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कोरबा

बालको में होली का त्योहार धूमधाम से संपन्न

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बालकोनगर। बालको परिवार ने होली उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया। बालको के एल्यूमिनियम क्लब में आयोजित कार्यक्रम में बालको के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिवारजन और विभिन्न श्रमिक संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने तबला और ढोलक की सुमधुर धुनों पर फाग गीतों का आनंद लिया। सीईओ राजेश कुमार और बालको महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती मनीषा कुमार ने बालको परिवार को होली की शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

होली की पूर्व संध्या पर बालकोनगर स्थित जीईटी हॉस्टल में होलिका दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बालको के युवा अधिकारियों ने विधिपूर्वक होलिका की पूजा-अर्चना कर उसका दहन किया।

कंपनी द्वारा आयोजित इस होली उत्सव में स्व सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा निर्मित गुलाल का उपयोग किया गया। इस पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया। “उन्नति” द्वारा निर्मित यह गुलाल बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के अनुकूल है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।

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कोरबा

बालको की उन्नति परियोजना ने बदली ज़िंदगी, गंगोत्री से मशरूम दीदी बनने का सफर

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बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) अपनी सामुदायिक विकास परियोजना ‘उन्नति’ के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन्हीं में से एक प्रेरक कहानी लालघाट क्षेत्र की निवासी गंगोत्री विश्वकर्मा की है, जिन्होंने रोज़ की मजदूरी से निकलकर मशरूम उत्पादन के ज़रिये आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई। बालको के सामुदायिक विकास सहयोग और प्रशिक्षण से आज ‘मशरूम दीदी’ न सिर्फ अपने परिवार को संबल दे रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की राह खोल रही हैं।

गंगोत्री जी ने बताया कि कुछ साल पहले तक उनकी ज़िंदगी रोज़ की मजदूरी के सहारे चलती थी। सुबह काम मिले तो चूल्हा जले, नहीं मिले तो बच्चों के चेहरे देखकर मन भीतर ही भीतर टूट जाता था। भविष्य की चिंता हर रात नींद छीन लेती थी। लेकिन वर्ष 2019 उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बनकर आया। इसी साल उन्नति परियोजना के माध्यम से जय मां हर्षिता स्व सहायता समूह से जुड़कर, मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। उस दिन मैंने महसूस किया कि शायद मेरी मेहनत भी किसी दिन अपनी पहचान बना सकती है।

बालको के सहयोग से मिले प्रशिक्षण के बाद मैंने उसी वर्ष मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआत में 16 बैग लगाए थे। मन में बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन जब फसल आई तो सिर्फ 2 बैग में ही मशरूम उगे। वही दो बैग मेरे लिए हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत की उम्मीद बन गए। मैंने अपनी गलतियों को समझा, तकनीक पर ध्यान दिया और हिम्मत जुटाकर दोबारा कोशिश की। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता गया और आज मसरूम इकाई में लगभग 200 बैग तक मशरूम उत्पादन हो रहा है।

इसकी खेती में 20 से 25 दिनों के भीतर पैदावार की शुरुवात होती है, सप्ताह के अंतराल पर तीन बार फसल मिलती है। लगातार उत्पादन बना रहे, इसलिए मैं रोज़ाना लगभग दो नए बैग तैयार करती हूँ। अब मुझे इंतज़ार नहीं करना पड़ता, हर दिन मेरे सपनों की फसल तैयार होती है। मशरूम उत्पादन की विधि में पैरा-कुट्टी को भिगोकर उतना ही सुखाया जाता है जिससे हल्की नमी बरकरार रहे। पोषण के लिए बायो-स्टिमुलेंट पाउडर और रोग से बचाव के लिए फॉर्मूलिन पाउडर मिलाया जाता है। इसी वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए बैग में अच्छी और सुरक्षित पैदावार होती है।

मैं अपनी पूरी उपज खुद बाज़ार में बेचती हूँ। शुरुआत के कठिन दौर में मुझे बालको सीएसआर से बहुत सहयोग मिला। उसी सहयोग से मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा। आज मैं खुद बीज मंगवाती हूँ और अपने समूह की दूसरी महिलाओं को भी बीज उपलब्ध कराती हूँ। आज मैं जय मां हर्षिता स्व सहायता समूह की सचिव के रूप में कार्य कर रही हूँ। लोग मुझे ‘मशरूम दीदी’ के नाम से जानते हैं यह मेरे लिए गर्व की बात है।

कोविड काल मेरे परिवार के लिए सबसे कठिन समय था। मेरे पति की आमदनी लगभग बंद हो गई थी। कई बार लगा कि फिर से मजदूरी की ज़िंदगी में लौटना पड़ेगा। लेकिन उसी समय मशरूम की खेती हमारे लिए सहारा बन गई। इसी फसल से घर के खर्च के साथ ही हमने थोड़ी बचत भी शुरू की। मशरूम की आमदनी और पति के सहयोग से हम एक ऑटो खरीद सके। आज मेरे पति वही ऑटो चलाते हैं। समय मिलने पर वो मेरे काम में हाथ भी बंटाते हैं। अब घर में सिर्फ संघर्ष की बातें नहीं होतीं, बल्कि आगे बढ़ने के सपने होते हैं।

आज मशरूम उत्पादन से मुझे औसतन प्रति माह लगभग 15 हजार का लाभ हो जाता है। सबसे बड़ा सुकून इस बात का है कि अब मैं अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हूँ। मेरा सपना है कि आने वाले समय में मैं 200 बैग से बढ़ाकर 5 हजार बैग तक मशरूम उत्पादन कर सकूँ, ताकि सिर्फ मेरा परिवार ही नहीं, बल्कि मेरे जैसी और भी महिलाएँ अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो लगता है, मजदूरी से शुरू हुई मेरी ज़िंदगी ने आत्मनिर्भरता तक का सफर तय कर लिया है। सही प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और मजबूत हौसलों से एक साधारण महिला भी अपने भविष्य की दिशा बदल सकती है।

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कोरबा

ब्रेकिंग – कोरबा के सीतामढ़ी में नशेड़ियों का तांडव, चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल,,,,देखे पूरी खबर

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संवाददाता साबीर अंसारी

कोरबा:– होली के त्यौहार के बीच जिले में कुछ नशेडियों द्वारा धारदार हथियार से हमला कर चार लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया, घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मामला है जिला कोरबा के सिटी कोतवाली क्षेत्र के सीतामढ़ी इमलीडुग्गू इलाके का जहां पूरा मोहल्ला होली का पर्व मना रहा था और अचानक 4 से 5 नशेड़ी युवक धारदार हथियार लेकर पहुंचे और वहां पर उपस्थित परवीन कुमार बरेठ और मुकेश कुमार यादव, धन सिंह और मोहन ठाकुर जिसमें चारो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

आरोपियों ने चाकू और ऑपरेशन में उपयोग होने वाले सर्जिकल ब्लेड से हमला कर वारदात को अंजाम दिया।

पीड़ितों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमला अचानक किया गया, जिससे पीड़ितों को संभलने का मौका नहीं मिला, घटना के बाद मोहल्लेवासी बड़ी संख्या में कोतवाली थाना पहुंच आरोपियों पर कार्यवाही करने की बात कहते हुए नाराजगी जताई है। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

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कोरबा

तुमान में सजेगा भक्ति का महाकुंभ: 6 मार्च से प्रारंभ होगी श्रीमद्भागवत कथा

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कोरबा। तुमान की पावन भूमि 6 मार्च से 13 मार्च तक पूर्णतः भक्तिमय वातावरण में डूबी नजर आएगी। श्री वैष्णव निकुंज निवास, तुमान में दिव्य श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर व्यापक उत्साह देखा जा रहा है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागिता की तैयारी कर रहे हैं।
इस सात दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव में भगवान श्री कृष्ण के अवतरण से लेकर उनकी बाल लीलाओं, गोपी प्रेम, धर्म स्थापना और भक्तों पर कृपा के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। कथा का उद्देश्य केवल श्रवण मात्र नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, संस्कारों और भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करना है।
कथा वाचन का दायित्व प्रसिद्ध कथावाचक पंडित बलराम प्रसाद पाण्डेय निभाएंगे, जिनकी मधुर शैली और आध्यात्मिक व्याख्या श्रोताओं को भावविभोर कर देती है। यज्ञ आचार्य के रूप में अखिलेश महाराज सोन लोहर्शी एवं संगीत मे सीमा मानस पार्टी संतोष महेत्तर ललित की गरिमामयी उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ एवं हवन संपन्न होंगे।
दैनिक कार्यक्रम
🔸 प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक – पूजन, हवन, संकीर्तन, तुलसी परिक्रमा एवं आरती
🔸 दोपहर 3 बजे से – पूज्य महाराज जी द्वारा भागवत कथा श्रवण
आयोजन स्थल को आकर्षक सजावट और आध्यात्मिक परिवेश से सुसज्जित किया जाएगा, जहाँ भजन-कीर्तन की स्वर लहरियाँ निरंतर गूंजती रहेंगी। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और प्रभु कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर रहेगा।
इस धार्मिक महोत्सव के आयोजक बलराम वैष्णव एवं संजू वैष्णव (तुमान) द्वारा समस्त क्षेत्रवासियों को सपरिवार उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का सादर आमंत्रण दिया गया है।
6 मार्च से प्रारंभ होने वाला यह भक्ति महोत्सव तुमान को एक सप्ताह तक आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर देगा।

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