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भारत पर ट्रम्प का 50% टैरिफ, 25% आज से लागू:ज्वेलरी-टेक्सटाइल जैसे सेक्टर को ज्यादा नुकसान, एक्सपोर्ट आधा हो सकता है
नई दिल्ली,एजेंसी। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर आज यानी, 7 अगस्त से 25% टैरिफ लागू हो गया है। वहीं 25% एक्स्ट्रा टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। अभी भारतीय सामानों पर करीब 10% टैरिफ लगता था। नए टैरिफ लगने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी, GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा- टैरिफ के कारण अमेरिका को होने वाले निर्यात में 40-50% की कमी आ सकती है।
हालांकि भारत के एक्सपोर्टर्स ने कहा- माल बेचने के किए उनके पास अमेरिका के अलावा दुनिया भर के बाजार हैं। ज्वेलरी जैसे कई सेक्टर्स में भारत का अमेरिका को निर्यात टैरिफ कम होने की वजह ज्यादा है। अब एक्सपोर्टर्स दुनिया के बाकी बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

1. इंजीनियरिंग गुड्स: सबसे ज्यादा निर्यात
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं।
- मौजूदा टैरिफ: 5% +10% = 15%, कई इंजीनियरिंग उत्पादों को सेक्शन 232 के तहत छूट भी। अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले इस कैटेगरी पर टैरिफ करीब 5% था।
- उदाहरण: 100 डॉलर का पार्ट अमेरिका में 115 डॉलर में बिकता है।
टैरिफ के बाद:
- नया टैरिफ: 5%+25%= 30%
- नई लागत: 100 डॉलर का सामान अब 130 डॉलर में पड़ेगा।
- असर: कीमत बढ़ने से निर्यात में 10-15% की कमी संभव।
- प्रभावित कंपनियां: भारत फोर्ज, टाटा स्टील, और L&T आदि।
- चुनौती: लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं।
क्या कर सकता है भारत?
- यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
- इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।
टैरिफ के कारण शिपमेंट में कमी आने की संभावना
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट एंड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा- अगर अमेरिका अपनी योजना के साथ आगे बढ़ता है और स्टील, एल्यूमीनियम और उनके डेरिवेटिव्स पर 50% टैरिफ लगाता है तो इन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात महंगा हो जाएगा।
इससे शिपमेंट में कमी आने की संभावना है। हमें लगभग तीन महीने तक इंतजार करना होगा यह देखने के लिए कि चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं। इसके बाद हम कोई रणनीति बना सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में ऊंचे टैरिफ की आशंका के चलते ऑर्डर पहले से ही ज्यादा ले लिए गए थे।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा था। भारत अमेरिका का आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है।
अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।
- उदाहरण: 100 डॉलर का स्मार्टफोन अमेरिका में 100.41 डॉलर में बिकता था।

अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।
टैरिफ के बाद: अभी इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट है। जब तक सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा नहीं होती तब तक अमेरिका को एपल, सैमसंग जैसे स्मार्टफोन्स के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सेक्शन 232 अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। यदि आयात देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, तो वाणिज्य विभाग जांच करता है और टैरिफ की सिफारिश करता है।
सेक्शन 232 की समीक्षा के बाद टैरिफ पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा के बाद अगर 25% का नया टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारत से एक्सपोर्ट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे और निर्यात पर इसका असर पड़ेगा।
- नया टैरिफ: 25%
- नई लागत: 100 डॉलर का स्मार्टफोन करीब 125 डॉलर में पड़ेगा।
- असर: कीमत में 25% की बढ़ोतरी, जिससे मांग में 20-25% की कमी संभव।
- प्रभावित कंपनियां: एपल और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां।
- चुनौती: वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से कड़ा मुकाबला।
क्या कर सकता है भारत?
- स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर्स को टैरिफ से छूट बनाए रखने के लिए बातचीत करना।
- घरेलू बाजार को मजबूत करने और नए ब्रांड्स विकसित करने पर जोर देना।
3. फार्मा: 250% टैरिफ लगाने की धमकी
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 10.52 बिलियन डॉलर यानी, करीब 92 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात किया था। ये अमेरिकी प्रिस्क्रिप्शन का करीब 40% हिस्सा है। अगर ये लागू होता है तो अमेरिका और भारत दोनों पर असर पड़ेगा।
- मौजूदा टैरिफ: 0% (फार्मा को अभी तक छूट थी)।
- उदाहरण: 100 डॉलर की दवा की कीमत 100 डॉलर ही है, क्योंकि कोई टैरिफ नहीं है।
टैरिफ के बाद: अभी फार्मा को छूट है, लेकिन ट्रम्प ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ की धमकी दी है।
- अगर 25% टैरिफ लागू हुआ: 100 डॉलर की दवा की कीमत 125 डॉलर हो जाएगी।
- प्रभावित कंपनियां: सन फार्मा, डॉ. रेड्डी, सिप्ला, ल्यूपिन।
- चुनौती: अगर टैरिफ लागू हुआ, तो वियतनाम जैसे देशों से मुकाबला करना पड़ेगा।
क्या कर सकता है भारत?
- जेनेरिक दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर जोर देना।
- यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक बाजारों में निर्यात बढ़ाना।
4. जेम्स एंड ज्वेलरी: टैरिफ से पहले एक्सपोर्ट डबल
पहले की स्थिति: भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.94 बिलियन डॉलर (करीब 87 हजार करोड़) के रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट किए थे। ये अमेरिकी हीरा आयात का 44.5% है।
- मौजूदा टैरिफ: ज्वेलरी (6%+10%=16%), डायमंड (0%+10%=10%)। अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले ज्वेलरी पर 6% और डायमंड पर 0% टैक्स लगता था।
- उदाहरण: 100 डॉलर की ज्वेलरी अमेरिका में 116 डॉलर में बिकती है।

अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।
टैरिफ के बाद:
- नया टैरिफ: ज्वेलरी (6%+25%=31%), डायमंड (0%+25%=25%)।
- नई लागत: 100 डॉलर की ज्वेलरी अब 131 डॉलर में पड़ेगी।
- असर: कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी संभव।
- प्रभावित कंपनियां: राजेश एक्सपोर्ट्स, टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स।
- चुनौती: अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे लाखों कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
क्या कर सकता है भारत?
- भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करना।
- यूरोपीय बाजारों में डायमंड निर्यात बढ़ाना।
एक्सपोर्टर बोले- हमसे ज्यादा असर अमेरिका पर
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल में सूरत रीजन के प्रेसिडेंट जयंती सावलिया ने कहा- दुनियाभर के ज्वेलरी मार्केट में हमारी हिस्सेदारी 6% ही है। हमारे पास अभी 94% मार्केट के लिए जगह है। यूएस मार्केट में अभी तक एक्सपोर्ट हम इसलिए कर रहे थे क्योंकि टैरिफ कम था।
अब सीधा 25% टैरिफ लगेगा, लेकिन ये धीरे-धीरे स्टेबल भी हो जाएगा। हमसे ज्यादा असर तो अमेरिका पर ही होगा। उन्होंने ये भी कहा कि टैरिफ बढ़ाए जाने की खबर से एक्सपोर्ट डबल-ट्रिपल हो गया है। 7 अगस्त से पहले लोग माल बेचकर टैरिफ से बचना चाहते हैं। इससे अगले 3-4 महीने तक माल की रिक्वायरमेंट नहीं रहेगी।
हालांकि अभी आगे क्या सिचुएशन होगी, इसके बारे में कोई नहीं बता सकता।
5. टेक्सटाइल: कपड़ों की मांग पर ब्रेक
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर, यानी करीब 87 हजार करोड़ के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किए थे। इसमें रेडीमेड गार्मेंट से लेकर कॉटन यार्न और कारपेट शामिल है।
- मौजूदा टैरिफ: 10%+10%= 20%, अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले टेक्सटाइल पर 10-15% टैक्स लगता था।
- उदाहरण: 100 का कपड़ा अमेरिका में 120 डॉलर में बिकता था।

अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।
टैरिफ के बाद:
- नया टैरिफ: 10%+25%=35%
- नई लागत: 100 डॉलर का कपड़ा अब 135 डॉलर में पड़ेगा।
- असर: कीमत में 25% की बढ़ोतरी, जिससे मांग में 20-25% की कमी संभव।
- प्रभावित कंपनियां: केपीआर मिल, अरविंद, वर्धमान टेक्सटाइल्स।
- चुनौती: बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा।
क्या कर सकता है भारत?
- भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करना।
- घरेलू ब्रांड्स और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर ध्यान देना।
बिजनेसमैन बोले- टैरिफ से पूरा ट्रेड डिस्टर्ब हो गया
गुजरात बेस्ड टेक्सटाइल बिजनेसमैन आशीष गुजराती ने कहा- ओवरऑल इंडस्ट्री पर इसका असर तो होने ही वाला है। होम टेक्सटाइल्स का सबसे बड़ा बायर US ही है। इस सेगमेंट में भारत के टोटल एक्सपोर्ट का 35% हम US एक्सपोर्ट करते हैं।
मुझे लगता है 2 -3 महीने में इसका सॉल्यूशन भी आ जाना चाहिए। अभी कोई क्लैरिटी नहीं है। 7 तारिख से टैरिफ लग रहा है तो सब पैनिक में ही हैं। क्या होगा-कैसे होगा- आगे डेट एक्सटेंड होगी कि नहीं। इससे तो पूरा ट्रेड डिस्टर्ब हो गया है।
6. ऑटोमोबाइल: ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट पर असर
पहले की स्थिति : 2024 में भारत ने अमेरिका को केवल 8.9 मिलियन डॉलर की पैसेंजर कार्स एक्सपोर्ट कीं, जो देश के कुल 6.98 बिलियन डॉलर के निर्यात का सिर्फ 0.13% है।
वहीं अमेरिका को सिर्फ 12.5 मिलियन डॉलर के ट्रक निर्यात किए गए, जो भारत के वैश्विक ट्रक निर्यात का 0.89% है। ये आंकड़े इस सेक्टर की सीमित जोखिम को दर्शाते हैं।
सबसे ज्यादा ध्यान देने वाला सेगमेंट है ऑटो पार्ट्स। 2024 में भारत ने अमेरिका को 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 19 हजार करोड़ रुपए) के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए, जो इसके वैश्विक ऑटो पार्ट्स निर्यात का 29.1% है।
अमेरिका ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर 89 बिलियन डॉलर के ऑटो पार्ट्स आयात किए, जिसमें मेक्सिको का हिस्सा 36 बिलियन डॉलर, चीन का 10.1 बिलियन डॉलर, और भारत का सिर्फ 2.2 बिलियन डॉलर था।
- मौजूदा टैरिफ: 25%, ट्रंप प्रशासन ने मई 2025 से भारत से आयात होने वाले पैसेंजर वाहनों और कुछ चुनिंदा ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% टैरिफ लगाया है।
टैरिफ के बाद :
- नया टैरिफ: 25%
- प्रभावित कंपनियां: टाटा मोटर्स, भारत फोर्ज, समवर्धन मदरसन।
- चुनौती: वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से कड़ा मुकाबला, जो सस्ते विकल्प दे सकते हैं।
क्या कर सकता है भारत?
- नए बाजार जैसे यूरोप और ASEAN देशों में निर्यात बढ़ाना।
- लागत कम करने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का विस्तार।
देश
नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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