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बजट 2025- इनकम टैक्स:12 लाख तक इनकम पर 60 हजार फायदा; नई टैक्स रिजीम वाले फायदे में, पुरानी जस की तस

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नई दिल्ली, एजेंसी। बजट में इनकम टैक्स को लेकर बड़ी राहत दी गई है। न्यू टैक्स रिजीम के तहत अब 12 लाख रुपए तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए 75 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह छूट 12.75 लाख रुपए हो जाएगी।

न्यू टैक्स रिजीम के स्लैब में भी बदलाव किया गया है। पुरानी टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हालांकि नई टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपए तक की छूट इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A के तहत दी गई है। यानी नई टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख तक की सालाना कमाई वालों पर 4-8 लाख रुपए पर लगने वाले 5% टैक्स और 8-12 लाख की कमाई पर लगने वाला 10% टैक्स सरकार माफ कर देगी। इससे टैक्सपेयर को 60 हजार रुपए का फायदा होगा।

मतलब यह कि अगर किसी की कमाई सालाना 12 लाख रुपए से ऊपर होती है तो उसकी टैक्स की कैलकुलेशन में 4-8 लाख पर 5% टैक्स और 8-12 लाख पर 10% टैक्स भी जोड़ा जाएगा। वहीं सरकार अगले हफ्ते नया इनकम टैक्स बिल लाएगी।

इनकम टैक्स या टैक्स को लेकर ये 8 बड़े बदलाव भी हुए

  1. रेंट से होने वाली इनकम पर TDS छूट दोगुनी : रेंट से होने वाली इनकम पर TDS की सीमा 2.4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख की गई है। यानी अब 6 लाख रुपए तक के सालाना किराए पर TDS नहीं काटा जाएगा।
  2. वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज से आय पर दोगुनी छूट : वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और पोस्ट ऑफिस के ब्याज से होने वाली कमाई पर मिलने वाली टैक्स छूट को 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया गया है। यानी अब ब्याज की इनकम पर वरिष्ठ नागरिकों को 1 लाख रुपए तक की राहत मिलेगी।
  3. पिछले 4 साल के रिटर्न फाइल कर सकेंगे : पुराने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की सीमा 2 साल से बढ़ाकर 4 साल की गई है। यानी यदि किसी करदाता ने अपना रिटर्न गलत फाइल किया हो या फाइल करना रह गया हो तो वह अब इस गलती को 4 साल के अंदर अपडेटेड रिटर्न फाइल करके ठीक कर सकेंगे।
  4. दो घर पर मिलेगा सेल्फ ऑक्यूपाइड हाउस का फायदा : बजट में सेल्फ ऑक्यूपाइड हाउस पर टैक्स राहत दी गई है। इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास दो घर हैं और आप दोनों घरों में रहते हैं, तो अब आप दोनों संपत्तियों पर टैक्स का फायदा ले सकेंगे। जबकि पहले टैक्स राहत सिर्फ एक सेल्फ ऑक्यूपाइड हाउस में ही मिलती थी।
  5. अगले हफ्ते आएगा नया इनकम टैक्स बिल : सरकार अगले हफ्ते नया इनकम टैक्स बिल लाएगी। इससे टैक्स सिस्टम को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसका मकसद टैक्सपेयर्स को बेवजह नोटिस और परेशानियों से बचाना है। इसके साथ ही KYC प्रक्रिया भी आसान की जाएगी, जिससे बैंक और अन्य वित्तीय कामों में कम कागजी झंझट होगा।
  6. पैन नंबर न होने पर टैक्स ज्यादा लगेगा: टीडीएस और टीसीएस का उपयोग आमतौर पर सामान बेचने के दौरान किया जाता था। इससे कस्टमर और दुकानदार दोनों को कई तरह की परेशानी होती थी। वित्तमंत्री ने इससे टीसीएस हटाने का ऐलान किया है। ये भी कहा है कि ऊंची दरों पर टीडीएस उन्हीं मामलों में लगाया जाएगा जिनका पैन नंबर नहीं होगा।
  7. पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपए तक विदेश भेजने पर टैक्स नहीं: विदेश में पढ़ाई के लिए पैसा भेजने पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की लिमिट अब 10 लाख रुपए कर दी गई है। अभी कोई व्यक्ति विदेश में पैसे भेजता है। यह रकम 7 लाख रुपए से अधिक होती है, तो उस पर TCS लगता है। हालांकि ये छूट आपको तभी मिलेगी जब ये पैसा किसी फाइनेंशियल आर्गनाइजेशन जैसे बैंक आदि से लोन लिया गया हो।
  8. NSS से पैसा निकालने पर छूट : कई सीनियर सिटीजन्स के पास बहुत पुराने नेशनल सेविंग्स स्कीम (NSS) खाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि जो लोग 29 अगस्त 2024 या उसके बाद NSS से पैसा निकालेंगे उन्हें निकासी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यही नियम NPS (नेशनल पेंशन स्कीम) वात्सल्य खातों पर भी लागू होगा, लेकिन इसकी छूट की एक लिमिट होगी।

अब पुरानी टैक्स रिजीम को समझें

पुरानी टैक्स रिजीम चुनने पर अभी भी आपकी 2.5 लाख रुपए तक की इनकम ही टैक्स फ्री रहेगी। हालांकि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत आपको 5 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स देना होगा।

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Shocking Report on Gold! भारतीय परिवारों के पास कितना सोना? रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, आंकड़े चौंकाने वाले

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मुंबई, एजेंसी। देश में सोने को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ASSOCHAM की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का सोना मौजूद है। यह मात्रा दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के कुल गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा बताई जा रही है।

सरकारी भंडार से कई गुना ज्यादा सोना

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व, जो World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक करीब 880 टन है, उसके मुकाबले घरेलू सोने का भंडार कहीं अधिक है। इससे साफ होता है कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि एक बड़ी निजी संपत्ति के रूप में जमा है।

सोना बन सकता है आर्थिक ग्रोथ का इंजन

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस भौतिक सोने को धीरे-धीरे वित्तीय सिस्टम में शामिल किया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हर साल घरेलू सोने का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल में लाया जाए, तो 2047 तक कुल सोने का लगभग 40 प्रतिशत वित्तीय प्रणाली में लाया जा सकता है।

GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का संभावित उछाल

इस बदलाव का बड़ा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है। अनुमान है कि इससे GDP में करीब 7.5 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है और जिससे 2047 तक अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 34 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय घरों में रखे सोने का कुल मूल्य दुनिया की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाओं के वार्षिक GDP से अधिक है, सिर्फ अमेरिका और चीन को छोड़कर।

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विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से मोहभंग! 40 दिनों में निकाले 1.66 लाख करोड़ से ज्यादा

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बेरुखी कम होने का नाम नहीं ले रही है। मार्च के बाद अप्रैल में भी FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं। यह ट्रेंड उस समय भी जारी है जब United States और Iran के बीच तनाव कम करने के प्रयास तेज हुए हैं।

अप्रैल में 48,000 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली

डेटा के मुताबिक, अप्रैल में अब तक FIIs ने 48,213 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए हैं। वहीं, पिछले 40 दिनों में कुल बिकवाली का आंकड़ा 1.66 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक कुल मिलाकर 1.79 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं।

शुक्रवार को बाजार में दिखी मजबूती

  • FIIs ने 672.09 करोड़ रुपए की खरीदारी की
  • DIIs ने भी 410.05 करोड़ रुपए की खरीदारी की
  • Sensex: 918 अंक उछलकर 77,550
  • Nifty 50: 275 अंक चढ़कर 24,050

बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

भारत से पैसा निकालकर एशिया के अन्य बाजारों में निवेश

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रेटेजिस्ट V K Vijayakumar के अनुसार, विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर South Korea और Taiwan जैसे बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

  • दक्षिण कोरिया में 3.6 बिलियन डॉलर का इनफ्लो
  • ताइवान में 5.6 बिलियन डॉलर का निवेश

इसके उलट, Bloomberg के डेटा के अनुसार, भारत से करीब 3 बिलियन डॉलर की निकासी हुई है।

2026 में FIIs का ट्रेंड

मार्च: 1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली (साल का सबसे खराब महीना)
फरवरी: 22,615 करोड़ की खरीदारी
जनवरी: 35,962 करोड़ की बिकवाली

2025 में भी FIIs का रुख कमजोर रहा था, जब उन्होंने कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपए बाजार से निकाले थे।

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अमीर-गरीब देशों के बीच खाई बढ़ी, United Nations रिपोर्ट में खुलासा

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमीर-गरीब देशों के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए वैश्विक वित्तीय संस्थानों में बड़े सुधार समेत जिन ऐतिहासिक फैसलों पर पिछले साल सहमति बनी थी, उनके पूरा नहीं होने से जहां समृद्ध राष्ट्र और मजबूत होते जा रहे हैं, वहीं गरीब देश विकास की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में दी गई है। 

स्पेन के सेविले में पिछले साल जून में अपनाए गए खाके का आकलन करती यह रिपोर्ट अगले हफ्ते वाशिंगटन में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की अहम बैठकों से ठीक पहले जारी की गई है। पिछले साल जून में अपनाई गई इस रूपरेखा का उद्देश्य अमीर-गरीब देशों के बीच की खाई को पाटना और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्यों को हासिल करना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक विकास को गति देने की पूरी तैयारी थी लेकिन ईरान युद्ध के कारण अब विश्व अर्थव्यवस्था के भविष्य पर अनिश्चितता के गहरे बादल छा गए हैं।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक और सामाजिक मामलों के अवर महासचिव ली जुनहुआ ने चेताया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव विकासशील देशों की चुनौतियों को और गंभीर बना रहे हैं, जिससे उनके लिए वित्तीय संसाधन जुटाना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए यह समय बेहद जोखिमभरा बनता जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक हित अब तेजी से आर्थिक संबंधों और वित्तीय नीतियों की दिशा तय करने लगे हैं।” 

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बढ़ती व्यापारिक बाधाएं और एक के बाद एक आ रही जलवायु संबंधी आपदाएं भी इस बढ़ती खाई को और चौड़ा कर रही हैं। पिछले वर्ष सेविले में आयोजित सम्मेलन में अमेरिका को छोड़कर कई देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से ‘सेविले प्रतिबद्धता’ को अपनाया था, जिसका उद्देश्य विकास के लिए हर साल मौजूद चार हजार अरब डॉलर की वित्तीय कमी को पाटना था। ‘सेविले प्रतिबद्धता’ के क्रियान्वयन का आकलन करती संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती वित्तीय खाई को पाटने के लिए यह “सबसे बड़ी उम्मीद” के रूप में सामने आती है। 

ली जुनहुआ ने कहा कि 2025 में 25 देशों ने गरीब राष्ट्रों के लिए अपनी विकास सहायता में कटौती कर दी, जिसके परिणामस्वरूप 2024 की तुलना में कुल मिलाकर 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी 59 प्रतिशत की गिरावट अमेरिका की ओर से देखी गई। ली ने यह भी कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर 2026 में इसमें और 5.8 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है, जो वैश्विक सहयोग के सामने नई चुनौतियों की ओर संकेत करती है। 

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