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भारत ने 241 रन का टारगेट दिया

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हेड का इस वल्र्ड कप में दूसरा शतक, लाबुशेन के साथ शतकीय साझेदारी, ऑस्ट्रेलिया 185/3

अहमदाबाद (एजेंसी)। भारत ने वल्र्ड कप 2023 के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 241 रन का टारगेट दिया है। जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 33.5 ओवर में 3 विकेट पर 185 रन बना लिए हैं। ट्रैविस हेड और मार्नस लाबुशेन क्रीज पर हैं। दोनों के बीच सेंचुरी पार्टनरशिप हो चुकी है। हेड ने इस वल्र्ड कप में दूसरा शतक जमाया। स्टीव स्मिथ 4 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें जसप्रीत बुमराह ने एनबीडब्ल्यू कर दिया। यह बुमराह का दूसरा विकेट है। उन्होंने मिचेल मार्श (15 रन) को भी आउट किया। इससे पहले, डेविड वॉर्नर 7 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें मोहम्मद शमी ने विराट कोहली के हाथों कैच कराया। ऑस्ट्रेलियाई पारी की पहली ही बॉल पर कोहली से स्लिप पर डेविड वॉर्नर का कैच छूटा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया फाइनल मैच का स्कोरकार्ड

पावरप्ले-1 में ऑस्ट्रेलिया ने गंवाए 3 विकेट

241 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया टीम ने पहले ही ओवर में 15 रन बना लिए। दूसरा ओवर फेंकने आए मोहम्मद शमी ने पहली ही बॉल पर डेविड वॉर्नर को स्लिप में कोहली के हाथों कैच करा दिया। नंबर-3 पर उतरे मिचेल मार्श ने तेजी से रन बनाए, लेकिन 5वें ओवर में उन्हें जसप्रीत बुमराह ने पवेलियन पर भेज दिया। बुमराह ने 7वें ओवर में स्टीव स्मिथ को भी एलबीडब्ल्यू कर दिया। 47 रन के स्कोर 3 विकेट गंवाने के बाद भी टीम ने 10 ओवर में 60 रन बना लिए।

भारतीय टीम 240 पर ऑलआउट, कोहली-राहुल की फिफ्टी

अहमदाबाद के पीएम नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया ने टॉस हारकर बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 240 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। टीम इंडिया इस वल्र्ड कप में पहली बार ऑलआउट हुई है। भारतीय टीम की ओर से विराट कोहली ने 54 और केएल राहुल ने 66 रन की पारी खेली। कप्तान रोहित शर्मा ने 31 गेंदों में 47 रन बनाकर भारत को तेज शुरुआत दी, लेकिन इस तेजी को बाकी प्लेयर जारी नहीं रख सके। ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से मिचेल स्टार्क ने 3 विकेट लिए। पैट कमिंस को 2 विकेट मिले।

डेथ ओवर्स में भारत ने 5 विकेट खोए

डेथ ओवर्स में भारत ऑलआउट हो गया। आखिरी 10 ओवर में ऑस्ट्रेलिया ने दबदबा बनाए रखा। इस दौरान सबसे बड़ा ओवर 8 रन का ही आया। 5 विकेट गिर जाने के बाद 42वें, 44वें और 45वें ओवर में विकेट खो दिया। इसके बाद सुर्यकुमार यादव के साथ ही बॉलर्स पर रन बनाने का दारोमदार आ गया। लगातार विकेट गिरने के कारण भारतीय प्लेयर्स ज्यादा रन नहीं बना सके। सूर्या भी 48वें ओवर में आउट हो गए। टीम ने आखिरी 10 ओवर में 43 रन जोड़े और 5 विकेट खोए।

मिडिल ओवर्स में ऑस्ट्रेलिया ने पार्टनरशिप बनने से रोकी

11 से 40 ओवर्स के बीच ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह गेम में रहा। पावरप्ले में 2 विकेट खोने के बाद भारत ने 11वें ओवर में तीसरा विकेट भी खो दिया। कोहली ने पारी संभालने की कोशिश की और केएल राहुल के साथ 109 बॉल में 67 रन की साझेदारी की। जैसे ही दोनों ने तेजी से रन बनाने शुरू किए, कोहली आउट हो गए। जडेजा भी ज्यादा देर नहीं खेल सके। इन ओवर्स में ऑस्ट्रेलिया ने पार्ट टाइम गेंदबाज ट्रैविस हेड के ओवर निकाले और भारतीय बल्लेबाज इसका फायदा नहीं उठा सके। मिडिल ओवर्स में सबसे बड़ा ओवर 7 रन का ही आया। भारत ने इन ओवर्स में 117 रन बनाए और 3 विकेट खोए।

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कवर्धा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान

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कवर्धा के पांच खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते 3 स्वर्ण और 2 रजत पदक

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान

कवर्धा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय सब जूनियर बेसबॉल बालक एवं बालिका प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कवर्धा के खिलाडि़यों से उप मुख्यमंत्री एवं विधायक कवर्धा विजय शर्मा ने अपने कवर्धा स्थित निवास कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    एमेच्योर बेसबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 24 से 29 मई तक आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रयास स्पोर्ट्स अकादमी कवर्धा के पांच खिलाडि़यों का छत्तीसगढ़ टीम में चयन हुआ था। इनमें बालक वर्ग से चंद्रेश कोर्राम, पंकज मेरावी और शुभम सेन तथा बालिका वर्ग से चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे शामिल थीं। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि बालिका टीम ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। 
    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खिलाडि़यों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खिलाडि़यों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
    अकादमी के प्रशिक्षक राजा जोशी ने बताया कि खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में महाराष्ट्र को 6-2 से पराजित कर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में चंद्रेश कोर्राम ने शानदार होमरन लगाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन होमरन लगाए।
    वहीं बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ टीम ने दिल्ली, तेलंगाना और मेजबान ओडिशा को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक जीतकर खिलाडि़यों ने शानदार प्रदर्शन किया। चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे ने टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खिलाडि़यों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, अभिभावकों और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है। सभी ने खिलाडि़यों एवं उनके प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दी हैं।

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20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय

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ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की। 

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे। 

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नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया। 

अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी। 

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हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था। 

उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था। 

इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है। 

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वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है। 

आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।

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कभी ‘पनौती’ कहकर हुई थीं ट्रोल, आज पति की ‘Lucky Charm’ बनीं अनुष्का शर्मा, 8 साल से फिल्मों से हैं दूर

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अहमदाबाद, एजेंसी। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की जोड़ी देश की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। हाल ही में आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की शानदार जीत के बाद एक बार फिर अनुष्का शर्मा चर्चा में आ गई हैं। टीम की जीत के जश्न के दौरान कैमरा बार-बार उनकी ओर घूमता नजर आया और सोशल मीडिया पर भी उनकी खुशी भरे वीडियो तेजी से वायरल होने लगे।

RCB की जीत के बाद फिर चर्चा में आईं अनुष्का

अहमदाबाद में खेले गए आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने गुजरात टाइटन्स को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद जहां विराट कोहली और पूरी टीम सुर्खियों में रही, वहीं स्टैंड्स में मौजूद अनुष्का शर्मा की प्रतिक्रियाओं ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया। मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अनुष्का को विराट कोहली की “लकी चार्म” बताना शुरू कर दिया। कई यूजर्स का मानना है कि अनुष्का की मौजूदगी टीम के लिए शुभ साबित हुई है।

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एक वक्त था जब ट्रोलिंग का करना पड़ता था सामना

हालांकि, आज जो लोग अनुष्का को लकी चार्म बता रहे हैं, कुछ साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शादी से पहले जब भी अनुष्का किसी मैच में विराट कोहली या टीम इंडिया को सपोर्ट करने पहुंचती थीं और टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता था, तो सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जाता था। कई बार लोगों ने बिना किसी वजह के टीम की हार का जिम्मेदार भी उन्हें ठहराया। यहां तक कि उन्हें “पनौती” और “मनहूस” जैसे अपमानजनक शब्दों से भी ट्रोल किया गया। क्रिकेट और निजी जीवन को जोड़कर देखे जाने की इस सोच की उस समय काफी आलोचना भी हुई थी।

वक्त बदला और बदल गई लोगों की सोच

समय के साथ हालात भी बदले और लोगों का नजरिया भी। आज वही अनुष्का शर्मा फैंस के बीच विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत और सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखी जाती हैं। RCB की लगातार दूसरी खिताबी जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्यार और सम्मान से भरे पोस्ट देखने को मिल रहे हैं। मैदान पर विराट की उपलब्धियों के साथ-साथ फैंस अब अनुष्का के समर्थन और उनकी मौजूदगी को भी सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।

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फिल्मों से दूर लेकिन चर्चा में हमेशा रहती हैं

अनुष्का शर्मा पिछले कुछ वर्षों से फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म ‘जीरो’ थी, जो साल 2018 में सिनेमाघरों में आई थी। इसके बाद उन्होंने किसी फिल्म में अभिनय नहीं किया। हालांकि, फिल्मों से दूर रहने के बावजूद अनुष्का अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ, परिवार और क्रिकेट मैचों में मौजूदगी को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं।

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परिवार को दे रही हैं प्राथमिकता

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आज दो बच्चों के माता-पिता हैं और दोनों अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं। यही वजह है कि अनुष्का ने पिछले कुछ सालों में अपने प्रोफेशनल काम से ज्यादा अपने परिवार और बच्चों पर ध्यान दिया है।

ट्रोलिंग से तारीफ तक का सफर

अनुष्का शर्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय कितनी जल्दी बदल सकती है। कभी सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने वाली अनुष्का आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। चाहे वह अपनी फिटनेस हो, परिवार के प्रति समर्पण हो या फिर मुश्किल समय में मजबूत बने रहना, अनुष्का ने हर दौर में खुद को गरिमा और आत्मविश्वास के साथ संभाला है।

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आज जब लोग उन्हें विराट कोहली की “लकी चार्म” कह रहे हैं, तो यह सिर्फ क्रिकेट की जीत का जश्न नहीं बल्कि उस सफर की भी पहचान है, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं के बीच खुद को मजबूत बनाए रखा। 

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