कोरबा
बालको सस्टेनेबिलिटी से उर्जा संरक्षण को दे रहा है बढ़ावा
बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियमम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने वित्तीय वर्ष में उर्जा संरक्षण के विभिन्न पहल के माध्यम से अपनी निरंतर प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। सस्टेनेबिलिटी के प्रति अपने प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए कंपनी ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। कंपनी हरित ईंधन के विभिन्न स्रोतों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमास, बायोडीजल आदि के माध्यम से अपने ऊर्जा मिश्रण में हरित ऊर्जा की मात्रा को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
कंपनी संयंत्र में छह इलेक्ट्रिक फोर्कलिफ्ट का उपयोग कर रहा है जो 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक फोर्कलिफ्ट की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। दैनिक प्रचालन कार्यों में इसका महत्वपूर्ण योगदान है जो तैयार माल की आवाजाही, ब्रेकडाउन, रखरखाव प्रबंधन, कच्चे माल की आवाजाही, स्टोर प्रबंधन और गोदाम संचालन जैसे कार्यों को सुविधाजनक बनाया है। अनुमानित रूप से प्रति वर्ष लगभग 93,000 लीटर डीजल की खपत में कमी आई है। कंपनी ने डीकार्बोनाइजिंग को बढ़ावा देते हुए पूरे संयंत्र में उपयोग किए जाने वाले तकनीकी वाहनों के लिए ईंधन के रूप में बायो-डीजल तथा आवाजाही के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहा है।
कंपनी अपने स्मेल्टर संचालन में बायोडीजल उपयोग कर रहा है। पिघले हुए गर्म धातु (एल्यूमिनियम) को लेकर जाने वाले लैडल्स को गर्म करने के लिए बायोडीजल का इस्तेमाल करता है। बायोडीजल कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त ईंधन का रूप है जिसके उपयोग से जीवाश्म ईंधन की तुलना में काफी कम ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन होता है जो वेदांता कंपनी के विजन नेट जीरो कार्बन के अनुरूप है। 2022 में बालको ने विभिन्न उर्जा संरक्षण पहल से लगभग 22000 गीगा जूल ऊर्जा की बचत की थी जो 2024 में बढ़कर लगभग 24,587 गीगा जूल पहुंच गई है। कंपनी अपने विश्व स्तरीय स्मेल्टर में एनर्जी इफीसिएंसी ग्रेफाइटाइज्ड पॉट का उपयोग कर उर्जा खपत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्मेल्टर में पॉट कंट्रोलर अपग्रेडेशन के साथ कंपनी लगभग प्रति मीट्रिक टन पर 150 किलोवॉट बिजली खपत को कम किया है। अनुमानित रूप से 246 टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। कंपनी के विभिन्न पहल के साथ महत्वाकांक्षी लक्ष्य वर्ष 2030 तक नेट वाटर पॉजिटिविटी और 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन की स्थिति हासिल करना है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि हम बालको में पर्यावरणीय भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अपने मिशन की आधारशिला के रूप में ऊर्जा-कुशल संस्कृति को लागू करने के लिए समर्पित हैं। हमारे विभिन्न पहल के माध्यम से संयंत्र के साथ समुदाय में जिम्मेदार ऊर्जा खपत को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिज्ञा का प्रतीक है। नवाचार, जागरूकता और सहयोग के माध्यम से हम स्थायी और एनर्जी इफीसिएंसी व्यवसाय प्रथाओं को अपना रहे हैं जो हरित, पर्यावरण अनुकूल दुनिया की ओर सांस्कृतिक बदलाव को भी प्रेरित कर रहे हैं।
ऊर्जा संरक्षण में बालको के उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार की परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (पीएटी) योजना के तहत ‘पीएटी टॉप परफॉर्मर’ अवार्ड 2023 जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत में भारतीय ऊर्जा एक्सचेंज (आईईएक्स) और पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (पीएक्सआईएल) से नवीकरणीय बिजली की खरीद शामिल है। इन इस प्रथाओं के साथ बालको भारत की सबसे अधिक ऊर्जा कुशल कंपनियों में से एक है।

कोरबा
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने की आवश्यक कार्रवाई
आपातकालीन सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने हेतु की जा रही आवश्यक कार्यवाही
कोरबा। ग्राम लामपहाड़ में घटित सड़क दुर्घटना की घटना को जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीरता से लेते हुए तत्काल तथ्यात्मक जांच कराई गई। जांच हेतु खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पताढ़ी को वस्तुस्थिति का परीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित अधिकारियों से प्राप्त प्रतिवेदन एवं स्थल स्तर पर उपलब्ध जानकारी के परीक्षण उपरांत घटना से संबंधित वस्तुस्थिति स्पष्ट हुई है। साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सामने आई चुनौतियों के निराकरण हेतु आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार 08 जून 2026 की रात्रि लगभग 8ः30 बजे ग्राम लामपहाड़ में एक बाइक दुर्घटना की सूचना सेक्टर मेडिकल ऑफिसर लेमरू को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध आपातकालीन संसाधनों के माध्यम से तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। इस दौरान लेमरू स्थित 108 एम्बुलेंस पूर्व से एक रेफर मरीज को कोरबा पहुंचाने के कार्य में लगी हुई थी तथा ड्यूटी अवधि पूर्ण होने एवं आवश्यक मानव संसाधन की अनुपलब्धता के कारण समय पर दुर्घटना स्थल तक नहीं पहुंच सकी।
जांच में यह भी पाया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाता है। वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में अवस्थित 108 एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ने पर कॉल कंन्ट्रोल सेंटर रायपुर को कॉल करने पर कोरबा में पॉयलेट को सीधे कॉल लगने की सुविधा नहीं है। पॉयलेट के निजी नम्बर पर कॉल किया जाता है। नेटवर्क सम्बन्धी समस्या के कारण कॉल कनेन्ट नही हो पाता है जिससे तत्कालीन अवधि में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में सेक्टर प्रभारी द्वारा तत्काल 108 सेवा के जिला समन्वयक से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया गया। लेमरू क्षेत्र में नेटवर्क संबंधी बाधाओं तथा द्वितीय व तृतीय पाली में डयूटी करने हेतु पर्याप्त पायलट एवं ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की उपलब्धता नहीं होने से आपातकालीन सेवा संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हुईं।
दुर्घटना से प्रभावित व्यक्ति को तत्पश्चात 112 वाहन के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू लाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उसे मृत पाया गया। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को सुरक्षित रखकर उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट हुआ है कि 108 एम्बुलेंस सेवा एक सतत (24×7) आपातकालीन सेवा है, जिसके सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक शिफ्ट में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना आवश्यक है। संबंधित एजेंसी द्वारा तीनों पालियों के लिए पृथक-पृथक पायलट एवं ईएमटी की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण उक्त स्थिति निर्मित हुई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 108 संजीवनी एक्सप्रेस के जिला समन्वयक से स्पष्टीकरण प्राप्त करने की कार्रवाई की गई है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में संचालित नवीन 108 संजीवनी एक्सप्रेस के लिए तीनों शिफ्टों में पृथक पायलट एवं ईएमटी की नियुक्ति सुनिश्चित करने हेतु उप संचालक (108), संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर को पत्र प्रेषित किया गया है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। घटना के संबंध में प्राप्त तथ्यों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम प्रारंभ कर दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को और अधिक त्वरित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी है।
कोरबा
मछलियों के संरक्षण हेतु 15 अगस्त तक बंद ऋतु घोषित
मत्स्य आखेट पर रहेगा प्रतिबंध,
प्रतिबंधित अवधि पर मछली पकड़ने पर देना होगा 25 हजार रूपये जुर्माना
कोरबा। जिले में वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि को ध्यान में रखकर उनके संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम के तहत 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को बंद ऋतु (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों जिनका संबंध नदी नालों से नहीं है, के अतिरिक्त जलाषयों में किये जा रहे केज कल्चर को छोड़कर सभी प्रकार के जल संसाधनों में मत्स्याखेट कार्य 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
सहायक संचालक मछली पालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने तथा अपराध सिद्ध होने पर छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र अधिनियम के तहत 25 हजार रूपए का जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि उक्त नियम केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका संबंध किसी नदी-नाले से नहीं है और उनके अतिरिक्त जलाशय जिनमें केज कल्चर का कार्य किया जा रहा है, उनमें मत्स्य अधिनियम लागू नहीं होंगे।
कोरबा
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के संबंध में बैठक 16 को
कोरबा। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 28 जून 2026 के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक कलेक्टोरेट सभा कक्ष में दोपहर 01 बजे आयोजित की गई है। सर्व संबंधितों को बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।
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