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छत्तीसगढ़

लघु उद्योग कर आप आत्मनिर्भर बन सकते हैं: डॉ मनेंद्र मेहता

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डॉ इंद्रजीत सिंह कॉलेज अकलतरा में उद्यम कार्यशाला का आयोजन

अकलतरा/ जांजगीर चांपा। विश्वास सोशल वेलफेयर सोसायटी (शिक्षोदय संस्थान) के डॉ इंद्रजीत सिंह महाविद्यालय अकलतरा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के तहत एक दिवसीय उद्यम कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें उद्यमी जागरूकता पर गहन विचार विमर्श किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र छात्राओं को स्वयं का उद्योग आरम्भ कर आत्मनिर्भर बनने को जागरूक किया गया। इसी संदर्भ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनेंद्र मेहता ने छात्र छात्राओं से कहा कि आप जागरूक होकर लघु उद्योग के क्षेत्र में जाकर आत्मनिर्भर बनकर देश को सुदृढ़ कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों का आव्हान किया कि हर वक़्त मौके की तलाश करते रहें और उनसे फायदा उठाने का प्रयास करें। उन्होंने बच्चों की प्रोत्साहित करते हुए कहा कि समय अनमोल है इसे व्यर्थ न जाने दें। विश्वास सोशल वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष संध्या चंद्रसेन ने भी विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हर कोई नौकरी करने लगे तो व्यापार कौन करेगा। विश्वास सोशल वेलफेयर सोसायटी की ट्यूटर मनीषा सैमुएल ने विस्तार से विद्यार्थियों को उद्यम के विषय में जानकारी प्रदान की। यह भी बताया कि उद्यम पंजीयन कैसे किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक जेएन कुर्रे, डॉ उपेंद्र वर्मा, वंदना राठौर,, डॉ ऋचा राठौर एवं सुनील साहू के साथ ही बिलासपुर से आए विश्वास सोशल वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष संध्या चंद्रसेन, मनीषा सैमुएल, मानसी सिंह उपस्थित रहे।

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कोरबा

SECL Plants 15,000 Saplings in Bilaspur in a Single Day as Part of Coal India’s Guinness World Records Campaign

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SECL to Plant Over 3 Lakh Saplings Across All Operational Areas in a Single Day

SECL Launches Bilaspur City’s First Miyawaki Forest Development Initiative

Bilaspur/Korba. In line with its commitment to environmental conservation and sustainable development, South Eastern Coalfields Limited (SECL) carried out a massive plantation drive of 15,000 saplings using the Miyawaki afforestation method over 1.5 hectares of land behind the New Commissioner Office at Koni, Bilaspur, on 21 July 2026. The plantation was undertaken as part of Coal India Limited’s nationwide campaign to establish a Guinness World Records benchmark through the highest number of trees planted in a single day.

The project is believed to be the first Miyawaki forest initiative in Bilaspur city undertaken by SECL. Developed using the Miyawaki technique, this dense urban forest is expected to significantly enhance biodiversity, increase green cover, and improve the local environment in the years to come.

The plantation programme was attended by Shri Harish Duhan, Chairman-cum-Managing Director, SECL; Shri Sunil Kumar Jain, Commissioner, Bilaspur Division; Shri Biranchi Das, Director (HR), SECL; Shri D. Sunil Kumar, Director (Finance), SECL; Shri Himanshu Jain, Chief Vigilance Officer, SECL; Shri Ramesh Chandra Mohapatra, Director (Technical/P&P), SECL; Shri K. Rajashekhar, Executive Director, Coal India Limited; Shri Sanjay Sinha, General Manager (Environment), along with Heads of Departments and senior officials of the company. The dignitaries participated in the plantation drive and conveyed the importance of environmental conservation and community participation.

Speaking on the occasion, Shri Harish Duhan, Chairman-cum-Managing Director, SECL, said, “Environmental protection is not merely a responsibility but our collective commitment towards future generations. Dense forests developed through the Miyawaki method will not only enhance green cover but will also play a significant role in biodiversity conservation, maintaining ecological balance, and mitigating the impacts of climate change.”

As part of Coal India’s Guinness World Records plantation campaign, large-scale plantation drives are being undertaken across all its subsidiary companies. Under this initiative, SECL is planting more than 3.20 lakh saplings across its various operational areas in a single day.

The campaign is not only an attempt to set a world record but also reflects SECL’s unwavering commitment towards sustainable mining, environmental stewardship, and creating a greener, cleaner and more resilient future for generations to come.

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कोरबा

बालको ने विश्व युवा कौशल दिवस पर मनाया वेदांता स्किल स्कूल के 15 वर्षों का सफर

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‘15 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के ऐतिहासिक पड़ाव की ओर वेदांता स्किल स्कूल’

बालकोनगर। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व युवा कौशल दिवस 2026 के अवसर पर वेदांता स्किल स्कूल के 15 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया। आयोजित कार्यक्रम में कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की उपलब्धियों को साझा किया गया। इस वर्ष विश्व युवा कौशल दिवस की थीम ‘साझा भविष्य के लिए कौशल’ है। कार्यक्रम में बालको के वरिष्ठ अधिकारी, समुदाय के प्रतिनिधि, पूर्व प्रशिक्षु, वर्तमान प्रशिक्षु और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विश्व युवा कौशल दिवस के उपलक्ष्य में स्किल स्कूल द्वारा सप्ताह भर विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वाद-विवाद, कविता लेखन, पोस्टर मेकिंग, इंडोर खेल और एआई वीडियो निर्माण जैसी कार्यों के माध्यम से युवाओं को अपनी रचनात्मकता, तार्किक सोच, संवाद क्षमता और डिजिटल कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

समारोह में प्रशिक्षुओं ने पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की झलक पेश की। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वेदांता स्किल स्कूल के एक पूर्व प्रशिक्षु की वास्तविक जीवन यात्रा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति रही। प्रस्तुति में दिखाया गया कि किस प्रकार कौशल प्रशिक्षण ने एक युवा के जीवन को नई दिशा देते हुए उसके लिए रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर तैयार किए। प्रशिक्षुओं के सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पूर्व प्रशिक्षुओं की सफलता की कहानियों और तकनीकी कौशल प्रदर्शन के साथ आयोजित समारोह ने कौशल विकास के 15 वर्षों की यात्रा को यादगार बनाया।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने कहा, “पिछले 15 वर्षों से वेदांता स्किल स्कूल युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल सिखाकर उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। हमारा उद्देश्य युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण देना है, जिससे वे बदलती उद्योगों की जरूरतों के अनुसार अपने कौशल को विकसित कर सकें। व्यावहारिक प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के साथ युवा आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनके लिए रोजगार व आजीविका के नए अवसर खुल रहे हैं। इसी प्रयास के माध्यम से हम समुदायों की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य में अपना योगदान दे रहे हैं।“

इस अवसर पर वेल्डर और मोबाइल रिपेयरिंग ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त 40 से अधिक युवाओं को प्लेसमेंट प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वहीं इस अवसर पर वेदांता स्किल स्कूल में पीएम सूर्य घर सर्टिफिकेशन एंड स्किल अपग्रेडेशन कोर्स फॉर सोलर पीवी टेक्नीशियन की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के तहत 100 सोलर पीवी टेक्नीशियन को एक सप्ताह का कौशल उन्नयन एवं प्रमाणन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक प्रतिभागी को प्रशिक्षण के दौरान 3,500 रुपये का भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।

वर्ष 2010 में स्थापित वेदांता स्किल स्कूल पिछले 15 वर्षों से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान कर रहा है। अब तक 14 हजार से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और इस वर्ष स्कूल 15 हजार युवाओं के प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल करने की ओर अग्रसर है। यहां वेल्डिंग, इलेक्ट्रिकल, फिटर, सिलाई मशीन संचालन, फूड एंड बेवरेज सर्विस तथा सोलर पीवी इंस्टॉलेशन जैसे रोजगारपरक ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाता है। एनएसडीसी से मान्यता प्राप्त 5-स्टार स्मार्ट सेंटर युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान कर रहा है। बालको अपने कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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छत्तीसगढ़

सर्पदंश नहीं, फिर भी मिला 4 लाख मुआवजा:बिलासपुर में ‘डायमंड गैंग’ 1.5 लाख में करता था डील, डॉक्टर, पुलिस, कर्मचारी सब सेट थे

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों समेत 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ में पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। अस्पताल में किसी की मौत की सूचना मिलते ही गैंग एक्टिव हो जाता था और सर्पदंश का फर्जी केस बनाकर करीब 1.5 लाख रुपए में सेटिंग की जाती थी।

पुलिस अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा राशि लेने वाले आरोपियों पर कार्रवाई कर रही है। तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों के बाद अब 2 पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में सिम्स के कई डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं।

बता दें कि, बिलासपुर में सामान्य मौतों को फर्जी सर्पदंश बताकर प्रति केस 4 लाख रुपए के हिसाब से 431 मामलों में 17.24 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया गया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई गईं, कई मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना ही रकम का बंदरबांट कर दिया गया।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

कैसे काम करता था एडवोकेट डायमंड गैंग

सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच में सिम्स से तहसील तक फैले कथित नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि, सिम्स में मौत की सूचना पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान गिरोह तक पहुंचाते थे। इसके बाद एडवोकेट हीरा खांडेकर (एडवोकेट डायमंड गैंग का सरगना) और उसके सहयोगी सक्रिय हो जाते थे।

जो मृतक के परिजन को पैसों और मुआवजे का लालच देकर उन्हें सर्पदंश की बात बताने के लिए तैयार करते थे। भले ही व्यक्ति की मौत दूसरे किसी कारण से हुई हो। इस आपराधिक लालच में आकर मृतक के परिवार वाले शासन के आपदा कोष से दी जाने वाली राशि का कुछ हिस्सा पाकर इस गिरोह के कारनामे में खुद शामिल हो जाते थे।

1.5 लाख में सेट करता था तहसील

जांच में पता चला है कि तहसील से जुड़ा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा 1 से 1.5 लाख रुपए लेकर तहसील स्तर पर केस आगे बढ़वाने और पूरी प्रक्रिया की सेटिंग कराने का काम करता था। फर्जी पीएम रिपोर्ट, पटवारी प्रतिवेदन और दस्तावेजों के जरिए मुआवजा प्रकरण तैयार कर सरकारी राशि तक पहुंचने का आरोप है।

सिम्स चौकी में तैनात कर्मचारियों से शवों की जानकारी मिलने के बाद गिरोह के सदस्य परिजनों से संपर्क करते थे। आरोप है कि कुछ मामलों में शवों पर सर्पदंश के निशान दिखाने के लिए छेड़छाड़ की गई और संबंधित थाने से मर्ग पंचनामा की कार्रवाई कराई गई।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

डॉक्टर से मिलकर तैयार कराते थे फर्जी पीएम रिपोर्ट

इसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हेरफेर कराने का खेल चलता था। पुलिस जांच में कुछ मामलों में डॉक्टरों की फर्जी पीएम रिपोर्ट और हस्ताक्षर सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद फर्जी पटवारी रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा केस तहसील में जमा किए जाते थे।

तहसील में रीडरों की आईडी से आगे बढ़ते थे केस

जांच के अनुसार, तहसील और एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडरों की आईडी से प्रकरणों को आगे बढ़ाया जाता था। आरोप है कि दैनिक वेतनभोगी गोविंद विश्वकर्मा रीडरों के संपर्क में रहकर प्रकरणों को स्वीकृति दिलाने में भूमिका निभाता था।

मुआवजा स्वीकृत होने के बाद राशि मृतकों के परिजनों के बैंक खातों में पहुंचती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि, गिरोह के सदस्य परिजनों को कुछ रकम देकर बाकी राशि निकलवा लेते थे।

14 ठिकानों पर पुलिस की दबिश, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और राजस्व अफसर भी शामिल

सर्पदंश मुआवजा मामले में पुलिस अब तक 14 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। इनमें तत्कालीन सिम्स चौकी प्रभारी गुलाब सिंह सोनवानी, प्रधान आरक्षक, होमगार्ड के दो जवान, डॉक्टर एनएच बोले, डॉ. प्रियंका सोनी, अधिवक्ता हीरा खांडेकर और गोविंद विश्वकर्मा समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।

कोनी थाने के सभी मामलों में दस्तावेज फर्जी मिले

पुलिस जांच में कोनी थाने में दर्ज सर्पदंश के सभी मामलों में पेश दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। इनमें पीएम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन फर्जी तरीके से तैयार किए जाने की बात सामने आई है। कोनी थाने में 3 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से दो मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलने की जानकारी तक नहीं होने की बात जांच में सामने आई है।

फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टर फरार

पुलिस जांच में डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा डॉ. एसएन बोले की ओर से जारी पीएम रिपोर्ट भी जांच के दायरे में आई है। फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉ. बोले के फरार होने की जानकारी है। पुलिस उनके घर पर भी दबिश दे चुकी है।

फर्जी हस्ताक्षरों से बदली मौत की वजह

जांच में डॉ. आरके मरकाम समेत कुछ डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। रतनपुर थाने में दर्ज एक मामले में हार्ट अटैक से हुई मौत को फर्जी हस्ताक्षर के जरिए सर्पदंश बताकर मुआवजा लेने का आरोप है।

पुलिस अब सर्पदंश मुआवजा से जुड़े सभी मामलों की जांच कर रही है। इसमें शामिल बाकी लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

डीन बोले- डॉ. बोले की छुट्टी खत्म, ड्यूटी पर नहीं लौटे

सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि डॉ. एसएन बोले ने तीन दिन की छुट्टी ली थी। उनकी छुट्टी खत्म हो चुकी है। सोमवार को उन्हें ड्यूटी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए हैं। इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष की ओर से दी गई है।

एसएसपी बोले- किसी को भी नहीं बक्शा जाएगा

सर्पदंश मामले में अधिवक्ता और उसकी टीम सिंडिकेट बनाकर काम कर रही थी। इसमें जिन-जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मामले में अब तक मुख्य आरोपी अधिवक्ता, उसका भांजा, बैंक कर्मी, डॉक्टर और तहसील के चार कर्मचारियों समेत कुछ अन्य लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

तहसील ऑफिस के कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर बवाल

सर्पदंश मुआवजा घोटाले में तहसील ऑफिस के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी संघ में बवाल मच गया है। कर्मचारी की गिरफ्तारी पर लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले शासन को सूचना दे दी चाहिए। लेकिन, प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया जा रहा है।

बड़े अफसरों को जांच के दायरे से बाहर रखने पर सवाल

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि,करोड़ों के इस घोटाले में कर्मचारी केवल केस पेश करते हैं। जबकि, पूरा अधिकार राजस्व अफसरों को रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले में छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। जबकि, जिम्मेदार बड़े अफसर अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं।

सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को केवल पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें न्यायालय में हथकड़ी लगाकर पेश किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अगर घोटाले में किसी की भूमिका है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, जशपुर जिले में पिछले 3 साल में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं। जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में काफी हंगामे के बाद इस पर सदन में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने पर 4 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है। यही वजह है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने लोगों ने अपने परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर सरकार से लाखों रुपए मुआवजा ले लिए।

इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मौत का कारण बदलकर मुआवजे के लिए आवेदन जमा किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में बिना परिजनों की सहमति के आरोपी मुआवजा लेकर बंदरबांट कर चुके हैं।

2025 में सामने आया था पहला मामला

फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पहला मामला 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस केस में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। उस समय भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की, जिसमें कई और संदिग्ध केस सामने आए।

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