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कोरबा

तंवर समाज के पदाधिकारियों ने DSP के खिलाफ मोर्चा:कोरबा में सामाजिक बैठक, बिलासपुर में FIR, कहा- बहिष्कार का आरोप गलत, पद का किया दुरुपयोग

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कोरबा/बिलासपुर। बिलासपुर में तंवर सतगढ़ समाज के पदाधिकारियों ने अपने ही समाज के DSP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि, उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रभाव का इस्तेमाल कर समाज के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराया है। सामाजिक बैठक कोरबा में हुई है और बिलासपुर में FIR दर्ज की गई है।

समाज के लोगों ने उन्हें बहिष्कृत करने के आरोप को भी गलत बताया है। बता दें कि DSP ने अंतरजातीय विवाह करने पर समाज के अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों पर रिश्तेदारों को बहिष्कृत करने और धमकी देने का आरोप लगाया है।

दरअसल, मूलत: ग्राम नुनेरा निवासी डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह पुलिस विभाग में DSP के पद पर पदस्थ हैं। वो सकरी आसमा सिटी में रहते हैं। परिवार के सदस्य गृह ग्राम में रहते हैं। जिसमें भाई-बहन शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने सरगुजा जिले की युवती से अंतरजातीय विवाह किया है।

एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाते हुए रविवार को एसपी और आईजी ऑफिस पहुंचे समाज के लोग।

एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाते हुए रविवार को एसपी और आईजी ऑफिस पहुंचे समाज के लोग।

अंतरजातीय विवाह करने पर समाज ने किया बहिष्कृत

DSP मेखलेन्द्र प्रताप सिंह वर्तमान में सरगुजा संभाग में पदस्थ हैं। उन पर इंटरकास्ट मैरिज करने का आरोप है। शादी के बाद सतगढ़ तंवर समाज के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों ने बैठक बुलाई। जिसके बाद उनके और परिवार का बहिष्कार कर दिया।

बताया गया कि सतगढ़ तंवर समाज ने दंड विधान और नियमावली बनाई है, जिसके पृष्ठ क्रमांक 5 दंड विधान प्रारूप-1 में सामाजिक अपराध खंड (व) उपखंड 2 में इंटरकास्ट मैरिज को आपराधिक कृत्य बताया गया है। बैठक में तय किया गया कि डॉ. सिंह ने सामाजिक नियमों के विरुद्ध अंतरजातीय विवाह कर अपने आप को सतगढ़ तंवर समाज से अलग कर चुके हैं।

इस आधार पर केन्द्रीय और शाखा कार्यकारिणी की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित कर उन्हें समाज से अलग मानने और भविष्य में किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में सम्मिलित न करने का निर्णय लिया गया।

अब समाज के पदाधिकारी बोले- नहीं किया है बहिष्कार

इस मामले में DSP ने अपने परिवार के सदस्यों को समाज से बहिष्कार करने और गाली-गलौज कर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कोटा थाने में केस दर्ज कराया है। जिस पर पुलिस ने समाज के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया है।

इधर, एफआईआर होने के बाद समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्होंने DSP और उसके परिवार के सदस्यों का बहिष्कार नहीं किया है। केवल, सामाजिक बैठक हुई है, जिसमें उन्हें नोटिस जारी किया गया है।

पदाधिकारी बोले- पद का किया दुरुपयोग

समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि DSP मेखलेंद्र सिंह ने अपने पद का गलत उपयोग किया है। झूठे आरोप लगाकर समाज के बुजुर्ग अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए एफआईआर कराया है। उनका कहना है कि न तो उन्होंने उनके परिवार के किसी सदस्य को धमकी दी है और न ही कोई विवाद किया है।

कोरबा में बैठक और बिलासपुर में एफआईआर

समाज के लोगों ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि समाज की बैठक कोरबा में हुई थी, जिसमें समाज के नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण और समाज के विकास की रूपरेखा तैयार करने को लेकर रणनीति बनाई गई। इस बैठक में DSP और उसके परिवार के सदस्यों को बहिष्कृत करने का निर्णय नहीं लिया गया है। न ही किसी तरह से अपशब्द गए हैं।

इसके बाद भी पुलिस ने कोरबा में हुई इस बैठक के दो माह बाद बिलासपुर जिले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए समाज के लोगों ने एसपी और आईजी से शिकायत की है।

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कोरबा

कलेक्टर के सख्त निर्देश:नल से पानी आने पर ही होगा जल जीवन मिशन के कार्यों का भुगतान

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कोरबा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर ने लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग को निर्देशित किया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों को संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) उनका क्रॉस वेरिफिकेशन करें।
उन्होंने निर्देश दिए कि मार्च 2028 तक सभी लंबित कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं में नल से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, उन्हीं कार्यों का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समितियों की नियमित बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए।
पाली के वनांचल क्षेत्र में योजना की दुर्गति
कोरबा जिले के पाली ब्लाक के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्यों की दुर्गति है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोरबा के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव को जानकारी देने के बाद भी साल भर से निरीक्षण करने का समय तक नहीं मिला। क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों ने केन्द्र की इस महत्वाकांक्षी योजना का बंटाधार कर दिया है और यदि सही जांच कराई जाए तो करोड़ों का भ्रष्टाचार निकलेगा। जल जीवन मिशन में कार्य करने वाले ठेकेदार करोड़पति बन गए और इनके तथा अधिकारियों की मिलीभगत से जहां योजना का लाभ अधिकांश एवं गांवों को नहीं मिल पा रहा है, वहीं गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों से योजना प्रारंभ होने से पहले ही दम तोड़ रही है और ठेकेदार भी कार्यवाही के अभाव में मदमस्त हैं।

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कोरबा

डीईओ को नोटिस जारी: छात्र सुरक्षा बीमा प्रभारी क्लर्क के खिलाफ होगी कड़ी कार्यवाही

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मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पर प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश
कोरबा। समय सीमा की बैठक में मंगलवार को कलेक्टर कुणाल दुदावत के तेवर सख्त दिखे। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा में विभाग की लापरवाही देखी। शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं स्कूलवार स्कैनिंग कार्य की समीक्षा की। मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी संबंधी प्राप्त शिकायतों के निराकरण में प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने संबंधित प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने तथा जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विकासखंड कोरबा एवं पोड़ी-उपरोड़ा में स्कैनिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 31 जुलाई तक सभी विकासखंडों में शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने वेंडर से समन्वय कर सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत बालिकाओं को शीघ्र साइकिल वितरण सुनिश्चित करने तथा स्कूली विद्यार्थियों को गणवेश का दूसरा सेट उपलब्ध कराने के लिए उच्च अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने पीएम पोषण गार्डन के लिए विद्यालयों की जानकारी 31 जुलाई तक उपलब्ध कराने, अहाताविहीन विद्यालयों की सूची तैयार करने तथा संबंधित जनपद पंचायतों के सीईओ को सरपंच एवं सचिव के माध्यम से उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विशेष शिविर आयोजित कर अपार आईडी बनाने तथा आधार एवं यू-डाइस से संबंधित त्रुटियों का निराकरण करने के निर्देश दिए।
छात्र सुरक्षा बीमा की राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत के मामले में कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संबंधित शाखा प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

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कोरबा

एकलव्य आवासीय स्कूल में अव्यवस्था का मामला : जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित

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कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव

गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर भी सवाल!

एकलव्य आवासीय विद्यालय में बच्चों ने कुछ दिन पूर्व पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन सहायक आयुक्त को निरीक्षण करने का समय ही नहीं मिला। महीनों से बच्चों को दूषित भोजन दिया जा रहा, लेकिन सहायक आयुक्त को कुछ पता ही नहीं।

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