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बिज़नस

बेकाबू हुआ AI अमेरिकी सरकारी वेबसाइट में घुसा:डेटा निकालकर इंटरनेट पर डाला, हैकिंग की भी कोशिश, लैब को भनक तक नहीं लगी

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वाशिंगठन, एजेंसी। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई का AI सिस्टम बेकाबू हो गया। अपनी लैब को बताए बिना ही कामर्स डिपार्टमेंट और अमेरिकी शेयर मार्केट रेगुलेटर SEC की वेबसाइटों से डेटा निकाल लिया। अमेरिका के शिक्षा विभाग की वेबसाइट को हैक करने की भी कोशिश की।

कॉमर्स डिपार्टमेंट और SEC की वेबसाइट पर हुई इस गड़बड़ी को खुद ओपनएआई ने सही माना है। कंपनी ने कहा कि वह शिक्षा विभाग वाले मामले की पड़ताल कर रही है।

ओपनएआई के मुताबिक, उसने पिछले कुछ हफ्तों में खुद सरकारी एजेंसियों को बताया था कि उसके ऑटोमेटेड एआई एजेंट्स ने उनकी वेबसाइटों पर अजीब हरकतें की हैं।

AI एजेंट ने डेटा की कॉपी बनाई, इंटरनेट पर पोस्ट की

एआई रिसर्च फर्म ‘ट्रांसलूज’ के रिसर्चर्स का कहना है कि शिक्षा विभाग की वेबसाइट से सिविल राइट्स ऑफिस का डेटा जुटाने के लिए ओपनएआई के सिस्टम ने उसे हैक करने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रही।

इसके अलावा, AI ने ऑनलाइन मिले लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके कॉमर्स डिपार्टमेंट के तहत आने वाले सेंसस ब्यूरो की वेबसाइट से भी डेटा निकाला।

वहीं एक अन्य मामले में, ओपनएआई के एजेंट्स ने SEC की वेबसाइट का पब्लिक डेटा एक ऑनलाइन फोरम पर शेयर कर दिया।

ओपनएआई का दावा है कि ये घटनाएं किसी बड़े डेटा लीक या हैकिंग के दायरे में नहीं आती हैं, लेकिन इससे साफ है कि सिस्टम ने उम्मीद से अलग और चिंता पैदा करने वाला काम किया।

कंपनी को इन घटनाओं का पता तब चला जब वह टेक स्टार्टअप ‘हगिंग फेस’ पर अपने सिस्टम से हुई सेंधमारी की पड़ताल कर रही थी।

एजेंसियां बोलीं- कोई संवेदनशील डेटा लीक नहीं

मामला सामने आने के बाद शेयर बाजार नियामक SEC के प्रवक्ता ने कहा कि एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया।

एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बताया कि डेटाबेस को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। वहीं, कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है।

गूगल, मेटा और एंथ्रोपिक के एआई भी कर चुके हैं ऐसी गड़बड़ियां

अमेरिकी सरकार की वेबसाइटों से जुड़े इन मामलों के सामने आने के बाद ऐसी घटनाओं की लिस्ट और लंबी हो गई है। ओपनएआई, एंथ्रोपिक, मेटा और गूगल के एआई एजेंट्स ने कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने या हैक करने की कोशिश की है।

इनमें से कुछ कोशिशें कामयाब रहीं और कुछ नाकाम। बड़ी बात यह है कि इन सभी मामलों में खुद कंपनियों को भी बाद में पता चला कि उनका एआई पर्दे के पीछे क्या कर रहा था। सिस्टम बेकाबू होने के मामलों में सबसे ज्यादा नाम ओपनएआई का सामने आया है।

ओपनएआई की प्रवक्ता के अनुसार, जांच बड़े पैमाने पर चल रही है और जिन संस्थाओं पर असर पड़ा है, उन्हें जानकारी दी जाती रहेगी। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामले सामान्य रिसर्च टास्क से जुड़े थे, जहां एआई भरोसेमंद जानकारी जुटाने के लिए सरकारी वेबसाइटों पर गया था।

सैम ऑल्टमैन बोले- घटनाओं की जानकारी बाहर लाने में देरी हुई

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर माना कि इन घटनाओं की जानकारी बाहर लाने में कंपनी से देरी हुई है। उन्होंने कहा कि टीम मामलों की गंभीरता के आधार पर काम कर रही है और ‘हगिंग फेस’ में हुई सेंधमारी अब तक का सबसे गंभीर मामला है।

AI एजेंट ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट में भी घुस गए थे

दो दिन दिन पहले खुलासा हुआ था इन ओपन एआई के AI एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट का भी एक्सेस हासिल कर लिया था। यह घटना जून में हुई थी, लेकिन सरकार को इसकी जानकारी सितंबर में मिली।

एआई को बेकाबू होने से रोकने के लिए ‘किल स्विच’ की बात हो रही

कई देश और एक्सपर्ट चाहते हैं कि एआई कंपनियों के लिए एक इमरजेंसी ‘किल स्विच’ बनाया जाए, जिससे खतरा दिखने पर पूरे एआई को एक झटके में बंद किया जा सके।

ओपनएआई ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स तैयार करने में जुटी है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर के नेटवर्क से जुड़े AI को किसी एक स्विच से बंद करना लगभग नामुमकिन है।

भविष्य के खतरों पर एआई विशेषज्ञों का क्या कहना है?

यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. हैमंड पिएर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामले आगे चलकर और खतरनाक हो सकते हैं। ये सरकारों के लिए खतरे की बड़ी घंटी है।

वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के डॉ. राफेल सिरिएलो ने कहा कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एआई लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी है। किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा।

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देश

एडरॉयट इंडस्ट्रीज के आईपीओ को 177 गुना बोली मिली

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नई दिल्ली, एजेंसी। एडरॉयट इंडस्ट्रीज के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को शुक्रवार को बोली के अंतिम दिन करीब 177 गुना अभिदान मिला। इसके साथ ही चार सार्वजनिक निर्गम अधिक अभिदान के साथ बंद हुए। अन्य तीन आईपीओ स्वास्तिका इंफ्रा, एलिवेट कैम्पसेज और आरमी इंफोटेक के हैं। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, एडरॉयट इंडस्ट्रीज के 151 करोड़ रुपए के आईपीओ में 78,72,900 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 1,39,22,95,200 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह आईपीओ 176.85 गुना अभिदान हुआ। 

गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी को 332.35 गुना, पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के हिस्से को 195.04 गुना और खुदरा निवेशकों के हिस्से को 99.81 गुना अभिदान मिला। एडरॉयट इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड के आईपीओ का मूल्य दायरा 126-134 रुपए प्रति शेयर है। इसमें 98,97,000 तक नए इक्विटी शेयरों का निर्गम और 13,50,000 तक इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश शामिल है। विद्यार्थियों के लिए आवास सुविधाएं और किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक की स्कूली शिक्षा से जुड़ी कंपनी एलिवेट कैम्पसेज के 2,100 करोड़ रुपए के आईपीओ को शुक्रवार को बोली के अंतिम दिन 1.79 गुना अभिदान मिला। इसे 3,36,73,468 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 6,02,86,769 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। 

एलिवेट कैम्पसेज के आईपीओ में नए इक्विटी शेयरों का निर्गम शामिल है और बिक्री पेशकश का कोई हिस्सा नहीं है। इसका मूल्य दायरा 343-362 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है। ऊपरी मूल्य दायरे पर कंपनी का मूल्यांकन 6,100 करोड़ रुपए से अधिक होगा। स्वास्तिका इंफ्रा के 161 करोड़ रुपए के आईपीओ को शुक्रवार को 7.60 गुना अभिदान मिला। इसे 63,35,001 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 4,81,51,260 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। 

गैर-संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 18.50 गुना, खुदरा निवेशकों के हिस्से को 5.39 गुना और क्यूआईबी श्रेणी को 3.22 गुना अभिदान मिला। इस आईपीओ में 128.50 करोड़ रुपए तक के नए शेयरों का निर्गम और 17,50,000 तक इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश शामिल है। इसका मूल्य दायरा 175-185 रुपए प्रति शेयर है। आरमी इंफोटेक के आईपीओ को 2.44 गुना अभिदान मिला। इसे 74,30,356 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 1,81,59,240 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। पात्र संस्थागत खरीदारों की श्रेणी को 2.99 गुना, खुदरा निवेशकों के हिस्से को 2.47 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 2.09 गुना अभिदान मिला। आरमी इंफोटेक के आईपीओ में 300 करोड़ रुपए तक के नए शेयरों का निर्गम शामिल है। इसका मूल्य दायरा 350-375 रुपए प्रति शेयर है। 

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देश

FDI अप्रैल-जून तिमाही में  6% बढ़कर 19.81 अरब डॉलर, अमेरिका से निवेश 76% घटा

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर रहा। हालांकि, इस दौरान अमेरिका से एफडीआई 76 प्रतिशत से अधिक घटा। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में भारत में 18.62 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। 

मई में एफडीआई एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 45 प्रतिशत से अधिक घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा। जून में भी इसमें करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4.91 अरब डॉलर रहा। हालांकि, अप्रैल में एफडीआई करीब दोगुना बढ़कर 12.1 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 6.6 अरब डॉलर था। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जापान 5.71 अरब डॉलर के एफडीआई के साथ सबसे बड़ा निवेशक रहा। इसके बाद क्रमश: सिंगापुर (5.22 अरब डॉलर), मॉरीशस (2.31 अरब डॉलर), नीदरलैंड (1.38 अरब डॉलर), अमेरिका (1.34 अरब डॉलर) और संयुक्त अरब अमीरात (86.8 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा। 

अमेरिका से एफडीआई चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 76 प्रतिशत से अधिक घटकर 1.34 अरब डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह 5.61 अरब डॉलर था। संयुक्त अरब अमीरात से भी निवेश घटकर 86.8 करोड़ डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक अरब डॉलर था। 

आंकड़ों के अनुसार, जिन प्रमुख क्षेत्रों में अच्छा एफडीआई आया, उनमें सेवा क्षेत्र (7.04 अरब डॉलर), कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में (2.84 अरब डॉलर), व्यापार में (1.92 अरब डॉलर), गैर-पारंपरिक ऊर्जा में (1.24 अरब डॉलर) और वाहन क्षेत्र में (62.2 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। इक्विटी निवेश, मुनाफे का निवेश और अन्य पूंजी को मिलाकर कुल एफडीआई अप्रैल-जून 2026-27 में करीब 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया। राज्यों में तमिलनाडु को इस अवधि में सबसे अधिक 5.95 अरब डॉलर का एफडीआई मिला। इसके बाद महाराष्ट्र (4.22 अरब डॉलर), दिल्ली (2.67 अरब डॉलर), कर्नाटक (2.11 अरब डॉलर) और गुजरात (1.3 अरब डॉलर) का स्थान रहा। 

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देश

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत अगस्त में 2.88 लाख करोड़ रुपए बढ़ी

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में 150 करोड़ रुपए से अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कुल लागत में करीब 2,88,122 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। अगस्त 2026 की सरकारी मासिक रिपोर्ट में यह कहा गया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की रिपोर्ट के अनुसार, 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 1,731 निर्माणाधीन परियोजनाओं की निगरानी की गई। इन परियोजनाओं की मूल लागत 30.71 लाख करोड़ रुपए थी, जो संशोधित होकर 33.60 लाख करोड़ रुपए हो गई है। रिपोर्ट में हालांकि यह नहीं बताया गया है कि वास्तव में कितनी परियोजनाओं में लागत बढ़ी है। 

मंत्रालय ने कहा कि इन परियोजनाओं पर अब तक 16.33 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जो संशोधित कुल परियोजना लागत का करीब 48.59 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, 647 परियोजनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हो चुकी है, जबकि 312 परियोजनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। परिवहन एवं लॉजिस्टिक क्षेत्र में सबसे अधिक 1,191 निर्माणाधीन परियोजनाएं हैं। इनकी संशोधित कुल लागत 16.05 लाख करोड़ रुपए है। कुल 1,731 परियोजनाओं में 715 ऐसी बड़ी परियोजनाएं हैं जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक है। इनकी मूल कुल लागत 25.89 लाख करोड़ रुपए थी। 

वहीं, 1,016 परियोजनाओं की लागत 150 करोड़ रुपए से 1,000 करोड़ रुपए से कम के बीच है और इनकी मूल कुल लागत 4.83 लाख करोड़ रुपए थी। मंत्रालय के अनुसार, परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति मोटे तौर पर एक-दूसरे के अनुरूप है। बड़ी संख्या में परियोजनाएं या तो शुरुआती चरण में हैं या पूरा होने के करीब हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास सबसे अधिक 982 परियोजनाएं हैं, जो कुल परियोजनाओं का 57 प्रतिशत हैं। इनकी संशोधित कुल लागत 9.52 लाख करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय के पास 147 निर्माणाधीन परियोजनाएं हैं, जिनकी संशोधित कुल लागत 3.14 लाख करोड़ रुपए है। कोयला मंत्रालय के पास 122 परियोजनाएं हैं, जिनकी संशोधित लागत 2.22 लाख करोड़ रुपए है।  

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