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कोरबा

दिव्यांगता और सामाजिक सरोकार : मुझे मेरी क्षमताओं से जानो

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उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै:। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा: ॥
दिव्यांगता का सामाजिक मॉडल कहता है कि दिव्यांगता, व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक स्थिति के बजाय समाज द्वारा बनाई गई बाधाओं के कारण होती है। सामाजिक सरोकार का मतलब है दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति समाज के दृष्टिकोण को सुधारना, उन्हें दया के बजाय अधिकार और समान अवसर देना और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक बाधाओं को दूर करना, ताकि वे गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। दिव्यांगता के सामाजिक मॉडल की मुख्य बाधाएँ समाज की है। यह मॉडल मानता है कि दिव्यांगता केवल व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक बाधाओं का परिणाम है, जो समाज द्वारा समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक बाधाओं का परिणाम है, जो समाज द्वारा बनाई जाती है। उदाहरण: शारीरिक बाधाओं में सुलभता की कमी (जैसे रैंप या लिफ्ट न होना) शामिल हैं, जबकि सामाजिक बाधाओं में यह रूढ़िवादी सोच शामिल है कि दिव्यांग लोग कुछ काम नहीं कर सकते या उन्हें केवल ‘खैरतÓ की आवश्यकता होती है, ताकि वे गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
नकारात्मक प्रभाव
दिव्यांगता के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण सामाजिक बहिष्कार, अलगाव और अवसाद को जन्म दे सकता है। सामाजिक सरोकार के पहलू सामाजिक न्याय दिव्यांग लोगों को व्यवस्थित रूप से हाशिए पर धकेलने के बजाय, उन्हें समान अवसर और न्याय दिलाना समाज कार्य का मूल सिद्धांत है।
अधिकारों पर जोर
दिव्यांग व्यक्तियों को दया या दान का पात्र मानने के बजाय, उनके अधिकारों को मान्यता देना और उन्हें सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है।
समान भागीदारी
उन्हें अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में भाग लेने की अनुमति देना और यह सुनिश्चित करना कि वे सामाजिक सेवाओं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं का हिस्सा बनें।
सकारात्मक दृष्टिकोण
समाज में जागरूकता बढ़ाकर दिव्यांगता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना और यह समझाना कि दिव्यांगता जीवन की कमजोरी नहीं है। दिव्यांगता केवल एक हिस्सा है, न कि पूरा जीवन।
समान अवसर
शिक्षा और रोजगार के समान अवसर प्रदान करके उन्हें राष्ट्रीय विकास में योगदान देने में सक्षम बनाना, जो अन्यथा अर्थव्यवस्था के लिए एक नुकसान है, दिव्यांगता और सामाजिक सरोकार का संबंध यह है कि समाज में दिव्यांग व्यक्तियों को शारीरिक, सामाजिक और दृष्टिकोण संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जो उनके समावेशन को बाधित करती हैं। इसका समाधान सामाजिक सरोकार के माध्यम से किया जा सकता है, जिसमें समाज के दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाना, बाधाओं को दूर करना और दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर और न्याय प्रदान करना शामिल है। दिव्यांगता को एक सामाजिक समस्या के रूप में देखना, न कि केवल एक चिकित्सा समस्या के रूप में, इस दिशा में पहला कदम है दिव्यांगता के सामाजिक पहलू।
बाधाओं का सामना
दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर शारीरिक (जैसे दुर्गम वातावरण) और सामाजिक (जैसे में देखना, न कि केवल एक चिकित्सा समस्या के रूप में, इस दिशा में पहला कदम है दिव्यांगता के सामाजिक पहलू, बाधाओं का सामना: दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर शारीरिक (जैसे दुर्गम वातावरण) और सामाजिक (जैसे भेदभावपूर्ण रवैया) बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
नकारात्मक दृष्टिकोण
दिव्यांगता के प्रति नकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण व्यक्तियों को शक्तिहीन बना सकता है और सामाजिक बहिष्कार की ओर ले जा सकता है।
सामाजिक बहिष्कार और अलगाव
नकारात्मक रवैया और बाधाएं दिव्यांग व्यक्तियों को अलगाव की ओर धकेल सकती हैं। सामाजिक सरोकार और समाधान सामाजिक मॉडल अपनाना: दिव्यांगता को व्यक्ति की अक्षमता के बजाय समाज में मौजूद बाधाओं के कारण उत्पन्न होने वाली समस्या के रूप में देखना।
सकारात्मक दृष्टिकोण
एक स्वस्थ समाज को दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
समानता और न्याय
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करना सामाजिक कार्य का मूल है।
नीतियों में सुधार
गैर-भेदभावपूर्ण कानूनों, नीतियों और प्रथाओं की वकालत करना जो दिव्यांग व्यक्तियों की भलाई को बढ़ावा देते हैं।
सशक्तिकरण
दिव्यांग व्यक्तियों को उनके जीवन के बारे में निर्णय लेने में शामिल करना और उन्हें सशक्त बनाना।
सामाजिक भागीदारी
समाज में उनकी भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए सामाजिक सुरक्षा और अन्य सहायक तंत्रों को मजबूत करना।
व्यावहारिक उदाहरण सुलभ वातावरण
इमारतों में सुलभ शौचालयों का निर्माण करना।
सहायता और समर्थन
सीखने में कठिनाई का सामना कर रहे व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने के लिए किराया चुकाने जैसी वित्तीय सहायता प्रदान करना।
मानसिक समर्थन
यह समझाना की दिव्यांग व्यक्ति भी सामान्य मनुष्य की तरह खुशी, दुख और अन्य भावनाएं महसुस करते हैं।


रौशनी के शहर में अंधेरे मकान देखे हैं
बिन आंखों के तुमसे कहीं ज़्यादा, आसमाँ देखे हैं।
तुमने बस इस जहां को देख कर मिटा ली है अपनी बेचैनियां
हमने उंगलियां फेर कर किताब पर कई जहां देखे हैं
मैं हर बात बोल लेता हूं इशारों से अपने
जैसे दरिया बात करती है किनारों से अपने
तुम चीख कर भी खुदा तक पहुंच नही पाते
मेरा मौन बात करता है सितारों से अपने
हम बोल नहीं पाते मगर एक हुनर रखते हैं।
होंठो की हरकत से इंसान परख लेते हैं।
हमने ना देखे कत्लों गम, और फरेबी सूरतें
हमने तो छूकर ज़ख्म के गहरे निशाँ देखे हैं।
देखो उसके सामने तो सारा आसमाँ पड़ा है
मगर परिंदे की जि़द है बिन पंखों के उड़ा है
ये मेरी तुम्हारी हार जीत का मसला नहीं है
कामयाब वही है, जो बिन पैरों के खड़ा है
वजूद की लड़ाई में, तुमसे रहम की गुहार क्यो
तुमने तो सड़कों पे अधूरे भगवान फेंके हैं।
बिन आंखों के तुमसे कहीं ज़्यादा, आसमाँ देखे हैं
जो तुम लाए हो दिलासा वो मुँडेर पर सजा दो
मेरे हौंसलों को आँधियों से लड़ने की सलाह दो
उम्मीद के, हसरतों के, नए ख्वाबों के अखबार में

मेरे नाम की खबर बने कोई ऐसी भी वज़ह दो
हम चल रहे है तुम्हारे साथ कदम दर कदम
हमने तुम्हारे बाग के सारे गुलाब देखे हैं
बिन आंखों के तुमसे कहीं ज़्यादा, आसमां देखे हैं।


डा. गजेंद्र तिवारी
शिक्षाविद, बिलासपुर

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कोरबा

सतरेगा पर्यटन रिसॉर्ट के इलेक्ट्रिक सर्किट बोर्ड में किंग कोबरा घुस कर बैठा, जितेंद्र सारथी ने किया खतरनाक रेस्क्यु

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कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।

कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

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कोरबा

जिला पंचायत कोरबा की सामान्य सभा में विकास कार्यों की हुई समीक्षा

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जर्जर सड़कों की शीघ्र मरम्मत और सड़क सुरक्षा के लिए गति अवरोधक व संकेतक लगाने के निर्देश

कोरबा। जिला पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में बुधवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन उपस्थित रहे। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान कृषि विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित कार्यों की जानकारी ली गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान वर्षा ऋतु के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की स्थिति पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की आवागमन सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐसी सड़कों की शीघ्र मरम्मत एवं सुधार कराने की आवश्यकता बताई। इस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करते हुए सड़कों की मरम्मत एवं सुधार कार्य प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में सड़क सुरक्षा के विषय पर भी चर्चा करते हुए दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने के लिए आवश्यक स्थानों पर गति अवरोधक एवं सड़क संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिले के पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर भी चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने आवश्यकता वाले क्षेत्रों में बांगो डेम से पेयजल उपलब्ध कराने की बात रखी। इस संबंध में संबंधित विभागों को क्षेत्र की आवश्यकता, तकनीकी संभावनाओं एवं व्यवहारिक पहलुओं का परीक्षण करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों, कार्यों की प्रगति तथा हितग्राहियों को दिए जा रहे लाभों की जानकारी प्रस्तुत की गई। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित आवश्यकताओं एवं ग्रामीणों की समस्याओं को बैठक में रखा गया, जिस पर अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया, श्रीमती शांति मरावी, श्रीमती सुष्मिता अनंत कमलेश, श्रीमती सावित्री अजय कंवर, श्रीमती सुषमा रवि रजक, विनोद कुमार यादव, श्रीमती माया रूपेश कंवर, कौशल नेटी एवं विद्वान सिंह मरकाम, उपसंचालक पंचायत मिथलेश किसान सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति गठित

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कोरबा, 10 सितम्बर 2026। जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन, कार्ययोजना तैयार करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
जिला स्तरीय समिति में पुलिस अधीक्षक, वन मंडलाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खाद्य अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जिला परिवहन अधिकारी, सहायक संचालक जनसंपर्क तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कोरबा को सदस्य बनाया गया है।
अभियान के अंतर्गत जिले में विभिन्न जनभागीदारी एवं सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अभियान के दौरान ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’, ‘नमो सेवा गाथा’ नुक्कड़ नाटक, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ और ‘जल जन सेवा संकल्प’ जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के सफल संचालन के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शासकीय अमले एवं उपलब्ध संसाधनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अभियान के दौरान आयोजित होने वाली प्रत्येक गतिविधि का फोटो एवं वीडियो अभिलेखीकरण करते हुए जिलेवार प्रगति प्रतिवेदन नियमित रूप से राज्य स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। प्रचार-प्रसार एवं सोशल मीडिया गतिविधियों में शासन द्वारा निर्धारित हैशटैग, फ्रेम एवं लोगो का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी आयोजनों में वित्तीय मितव्ययिता बरतते हुए उपलब्ध शासकीय संसाधनों एवं अधोसंरचना का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति अभियान की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय तथा निर्धारित कार्यक्रमों की सतत मॉनिटरिंग करेगी। अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से सेवा एवं विकास गतिविधियों को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाना है।

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