दंतेवाड़ा, एजेंसी। दंतेवाड़ा जिले के तोड़मा गांव के जंगलों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने तीन IED बरामद किया है। जिसे मौके पर ही डिफ्यूज कर दिया गया है। इसके साथ ही जंगल में छिपाकर रखा गया विस्फोटक सामग्री, हथियार, हथियारों से जुड़ा सामान और प्रतिबंधित सामग्री का बड़ा जखीरा भी बरामद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, 6 जून को मिली खुफिया सूचना के आधार पर CRPF की 195वीं बटालियन और दंतेवाड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने तोड़मा जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अभियान द्वितीय कमान अधिकारी विक्रांत वर्मा के मार्गदर्शन और सहायक कमांडेंट संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में चलाया गया।
सर्चिंग के दौरान सुबह करीब 8:40 बजे जवानों को जंगल में संदिग्ध वस्तुएं दिखाई दीं। क्षेत्र को तत्काल घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) को बुलाया गया। जांच में दो प्रेशर कुकर IED और एक पाइप बम बरामद हुआ।
BDS टीम ने विशेषज्ञ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए तीनों विस्फोटकों को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर नष्ट कर दिया। सुरक्षा बलों की सतर्कता से संभावित बड़ी जनहानि टल गई।
विस्फोटक डंप बरामद
ऑपरेशन के दौरान आसपास के इलाके में की गई अतिरिक्त सर्चिंग में छिपाकर रखा गया विस्फोटक और युद्ध सामग्री का बड़ा जखीरा भी बरामद हुआ। बरामद सामान में BGL, 303 रायफल से संबंधित सामग्री, एयर रायफल, विभिन्न प्रकार की मैगजीन, कारतूस, वायरलेस सेट।
गन पाउडर, कोर्डेक्स वायर, डेटोनेटर, गैर-विद्युत विस्फोटक, 51 एमएम बम, दूरबीन, नक्सली वर्दी, कॉम्बैट बेल्ट, मल्टीमीटर, कैमरा फ्लैश, इलेक्ट्रिक कंट्रोल यूनिट, बैटरियां, इलेक्ट्रिक स्विच और टेलीफोन वायर समेत बड़ी मात्रा में सामग्री शामिल है।
इसके अलावा नक्सली साहित्य और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं भी बरामद की गई हैं। पुलिस का मानना है कि नक्सली इस सामग्री का इस्तेमाल सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने और क्षेत्र में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए डंप कर रखे हुए थे। ऑपरेशन पूरा होने के बाद सभी जवान सुरक्षित बेस कैंप लौट आए।
दावा- आपत्ति 15 सितंबर तक आमंत्रित कोरबा 09 सितंबर 2026। जनता प्राथमिक उपभोक्ता भंडार सहकारी समिति मर्यादित नगोईखार पंजीयन क्रमांक 3584 के सदस्यों के मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए मतदाता सूची प्रकाशित किया गया है। मतदाता सूची के सम्बंध में सदस्यों से दावा-आपत्ति 15 सितंबर 2026 तक आमंत्रित किया गया है। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी श्रीमती सुष्मिता लकड़ा ने बताया कि दावा- आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के साथ सोसायटी कार्यालय नगोईखार में समिति प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल के पास 15 सितंबर 2026 तक कार्यालयीन समय पर प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा- आपत्तियों का निराकरण 16 सितंबर को 12 बजे से किया जायेगा। निराकरण उपरांत अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
कोरबा/हरदीबाजार। एसईसीएल (SECL) दीपका एरिया परियोजना के विस्तार को लेकर हरदीबाजार स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (हॉस्पिटल) के स्थानांतरण की कवायद के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों भू-विस्थापितों और जनप्रतिनिधियों का जबरदस्त आक्रोश एवं उग्र विरोध सामने आया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मूल संवैधानिक और मौलिक मांगों का त्वरित निराकरण नहीं किया जाता, तब तक अस्पताल का स्थानांतरण किसी भी स्थिति में नहीं होने दिया जाएगा, यदि प्रशासन ने जबरन अस्पताल हटाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों को उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आज हरदीबाजार तहसील कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (SDM) पाली रोहित सिंह एवं तहसीलदार अमित क्रेकेटा की मौजूदगी में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में हरदीबाजार पंचायत के सरपंच, उप-सरपंच, जनपद सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे ।
मुआवजा पत्रक में भारी गड़बड़ी व गुमराह करने का आरोप
बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दीपका एरिया प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नापी-सर्वे के उपरांत एसईसीएल द्वारा तैयार किए गए मुआवजा पत्रक में 40% घाटा-बढ़ा दर्शाकर किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि नियम-कानून में इस तरह के 40%-60% के नियम का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। एसईसीएल प्रबंधन किसानों को गुमराह कर ऐसा पत्रक बना रहा है, जिससे उन्हें उनकी जमीन का वास्तविक लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। वर्षों से निवास कर रहे मूल किसानों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है ।
केंद्रीय कोयला मंत्री के कड़े निर्देशों की याद दिलाई
ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया कि हाल ही में कटघोरा विधायक के नेतृत्व में विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्र की जमीनी परिस्थितियों और समस्याओं को साझा किया था, इस पर कोयला मंत्री ने एसईसीएल बिलासपुर मुख्यालय (HQ) को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी किसान के अधिकारों का हनन या उनके साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए, इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रबंधन तानाशाही रवैया अपना रहा है ।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
मुआवजा विसंगति का समाधान:- मुआवजा पत्रक में की गई 40% की विसंगति को तत्काल सुधारकर किसानों को उनकी भूमि का उचित व वास्तविक मूल्य प्रदान किया जाए ।
शीघ्र रोजगार की उपलब्धता:- भूमि अधिग्रहण के एवज में जितने भी पात्र किसान/विस्थापित हैं उन्हें अविलंब और तत्काल प्रभाव से रोजगार उपलब्ध कराया जाए ।
बसाहट कार्य में तेजी:- विस्थापितों के लिए नए बसाहट स्थल पर जारी निर्माण व विकास कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए इसमें तेजी लाने की मांग की गई ।
स्वास्थ्य सुविधा सुरक्षा:- जब तक सभी मौलिक व विधिक अधिकारों की बहाली नहीं होती अस्पताल को यथावत रहने दिया जाए ।
शासन-प्रशासन आगे आकर निकाले समाधान
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे विकास और खदान विस्तार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों का नुकसान करके विस्तार स्वीकार्य नहीं है। एसईसीएल प्रबंधन और शासन-प्रशासन को आगे आकर किसानों की इन जायज और मूल समस्याओं का न्यायसंगत समाधान निकालना चाहिए, ताकि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा भी हो सके और कोयला खदान का विस्तार भी सुचारू रूप से संचालित हो सके ।
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में 2 महीने पहले हुए युवक की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। हत्या की वजह लव अफेयर बताई गई है। देर रात बॉयफ्रेंड अपनी शादीशुदा गर्लफ्रेंड से मिलने पहुंचा था। इसी दौरान उसके भाई ने दोनों को पकड़ लिया।
विवाद के बाद बॉयफ्रेंड भागने की कोशिश कर रहा था, तभी भाई ने फावड़े से उसके सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में बहन और बड़े भाई ने लाश ठिकाने लगाने में मदद की। युवक की लाश को गांव की एक बाड़ी में फेंक दिया।
जांच के दौरान डॉग स्क्वाड की टीम आरोपियों के घर के पास पहुंची। डॉग ने घर के दो चक्कर लगाए और इसके बाद मेन गेट पर बैठ गया। पुलिस ने युवती और उसके दोनों भाइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
आरोपी पुलिस को गुमराह करने के लिए बार-बार बयान बदलते रहे। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस ने अंधेकत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए 200 से ज्यादा टावर डंप, CDR, IPDR, GPS, CCTV फुटेज और फॉरेंसिक तकनीक का एनालिसिस किया।
इसके अलावा ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट जैसी प्रक्रियाएं भी अपनाई गईं। मामला मुलमुला थाना क्षेत्र के कोसा गांव का है।
बाड़ी में अमित भंडारी की लाश मिली थी।
पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक, अमित भंडारी (25) कोसा गांव रहने वाला था और मजदूरी करता था। उसका उसी गांव की संतोषी सिंह क्षत्रिय से लव अफेयर था। संतोषी शादीशुदा थी, इसके बाद भी उसकी और अमित की बातचीत होती थी। वहीं, संतोषी पति से लड़ाई के बाद अक्सर मायके आ जाती थी।
इस बीच 29 जून को गांव की एक बाड़ी में युवक का शव मिला। उसकी पहचान अमित के रूप में हुई। अमित 27 जून से लापता था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज की। पुलिस ने जांच में आधुनिक तकनीक की मदद ली। इसमें 200 से ज्यादा मोबाइल टावर डंप, CDR, IPDR, GPS, CCTV फुटेज और फॉरेंसिक जांच की गई। संदिग्धों से ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट भी कराया गया।
घर की दीवार पर मिले खून के धब्बे
पुलिस ने घटना को दोबारा करके भी जांच की और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की फिर से जांच की। बिलासपुर से लाई गई ट्रैकर डॉग विमला ने भी जांच में अहम सुराग जुटाने में मदद की। बिलासपुर से आई ट्रैकर डॉग ‘विमला’ ने हत्यारे के घर के 2 चक्कर लगाने के बाद वहीं घर के सामने बैठ गई।
इसके बाद पुलिस ने घर की दीवार की जांच की, जहां खून के धब्बे मिले। फोरेंसिक टीम ने खून के नमूने लेकर जांच की, जिसमें इंसान की खून होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने तीनों भाई-बहनों से पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने पूरी घटना का खुलासा कर दिया।
अमित भंडारी देर रात गर्लफ्रेंड से मिलने पहुंचा था। (फाइल फोटो)
तीनों भाई-बहनों से पूछताछ में खुला राज
पुलिस के मुताबिक, संतोषी अपने मायके आई हुई थी। 27-28 अगस्त की दरमियानी रात अमित और संतोषी ने करीब 1:30 बजे तक फोन पर बात की। इसके बाद रात करीब 2:30 बजे अमित, संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा। इसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म करके घर लौटा।
घर के पीछे कुछ आवाज सुनकर वह वहां पहुंचा। वहां उसने अपनी बहन को अमित के साथ देखा। इस पर दोनों के बीच विवाद हो गया। पुलिस के मुताबिक, विवाद के दौरान मारपीट हुई और अमित का सिर पीछे की दीवार से टकरा गया। इससे दीवार पर खून का निशान भी लगा।
फावड़े से सिर और छाती पर किया वार
पुलिस के अनुसार, अमित जान बचाने के लिए दीवार फांदकर भागने की कोशिश कर रहा था। तभी बजरंग सिंह ने पास पड़े फावड़े से उसके सिर और छाती पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से अमित की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद बजरंग ने अमित के शव को घर के पीछे बाड़ी में झाड़ियों के नीचे छिपा दिया। पुलिस के अनुसार, उसी रात गांव में चोरी की सूचना पर डायल-112 की टीम भी मौजूद थी। लोगों के जागे होने के कारण आरोपी शव को दूसरी जगह नहीं ले जा सके।
बहन ने शव छिपाने में की मदद
पुलिस के मुताबिक, संतोषी सिंह ने पूरी घटना देखी और शव छिपाने में बजरंग की मदद की। अगले दिन बजरंग के बड़े भाई पप्पू सिंह के गांव लौटने पर उसे घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद दोनों भाइयों ने अमित को तलाशने का नाटक किया। वे अमित के परिजनों के साथ थाने पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने में भी शामिल हुए।
आधी रात को शव दूसरी जगह ले गए
पुलिस के अनुसार, 28 जून की मध्यरात्रि करीब 12 बजे मौका देखकर बजरंग और पप्पू ने अमित के शव को गांव के बीच स्थित दूसरे स्थान पर ले जाकर रख दिया। ऐसा उन्होंने हत्या का संदेह खुद पर आने से बचाने के लिए किया।
न्यायिक रिमांड पर भेजा जेल
फिलहाल, आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल फावड़ा बरामद किया है। इसके अलावा शव को दूसरी जगह ले जाने में इस्तेमाल की गई लोहे की छोटी सीढ़ी भी जब्त की गई है। आरोपी बहन और भाइयों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।