत और इम्पोर्टेड ड्यूटी के कारण इसका असर प्रीमियम सेगमेंट तक सीमित रहेगा। मास-मार्केट ब्रांड्स टाटा, महिंद्रा जैसी कंपनियों पर तुरंत असर होने की उम्मीद कम है।

टेस्ला के सामने 5 प्रमुख चुनौतियां

1. हाई इम्पोर्ट ड्यूटी और कीमत: टेस्ला की गाड़ियां CBU (कम्प्लीट्ली बिल्ट यूनिट) के रूप में आयात होंगी। इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी और GST लगने से कीमतें प्रीमियम सेगमेंट में पहुंच जाती हैं, जो मास-मार्केट ग्राहकों के लिए महंगी होंगी। इस सेगमेंट में सेल्स लिमिटेड हैं।

2. सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: टेस्ला ने मुंबई और दिल्ली में 8 सुपरचार्जिंग स्टेशन की योजना बनाई है। ग्रामीण और छोटे शहरों में चार्जिंग की कमी टेस्ला की ज्यादा रेंज का फायदा कम कर सकती है।

3. कस्टमर बिहेवियर: भारतीय ग्राहक सर्विस, लागत और रीसेल वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं। यहां टेस्ला को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।

4. सर्विस और डीलरशिप नेटवर्क: टेस्ला की डायरेक्ट-टु-कंज्यूमर सेल्स मॉडल (ऑनलाइन बिक्री) भारत में नई है और इसका सर्विस नेटवर्क अभी सीमित है। BMW, मर्सिडीज, और टाटा जैसे ब्रांड्स का देशभर में मजबूत डीलर और सर्विस नेटवर्क टेस्ला के लिए चुनौती है।

5. लोकल मैन्युफैक्चरिंग में देरी: टेस्ला की गुजरात/कर्नाटक में प्रस्तावित गीगाफैक्ट्री 2026-2027 से पहले शुरू होने की संभावना कम है। तब तक ज्यादा कीमत वाली इम्पोर्टेड गाड़ियों पर निर्भर रहना होगा।

टेस्ला का भारत में किन कारों से कॉम्पिटिशन होगा?

टेस्ला को भारत में टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी स्थानीय कंपनियों से चुनौती मिलेगी। इनके अलावा BYD, BMW, ऑडी और मर्सिडीज जैसे ब्रांड्स भी टेस्ला को टक्कर देंगे। टेस्ला की टेक्नोलॉजी और ब्रांड वैल्यू इसे अलग बनाती है, लेकिन स्थानीय कंपनियों की कीमत और सर्विस नेटवर्क बड़ी चुनौती होगी।

  • टाटा मोटर्स: भारत में EV मार्केट के 60% से ज्यादा शेयर के साथ सबसे बड़ा प्लेयर। टाटा नेक्सन EV जैसे मॉडल टेस्ला को टक्कर देंगे।
  • महिंद्रा एंड महिंद्रा: महिंद्रा की BE6 और XEV 9e मॉडल्स टेस्ला के लिए कॉम्पिटिशन होंगे। महिंद्रा की मजबूत ब्रांड लॉयल्टी और किफायती प्राइसिंग टेस्ला को टक्कर दे सकती है।
  • MG मोटर्स: विंडसर और साइबस्टर जैसी कारें टेस्ला के प्रीमियम सेगमेंट में चुनौती पेश कर सकती हैं। भारत में इसका 22% मार्केट शेयर भी एक फैक्टर है।
  • ‌BYD: चीनी कंपनी BYD की ATTO 3, SEAL, और e6 मॉडल्स टेस्ला के प्रीमियम और टेक्नोलॉजी-फोकस्ड सेगमेंट में मुकाबला करेंगे। हालांकि, भारत में इसकी मौजूदगी सीमित है।
  • हुंडई: इस साउथ कोरियन कंपनी के आयोनिक 5 और क्रेटा इलेक्ट्रिक जैसी कारें टेस्ला के प्रीमियम EV सेगमेंट में टक्कर दे सकती है। इसका विस्तृत डीलरशिप नेटवर्क भी एक फैक्टर है।
  • BMW, ऑडी, मर्सिडीज: यूरोपियन ब्रांड्स BMW की i4 और iX, ऑडी की e-tron और मर्सिडीज की EQ सीरीज जैसी लग्जरी EVs टेस्ला की कारों से प्रीमियम मार्केट में मुकाबला करेंगी।
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मिडिल ईस्ट में उबाल, दुनियाभर के बाजारों में भूचाल, कमजोर खुल सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में संकट गहराने व होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने तथा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान के बाद दुनियाभर के बाजार 3 मार्च को क्रैश हो गए। एशियाई बाजार 11 महीनों के अपने सबसे खराब दौर के ट्रेक पर नजर आ रहे हैं। साउथ कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा कमजोरी दिख रही है। छुट्टी से लौटने के बाद यह 5 फीसदी गिर गया और प्रोग्राम ट्रेडिंग के लिए कुछ समय के लिए सेल ऑर्डर रोक दिए गए। होली की छुट्टी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं। फ्यूचर्स से जुड़े संकेतक GIFT Nifty में करीब 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,355 के आसपास लगभग 2.55% नीचे ट्रेड करता दिखा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि BSE Sensex और NIFTY 50 दबाव में खुल सकते हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। उल्लेखनिय है कि ट्रंप ने कहा कि यह वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है। 

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। टेक दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix में करीब 10% तक की कमजोरी आई।

जापान का Nikkei 225 3% से अधिक फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का SSE Composite Index भी 1% से ज्यादा नीचे रहे। यूरोप में Stoxx Europe 600 लगभग 2.5% गिरा, वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स में भी 2% तक की कमजोरी दिखी।

कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच Brent Crude 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी दर्ज हुई थी। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते जोखिम ने तेल और गैस आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेल की बढ़ती कीमतें एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

सोमवार को भी दिखा भारी उतार-चढ़ाव

सोमवार को भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूटा, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी के साथ करीब 1,048 अंकों की गिरावट पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 575 अंक फिसलकर अंत में 312 अंक नीचे बंद हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय संतुलित और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल, तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम

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मुंबई, एजेंसी। गैस की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आज थोक गैस की कीमतों में 32% की सीधी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे दाम थोड़े समय के लिए 151 पेंस प्रति थर्म तक जा पहुंचे। यह फरवरी 2023 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।

एक हफ्ते में करीब 93% की वृद्धि 

बाजार में गैस की कीमतों का बढ़ना जारी है। कल कीमतों में हुई 50% की वृद्धि के बाद, इस सप्ताह अब तक गैस के दाम 93% तक बढ़ चुके हैं। हालांकि, शुरुआती उछाल के बाद कीमतों में मामूली राहत देखी गई और यह 148 पेंस प्रति थर्म पर आकर रुकी।

आम आदमी पर क्या होगा असर? 

गैस की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। बिजली की कीमतें अभी भी थोक गैस की लागत से जुड़ी हुई हैं, इसलिए गैस महंगी होने से बिजली भी महंगी हो सकती है। दूसरी ओर ‘एनर्जी प्राइस कैप’ (जो ऊर्जा की प्रति यूनिट अधिकतम शुल्क को सीमित करती है) काफी हद तक थोक लागतों के आधार पर ही तय की जाती है। 

यदि थोक कीमतें इसी उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू बिलों (Household bills) में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

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Gold-Silver Drop: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव, कीमतों में आई बड़ी गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के कारण सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर शाम के कारोबार में दोनों कीमती धातुएं औंधे मुंह गिरी है। MCX पर खबर लिख जाने के समय सोने का वायदा भाव 2.45% यानि 3760 रुपए की गिरावट के साथ 1,62,314 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं चांदी में 16653 रुपए (6.21%) टूटकर 2,61,828 रुपए प्रति किलोग्राम पर था। आपको बता दें कि आज MCX पर होली के कारण सुबह का कारोबार बंद था। इंटरनैशनल मार्केट में भी सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आई है।

इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमत

इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें $5400 के पार चली गईं, जिसके बाद देर शाम के ट्रेडिंग में गिरावट देखी गई। शाम के कारोबार में Comex पर सोना 159 डॉलर की गिरावट के साथ 5,159.10 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के भाव ने इस साल 5,586.20 डॉलर के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया। Comex पर चांदी के वायदा भाव 7.44 डॉलर की गिरावट के साथ 81.50 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। इसके भाव ने इस साल 121.79 डॉलर का उच्चतम स्तर छू लिया।

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