कोरबा
कोयले की काली हकीकत – उत्पादन में तीन गुना उछाल, पर आधे रह गए हाथ
कोल इंडिया के 50 साल, मशीनीकरण की चमक के पीछे बढ़ता ठेका प्रथा का बोझ और उजड़ते गांवों की सिसकियाँ
कोरबा। 1 नवंबर 1975 को जब देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड की नींव रखी गई तब इसके पास 6.70 लाख स्थायी कर्मचारियों की फौज थी आज 2024-25 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कोयला खदानों में मशीनों का शोर तो बढ़ा है और उत्पादन में 3 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि भी हुई है, लेकिन इस विकास की कीमत उन मजदूरों ने चुकाई है, जिनकी नौकरियां खत्म हो गईं और उन किसानों ने जिनकी जमीनें खदानों में समा गईं ।

उत्पादन का नया रिकॉर्ड, रोजगार का ब्लैकआउट
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि कोल इंडिया में पिछले तीन दशकों में स्थायी कार्यबल में 65% की भारी गिरावट आई है। वर्ष 1995 में जब कंपनी 237 मिलियन टन कोयला निकाल रही थी, तब 6.40 लाख स्थायी कर्मचारी तैनात थे। आज उत्पादन बढ़कर 773 मिलियन टन (वर्ष 2024-25) पहुंच गया है, लेकिन स्थायी कर्मचारी घटकर मात्र 2.20 लाख रह गए हैं। इस खाई को भरने के लिए ठेका प्रथा (Outsourcing) का सहारा लिया गया है। अकेले SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में आज लगभग 44,000 स्थायी कर्मियों के मुकाबले 1,07,626 ठेका मजदूर काम कर रहे हैं, यानी प्रबंधन अब स्थायी रोजगार देने के बजाय सस्ते और अस्थाई श्रम पर निर्भर है ।

SECL जमीन ली लाखों एकड़, नौकरी मिली चंद सैकड़ों को
छत्तीसगढ़ की लाइफलाइन कही जाने वाली SECL ने अब तक 1,85,575 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है, लेकिन इस भूमि के बदले मिलने वाले रोजगार की रफ्तार सुस्त है। पिछले तीन वर्षों में जहां 1,85,000 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित हुई उसके एवज में केवल 1200 लोगों को रोजगार दिया गया, वहीं सीधी भर्ती में भी केवल 1300 लोगों को ही मौका मिला ।
उजड़ती खेती, बढ़ता खनन, गेवरा-दीपका- कुसमुंडा का संकट
एशिया की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शुमार गेवरा, दीपका और कुसमुंडा में खनन के कारण लगभग 7805 हेक्टेयर कृषि भूमि का अस्तित्व खत्म हो गया है। आने वाले समय में 5000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का अर्जन प्रस्तावित है, खेती योग्य भूमि के कम होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई है ।
गेवरा परियोजना
यहां 20 से ज्यादा गांवों का अस्तित्व मिट चुका है पुनर्वास की स्थिति यह है कि प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है ।
प्रबंधन की नाकामी, आवासों पर कब्जा और संसाधनों की बर्बादी
एक ओर जहां कंपनी नए आवासों के निर्माण पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुराने संसाधनों का प्रबंधन करने में नाकाम साबित हो रही है ।
कोल इंडिया के पास 3.80 लाख आवास हैं, जबकि कर्मचारी केवल 2.20 लाख।
अकेले गेवरा में 3200 क्वार्टर्स में से 250 पर अवैध कब्जा है।
प्रबंधन इन अवैध कब्जाधारियों को हटाने के बजाय उनके बिजली और पानी का खर्च वहन कर रहा है, जो सीधे तौर पर राजस्व की हानि है ।
मुख्य मुद्दे जो समाधान मांगते हैं:-
पुनर्वास की बदहाली
प्रभावित गांवों के लिए बनाई गई नीतियां केवल कागजों तक सीमित हैं, विस्थापितों को मिलने वाला मुआवजा और सुविधाएं ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं ।
सुरक्षा और वेतन विसंगति
ठेका मजदूरों से काम तो स्थायी कर्मचारियों जैसा लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें मिलने वाली सुरक्षा और वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है ।
कृषि का संकट
उपजाऊ भूमि के खनन क्षेत्र में तब्दील होने से भविष्य में खाद्य सुरक्षा की चुनौती पैदा हो सकती है ।
कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियां उत्पादन के नए शिखर तो छू रही हैं, लेकिन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और मानवीय संवेदनाओं के मोर्चे पर पीछे छूटती नजर आ रही हैं, यदि रोजगार पुनर्वास और स्थायी कार्यबल पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह काला सोना स्थानीय समुदायों के लिए केवल काला अंधेरा बनकर रह जाएगा ।
( उपरोक्त आंकड़े गूगल से प्राप्त है आधिकारिक आंकड़े अलग हो सकते हैं )

कोरबा
चित्रा टॉकीज प्रांगण में बिखरेंगे रंग, गोपाल मोदी के संग होली का उमंग
रंगों के पावन पर्व पर होली की भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को दी शुभकामनाएं
कोरबा। रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा 4 मार्च 2026, बुधवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चित्रा टॉकीज प्रांगण, कोरबा में प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगा।इस आयोजन का उद्देश्य रंगों के इस पावन पर्व पर समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और एकता का संदेश देना है। समारोह में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं शहरवासी शामिल होंगे। इस होली मिलन समारोह में उपस्थितजन एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे तथा आपसी समरसता का संदेश प्रसारित करेंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने दी होली की शुभकामनाएं
रंगों के पावन पर्व होली के इस खास अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमें पुराने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कह कि रंगों का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
कोरबा
होली खेलें पर जरा संभलकर, त्वचा और बालों का रखें खास ध्यान- त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जय
कोरबा। होली रंगों का त्योहार है। इसे बड़े ही उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। पहले पारंपरिक होली फूलों, सूखे गुलाल, और पानी के साथ मनाई जाती थी, लेकिन अब सिंथेटिक रंगों ने इसकी जगह ले ली है। जिसका दुष्प्रभाव न केवल हमारी त्वचा तथा बाल, आंखों में भी पड़ता हैं यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। होली की मस्ती के साथ-साथ उत्सव के दौरान अपनी त्वचा और बालों की देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस होली में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह एनकेएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जय बावने देतें हैं।
डॉ. जय बताते हैं कि होली से एक दिन पहले अपनी त्वचा को ढेर सारे मॉइस्चराइजर से हाइड्रेट करें। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा नाजुक नहीं होती है जो आसानी से क्षतिग्रस्त नहीं होगी। होली के दिन अपने बालों में नारियल का तेल, शरीर पर बेबी ऑयल और होंठों पर लिप बाम लगाएं एवं अपनी त्वचा को सुरक्षित रखें। तेल लगाने के बाद सनस्क्रीन लगाना न भूलें। कपड़े पूरी बाजू के पहनें ताकि त्वचा को नुकसान कम से कम हो। अपने नाखूनों की सुरक्षा के लिए नेल पॉलिश लगाएं। होली के दिन भी खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
होली के बाद त्वचा और बालों की देखभाल के टिप्स देते हुए डॉ. जय बतातें हैं कि एक बार जब रंग थोड़ा फीका हो जाए, तो त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने के लिए मेडिकल फेशियल करवाना चाहिए। यह आपको आकर्षक लुक वापस पाने में मदद करेगा। अगर आपको लगता है कि आपकी त्वचा हल्की फट रही है, तो एलोवेरा जेल या लैक्टोकैलेमाइन लोशन लगाएं, लेकिन अगर दाने बने रहते हैं, तो बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। बालों को धोने से पहले सप्ताह में एक बार प्राकृतिक हेयर मास्क का उपयोग करें। डॉ. जय सुझाव देते हैं कि होली खेलने में अधिक पानी, फूलों की पंखुड़ियों और ऑर्गेनिक रंग का उपयोग करना बेहतर है। डॉ. जय बावने त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ एडीसी लैब निहारिका और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में नियमित रूप से उपलब्ध रहते है।
कोरबा
ई-रिक्शा ने बाइक सवार दंपति को मारी टक्कर:महिला के सिर में गंभीर चोट, कोरबा में हादसे के बाद चालक मौके से भागा
कोरबा। कोरबा जिले के बालको थाना क्षेत्र अंतर्गत नेहरू नगर दुर्गा चौक के पास सोमवार को शाम करीब 7 बजे एक तेज रफ्तार ई-रिक्शा की टक्कर से बाइक सवार महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, निरमला राजपूत अपने पति मोहन सिंह के साथ बाइक से घर लौट रही थीं। नेहरू नगर दुर्गा चौक के पास पीछे से आ रहे एक ई-रिक्शा चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
इस दौरान ई-रिक्शा एक राहगीर मां और बेटी को भी चपेट में लेने से बाल-बाल बचा। टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला सड़क पर गिर पड़ीं और उनके सिर में गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद ई-रिक्शा चालक मौके से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। स्थानीय लोगों ने ई-रिक्शा चालक की लापरवाही को हादसे का कारण बताया है। उन्होंने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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