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कुसमुंडा

अधिकारों की लड़ाई होगी तेज, RCWF के आह्वान पर 12 जून को कुसमुंडा में जुटेगा ठेका मजदूर और भूविस्थापितों का महासैलाब

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महासभा को सफल बनाने के लिए आयोजकों ने बैठक कर तैयार की रणनीति, सौंपी गई जिम्मेदारियां

कोरबा/कुसमुंडा। कोयला खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका मजदूरों व भूविस्थापितों के अधिकारों के दमन सुरक्षा में अनदेखी और उनके वाजिब हक को दबाने की कोशिशों के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का शंखनाद होने जा रहा है। राष्ट्रीय कालरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर आगामी 12 जून 2026 दिन शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे से कुसमुंडा के महतारी अंगना मैदान पर एक विशाल ठेका मजदूर और भूविस्थापित महासभा का आयोजन किया जा रहा है ।

इस महासभा को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए आयोजकों द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें क्षेत्र के सभी जिम्मेदार साथियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ।

शोषण के खिलाफ एक मंच पर आएंगे श्रमिक और भूविस्थापित

बैठक के दौरान आयोजकों ने तीखे शब्दों में कहा कि कोयला खदानों सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों का प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है, उनके अधिकारों सुरक्षा व्यवस्था और वाजिब हक को बेरहमी से कुचला जा रहा है। इस महासभा का मुख्य उद्देश्य सभी ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों को एक मजबूत मंच पर लाना है, ताकि प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ उनके हक व अधिकार की लड़ाई को और तेज व निर्णायक बनाया जा सके ।

तैयारियों को लेकर सौंपी गई जिम्मेदारियां, बैठक में रहे मौजूद

महासभा की सफलता के लिए रणनीति बनाने हेतु आयोजित इस बैठक में क्षेत्र के प्रबुद्ध और जिम्मेदार नागरिकों व श्रमिक नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रमुख रूप से कैलाश साहू, विनोद सारथी, अशोक पटेल, विष्णु प्रसाद, गोविंदा सारथी, राजेन्द्र पटेल, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, कान्हा, प्रकाश जायसवाल, राजू पटेल, नरेश महंत, हेमंत नामदेव, प्रमोद चंद्रा, उदय पटेल, सुरेश पटेल, रामकुमार चन्द्रा, रामकुमार, आनंद यादव, गणेश दास, विजय महंत, अनिल कंवर, देवनाथ नामदेव, बोधन चौहान, अशोक देवांगन, जितेन्द्र साहू, कान्हा, अहीर, तेरस लाल, लखन लाल सहित बड़ी संख्या में अन्य साथी उपस्थित थे ।

आयोजकों की अपील

आयोजक समिति ने कुसमुंडा और आसपास के सभी ठेका श्रमिकों भूविस्थापितों और प्रभावित नागरिकों से अपील की है कि वे 12 जून को दोपहर 3:00 बजे अधिक से अधिक संख्या में कुसमुंडा महतारी अंगना पहुंचकर अपनी एकजुटता का परिचय दें और अपने अधिकारों की इस आवाज को बुलंद करें ।

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कुसमुंडा

कुसमुंडा में कोल परिवहन का चक्काजाम कर किसान सभा ने विस्थापन प्रभावित बेरोजगारों को आऊट सोर्सिंग कंपनियों में रोजगार देने की मांग की

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11 नवंबर को प्रशासन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता में समस्याओं के समाधान के लिखित आश्वाशन दिया एसईसीएल ने

कोरबा/कुसमुंडा।छत्तीसगढ़ किसान सभा ने एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में आउट सोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाले कामों में प्रभावित भू विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर कुसमुंडा थाना के पास कुसमुंडा से गुजरने वाली कोल परिवहन को पूर्ण रूप से रोककर चक्काजाम शुरू कर दिया चक्काजाम को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल उपस्थित था। चक्काजाम से खदान के अंदर और बाहर भारी वाहनों का जाम लगना शुरू हुआ जिसके बाद दर्री तहसीलदार और कुसमुंडा थाना प्रभारी ने थाना में किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल को त्रिपक्षीय वार्ता के लिए बुलाया बैठक में एसईसीएल ने 11 नवंबर को प्रशासन की उपस्तिथि में समस्याओं के समाधान का लिखित आश्वासन दिया उसके बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने प्रशासन से मांग किया की एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण हुई है वह भू विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और प्रबंधन आऊट सोर्सिंग कंपनियों के साथ सांठ गांठ कर दूसरे जिलों और प्रदेशों से कर्मचारी लाकर भर्ती कर रही है। जिसका हमारे संगठन द्वारा विरोध किया जा रहा है कुसमुंडा और गेवरा में होने वाले कार्यों में प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण प्रभावित भू विस्थापित और स्थानीय बेरोजगारों को सड़क पर उतर कर विरोध करना पड़ रहा है।

किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और सचिव दीपक साहू ने कहा की खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की पूरी जमीन ली जाती है लेकिन रोजगार देते समय 100% रोजगार प्रभावित ग्रामीणों को नहीं दिया जा रहा है 30% कंपनी सुरक्षित रखते हुए जिले से बाहर के लोगों को भरकर प्रभावितों के हक के रोजगार को बेच रही है। छोटे रकबा वाले किसानों को खेती किसानी से अलग कर पहले ही बेरोजगार बना दिया गया है और रोजगार होने के बावजूद किसानों को रोजगार से वंचित रखा जा है। प्रभावितों के पास अब संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। अगर प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्र के भू विस्थापितों की बात नहीं सुनी तो आगे और उग्र आंदोलन होगा।

भू विस्थापित नेता दामोदर श्याम और रेशम यादव ने आरोप लगाया कि जिनकी जमीन गई है उन्हें ना तो स्थाई रोजगार दिया जा रहा है ना ही उनके परिवार को आऊट सोर्सिंग में काम सभी के हक को निजी कंपनी छीनने का कार्य कर रही है। भू विस्थापित नेताओं ने इसके विरोध में एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में उग्र प्रदर्शन कर चक्काजाम किया है और आगे भी सही नीति नहीं बनी तो आंदोलन का विस्तार होगा।

चक्काजाम में प्रमुख रूप से दामोदर श्याम,रेशम यादव,दीपक साहू,जय कौशिक,उत्तम दास,हरिहर,दीनानाथ,विकाश,दिलीप,सोनू,सागर पटेल,मोहम्मद हुसैन,राजेश्वर दास,शशि यादव,जय चंद बरेठ,शनि,रामकुमार,हरी साहू, के साथ प्रभावित क्षेत्र के बेरोजगार शामिल थे।

मांगे

  1. खदान विस्तार के लिए पूर्व एवं वर्तमान में जिन गांव की जमीन अधिग्रहण हुई है उन गांव के बेरोजगारों को पहली प्राथमिकता के साथ आउट सोर्सिंग कंपनियों में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
  2. खनन प्रभावित क्षेत्र एवं जिले के ही बेरोजगारों को आऊट सोर्शिंग कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
  3. आउट सोर्सिंग कंपनियों का काम समाप्त होने पर चालू होने वाले नए कंपनियों में पुराने कर्मचारियों को कार्य में पुनः रखा जाए। (वर्तमान में गोदावरी कंपनी बंद होने के कारण जिले के सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं )।
  4. आउट सोर्सिंग कंपनियों में 70 और 30% रोजगार देने का खेल समाप्त किया जाए। जिनकी जमीन अधिग्रहण हुई है उन्हे पहली प्राथमिकता के साथ खनन प्रभावित जिले के बेरोजगारों को खनन कार्य में 100% रोजगार दिया जाए।

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कुसमुंडा

पुलिस की तत्पर कार्रवाई: गंगा नगर बाजार के पास हुई डकैती का पर्दाफाश, 02 शातिर आरोपी गिरफ्तार, रू.21,000 मूल्य के लूटे गए मोबाइल फोन व नकदी बरामद

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कोरबा/कुसमुंडा। थाना कुसमुंडा पुलिस ने गंगा नगर बाजार के पास राहगीरों को रोककर मारपीट, चाकू दिखाकर डकैती करने वाले गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटे गए 3 मोबाइल फोन और नकदी सहित कुल रू.21,000 की संपत्ति बरामद कर ली है।

30 अक्टूबर 2026 की रात प्रार्थी अपने साथियों (सुरेंद्रपाल कंवर, ज्योतिश कुमार, उमेश कंवर, प्रमोद कंवर व अजय सिंह) के साथ ग्राम खोडरी से लौट रहा था। रात करीब 11:00 बजे जब वे गंगा नगर बाजार के समीप पहुंचे, तभी 7 से 8 अज्ञात व्यक्तियों ने लूट की नीयत से उनकी मोटरसाइकिल रोक ली।
आरोपियों ने हाथ-मुक्कों, बेल्ट व डंडे से प्रार्थी और उसके साथियों की बेरहमी से पिटाई की और चाकू दिखाकर डराते हुए प्रार्थी का विवो Y31, ज्योतिश कुमार का ओप्पो A5 (मय पर्स व रू.500 नकद) तथा सुरेंद्र पाल कंवर का विवो Y18 मोबाइल फोन लूट कर फरार हो गए। मारपीट में प्रार्थी व उसके साथियों को गंभीर चोटें आईं।
पीड़ित की शिकायत पर थाना कुसमुंडा में अपराध क्रमांक 186/2026, धारा 331(4), 305, 3(5) बीएनएस (BNS) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कुसमुंडा पुलिस ने तत्काल विशेष टीम गठित कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू की। मुखबिर तंत्र और त्वरित छानबीन के आधार पर पुलिस ने घटना में संलिप्त दो आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई समस्त संपत्ति बरामद कर ली गई।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

  • निशांत प्रसाद केंवट (20 वर्ष), पिता: लक्ष्मी प्रसाद केंवट, साकिन: कुदरीपार (शिव मंदिर के पास), थाना बांकीमोंगरा, जिला कोरबा (छ.ग.)।
  • शिवा बिंझवार (20 वर्ष), पिता: रामसिंह बिंझवार, साकिन: मोंगरा बस्ती, थाना बांकीमोंगरा, जिला कोरबा (छ.ग.)।
    बरामदगी
  • विवो Y31, ओप्पो A5 और विवो Y18 मोबाइल फोन
  • लूटी गई नकदी रकम
  • कुल बरामदगी मूल्य: लगभग रू.21,000

दोनों आरोपियों को सक्षम न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वारदात में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है।

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कुसमुंडा

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पहचान वाले लक्ष्मण नाला के अस्तित्व पर संकट, निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने की मांग

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निजी कंपनी की सुविधा के लिए स्थानीय धरोहर को नुकसान पहुँचाने की आशंका, कलेक्टर से निष्पक्ष जाँच की मांग

कोरबा/कुसमुंडा। जिले के ग्राम कुचेना कुसमुंडा स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक लोकमान्यता से जुड़े लक्ष्मण नाला के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने चिंता व्यक्त की है। समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कलेक्टर जिला कोरबा को ज्ञापन सौंपकर लक्ष्मण नाला के आसपास कराए जा रहे सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों पर जाँच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाने तथा इस स्थल के संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है ।

समिति के अनुसार ग्राम कुचेना का लक्ष्मण नाला स्थानीय ग्रामीणों की ऐतिहासिक पौराणिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय बुजुर्गों एवं ग्रामीणों के बीच प्रचलित लोकमान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण जी के वनवास काल से इस स्थान का संबंध माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यहाँ एक बड़े पत्थर की आकृति भी मौजूद है, जिसे लक्ष्मण जी द्वारा ईंट काटे जाने से संबंधित मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह स्थल लंबे समय से स्थानीय जनमानस की आस्था एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है ।

निजी कंपनी की सुविधा के लिए निर्माण, निष्पक्ष जाँच जरूरी

सपुरन कुलदीप ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में किसानों की निजी भूमि खरीदकर कोयला डिस्पैच के लिए स्टॉक एवं सड़क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। आशंका है कि इस निर्माण से लक्ष्मण नाला की प्राकृतिक संरचना जल प्रवाह तथा उससे जुड़ी ऐतिहासिक-पौराणिक पहचान को नुकसान पहुँच सकता है ।

उन्होंने कहा कि यदि किसी निजी कंपनी की व्यावसायिक सुविधा के लिए सड़क निर्माण किया जा रहा है, तो उसकी आवश्यकता स्वीकृति जनहित एवं स्थानीय धरोहर पर पड़ने वाले प्रभाव की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। किसानों की भूमि खरीदी जाने, भूमि के मूल्य तथा निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके ।

विकास का विरोध नहीं, धरोहर की सुरक्षा जरूरी

समिति अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संगठन विकास कार्यों का विरोधी नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर किसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व को खतरे में डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण नाला केवल जल निकासी का माध्यम नहीं बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की लोकस्मृति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा स्थल है एक बार ऐसी धरोहर नष्ट हो जाने पर उसकी भरपाई संभव नहीं होगी ।

समिति की प्रमुख मांगें

समिति ने कलेक्टर से मांग की है कि:—

  1. लक्ष्मण नाला के आसपास चल रहे निर्माण कार्यों पर जाँच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाई जाए ।
  2. राजस्व विभाग संबंधित ग्राम पंचायत एवं अन्य सक्षम विभागों की संयुक्त टीम बनाकर स्थल का निरीक्षण एवं सीमांकन कराया जाए ।
  3. नाले की प्राकृतिक संरचना जल प्रवाह और स्थानीय ऐतिहासिक-पौराणिक मान्यताओं का दस्तावेजीकरण कराया जाए ।
  4. किसानों की भूमि खरीदी भूमि के मूल्य सड़क निर्माण की आवश्यकता तथा निजी कंपनी को होने वाले संभावित लाभ की निष्पक्ष जाँच की जाए ।
  5. सड़क निर्माण की स्वीकृति नक्शा वैधानिक अनुमति एवं अन्य संबंधित अभिलेखों की जाँच कराई जाए ।
  6. लक्ष्मण नाला को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षण योजना बनाई जाए तथा आवश्यकता होने पर वैकल्पिक सड़क मार्ग पर विचार किया जाए ।
  7. जाँच एवं की गई कार्रवाई की जानकारी ग्रामवासियों और समिति को लिखित रूप में दी जाए ।

कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

सपुरन कुलदीप ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि जनभावनाओं प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था एवं स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए, मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य से किसी प्रकार की अपूरणीय क्षति होने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।

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