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48 घंटे वीकली काम, ओवरटाइम पर एक्स्ट्रा पेमेंट… देशभर में लागू हुए 4 नए लेबर कोड, बदले Salary और Working Rules

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मुंबई, एजेंसी। भारत में labor system को माॅडर्न और आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से चर्चा में रहे four new labor codes अब पूरी तरह लागू कर दिए गए हैं। सरकार ने इनसे जुड़े जरूरी नियम आधिकारिक राजपत्र में जारी कर दिए हैं, जिसके बाद ये कानून प्रभाव में आ गए हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब कर्मचारियों के काम के घंटे, ओवरटाइम, सैलरी, छुट्टियां और social Security से जुड़े कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सुविधाएं मिलेंगी, जबकि उद्योगों और कंपनियों के लिए कामकाज की प्रक्रिया पहले से आसान होगी।

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कौन-कौन से लेबर कोड लागू हुए
सरकार ने जिन चार बड़े लेबर कोड को लागू किया है, उनमें शामिल हैं:
– Wage Code 2019
– Industrial Relations Code 2020
– Social Security Code 2020
– Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020

इन नए कोड्स के जरिए देश के 29 पुराने labor laws को एक साथ जोड़कर नई व्यवस्था तैयार की गई है।

क्यों जरूरी था बदलाव
पुराने श्रम कानून कई दशकों पुराने थे और समय के साथ काफी जटिल हो गए थे। अलग-अलग नियमों और प्रक्रियाओं के कारण कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, रोजगार बढ़ाना और कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि इससे देश में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

अब हफ्ते में तय होंगे काम के घंटे
नए लेबर नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी से सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही काम कराया जा सकेगा। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा काम का दबाव न पड़े। अगर कोई कर्मचारी तय समय से अधिक काम करता है, तो उसे ओवरटाइम का एक्स्ट्रा पेमेंट देना अनिवार्य होगा। साथ ही हर कर्मचारी को सप्ताह में कम से कम एक दिन की छुट्टी देना जरूरी होगा।

हर कर्मचारी को मिलेगा लिखित जॉब लेटर
नई व्यवस्था के तहत अब हर कंपनी को कर्मचारी को नियुक्ति के समय लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा। इससे नौकरी से जुड़ी शर्तें साफ रहेंगी और कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। यह नियम खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कई बार बिना लिखित दस्तावेज के नियुक्तियां होती थीं।

40 साल से ऊपर कर्मचारियों का हेल्थ चेकअप
सरकार ने कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नया प्रावधान भी जोड़ा है। इसके तहत 40 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले कर्मचारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुरक्षा को बेहतर बनाना और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान करना है।

महिलाओं को समान वेतन   
नए लेबर कोड में महिलाओं के लिए भी कई अहम प्रावधान किए गए हैं। अब समान काम करने पर महिलाओं और पुरुषों को बराबर वेतन देना जरूरी होगा। इसके अलावा महिलाओं को अलग-अलग शिफ्ट में काम करने के अवसर भी दिए जाएंगे और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

नौकरी जाने पर मिलेगा री-स्किलिंग सपोर्ट
सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नेशनल री-स्किलिंग फंड का प्रावधान भी किया है। यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो उसे नई स्किल सीखने और दोबारा रोजगार पाने में मदद दी जाएगी। इस योजना का मकसद बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों को तैयार करना है।

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सेबी ने मई में निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का समाधान किया

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नई दिल्ली, एजेंसी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मई में अपने ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच (स्कोर्स) के जरिये निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का निपटान किया है। सेबी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर तक स्कोर्स पर 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इन शिकायतों से जुड़ी कंपनियों में केफिन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लि., सेक्योर क्रेडेंशियल्स लि. और ईस्टर्न इनवेस्टमेंट्स लि. शामिल हैं। नियामक के शिकायत मंच को मई में 4,918 नई शिकायतें मिलीं, जबकि इस दौरान 5,548 शिकायतों का समाधान किया गया। परिणामस्वरूप 31 मई, 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या 6,167 से घटकर 5,537 हो गई। 

नियामक ने यह भी बताया कि अप्रैल के दौरान निवेशकों की शिकायतों पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने में कंपनियों को औसतन पांच दिन लगे, जबकि पहली बार की समीक्षा वाली शिकायतों के समाधान में औसतन आठ दिन लगे। सेबी ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों के आंकड़ों में वे शिकायतें भी शामिल हैं जिनमें कंपनियों या संबंधित संस्थाओं ने तय समय के भीतर निवेशकों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा कर दी हैं लेकिन शिकायतें अभी लंबित हैं। इससे निवेशकों को जवाब से असंतुष्ट होने पर समीक्षा की मांग करने का मौका मिलता है। 

स्कोर्स 2.0 के तहत, शिकायतें अपने आप संबंधित कंपनी को भेज दी जाती हैं और उनके पास निवेशक को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने के लिए 21 दिन का समय होता है। अगर निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे 15 दिन के भीतर पहले स्तर की समीक्षा की मांग कर सकते हैं, जिसके बाद एक तय संस्था शिकायत की जांच करती है और एटीआर जमा करती है। अगर निवेशक अब भी असंतुष्ट रहते हैं, तो वे अगले 15 दिन के भीतर दूसरे स्तर की समीक्षा की मांग भी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, सेबी सीधे मामले की जांच करता है और अपनी एटीआर जमा करता है। 

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शुक्रवार को नहीं खुलेगा शेयर बाजार, कल से 3 दिन बंद रहेगी ट्रेडिंग

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मुंबई, एजेंसी। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर है। इस बार शेयर मार्केट में लॉन्ग वीकेंड रहेगा। कल से लगातार तीन दिन तक भारतीय शेयर बाजार बंद रहेंगे। शुक्रवार (26 जून) को मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में ट्रेडिंग नहीं होगी। इसके साथ ही शनिवार, रविवार होने के कारण कारोबार नहीं होगा। 

अब बाजार में नियमित ट्रेडिंग सोमवार 29 जून को दोबारा शुरू होगी। इससे पहले 28 मई को बकरीद के मौके पर बाजार बंद रहा था। 

कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां

स्टॉक एक्सचेंज के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के लिए कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां तय की गई थीं, जिनमें से 9 छुट्टियां बीत चुकी हैं। मुहर्रम के बाद साल के बचे हुए महीनों में 6 और मौकों पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग बंद रहेगी। मुहर्रम के बाद अगली छुट्टी सीधे सितंबर में होगी यानी जुलाई और अगस्त के महीने में बाजार में कोई अतिरिक्त छुट्टी नहीं है।

MCX का शाम का सत्र रहेगा खुला

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह का ट्रेडिंग सत्र बंद रहेगा। हालांकि शाम का सत्र निर्धारित समय के अनुसार खुला रहेगा, जिससे कमोडिटी ट्रेडर्स शाम के दौरान सामान्य रूप से कारोबार कर सकेंगे।

निवेशकों और ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने सौदों और निवेश योजनाओं को इस लॉन्ग वीकेंड को ध्यान में रखकर व्यवस्थित करें।

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JSW इंफ्रास्ट्रक्चर के क्यूआईपी को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिलीं

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नई दिल्ली, एजेंसी। सज्जन जिंदल प्रवर्तित जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिली हैं, जो 7,503 करोड़ रुपए तक के सांकेतिक निर्गम आकार से लगभग सात गुना अधिक है। इस निर्गम का प्रबंधन कर रहे मर्चेंट बैंकरों ने यह जानकारी दी। क्यूआईपी 22 जून को शुरू हुआ। इसमें घरेलू और वैश्विक स्तर के प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने मजबूत भागीदारी दिखाई, जिससे देश के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना क्षेत्र में निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिला है।

कंपनी ने 23 करोड़ नए शेयर के क्यूआईपी के जरिये 7,502.7 करोड़ रुपए तक जुटाने की योजना बनाई थी। इसमें प्रवर्तक द्वारा 3.32 करोड़ शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) भी शामिल थी। इन शेयर की पेशकश 285 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर की गई, जो 22 जून को बीएसई पर कंपनी के 307.25 रुपए के बंद भाव से 7.2 प्रतिशत कम है। मर्चेंट बैंकरों के अनुसार, कंपनी इससे प्राप्त राशि का इस्तेमान नए बंदरगाह विस्तार, रणनीतिक अधिग्रहणों और ऋण कम करने के लिए करेगी। जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी वाणिज्यिक बंदरगाह संचालक कंपनी है।  

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