काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा चितवन जिले में 132 शव मिले हैं। बड़ी संख्या में डेड-बॉडी मिलने से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जगह कम पड़ रही है। चितवन की मॉर्चुरी (शवगृह) में सिर्फ 50 डेड-बॉडी रखने की सुविधा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव और लापता लोगों की तलाश जारी है। करीब 1,500 लोगों की तलाश की जा रही है। भारत के 288 नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीय भी शामिल हैं।
बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है। नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ के बाद एक महिला को बचावकर्मी अर्थमूवर मशीन की मदद से सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए
पहाड़ से उतर रही नदी ने तबाही मचाई
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी में पानी का तेज बहाव नीचे आता दिख रहा है।
जैसे-जैसे नदी का पानी नीचे आया उसकी रफ्तार और ऊंचाई और ज्यादा हो गई।
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रास्ते में आने वाले घरों को तबाह कर दिया।
जान बचाने की जद्दोजहद
मलबे का बहाव तेजी से नीचे आया। लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
30 फीट ऊंची लहरें उठ रही थीं। लोग जान बचाने के लिए घर की तीसरी-चौथी मंजिल पर चढ़ गए।
लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना झटका
बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था।
लेकिन बाद में पता चला कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा यह झटका लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था।
नेपाल के नुवाकोट जिले में बाढ़ से मची तबाही का मंजर
1 – भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद नुवाकोट में मलबे रिहायशी इलाकों में घुसा
2- बाढ़ के बाद घुटनों तक कीचड़ जमा
3. नुवाकोट में बाढ़ के बाद घर क्षतिग्रस्त हुए
4. बाढ़ के बाद मलबे से भरे पानी में डूबे घर
त्रिशूली में बाढ़ के बाद राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल के त्रिशूली इलाके में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है।
प्रभावित इलाकों, खासकर रसुवा तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए गुरुवार को काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से निजी हेलिकॉप्टरों की 40 से ज्यादा चार्टर्ड उड़ानें रवाना हुईं।
शव मिल रहे, रखने की जगह कम
नेपाल में रसुवा की बाढ़ के बाद 289 शव बरामद हो चुके हैं, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती है। चितवन की स्वास्थ्य सुविधाओं में करीब 50 शव रखने की क्षमता ही बताई गई है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बड़े रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में अस्थायी शवगृह बनाए जा सकते हैं। हर शव का नंबर, फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करना जरूरी है।
खराब हालत वाले शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, दांतों की जांच और DNA टेस्ट किए जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि पहचान पक्की होने से पहले शव परिवार को न सौंपे जाएं।
नेपाल की मदद के लिए भारत बैली ब्रिज भेजेगा
नेपाल में बाढ़ से टूटे रास्तों और पुलों को फिर से जोड़ने के लिए भारत बैली ब्रिज भेजेगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह एक पोर्टेबल और पहले से तैयार किया जा सकने वाला पुल है, जिसे जरूरत वाली जगह पर जल्दी लगाया जा सकता है।
बाढ़ या भूस्खलन में जब कोई पुल टूट जाता है, तो बैली ब्रिज कम समय में रोड कनेक्टिवटी को बहाल करने में मदद करता है। इसे जरूरत के मुताबिक दूसरी जगह भी ले जाकर लगाया जा सकता है।
हेलिकॉप्टर से त्रिशूली में राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल के त्रिशूली इलाके में बाढ़ के बाद राहत और बचाव का काम तेज कर दिया गया है। सड़क और दूसरे रास्तों को नुकसान पहुंचने के कारण फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित जगह ले जाया जा रहा है।
बचाए गए लोगों को हेलिकॉप्टर से त्रिशूली बाजार पहुंचाया जा रहा है। सेना और निजी हेलिकॉप्टरों की मदद से अब तक 100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से बाहर निकाला जा चुका है।
नेपाल की बाढ़ में गुजरात के 12 लोग लापता
नेपाल में आई बाढ़ में भारत के गुजरात से भी 12 लोग लापता बताए जा रहे हैं। फिलहाल इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली है।
नेपाल ने 20 अरब रुपये जुटाए, विश्व बैंक से मांगेगी 25 अरब
नेपाल सरकार ने भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से निपटने के लिए तुरंत 20 अरब नेपाली रुपये (रू.1,250 करोड़) जुटाने का फैसला किया है। यह रकम प्रधानमंत्री राहत कोष, गृह मंत्रालय और दूसरे स्रोतों से जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा सरकार विश्व बैंक से करीब 25 अरब नेपाली रुपये (रू.1,562.5 करोड़) की मदद लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय बोला- 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल में फ्लैश फ्लड से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद जारी रखेगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है। ये सभी तमिलनाडु के हैं।
भारत नेपाल की मांग के आधार पर राहत सामग्री और बेली ब्रिज भेज रहा है। विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम बनाया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की गई है।
जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर संवेदना जताई और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
नेपाल बाढ़ पर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में आई बाढ़ को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और काठमांडू व बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा और उनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए तुरंत प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विदेश मंत्रालय राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।
जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल सरकार के साथ मिलकर राहत और बचाव के काम में मदद कर रहा है। फिलहाल मंत्रालय का मुख्य फोकस प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीय नागरिकों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
तमिलनाडु के 21 लोगों को रेस्क्यू किया गया
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है।
चीनी टूर गाइड के फैसले से पूरे ग्रुप की जान बची
बुधवार को एक चीनी टूर गाइड ने आखिरी वक्त पर अपना प्लान बदल दिया और उसका यह फैसला उसके पूरे ग्रुप की जान बचाने वाला साबित हुआ। गाइड ने बताया कि पहले वह पर्यटकों को ग्यिरोंग पोर्ट घुमाने ले जाने वाला था, लेकिन रातभर हुई बारिश को देखते हुए उसने अपना प्लान बदल दिया।
गाइड ने झेजियांग डेली को बताया कि पिछली रात लगातार बारिश हुई थी। उसे चिंता थी कि बारिश की वजह से बर्फ से ढके पहाड़ दिखाई नहीं देंगे। इसलिए उसने पोर्ट जाने के बजाय पर्यटकों को हिमालय की बर्फीली चोटियों का नजारा दिखाने वाले मौसम केंद्र के प्लेटफॉर्म पर ले जाने का फैसला किया।
कुछ ही समय बाद ग्यिरोंग इलाके में भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा दी। अगर गाइड अपना प्लान नहीं बदलता, तो उसका ग्रुप भी इस आपदा की चपेट में आ सकता था।
तस्वीरों में दिखा बाढ़ का दर्द, हर चेहरे पर चिंता और मायूसी
नवलपुर में नारायणी नदी से 62 शव बरामद
भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बहकर आए 62 शव नवलपुर जिले में नारायणी नदी के किनारे से बरामद किए गए हैं। जिला पुलिस कार्यालय नवलपरासी (पूर्व) के अनुसार, इनमें 26 पुरुष, 16 महिलाएं, 3 बालक, 7 बालिकाएं और 9 ऐसे शव शामिल हैं जिनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है।
पुलिस ने बताया कि सभी शवों को फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में रखा गया है। आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हें पोखरा भेजने की तैयारी की जा रही है। अब तक बरामद किसी भी शव की पहचान नहीं हो पाई है।
नेपाल ने भारत में रह रहे नेपाली समुदाय से मदद मांगी
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद भारत स्थित नेपाली दूतावास ने नेपाली समुदाय से आर्थिक मदद की अपील की है।
दूतावास ने लोगों से प्रधानमंत्री आपदा बचाव कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष में सहयोग देने को कहा है। इच्छुक लोग दूतावास की ओर से दिए गए बैंक खातों के जरिए मदद कर सकते हैं।
सरकार के मुताबिक, बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा आंकड़ा जुटाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में बचाव, तलाश और राहत का काम भी तेज कर दिया गया है।
दूतावास ने कहा है कि दोनों राहत कोषों में जमा पैसे का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद, राहत, पुनर्वास और दोबारा निर्माण के लिए किया जाएगा।
भूस्खलन के मलबे से बनी झील में बढ़ रहा पानी
चीनी सरकारी टीवी चैनल CCTV की नई ड्रोन फुटेज में पिछले भूस्खलन से बनी जगह पर एक झील बनती दिखाई दे रही है। यह झील ग्यिरोंग पोर्ट के पास, नेपाल की तरफ बनी है। CCTV के मुताबिक, झील का आकार लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और पानी अब किनारों से बाहर निकलने लगा है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने का अनुमान है। इससे झील को रोकने वाला मलबे का बांध टूटने और अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर बहने का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल में बाढ़ पर दलाई लामा ने दुख जताया
दलाई लामा ने आज सुबह जारी एक बयान में नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके लिए मैं प्रार्थना करता हूं। इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों और मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।”
दलाई लामा ने कहा कि यह जलवायु परिवर्तन या किसी दूसरी वजह से पैदा हुई बड़ी समस्या के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी आपदाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के 80 लोगों के लिए हेल्पलाइन शुरू
नेपाल में आई बाढ़ के बाद महाराष्ट्र के करीब 80 लोग अब भी फंसे हुए हैं। उन्हें तलाशने और सुरक्षित वापस लाने के लिए राज्य सरकार ने 24 घंटे चलने वाला हेल्पलाइन सेंटर शुरू किया है।
मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, जलगांव के 4 लोगों से संपर्क हो चुका है और उनके साथ मौजूद 37 से ज्यादा लोग भी सुरक्षित हैं। बाकी लोगों से संपर्क की कोशिश जारी है।
बाढ़ में पुणे के 4 लोग भी लापता बताए जा रहे हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। सरकार ने परिवारों से अपने लापता परिजनों की जानकारी हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराने की अपील की है।
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद तबाही का मंजर
त्रिशूली में भीषण बाढ़ के बाद कीचड़ से ढकी इमारतों का ड्रोन इमेज
नुवाकोट के देवीघाट में बाढ़ के बाद जगह-जगह मलबा और तबाही दिखाई दी।
नुवाकोट के त्रिशूली में गुरुवार को बाढ़ के बाद रेस्क्यू टीम एक शव ले जाते हुए।
देवीघाट में गुरुवार को अचानक आई बाढ़ के बाद हुआ नुकसान
बाढ़ का पानी खत्म होने के बाद मलबे में एक मोटरसाइकिल धंसी नजर आई।
देवीघाट में गुरुवार को अचानक आई बाढ़ के बाद कीचड़ में फंसी एक गाड़ी।
नुवाकोट जिले के देवीघाट में सुरक्षित जगह की ओर जाते स्थानीय लोग अपना सामान लेकर निकलते हुए।
अयोध्या, एजेंसी।‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’
‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’
ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।
श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।
EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।
सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।
GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।
ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05
GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।
EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।
वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।
दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।
इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।
EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।
2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल
अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।
GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।
ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए
PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।
PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।
श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।
विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।
विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।
पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…
विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।
आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।
विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है
विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।
विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।
टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।