रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर ED की रेड का मामला विधानसभा में भी गूंजा। बता दें कि ED ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक यह गिरफ्तारी शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। सरकार के दबाव में कार्रवाई का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा कि आज बच्चे का जन्मदिन है और उसे उठा लिया गया है। ये सब सरकार के दबाव में हो रहा है। आज की कार्यवाही का बहिष्कार करते हैं। इसके बाद कांग्रेस के सभी विधायक सदन से बाहर निकल गए।
भूपेश बघेल ने मंत्री दयालदास से सवाल किया कि धान केंद्रों से उठा लिया, तो फिर धान है कहां?
धान खरीदी और एनजीओ अनुदानों को लेकर किए सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज अंतिम दिन है। बहिष्कार से पहले विपक्ष ने सरकार को धान खरीदी और एनजीओ अनुदानों को लेकर जमकर घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि धान की कुल नीलामी कितनी हुई और जो एफसीआई और नान को दिया जाना था, वह मिलर्स को कितना दिया गया है।
भूपेश ने सवाल किया कि धान केंद्रों से उठा लिया, तो फिर धान है कहां? राइस मिलर्स को 1,59,000 मीट्रिक टन धान दे दिया गया। संग्रहण केंद्रों में 51,000 मीट्रिक टन धान है, लेकिन फिर नीलामी कितनी हुई? और एफसीआई और नान को देने के लिए मिलर्स के पास कितना स्टॉक है?
इस पर जवाब में मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि संचारी बालोद विधानसभा क्षेत्र में 2,25,000 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी, जिसमें से 1,79,700 मीट्रिक टन धान राइस मिलर्स को भेजा गया। बचत में मात्र 51 हजार 691 मीट्रिक टन धान बचा है।
मंत्री ने बताया कि करीब 1,000 मीट्रिक टन धान ही खरीदी केंद्र में है और बाकी संग्रहण केंद्रों में चला गया है। सभी आंकड़े पारदर्शी हैं, नीलामी और एफसीआई-नान को धान भेजने की प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है।
एनजीओ अनुदान पर उठा विवाद, कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल
महासमुंद से कांग्रेस विधायक चतुरी नंद ने महिला एवं बाल विकास विभाग से पूछा कि किन सामाजिक संस्थाओं को कितना अनुदान मिला है और उसका उपयोग किस मद में किया गया। उन्होंने खासतौर पर फॉर्च्यून फाउंडेशन NGO का जिक्र करते हुए कहा कि दस्तावेजों में 2024-25 और 2025-26 में जो राशि दिखाई गई है, वह मंत्री के बताए आंकड़ों से मेल नहीं खा रही।
इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब में बताया कि फॉरच्यून फाउंडेशन महासमुंद और आशियाना वृद्धाश्रम को चलाती है। 2023-24 में संस्था को ₹23.59 लाख, 2022-23 में ₹23 लाख, और 2024-25 में ₹10 लाख का अनुदान दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, “जिन राशियों में अंतर दिखाई दे रहा है, वह दो किस्तों में जारी की गई रकम के कारण हो सकता है। फिर भी मैं जानकारी की पुष्टि करवाने के लिए तैयार हूं।”
मंत्री लक्ष्मी ने चातुरी नंद के सवाल पर कहा कि बजट उपयोग की जानकारी विभाग उपलब्ध करवाएगा।
विधायक चातुरी नंद ने की जांच की मांग
कांग्रेस विधायक चतुरी नंद ने सदन में मांग की कि NGO को दिए गए अनुदान और उनके दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पूछा कि अगर संस्था महासमुंद में है, तो उसका दफ्तर कहां है? बजट का वास्तविक उपयोग किस काम में किया गया।
मंत्री ने जवाब में बताया कि संस्था की संपर्क जानकारी और बजट उपयोग की जानकारी विभाग उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शिता के साथ सभी रिकॉर्ड जांच के लिए तैयार हैं।
विधायक भैया लाल ने कहा- गलत जानकारी दी गई
विधायक भैया लाल राजवाड़े ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से पूछा कि मैंने जो पूछा था उसके हिसाब से जानकारी सही नहीं दी गई है। मैंने पूछा था कि कितने आवेदन दिव्यांगों के लिए आए हैं। इस पर विभाग ने जवाब में कहा कि 21 आवेदन आए हैं। क्या यह गलत जानकारी देकर आपको फंसाने का काम कर रहा है।
इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खड़े होकर जवाब देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट मेरे पास है। इतना बड़े आप वरिष्ठ सदस्य हमारे मार्गदर्शक भी हैं। उनके प्रश्न में यह था कि बैकुंठपुर जिला कोरिया कितने आवेदन दिव्यांगों के आए हुए हैं। 21 आवेदन की जानकारी दी गई है। भैया लाल राजवाड़े ने कहा कि सुशासन तिहार में इतने आवेदन आए हैं। निराकरण कहां हुआ है, मैंने तो पूरे विधानसभा की बात की है।
विधानसभा में कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने डीएपी सप्लाई का मुद्दा उठाया।
जानिए सत्र के चौथे दिन क्या-क्या हुआ
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का चौथा दिन हंगामेदार रहा। डीएपी (उर्वरक) खाद की सप्लाई का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व CM भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने सरकार पर प्राइवेट सेक्टर को डीएपी देकर किसानों को वंचित रखने का आरोप लगाया।
सदन में खूब नारेबाजी हुई। हंगामा करते हुए कांग्रेस के विधायक विधानसभा सदन के गर्भगृह में जा पहुंचे। कई बार समझाने के बाद भी जब कांग्रेसी विधायक सदन के बाहर नहीं गए तो स्पीकर डॉ रमन सिंह नाराज हुए।
डॉ. रमन ने कहा था कि 25 साल से जो परंपरा चली आ रही है, इसे तोड़ने का काम प्रतिपक्ष के लोग कर रहे हैं। यहां संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बाद डॉक्टर रमन सिंह ने सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया। हालांकि, 5 मिनट बाद सदन की कार्रवाई फिर से शुरू हुई।
पटेल ने पूछा- डीएपी भंडारण का कितना लक्ष्य था?
पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने छत्तीसगढ़ में डीएपी की आपूर्ति को लेकर सवाल किया। पटेल ने पूछा कि छत्तीसगढ़ में डीएपी भंडारण का कितना लक्ष्य था? कितना भंडारण हो चुका है? कितना व्यापारियों को दिया गया और कितना सोसाइटियों के जरिए किसानों को पहुंचाया गया ?
इसका जवाब देते हुए कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने बताया कि 3 लाख 10 हजार मिट्रिक टन का लक्ष्य था, जून तक 1 लाख 18000 मिट्रिक टन डीएपी मिला है। आने वाले 4 से 5 दिनों में बड़ी मात्रा में डीएपी की रेक मिलने वाली है, जिससे आपूर्ति बेहतर हो सकेगी।
सदन में कृषि मंत्री नेताम ने कमी स्वीकारी और कहा जल्द व्यवस्था ठीक होगी।
कृषि मंत्री नेताम ने स्वीकारी DAP की कमी
उमेश पटेल ने कहा था कि यह तो 50% से भी कम भंडारण की स्थिति है। जवाब में कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने डीएपी की कमी स्वीकारी, उन्होंने कहा लेकिन यह सिर्फ छत्तीसगढ़ की परेशानी नहीं है। एक वैश्विक समस्या है, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए काम किया जा रहा है।
मोदी का नाम सुनते ही मचा बवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सुनते ही कांग्रेस विधायकों ने बवाल शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री भाषण दे रहे हैं। इसके बाद प्राइवेट सेक्टर को डीएपी देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने हंगामा कर दिया।
स्थिति काे संभालते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की स्थिति को देखते हुए सरकार को यह करना चाहिए कि डीएपी प्राइवेट सेक्टर में न देकर 100% सोसाइटी में ही देना चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि हम यही व्यवस्था आने वाले दिनों में करने जा रहे हैं।
DAP के मुद्दे पर सदन में सभी विधायक अपनी जगह छोड़कर यूं हंगामा करते हुए।
जब गर्भगृह में ही बैठ गए कांग्रेसी
इस दौरान ‘DAP खाद देना होगा’, ‘किसान विरोधी सरकार नहीं चलेगी’, ‘कृषि मंत्री इस्तीफा दो’ के नारे खुद भूपेश बघेल लगवाते हुए सभी विधायकों के साथ गर्भगृह में आ गए। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सदन के गर्भगृह में आने की वजह से सभी कांग्रेस विधायक निलंबित हो गए हैं। सदन के बाहर चले जाएं। कांग्रेसियों ने इस बात को अनदेखा कर दिया और वहीं बैठकर नारे लगाते रहे।
इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब ये सभी निलंबित हो चुके हैं फिर भी सदन की कार्रवाई में बाधा पहुंचाना, ये तो नई परंपरा की शुरुआत कर रहे हैं। इसके बाद फिर रमन सिंह ने सभी को बाहर जाने को कहा, ऐसा दो बार कहा गया मगर कोई कांग्रेसी विधायक बाहर नहीं गया। नारेबाजी चलती रही।
मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप
रायपुर, एजेंसी।शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।
इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।
यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।
इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।
रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।
गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान
डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।
12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा
2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट
जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।
कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।
NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।
ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।
बलौदाबाजार, एजेंसी।छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।
दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।
बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम
छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ
राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।
अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।
पुलिस जवान तैनात
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।
कोई अधिकारिक बयान नहीं आया
हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।
बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
बालोद, एजेंसी।छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।
जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।
महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।
पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।
इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।
बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम
प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।
पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क
आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।
पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए
प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।
आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।
पति की बीमारी का उठाया फायदा
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।
कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन
एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।
ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी
एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।