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खतरा से निपटने बन रहा मास्टर प्लाल, मुंबई डूबे नहीं, इसलिए नदी के नीचे बनाएंगे नदी

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जापान ने इसी प्रोजेक्ट से टोक्यो को बाढ़ से बचाया, भारत दूसरा देश होगा

मुंबई (एजेंसी)। तारीख 26 जुलाई, साल 2005। मुंबई में तेज बारिश शुरू हुई। धीरे-धीरे सड़कों पर पानी भरने लगा। कुर्ला में मीठी नदी और वेस्ट बांद्रा में बांद्रा तालाब ओवरफ्लो हो गया। इस दिन 24 घंटे में 944 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा। ये मुंबई में पूरे जुलाई महीने में होने वाली बारिश के बराबर था। सिर्फ एक दिन की बारिश से पूरी मुंबई में रास्ते बंद हो गए, फ्लाइट और ट्रेनें रोकनी पड़ीं। लोग जहां थे, वहीं फंसकर रह गए। 1094 लोगों की जान चली गई। 550 करोड़ का नुकसान हुआ। इस बाढ़ ने बता दिया कि मुंबई ऐसे हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद भी लगभग हर साल बरसात के मौसम में मुंबई डूबती रही और लोगों की जानें जाती रहीं। ऐसे हालात दोबारा न बनें, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने प्लानिंग शुरू की है। महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन, यानी मित्रा जापान की कंपनी द जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ मिलकर अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। प्रोजेक्ट पर इसलिए भी फोकस है क्योंकि क्लाइमेट चेंज की वजह से मुंबई के कई इलाके डूबने की रिपोर्ट आती रही हैं। 2021 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज, यानी आईपीसीसी ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर नोएडा की फर्म आरएमएसआई ने अनुमान लगाया था कि बढ़ते समुद्री जलस्तर की वजह से 2050 तक मुंबई, कोच्चि, मंगलौर, चेन्नई, विशाखापट्टनम और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहर डूब सकते हैं। अगर मुंबई में अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट कामयाब रहता है, तो इन शहरों को भी फायदा मिलेगा।

मीठी नदी के नीचे बनेगी अंडरग्राउंड टनल

महाराष्ट्र इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन के सीईओ प्रवीण परदेसी ने मीडिया को बताया कि हम मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मीठी नदी के ठीक नीचे नदी जैसी अंडरग्राउंड टनल या रिजरवायर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रवीण परदेसी बताते हैं, ‘जब कभी मौसम ज्यादा गर्म होता है, तो ज्यादा बारिश होती है। एवरेज रेनफॉल उतना ही रहता है। इससे कुछ ही दिनों में पूरे सीजन की बारिश हो जाती है। ज्यादा बारिश होने पर हमारी ड्रेनेज कैपेसिटी कम पड़ जाती है।’ प्रवीण आगे बताते हैं, ‘मुंबई का बिल्ट अप एरिया बढ़ गया है। पहले प्लानिंग के वक्त हमने सोचा था कि 100 मिलीमीटर बारिश होगी, तो 50 मिलीमीटर पानी जमीन के अंदर चला जाएगा। नॉर्मली होता है कि 50 प्रतिशत पानी बह जाता है, लेकिन ये अभी 100 प्रतिशत हो गया है। हमने हर जगह फर्शी या बिल्ट अप एरिया लगा दिया। इससे पानी जमीन के अंदर जाता ही नहीं है। प्रवीण परदेसी कहते हैं, सड़क पर पानी न बहे, इसके लिए सारा पानी स्टॉर्म वाटर ड्रेन में जाना चाहिए। इतने बड़े स्टॉर्म वाटर ड्रेन बनाना मुश्किल होता है। इसी समस्या का हल जापान में खोजा गया है। टोक्यो में ईडो नदी के बगल में उतनी ही बड़ी दूसरी नदी बना दी गई है। बारिश का पानी या तूफान आता है और वाटर लेवल बढ़ता है, तो उसका पानी साइड्स में बने ‘ड्रा होल्स’ से नीचे चला जाता है। ये पानी बड़े-बड़े चैनल्स में स्टोर होता है। इससे वहां कभी भी बारिश का पानी रास्ते पर नहीं बहता। ज्यादा पानी होने पर सीधे अंडरग्राउंड बनी नदी में चला जाता है। ये नदी टनल की तरह कंक्रीट की होती है। प्रवीण परदेसी बताते हैं कि ऐसी ही नदी बनाने का करार हमने जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी, यानी जायका के साथ किया है। डिप्टी ष्टरू देवेंद्र फडणवीस ने जापान जाकर इस पर मीटिंग की है। जायका हमारे साथ ये प्रोजेक्ट करने को तैयार है।

जिन्होंने जापान में प्रोजेक्ट पूरा किया, वही मुंबई में काम कर रहे

प्रवीण परदेसी कहते हैं, ‘मुंबई के लिए मीठी नदी बहुत अहम है। इसलिए सबसे पहले प्रोजेक्ट के लिए हमने इसे ही चुना है। जायका इसकी फीजिबिलिटी पर रिसर्च कर डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएगी। टोक्यो में ये काम करने वाले साइंटिस्ट और इंजीनियर ही मुंबई में रिसर्च रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

जापान में प्रोजेक्ट पूरा होने में 7 साल लगे

प्रवीण परदेसी कहते हैं कि जापान के पास दुनिया की सबसे आधुनिक मशीनें और तकनीक है। इसके बावजूद उन्हें प्रोजेक्ट पूरा करने में 7 साल से ज्यादा लगे। हमने उन्हें अगले 6-7 महीने में इसका मास्टर प्लान और डीपीआर बनाने के लिए कहा है।

मास्टर प्लान में दो पार्ट होंगे-

वे चीजें, जिन्हें हम तुरंत प्रभावी बना सकते हैं। जिन्हें बहुत लंबे समय में करना पड़ेगा पूरी नदी बनाने में हमें 7 साल से ज्यादा लग सकते हैं। इससे पहले हम बाढ़ को रोकने के लिए कुछ छोटे उपाय करेंगे। जिससे ज्यादा बारिश होने पर नुकसान को कम किया जा सकेगा। दोनों की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन रही है।

ये प्रोजेक्ट भविष्य में मुंबई को डूबने से बचाने के लिए

प्रवीण परदेसी बताते हैं कि ये प्रोजेक्ट फ्यूचर के हिसाब से तैयार हो रहा है। इससे मुंबई में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या खत्म हो जाएगी। आज से 20-25 साल बाद और ज्यादा बारिश होगी, समुद्र का लेवल बढ़ा, तो पानी शहर में घुसेगा और बारिश का पानी बाहर नहीं जा सकेगा। ऐसे में हम फ्यूचर में मुंबई को डूबने से बचाने के लिए ये कदम उठा रहे हैं।

जापान में प्रोजेक्ट पर 41 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए

प्रवीण परदेसी के मुताबिक, दुनिया में अभी सिर्फ जापान ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया है। भारत में आने वाले खर्च के सवाल पर वे कहते हैं, ‘हम अभी खर्च का आकलन नहीं कर सकते हैं। जापान ने अपने यहां इस प्रोजेक्ट पर करीब 5 बिलियन डॉलर यानी 41 हजार करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च किए हैं।

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अयोध्या राम मंदिर से 7 करोड़ की चोरी का दावा:अखिलेश बोले- सरकार की चुप्पी संदिग्ध; पूर्व मंत्री ने कहा- चंपत राय कसम खाएं

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अयोध्या/लखनऊ, एजेंसी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का आरोप है कि अयोध्या राम मंदिर में आए चढ़ावे में करोड़ों रुपए की चोरी की गई है। उन्होंने रविवार दोपहर X पोस्ट लिखकर कहा, सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। कोर्ट को खुद इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए।

अयोध्या में सपा के पूर्व विधायक व मंत्री रहे पवन पांडेय ने दावा किया कि 5 से साढ़े 7 करोड़ तक की चोरी की गई है। अगर चोरी नहीं हुई है तो ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय सामने आएं और प्रभु श्रीराम की कसम खाकर कहें कि आरोप झूठे हैं। अगर बात सच है तो एफआईआर करवाएं।

ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने अखिलेश के आरोपों पर कहा,

ट्रस्ट के सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और लिखित रूप में दर्ज किए जाते हैं। सभी लेन-देन का हिसाब-किताब सावधानीपूर्वक रखा जाता है और सब कुछ सही और पारदर्शी तरीके से चल रहा है। ट्रस्ट में आपसी सद्भाव और प्रेम है। रामजी सब कुछ देखते हैं। लोग चाहे जो कहें, लेकिन रामलला से संबंधित कार्य पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रहा है। ट्रस्ट कभी ऐसी गलती नहीं करेगा।

महंत नृत्य गोपाल दास राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। ये तस्वीर ट्रस्ट की बैठक से जुड़ी 5 महीने पुरानी है।

महंत नृत्य गोपाल दास राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। ये तस्वीर ट्रस्ट की बैठक से जुड़ी 5 महीने पुरानी है।

अखिलेश ने लिखा- रुपए गायब होना मंदिर ट्रस्ट के लिए शर्मनाक

अखिलेश ने X पोस्ट कर लिखा, पूरी दुनिया में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील खबर है। राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपए की रकम गायब मिली है।

अखिलेश ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सरकार को भी घेरा है। लिखा, करोड़ों रुपए गायब होना मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है।

सपा अध्यक्ष ने कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनानती समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।

पूर्व मंत्री का दावा- साढ़े 7 करोड़ रुपए की चोरी की गई

पवन पांडेय सपा सरकार में वन और मनोरंजन कर राज्य मंत्री रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अयोध्या राम मंदिर के अंदर जो दानपात्र रखे हुए हैं, जो चढ़ावा आता है, उसमें 5 से 7.50 करोड़ तक की चोरी की गई है। इसमें भाजपा के ही कार्यकर्ताओं के और ट्रस्ट के कुछ लोगों के नाम आ रहे हैं।

मैं इस देश की सरकार और यूपी सीएम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछना चाहता हूं कि क्या आप इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या उन चोरों पर एफआईआर होगी? क्योंकि देश के करोड़ों लोगों की आस्था उस मंदिर से जुड़ी हुई है। लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा, एक-एक रुपया जोड़कर उस मंदिर के निर्माण के लिए और भगवान राम के चरणों में अर्पित किया था। अगर वहां इस तरह की चोरी हो रही है, तो यह बहुत ही निंदनीय है। सरकार को तुरंत इस पर एक्शन लेना चाहिए और जो भी दोषी हैं, उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजना चाहिए।

उन्होंने कहा, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये चोरी कितने समय से हो रही थी। ट्रस्ट के किन-किन सदस्यों तक ये पैसा गया है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

पवन पांडेय सपा सरकार के राज्य मंत्री रहे हैं। इन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीनों में घोटाले का भी आरोप लगाया था।

पवन पांडेय सपा सरकार के राज्य मंत्री रहे हैं। इन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीनों में घोटाले का भी आरोप लगाया था।

अयोध्या के संत क्या बोले …

आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा, राम मंदिर हिंदू जनमानस की आस्था का केंद्र है। राम जन्मभूमि के लिए राम भक्तों ने बलिदान दिया है। और राम भक्तों को पीड़ित करने का, प्रताड़ित करने का काम अखिलेश यादव ने किया है। तो राम मंदिर से संबंधित चीजों पर उनके बोलने का कोई अधिकार नहीं है, कोई हक नहीं है।

मंदिर ट्रस्ट के प्रशासक गोपालजी राव ने कहा, इन लोगों (अखिलेश और पवन पांडेय) ने मंदिर के पक्ष में कभी नहीं बोला है। आरोप कोई भी लगा सकता है। आप महामंत्री से बात कीजिए। मैं अधिकृत वक्ता नहीं हूं। आप चंपत राय से बात कीजिए।

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दावा- NEET पेपर लीक के बाद NTA सिस्टम बदलेगा:एक्सपर्ट्स सवाल तैयार तो करेंगे, पर पता नहीं होगा किस एग्जाम के लिए किया

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नई दिल्ली, एजेंसी। NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE की मार्किंग गड़बड़ियों के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं।

नई योजना के तहत अलग-अलग विषयों के एक्सपर्ट्स केवल सवाल तैयार करेंगे। इन सवालों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इसमें करीब 10 हजार सवाल हो सकते हैं। बाद में टेक्नीक की मदद से इन सवालों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा- पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी ली है। मंत्री जिम्मेदारी से नहीं भाग रहे, बल्कि व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं।

जानिए NTA की नई प्लानिंग के बारे में

  • NTA से जुड़े अधिकारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी बहुत कम लोगों तक पहुंचे। सिस्टम को लोगों पर नहीं, प्रोसेस पर भरोसा करना चाहिए। पेपर लीक मामले में ट्रांसलेशन करने वालों की गिरफ्तारी के बाद NTA ट्रांसलेशन प्रोसेस में भी बदलाव करना चाहती है।
  • एजेंसी पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि वह करीब 85% ट्रांसलेशन का काम AI से कराने की योजना बना रही है। इसके बाद एक्सपर्ट्स सिर्फ यह जांचेंगे कि ट्रांसलेशन सही हुआ या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कोशिश यह भी रहेगी कि ट्रांसलेशन करने वालों को यह जानकारी न हो कि वे किस परीक्षा के सवाल देख रहे हैं।
  • वहीं, NTA इस समय 21 जून को होने वाले NEET-UG री-टेस्ट की तैयारी भी कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ बदलाव अभी से लागू किए जा चुके हैं। इसके तहत नए सब्जेट एक्सपर्ट्स को जोड़ा गया है। साथ ही पेपर छपने के बाद उसके ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज सिस्टम को और सुरक्षित बनाने पर भी काम चल रहा है।

रिजिजू बोले- शिक्षा मंत्री पर सीधा आरोप हो तो इस्तीफा मांगिए

रिजिजू ने कहा कि लाखों छात्रों को NEET दोबारा देने की नौबत आई और CBSE की मार्किंग गड़बड़ियों से भी परेशानी हुई। ऐसे मामलों में सरकार की जिम्मेदारी समस्या को ठीक करना है, न कि उससे बचना। उन्होंने भरोसा जताया कि उठाए गए कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि किसी मंत्री या उसके स्टाफ पर सीधे भ्रष्टाचार, रिश्वत या गलत काम का आरोप हो तो इस्तीफे की मांग जायज होती है, लेकिन NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री पर ऐसा कोई सीधा आरोप नहीं है।

NTA बोला- NEET री-एग्जाम का पेपर लीक नहीं हुआ

NEET (UG) 2026 री-एग्जाम से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर पेपर लीक होने और सवाल पहले से मिलने के कई दावे किए जा रहे हैं। NTA ने इन सभी दावों को गलत और भ्रामक बताया है।

एजेंसी का कहना है कि कुछ ठग गिरोह छात्रों और उनके परिवारों को गुमराह कर पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित पेपर और लीक से जुड़े मैसेज पूरी तरह फर्जी हैं।

NTA ने कहा कि परीक्षा की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और परीक्षा निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी। एजेंसी ने छात्रों से अफवाहों पर भरोसा न करने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की है।

साथ ही, ऐसे फर्जी मैसेज और पोस्ट फैलाने वाले अकाउंट्स व चैनलों की पहचान की जा रही है। NTA उनकी जानकारी सोशल मीडिया कंपनियों और साइबर क्राइम एजेंसियों को दे रही है, ताकि उन्हें हटाया जा सके। एजेंसी ने ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए शिकायत भी दर्ज कराई है।

NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।

12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया।

NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।

इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं।

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राहुल बोले- 18 साल का सार्थक CBI से तेज निकला:CBSE के OSM पोर्टल की गड़बड़ी उजागर की, ये नौजवानों की जीत

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को CBSE स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का 8.15 मिनट का वीडियो अपने X अकाउंट पर शेयर किया। दोनों की मुलाकात 2 जून को दिल्ली में हुई थी।

18 साल के सार्थक सिद्धांत ने CBSE की 12वीं क्लास के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और OSM का काम करने वाली कंपनी COEMPT से जुड़ी टेंडर प्रोसेस में गड़बड़ी का खुलासा किया है। राहुल ने कहा,

देश का 18 साल का युवा CBI से तेज निकला, नौजवानों की ये जीत सही मायने में सरकार की हार है।

झारखंड के रांची के रहने वाले सार्थक ने भी इस साल 12वीं के एग्जाम दिए थे। नंबर कम आने पर उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए अपनी स्कैन की गई आंसरशीट मंगाई थीं।

गलत नंबर कटने और दूसरी परेशानियों को सार्थक ने सोशल मीडिया पर शेयर था। सार्थक CBSE में सुधार के लिए संसद की स्थायी समिति के सामने 500 पेज की प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं।

राहुल और सार्थक की बातचीत…

राहुल: यह अच्छा है या बुरा, आप इस पर क्या सोचते हैं।

सार्थक: मैंने वही किया जो नागरिक को किसी भी चीज को लेकर करना चाहिए। ये हमारा देश है हर किसी में इतना सिविक सेंस जरूर होना चाहिए कि चीजों को पढ़कर सिस्टम को ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए काम करे। चाहें कितनी भी गड़बड़ी हो, लेकिन सुधार के लिए काम करना चाहिए।

राहुल: जो हुआ, उसके बारे में आप क्या सोचते हैं?

सार्थक: निसर्ग अधिकारी एथिकल हैकर है। उसने मुझे ग्रुप चैट पर OSM पोर्टल की गड़बड़ी शेयर की। मैंने देखा तो पाया कि उसमें सबकुछ ऑनमार्क द्वारा किया गया था। ऑनमार्क OSM इवैल्यूएशन के लिए एडटेक सॉल्यूशन कंपनी है। मैंने इसके बारे में और पता लगाया। निसर्ग ने मुझे दूसरी यूनिवर्सिटीज की भी डिटेल भेजी, जो ऑनमार्क का यूज करती थीं। उनमें भी गड़बड़ी दिखी। इसके बाद मुझे लगा कि सीबीएसई क्यों ऐसी कंपनी का यूज कर रही है, जिसके साथ इतनी गड़बड़ियां जुड़ी हैं।

राहुल: 18 साल का लड़का लूपहोल ढूंढ सकता है, तो ये बड़ा सिस्टम क्यों नहीं?

सार्थक: मुझे लगता है कि ये लोग अपना काम जिम्मेदारी से नहीं कर रहे हैं। 3 बार टेंडर बदला गया, रुल्स बदले गए, इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट COEMPT एडुटेक को दिया गया। गड़बड़ी की बात सामने आने पर भी जांच नहीं की गई, रुल्स बार-बार बदले गए। हो सकता है कि उन्हें (CBSE) को कंपनी ज्यादा पसंद हो या उन्हें हम 17 लाख स्टूडेंट्स के फ्यूचर की चिंता नहीं हो।

राहुल: आप इतने जिज्ञासु कैसे हैं, देश का एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट्स में जिज्ञासा को मार रहा है।

सार्थक: मुझे लगता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट्स में जिज्ञासा को मार रहा है। मुझे ये इसलिए है क्योंकि मेरे माता-पिता दोनों ही कंप्यूटर इंजीनियर रहे हैं। मैंने CBSE के सभी 576 टेंडर खंगाले। GEM पोर्टल भी खंगाला, वहां कुछ नहीं मिला। इसके बाद गूगल से जानकारी जुटाई। COEMPT को टेंडर देने से पहले 2 बार टेंडर कैंसिल किया गया। OSM सिस्टम लाने के केवल 74 दिन पहले ही ये टेंडर कंपनी को दिया गया।

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