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सिर्फ 4,000 की करें मंथली बचत और बन जाएं लखपति! जानें कौन देगा सबसे ज्यादा रिटर्न? SIP, PPF या फिर…
मुंबई, एजेंसी। नए निवेशकों के लिए निवेश की शुरुआत करना अक्सर भ्रमित करने वाला (Confusing) हो सकता है। रिकरिंग डिपॉजिट (RD) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसे पारंपरिक विकल्प तो लोग पहले से जानते हैं लेकिन सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) हाल ही में ज़्यादा प्रचलित हुआ है।
रू.4,000 की छोटी मासिक रकम से निवेश की शुरुआत करना काफी आसान हो सकता है। यह जेब पर ज़्यादा असर डाले बिना बचत शुरू करने का एक शानदार तरीका है। आइए जानते हैं कि 15 साल की अवधि के लिए SIP, PPF और RD में से कौन सा विकल्प सबसे ज़्यादा रिटर्न दे सकता है और आपके लिए सही चुनाव क्या होगा।
₹4,000 मासिक निवेश पर 15 साल में रिटर्न की तुलना
यदि आप 15 साल तक हर महीने रू.4,000 का निवेश करते हैं तो आपका कुल निवेश रू.7,20,000 होगा। तीनों विकल्पों में संभावित रिटर्न नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:
| निवेश विकल्प | मासिक निवेश (₹) | अवधि | अनुमानित ब्याज दर (%) | मैच्योरिटी वैल्यू (₹) | कुल मुनाफा (₹) |
| SIP (म्यूचुअल फंड) | 4,000 | 15 साल | 12% | 19,03,726 | 11,83,726 |
| PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) | 4,000 | 15 साल | 7.1% | 13,01,827 | 5,81,827 |
| RD (रिकरिंग डिपॉजिट) | 4,000 | 15 साल | 6.5% | 12,17,059 | 4,97,059 |
अनुमानित 12% औसत वार्षिक ब्याज दर के साथ SIP (Systematic Investment Plan) 15 साल में रू.19 लाख से अधिक का सबसे बड़ा फंड तैयार कर सकता है।
कौन सा विकल्प आपके लिए सही है?
1. SIP (म्यूचुअल फंड) – सबसे ज़्यादा रिटर्न की संभावना
यह सबसे ज़्यादा रिटर्न (रू.11,83,726 का मुनाफा) दे सकता है क्योंकि इसे उच्च ब्याज दर (12% माना गया) और कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) का लाभ मिलता है। SIP में कोई न्यूनतम अवधि तय नहीं है। आप अवधि से पहले भी खाता बंद करवा सकते हैं (कुछ पेनल्टी के साथ)। यह बाज़ार से जुड़ा होने के कारण जोखिम भरा विकल्प है लेकिन लंबी अवधि (15 साल) में जोखिम कम हो जाता है।
2. PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) – सुरक्षा और टैक्स लाभ
यह सरकारी गारंटी वाला विकल्प है जो RD से बेहतर रिटर्न (रू.5,81,827 का मुनाफा) देता है। इसमें न्यूनतम 15 साल तक निवेश करने की बाध्यता होती है। कुछ स्पेशल केस (जैसे जानलेवा बीमारी या उच्च शिक्षा) में 5 साल के बाद पैसा निकाला जा सकता है लेकिन ब्याज दर घटाकर 6.1% कर दी जाती है। यह EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों पर टैक्स छूट मिलती है।
3. RD (रिकरिंग डिपॉजिट) – सुरक्षा और तरलता (Liquidity)
तीनों में सबसे कम रिटर्न (रू.4,97,059 का मुनाफा) मिलता है। यह बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा संचालित होता है इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित है। SIP की तरह ही इसमें भी अवधि से पहले निकासी का विकल्प होता है (कुछ पेनल्टी के साथ)।
अंतिम फैसला
यदि आप उच्च रिटर्न के लिए बाज़ार जोखिम लेने को तैयार हैं तो SIP सबसे अच्छा विकल्प है। यदि आप गारंटीड रिटर्न, टैक्स लाभ और पूरी सुरक्षा चाहते हैं तो PPF सर्वश्रेष्ठ है। यदि आप कम जोखिम और आसान पहुंच चाहते हैं तो RD चुन सकते हैं।
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शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, इन 5 वजहों से आई तेजी
मुंबई, एजेंसी। मंगलवार (9 जून) को शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों हरे निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स 394.50 अंक उछल कर 73,918.76 पर बंद हुआ, तो निफ्टी में भी 119.10 अंक की तेजी आई, 23,242.10 के स्तर पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में तेजी की वजह
जियोपॉलिटिकल टेंशन में नरमी
ईरान और इजरायल ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर उन्होंने एक-दूसरे पर हमले बंद कर दिए हैं। इससे मार्केट में रौनक आ गई।
कच्चे तेल में गिरावट
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स फिसलकर प्रति बैरल $97 से टूटकर रू.93 के आसपास आ गया।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी
पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक, दोनों के निफ्टी इंडेक्स में 1-1% से अधिक तेजी आई। इन्हें मिनिमम तीन साल के मेच्योरिटी वाले विदेशी कर्ज को लेकर कंसेशनल स्वैप फैसिलिटी को आरबीआई की मंजूरी से सपोर्ट मिला है।
एशियाई बाजारों में रौनक
दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% से अधिक, इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में करीब 5%, ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 3%, जापान के निक्केई 225 में 2% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी से अधिक तेजी है।
India VIX में नरमी
मार्केट की घबराहट को मापने वाला इंडिया विक्स फिसलकर 17 के नीचे आया तो मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 5.05% की गिरावट के साथ 16.17 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है इसका कम होना।
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FTA का लाभ उठाने की भारत की दर साझेदार देशों से बहुत कम
नई दिल्ली, एजेंसी। मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने की भारत की दर महज 20-30 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि भारत को निर्यात करने वाले साझेदार देशों में यह उपयोग दर 60-70 प्रतिशत तक है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। निजी शोध संस्था जीटीआरआई की रिपोर्ट कहती है कि भारत के निर्यातक उच्च अनुपालन लागत और कई देशों में पहले से ही कम शुल्क के कारण एफटीए से मिलने वाले लाभों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के चलते उलटे शुल्क ढांचे की समस्या और जटिल हो गई है, क्योंकि कई तैयार उत्पाद अब आसियान, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदार देशों से शून्य या कम शुल्क पर भारत में आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कच्चे माल और उत्पादन सामग्रियों पर अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लगता है, जबकि उन्हीं सामग्रियों से बने तैयार उत्पाद एफटीए के तहत कम या शून्य शुल्क पर आयात हो जाते हैं, जिससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
जीटीआरआई ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि इस्पात और एल्युमीनियम पर 7.5 से 10 प्रतिशत तक सर्वाधिक तरजीही देश (एमएफएन) शुल्क लगता है लेकिन इन्हीं से बने मशीनरी और उपकरण कई एफटीए के तहत बिना शुल्क भारत में प्रवेश कर सकते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “भारत के एफटीए साझेदार देशों में औसतन एमएफएन शुल्क बहुत कम या लगभग शून्य है, जबकि भारत का औसत व्यापार-भारित एमएफएन शुल्क लगभग 12.6 प्रतिशत है।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में भारत का आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ औसत वार्षिक व्यापार घाटा लगभग 62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। थिंक टैंक ने सुझाव दिया कि भारत को शुल्क संरचना में सुधार, उलटी शुल्क संरचना को ठीक करने, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और एफटीए उपयोग की निगरानी के लिए एक अलग संस्था बनाने पर विचार करना चाहिए।
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Salary Hike: सैलरी में होगा इजाफा, कंपनियां कर सकती हैं 8.6-10.2% तक वेतन बढ़ोतरी
मुंबई, एजेंसी। चालू वित्त वर्ष में कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में 8.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। कुशल एवं बेहतर निष्पादन वाले कर्मचारियों की लगातार बढ़ती मांग के कारण यह वृद्धि देखने को मिल रही है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई। टीमलीज सर्विसेज की रोजगार एवं वेतन परिदृश्य पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान औसत वेतन वृद्धि 8.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ईवी अवसंरचना, वित्तीय-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और औषधि जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों की प्रमुख भूमिका रहने वाली है।

रिपोर्ट कहती है कि ईवी और उससे जुड़े क्षेत्र में 9.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक और साइट इंजीनियर जैसी भूमिकाओं में सबसे अधिक वृद्धि होने का अनुमान है। टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए ने कहा, “भारत का वेतन ढांचा पहले की तुलना में अधिक विविध और प्रदर्शन-आधारित होता जा रहा है। अब वेतन बढ़ोतरी के रुझान अलग-अलग क्षेत्रों की वृद्धि और विशेष कौशल पर निर्भर कर रहे हैं। वेतन वृद्धि अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे और उभरते शहर भी अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन, बीमा और बीपीओ जैसे क्षेत्रों में इस साल वेतन वृद्धि 8.9 प्रतिशत से 9.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वहीं बैंकिंग, निर्माण एवं रियल एस्टेट, दूरसंचार और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में वेतन वृद्धि 8.6 प्रतिशत से 8.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट कहती है कि विभिन्न कार्य क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का सबसे अधिक असर बिक्री एवं विपणन, इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
शहरों के स्तर पर चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद वेतन वृद्धि के मामले में आगे रह सकते हैं। इनके अलावा विशाखापट्टनम और नागपुर जैसे उभरते शहरों में भी अच्छी वृद्धि देखे जाने की संभावना है। इसके उलट सूरत, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में पिछले वर्ष की तुलना में वेतन वृद्धि की दर में थोड़ी गिरावट देखी गई है।
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