कार्रवाई के लिए संचालक को भी लिखा था पत्र, दंतेवाड़ा कलेक्टर बोले-जांच करेंगे
जगदलपुर /दंतेवाड़ा,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गीदम में डॉ देवेंद्र प्रताप को BMO (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) नियुक्त करने के बाद एक बार फिर से विवाद की स्थिति बन रही है। कांग्रेस का कहना है कि, मरीजों के साथ हुए दुर्व्यवहार समेत अन्य आरोप इन पर लगे थे। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस की सरकार में इन्हें हटाया गया था।
लेकिन अब भाजपा की सरकार में नेताओं ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर इन्हें BMO की कुर्सी पर बिठा दिया है। इधर भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को गलत बताया है। कहा है कि हॉस्पिटल में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
पहले समझिए क्यों हो रहा विवाद?
दरअसल, डॉ देवेंद्र प्रताप 2021 में कोविड अस्पताल के प्रभारी थे। शहर के लोगों ने इन पर कोविड मरीज को अस्पताल से बाहर निकालने का आरोप लगाया था और NH-63 पर चक्काजाम कर दिया था। जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर CMHO ने उन्हें पद से हटा दिया था।
जिसके बाद मामला शांत हुआ था। गीदम में MCH (मातृ एवं शिशु अस्पताल) को ही कोविड अस्पताल बनाया गया था। डॉ देवेंद्र प्रताप दोनों के प्रभारी थे।
CMHO ने आदेश जारी किया।
5 बार नोटिस थमाया, नहीं दिया जवाब
वहीं कोविड अस्पताल प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद से डॉ देवेंद्र प्रपात लगातार एब्सेंट थे। पिछले साढ़े 4 सालों में दंतेवाड़ा के CMHO और सिविल सर्जन ने उन्हें 5 बार नोटिस थमाया। एब्सेंट रहने का कारण पूछा था। लेकिन उन्होंने दंतेवाड़ा के CMHO कार्यालय में किसी भी प्रकार का लिखित में जवाब प्रस्तुत नहीं किया था।
वहीं 6 जून 2022 को तत्कालीन CMHO ने इनपर कार्रवाई करने के लिए संचालक (स्वास्थ्य सेवा) को भी एक पत्र लिखा था। साढ़े 4 साल बाद दंतेवाड़ा में बिना किसी सूचना के एब्सेंट रहने के बाद अब सीधे BMO बनकर लौटे हैं।
नहीं माने अफसरों का निर्देश, थमाया नोटिस
डॉ देवेंद्र प्रताप को शासकीय कारणों से जिला अस्पताल में संलग्न किया गया था। लेकिन वे नहीं गए। वहीं 23 मई 2022 को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के तत्कालीन सिविल सर्जन ने उन्हें पत्र लिखा कि बिना किसी सूचना के पिछले कई महीनों से एब्सेंट हैं। जिले में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में भी एब्सेंट रहना ये आपके आचरण को दर्शा रहा है।
वहीं 10 मार्च 2023 को जिले के तत्कालीन CMHO ने भी एक पत्र जारी किया था। जिसमें उन्होंने डॉ देवेंद्र प्रपात को लिखा था कि 29 जून 2021 को आपको प्रशासनिक कारणों की वजह से जिला अस्पताल में संलग्न किया गया था। लेकिन आप एब्सेंट हैं। ये सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विपरीत है। सिविल सर्जन और CMHO के पत्र के बाद भी इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था।
तस्वीर साल 2021 की है, जब शहर के लोगों ने डॉ देवेंद्र प्रताप के खिलाफ NH-63 जाम किया था।
अब जानिए कब-कब इन्हें नोटिस दिया
23 मई 2022 को CMHO ने नोटिस थमाया। जवाब नहीं दिया।
6 जून 2022 को CMHO ने नोटिस दिया। जवाब नहीं दिया। CMHO ने संचालक को भी पत्र लिखा था।
10 मार्च 2023 को CMHO ने नोटिस थमाया। जवाब नहीं दिया।
23 सितंबर 2023 को CMHO ने नोटिस थमाया। जवाब नहीं दिया।
12 जून 2024 को CMHO ने नोटिस थमाया। जवाब नहीं दिया।
उप संचालक ने CMHO को लिखा पत्र
वहीं 30 मई 2025 को उप संचालक (स्वास्थ्य सेवाएं) की तरफ से दंतेवाड़ा CMHO डॉ अजय रामटेके को एक पत्र लिखा गया। जिसमें कहा गया कि 23 अप्रैल 2025 को डॉ देवेंद्र प्रताप का जवाब मिला है। उन्होंने कहा है कि पारिवारिक कारणों की वजह से वे 21 अगस्त 2021 से एब्सेंट थे। पारिवारिक स्थिति में सुधार आने की वजह से कार्य पर उपस्थिति स्वीकार करने उन्होंने अनुरोध किया है।
4 जुलाई को CMHO ने जारी किया आदेश
वहीं दंतेवाड़ा जिले के CMHO अजय रामटेके ने 4 जुलाई 2025 को एक आदेश जारी कर डॉ देवेंद्र प्रताप को गीदम ब्लॉक का BMO नियुक्त कर दिया। अब सूत्र बता रहे हैं कि देवेंद्र प्रताप को BMO बनाने के लिए CMHO पर बड़े स्तर पर पॉलिटिकल दबाव बनाया गया था। हालांकि, CMHO की तरफ से इस संबंध में कोई बयान सामने नहीं आया है।
गीदम में BMO पद को लेकर हमेशा विवाद की स्थिति रही है।
कलेक्टर बोले- जांच करेंगे
इस मामले के संबंध में जब हमने दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी।
कांग्रेस बोली- भ्रष्टाचार करवाने की मंशा
गीदम नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष साक्षी रविश सुराना ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साक्षी का कहना है कि, विवादों में रहने वाले डॉक्टर को BMO बनाना, CMHO जैसे अधिकारी पर सरकार का दबाव बनाना ये भाजपा का काम है।
पद में भले ही किसी डॉक्टर को बिठा दिया गया है, लेकिन यहां खरीदी बिक्री के कामों, पूर्व में हुए कामों के पैसे निकालने का काम भाजपा के लोगों के इशारे पर ही किया जाएगा। ये साफ है कि अस्पताल को कमाई का जरिया बनाकर भ्रष्टाचार करवाने की कोशिश है।
एब्सेंट रहने के बाद सीधे BMO के पद पर कार्यभार संभाला। स्टाफ लोगों ने इनका स्वागत किया था।
भाजपा बोली- सारे आरोप बेबुनियाद
भाजपा के जिला अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने कहा कि, मैं खुद गीदम का निवासी हूं। चाहता हूं कि मेरे शहर में स्वास्थ्य सुविधा अच्छी हो। कांग्रेस के लोग जो आरोप लगा रहे हैं वे बेबुनियाद है। पूर्व BMO के कार्यकाल में हुए कामों का भी चिट्ठा खोला जाए। कहां राशन सप्लाई हुआ, किस संस्था को दिया ये भी तथ्य सामने आए।
उन्होंने कहा कि, भाजपा के लोगों ने न तो किसी अधिकारी पर दबाव बनाया है और न ही किसी की पोस्टिंग करवाई है। पद पर कोई भी डॉक्टर बैठे, गलत काम करेंगे तो कार्रवाई होनी निश्चित है। सरकार चाहे किसी की भी हो हॉस्पिटल में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप
रायपुर, एजेंसी।शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।
इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।
यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।
इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।
रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।
गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान
डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।
12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा
2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट
जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।
कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।
NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।
ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।
बलौदाबाजार, एजेंसी।छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।
दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।
बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम
छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ
राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।
अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।
पुलिस जवान तैनात
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।
कोई अधिकारिक बयान नहीं आया
हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।
बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
बालोद, एजेंसी।छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।
जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।
महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।
पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।
इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।
बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम
प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।
पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क
आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।
पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए
प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।
आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।
पति की बीमारी का उठाया फायदा
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।
कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन
एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।
ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी
एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।