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UPI ने Visa को पछाड़ा, बना दुनिया का सबसे तेज़ डिजिटल पेमेंट सिस्टम

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नई दिल्ली,एजेंसी।कुछ साल पहले तक डिजिटल पेमेंट्स का मतलब था Visa और MasterCard। लेकिन आज, भारत में विकसित एक तकनीक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) वैश्विक स्तर पर भुगतान प्रणाली का चेहरा बदल रही है। Visa और MasterCard जैसी दशकों पुरानी कंपनियाँ अब UPI के सामने संघर्ष करती दिख रही हैं।

UPI की उड़ान: रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन से बढ़ता विश्वास
➤ 2025 के जून महीने की शुरुआत में ही UPI ने रोजाना 65 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया।
➤ सिर्फ 1 जून को 64.4 करोड़ ट्रांजेक्शन और अगले दिन 65 करोड़ से ऊपर — ये संख्याएँ दिखाती हैं कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में अब UPI को अपनाया जा रहा है।
➤ वहीं Visa के आंकड़े देखें तो फाइनेंशियल ईयर 2024 में उनके औसत दैनिक ट्रांजेक्शन 64 करोड़ रहे। मतलब अब UPI रोजाना के आधार पर Visa से आगे निकल चुका है।

क्यों है UPI इतना प्रभावशाली?
➤ लो-कोस्ट ट्रांजेक्शन: बैंक-टू-बैंक फ्री ट्रांसफर ने लोगों का भरोसा जीता।
➤ यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस: केवल एक QR कोड या मोबाइल नंबर से पेमेंट संभव।
➤ सीधी बैंकिंग: इसमें कोई इंटरमीडियरी कार्ड कंपनी नहीं, जिससे लागत और समय दोनों की बचत।
➤ सरकारी समर्थन: भारत सरकार और RBI की रणनीतिक पहल ने इसे घर-घर तक पहुंचाया।


Visa और MasterCard के लिए चेतावनी की घंटी?
UPI की तेज़ी से बढ़ती स्वीकार्यता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Visa जैसी कंपनियों के लिए एक चुनौती बन गई है। ज़ैगल के संस्थापक राज पी नारायणम के अनुसार, आने वाले वर्षों में UPI सालाना 400 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार कर सकता है — यह Visa के मौजूदा 233 अरब ट्रांजेक्शन से दोगुना से अधिक है।

2029 तक क्या होगा?
वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि 2029 तक UPI दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली पेमेंट नेटवर्क बन सकता है। इसके पीछे कारण होंगे:
➤ बढ़ता डिजिटल इंडिया अभियान
➤ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ
➤ कम लागत और उच्च सुविधा

भारत से निकली तकनीक, दुनिया पर छा गई
UPI अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। जिस तरह से यह Visa और MasterCard जैसी संस्थाओं को चुनौती दे रहा है, वह न सिर्फ भारतीयों के लिए गर्व की बात है, बल्कि विकासशील देशों के लिए भी एक प्रेरणा है।

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मिडिल ईस्ट में उबाल, दुनियाभर के बाजारों में भूचाल, कमजोर खुल सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में संकट गहराने व होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने तथा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान के बाद दुनियाभर के बाजार 3 मार्च को क्रैश हो गए। एशियाई बाजार 11 महीनों के अपने सबसे खराब दौर के ट्रेक पर नजर आ रहे हैं। साउथ कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा कमजोरी दिख रही है। छुट्टी से लौटने के बाद यह 5 फीसदी गिर गया और प्रोग्राम ट्रेडिंग के लिए कुछ समय के लिए सेल ऑर्डर रोक दिए गए। होली की छुट्टी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं। फ्यूचर्स से जुड़े संकेतक GIFT Nifty में करीब 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,355 के आसपास लगभग 2.55% नीचे ट्रेड करता दिखा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि BSE Sensex और NIFTY 50 दबाव में खुल सकते हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। उल्लेखनिय है कि ट्रंप ने कहा कि यह वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है। 

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। टेक दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix में करीब 10% तक की कमजोरी आई।

जापान का Nikkei 225 3% से अधिक फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का SSE Composite Index भी 1% से ज्यादा नीचे रहे। यूरोप में Stoxx Europe 600 लगभग 2.5% गिरा, वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स में भी 2% तक की कमजोरी दिखी।

कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच Brent Crude 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी दर्ज हुई थी। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते जोखिम ने तेल और गैस आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेल की बढ़ती कीमतें एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

सोमवार को भी दिखा भारी उतार-चढ़ाव

सोमवार को भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूटा, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी के साथ करीब 1,048 अंकों की गिरावट पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 575 अंक फिसलकर अंत में 312 अंक नीचे बंद हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय संतुलित और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल, तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम

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मुंबई, एजेंसी। गैस की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आज थोक गैस की कीमतों में 32% की सीधी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे दाम थोड़े समय के लिए 151 पेंस प्रति थर्म तक जा पहुंचे। यह फरवरी 2023 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।

एक हफ्ते में करीब 93% की वृद्धि 

बाजार में गैस की कीमतों का बढ़ना जारी है। कल कीमतों में हुई 50% की वृद्धि के बाद, इस सप्ताह अब तक गैस के दाम 93% तक बढ़ चुके हैं। हालांकि, शुरुआती उछाल के बाद कीमतों में मामूली राहत देखी गई और यह 148 पेंस प्रति थर्म पर आकर रुकी।

आम आदमी पर क्या होगा असर? 

गैस की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। बिजली की कीमतें अभी भी थोक गैस की लागत से जुड़ी हुई हैं, इसलिए गैस महंगी होने से बिजली भी महंगी हो सकती है। दूसरी ओर ‘एनर्जी प्राइस कैप’ (जो ऊर्जा की प्रति यूनिट अधिकतम शुल्क को सीमित करती है) काफी हद तक थोक लागतों के आधार पर ही तय की जाती है। 

यदि थोक कीमतें इसी उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू बिलों (Household bills) में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

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Gold-Silver Drop: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव, कीमतों में आई बड़ी गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के कारण सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर शाम के कारोबार में दोनों कीमती धातुएं औंधे मुंह गिरी है। MCX पर खबर लिख जाने के समय सोने का वायदा भाव 2.45% यानि 3760 रुपए की गिरावट के साथ 1,62,314 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं चांदी में 16653 रुपए (6.21%) टूटकर 2,61,828 रुपए प्रति किलोग्राम पर था। आपको बता दें कि आज MCX पर होली के कारण सुबह का कारोबार बंद था। इंटरनैशनल मार्केट में भी सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आई है।

इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमत

इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें $5400 के पार चली गईं, जिसके बाद देर शाम के ट्रेडिंग में गिरावट देखी गई। शाम के कारोबार में Comex पर सोना 159 डॉलर की गिरावट के साथ 5,159.10 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के भाव ने इस साल 5,586.20 डॉलर के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया। Comex पर चांदी के वायदा भाव 7.44 डॉलर की गिरावट के साथ 81.50 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। इसके भाव ने इस साल 121.79 डॉलर का उच्चतम स्तर छू लिया।

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