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क्या दिल्ली-हरियाणा मॉडल से बिहार में BJP को जिताएगा RSS:हर गांव में 10 लोगों की टीम एक्टिव, रूठे वोटर्स को मनाएंगे

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दिल्ली/पटना,एजेंसी। सीवान जिले के कोड़ारी गांव के रहने वाले नितेश कुमार पेशे से किसान हैं। दूध का भी कारोबार है। उनके एक जानने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक यानी RSS से जुड़े हैं। एक दिन उन्होंने नितेश को घर बुलाया। वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। नितेश उन्हें नहीं जानते थे। वे उनके बीच बैठे, तो बातचीत शुरू हुई। हालचाल के बाद पॉलिटिक्स, राष्ट्रवाद और सरकार की योजनाओं पर बातें होने लगीं।

नितेश कहते हैं, ‘उनकी बातों का मुझ पर बहुत असर हुआ। मैं बाद में भी उन लोगों से मिलता रहा। एक दिन वे लोग मेरे घर आए। मैंने अपने गांव के कुछ लोगों से उन्हें मिलवाया। फिर वे बार-बार मेरे गांव आने लगे। हम चाय पर बैठते थे। वे कहते थे कि ऐसी पार्टी को वोट दो, जिसके हाथ में हमारा राज्य और देश सुरक्षित रहे।’

नितेश तक पहुंचे लोग, दरअसल बिहार में RSS की स्ट्रैटजी का हिस्सा हैं। RSS से जुड़े सोर्स बताते हैं कि संगठन के स्वयंसेवक पटना, मुजफ्फरपुर, सीवान, भागलपुर सहित सीमांचल और मगध के गांव-शहरों में एक्टिव हो गए हैं। चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं और लोगों से मिलते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं, ये अलग-अलग गांवों में जा रहे हैं।

RSS की इसी स्ट्रैटजी से BJP ने पहले हरियाणा और फिर दिल्ली में सरकार बनाई थी। RSS ने बिहार को दो प्रांत उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार में बांटा है। उत्तर बिहार का काम मुजफ्फरपुर और दक्षिण बिहार का पटना से होता है।

बिहार में कुल 16 हजार स्वयंसेवक, 2 महीने से एक्टिव

बिहार में काम कर रहे प्रांत प्रचारक स्तर के पदाधिकारी से हमने RSS की स्ट्रैटजी पर बात की। वे कहते हैं, ‘बिहार में अभी 16 हजार स्वयंसेवक इस वक्त एक्टिव हैं। RSS का काम दिखता है, उसके कार्यकर्ता नहीं। नतीजा दिखता है, तैयारी नहीं।’

हमने पूछा कि क्या बिहार में भी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जिताने वाले मॉडल पर काम हो रहा है। वे जवाब देते हैं, ‘हर राज्य की जनता अलग है, मुद्दे अलग हैं। कॉमन सिर्फ इतना है कि RSS सोशल मीडिया पर नहीं, जमीन पर उतरता है। हमारे स्वयंसेवक घर-घर पहुंचते हैं। लोगों का मन टटोलते हैं, उनसे जुड़ते हैं। हर राज्य के वोटर अलग हैं, तो रणनीति में कुछ फर्क तो होता ही है।’

रूठे वोटर को मना रहे, कन्फ्यूज वोटर्स को बता रहे अच्छी पार्टी कौन

प्रांत प्रचारक आगे कहते हैं, ‘RSS के स्वयंसेवक की एक टीम घर-घर जाकर वोटर्स की लिस्ट तैयार कर चुकी हैं। अब दूसरी टीम ने अपना काम शुरू किया है। ये टीमें उन वोटर्स को मना रही हैं, जिसके मन में BJP या NDA के लिए थोड़ी भी दुविधा है। मतलब, हम कन्फ्यूज वोटर को बिहार के लिए सही पार्टी चुनने में मदद कर रहे हैं।’

सही पार्टी मतलब? प्रांत प्रचारक कहते हैं, ‘ऐसी पार्टी, जो राज्य और लोगों का विकास कर सके। पार्टी का नाम हम कभी नहीं लेते।’

इसी बात को प्रांत स्तर के एक और प्रचारक आगे बढ़ाते हैं। वे कहते हैं, ‘घर-घर जाकर लोगों की कैटेगरी के हिसाब से लिस्ट बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। ये लिस्ट तीन हिस्सों में है। 1. BJP के पक्के वोटर 2. कन्फ्यूज वोटर 3. रूठे वोटर

यानी आपका काम खत्म हुआ? प्रचारक जवाब देते हैं, ‘नहीं, काम तो अब शुरू हुआ है। RSS की दूसरी टीमों ने लिस्ट के मुताबिक लोगों से फिर संपर्क करना शुरू किया है। ये टीमें वोटर्स को मुद्दे, उनके फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगी।’

‘किस पार्टी ने क्या वादा किया था, कितना पूरा किया, किस पार्टी ने बिहार को जंगलराज बनाया और किसने अच्छा काम किया। इन टीमों का काम कन्फ्यूज वोटर्स के दिमाग में क्लेरिटी लाना है। एक-सवा महीने बाद फिर लिस्ट को रिव्यू किया जाएगा।’

‘रूठे वोटर्स को गुस्सा निकालने का मौका दे रहे’

हम जमीन पर काम कर रहे स्वयंसेवकों से भी मिले। इनमें से एक कहते हैं, ‘RSS ने एक प्रयोग हरियाणा में किया था। NDA या BJP के नाराज वोटर्स को मनाने के लिए कुछ वरिष्ठ स्वयंसेवकों की टीमें बनाई थीं। इनका काम लोगों की शिकायतें सुनना था। वे उनसे मिलते, उनकी बातें सुनते थे। उन्हें गुस्सा उतारने देते थे। यही काम बिहार में भी कर रहे हैं।’

इस टीम का काम ही वोटर्स का गुस्सा झेलना है, जैसे परिवार के नाराज सदस्य की शिकायत सुनी जाती है। शिकायतों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। ये लिस्ट टीम अपनी लीडरशिप को दे रही हैं।

‘इस लिस्ट पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इसे दो हिस्से में बांटा है। जो काम दो महीनों के अंदर हो सकते हैं, उन्हें करवाने की कोशिश हो रही है। जिन शिकायतों को दूर करने में ज्यादा वक्त लगना है, उसके लिए भरोसा दे रहे हैं, उनकी शिकायत चुनाव के फौरन बाद दूर की जाएगी।’

किस तरह की शिकायतें हैं, जिन पर तुरंत काम करवा रहे हैं? जवाब मिला, ‘जैसे किसी गांव में सड़क खराब है, उसे ठीक करवा देना या फिर पक्की सड़क बनवा देना। किसी को PM आवास योजना के तहत घर नहीं मिला, तो उसकी प्रोसेस शुरू करवा देना, राशन कार्ड बनवा देना। ये सारे काम लिस्ट में हैं। कोशिश होगी ये सभी चुनाव से पहले करवा दें।’

महिला वोटर्स पर फोकस, उनके लिए अलग से स्ट्रैटजी बनी

RSS के एक सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में महिला वोटर निर्णायक हैं। उनके लिए अलग से रणनीति बनी है। RSS से जुड़े महिला संगठन ये काम कर रहे हैं। उनकी टीमें अलग-अलग उम्र की महिलाओं से मिल रही हैं। घरेलू और पेशेवर महिलाओं के लिए अलग टीमें हैं।’

वे आगे कहते हैं, ‘RSS एक सर्वे भी कर चुका है। कैटेगरी के साथ महिलाओं की लिस्ट तैयार है। अब उनके साथ टीमें बैठक कर रही हैं। महिलाओं से पूछा जा रहा है कि उनकी सीट पर कौन सा नेता बेहतर है। उन्हें कैसे नेता और सरकार चाहिए।’

‘महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हर चीज से प्रभावित होती हैं। घर का राशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सड़कों का माहौल, इनसे जुड़े ऐसे कुछ सवाल महिलाओं से पूछे जा रहे हैं। फिर उनके जवाब पर डिस्कशन किया जा रहा है। इससे कोई एक चेहरा या फिर उनकी पसंद की सरकार की इमेज निकल कर सामने आए। ये एक्सरसाइज टिकट के लिए कैंडिडेट चुनने में काम आएगी।’

RSS 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट देगा

सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में NDA में किसे कितनी सीटें मिलेंगी, ये तय होना है। 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट हमें तैयार करनी है। इस पर पार्टी और RSS मंथन करने के बाद फैसला लेगा।’

क्या लिस्ट में हर सीट से एक कैंडिडेट होगा? जवाब मिला, ‘नहीं, हर सीट पर तीन कैंडिडेट के नाम देंगे। हर कैंडिडेट की छवि, मजबूत और कमजोर पक्ष डिटेल में देंगे। जिस सीट पर मौजूदा विधायक कमजोर हैं, वहां नए चेहरे की तलाश करेंगे। विधायक का रिपोर्ट कार्ड भी देंगे।’

सोर्स बताते हैं,

प्रधानमंत्री की रैली से लेकर स्टार प्रचारकों की रैलियों में RSS की भूमिका होगी। कौन सा प्रचारक कहां वोटर्स को अपील करेगा, इसे ध्यान में रखते हुए RSS रैलियों और बैठकों का प्लान बना रहा है।

RSS के एक प्रांत प्रचारक बताते हैं, ‘बिहार में RSS की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां RSS की शुरुआत यानी 1925 से ही शाखाएं चल रही हैं। मार्च 2025 में RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत बिहार आए थे। यहां उन्होंने स्वयंसेवकों से बात की। इसके बाद बिहार के लिए रणनीति तैयार की गई। यह रणनीति तीन पॉइंट पर आधारित है- राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और विकास।’

स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS 2025 को शताब्दी वर्ष की तरह मना रहा है। फोटो दिल्ली में हुई बैठक की है। ये बैठक 26 से 28 अगस्त को दिल्ली में हुई थी।

स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS 2025 को शताब्दी वर्ष की तरह मना रहा है। फोटो दिल्ली में हुई बैठक की है। ये बैठक 26 से 28 अगस्त को दिल्ली में हुई थी।

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में RSS ने अलग-अलग सीटों पर 50 हजार से ज्यादा बैठकें की थीं। इनके जरिए वोटर्स को BJP के पक्ष में एकजुट किया गया। बिहार में भी इसी तरह काम हो रहा है। मुजफ्फरपुर के RSS के शाखा प्रमुख बताते हैं, हमारे 5 हजार स्थानीय स्वयंसेवक हैं। बाहर से करीब 500 स्वयंसेवक सिर्फ मुजफ्फरपुर आए हैं। वे गांव-गांव घूम रहे हैं।’

गांवों में 10 से 15 लोगों की टीम, ब्लॉक में हर हफ्ते 100 मीटिंग

ग्राउंड पर काम के तरीके पर एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम रोज 5-10 घरों में जाते हैं। लोगों से राम मंदिर, विकास की योजनाएं, जातिवाद के खिलाफ और RSS की रणनीति पर बात करते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवकों की टीम डोर-टु-डोर कैंपेन करती है।’

‘हम राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा, पाकिस्तान, हिंदुत्व, राम मंदिर, गौ-रक्षा और विकास के साथ-साथ PM किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के फायदे बताते हैं। हम ऐसे परिवार चुनते है जो हिंदू हैं, लेकिन BJP के वोटर नहीं हैं। या BJP के वोटर रहे हैं, लेकिन किसी वजह से नाराज हैं। अभी एक ब्लॉक में हर हफ्ते 100 बैठकें कर रहे हैं।’

मुस्लिम आबादी वाले एरिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस

RSS की टीमें मुद्दों के आधार पर इलाके चुन रही है। पूर्वी बिहार और सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस है। इन जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है।

यहां स्वयंसेवक राम मंदिर का जिक्र करते हैं और कहते हैं, मोदी जी ने 500 साल का सपना पूरा किया है। पश्चिमी बिहार और मगध में किसानों के मुद्दे और उनसे जुड़ी योजनाओं पर बात होती है। ग्रामीण इलाकों में जातिवाद के खिलाफ अपील की जाती है।

एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं। लोगों से बहस नहीं करते, बल्कि उन्हें समझाते हैं। बुजुर्गों से मिलते है। पहले रामायण, फिर विकास की बात करते हैं। हर जिले में प्रभारी हैं, जो इसकी रिपोर्ट नागपुर भेजते हैं।’

RSS के विचारक दिलीप देवधर बताते हैं, ‘संघ परिवार और BJP मिलकर काम कर रहे हैं। BJP जो काम अकेले कर सकती है, उसे वह करती है, बाकी मोर्चों पर संघ परिवार एक्टिव रहता है। संघ परिवार का काम इवेंट के हिसाब से नहीं होता।’

जाति जनगणना के ऐलान में भी RSS का इनपुट

केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल, 2025 को जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया था। देश में आजादी के बाद यह पहली जातीय जनगणना होगी। इस ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS चीफ मोहन भागवत के बीच मुलाकात हुई थी।

RSS के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘BJP, RSS से जातिगत जनगणना के लिए सहमति चाहती थी। RSS इस पर दुविधा में था। बिहार से संगठन के कार्यकर्ताओं से उसी वक्त इनपुट मिला कि BJP की OBC और आरक्षण विरोधी छवि को चुनाव से पहले तोड़ना होगा, नहीं तो इसका असर नतीजों पर दिखेगा।’

‘वक्त कम था, इसलिए उसी वक्त जाति जनगणना की घोषणा कर इस छवि को तोड़ने की कोशिश की गई। RSS से इस मुद्दे पर पहले से बात हो रही थी। इनपुट के बाद RSS ने सहमति दे दी क्योंकि 2015 में आरक्षण पर दिए मोहन भागवत के बयान का असर 2020 तक चुनाव में साफ दिखा था।’

गृह मंत्रालय ने 16 जून को जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्र सरकार दो फेज में जनगणना कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। 1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी।

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पश्चिम बंगाल में कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप के हत्यारे तत्काल हों गिरफ्तार: राहुल गांधी

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नई दिल्ली,एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि उसके लोगों ने कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की हत्या की है। श्री गांधी ने रविवार को देबदीप की हत्या पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की और कहा कि कांग्रेस हिंसा पर भरोसा नहीं करती और अहिंसा के सिद्धांत को कलंकित करने वाली राजनीति के सामने झुकना नहीं जानती है।
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर रविवार को लिखा, ‘कांग्रेस के कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की तृणमूल से जुड़े गुंडों द्वारा की गयी हत्या बेहद निंदनीय है। शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, तृणमूल का गुंडा राज चल रहा है। वोट के बाद विरोधी आवाज़ों को डराना, मारना, मिटाना, यही टीएमसी का चरित्र बन चुका है।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस की राजनीति कभी हिंसा पर नहीं टिकी और न कभी टिकेगी।
हमने भी अपने कार्यकर्ता खोए हैं, फिर भी हमने हमेशा अहिंसा और संविधान का रास्ता चुना है। यही हमारी विरासत है, यही हमारा संकल्प।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी मांग स्पष्ट है, सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कठोरतम सज़ा मिले और देबदीप के परिवार को पूर्ण सुरक्षा तथा मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए। भारत की अहिंसक परंपरा को कलंकित करने वाली इस राजनीति के सामने हम झुकेंगे नहीं। न्याय होकर रहेगा।’ 

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पहले आतंकियों को बिरयानी, अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से दिया जवाब- ममता पर अमित शाह ने साधा निशाना

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तेहट्टा,एजेंसी। गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी जन सभा को संबोधित किया। नदिया के तेहट्टा विधानसभा में अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि TMC ने किसानों की अनदेखी की है पहले चरण में TMC का सूपड़ा साफ हो गया है। 

पश्चिम बंगाल की तेहट्टा, नादिया में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि…जब ममता बनर्जी और कांग्रेस की सरकार थी तब आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे। 2014 में पीएम मोदी की सरकार आई उरी पर हमला हुआ तो सर्जिकल स्ट्राइक की, पुलवामा में हमला हुआ एयरस्ट्राइक की और पहलगाम में हमला हुआ, पाकिस्तान के घर में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर करके आतंकवादियों का सफाया किया गया। 

पीएम मोदी ने इस देश को आतंकवाद से मुक्त किया है। पीएम मोदी ने इस देश को नक्सलवाद से मुक्त किया है और अब भाजपा सरकार ला दीजिए, चुन-चुन कर घुसपैठियों को निकालने का काम हम करेंगे… दीदी कहती हैं कि SIR करके घुसपैठियों का नाम क्यों निकाल रहे हो? दीदी, आपका समय समाप्त हो चुका है।

अमित शाह ने कहा, “4 मई को भाजपा सरकार बनने वाली है। मई महीने के बाद बंगाल की हर दीदी, माता, बहन के खाते में हर महीने 3 हजार रुपये भाजपा सरकार भेजने वाली है और सारे बेरोज़गार युवाओं के बैंक खाते में हर महीने 3 हजार रुपये भेजे जाएंगे। सारी माताओं- बहनों को बस में कोई टिकट नहीं लेना है, मुफ्त में यात्रा हो जाएगी।  उन्होंने कहा कि 4 तारीख को भाजपा सरकार आने वाली है… भाजपा का मुख्यमंत्री आने के बाद सिर्फ मतदाता सूची से नहीं, पूरे बंगाल की भूमि से घुसपैठियों को चुन-चुन कर निकालेंगे। 

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न्यायपालिका पर जनता का भरोसा बनाए रखना हमारा दायित्व: सीजेआई सूर्यकांत

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नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका और उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता का गहरा विश्वास है और इस विश्वास को बनाए रखना सभी का दायित्व है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां ‘एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज’ (राजस्थान चैप्टर) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने पूर्व न्यायाधीशों की तुलना ‘बावड़ी’ से करते हुए उन्हें ज्ञान का भंडार बताया, जो कठिन परिस्थितियों में व्यवस्था का मार्गदर्शन कर सकते हैं। सीजेआई ने कहा, “जिस प्रकार राजस्थान में बावड़ियां बरसात के मौसम में पानी संचित कर सूखे समय में उपयोगी होती हैं, उसी प्रकार सेवानिवृत्त न्यायाधीश हमारे लिए एक बहुमूल्य संसाधन हैं। लोक अदालतों, मध्यस्थता और सलाहकार भूमिकाओं में उनका अनुभव अत्यंत उपयोगी है।

न्यायिक संस्थाओं को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता 
सीजेआई ने कहा कि राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सहित सभी न्यायिक संस्थाओं को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोग न्यायाधीशों के शब्दों को अत्यंत सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं, जो न्यायपालिका पर जनता के गहरे विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस विश्वास को बनाए रखना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है।
न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने एक शेर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, “जिसको तूफानों से उलझने की हो आदत, ऐसी कश्ती को समंदर भी दुआ देता है।” उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे जनता का विश्वास न केवल बना रहे बल्कि और मजबूत हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और यह कानून तथा संविधान की रक्षक है। शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका ने ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया है।

न्यायालयों की संख्या बढ़ाने पर कार्य कर रही सरकार 
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायाधीश केवल मुकदमों का निपटारा नहीं करते, बल्कि वे न्याय की आवश्यकता वाले प्रत्येक व्यक्ति की उम्मीद होते हैं। अनुभवी न्यायाधीशों का योगदान आज भी न्याय प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए कानूनों के प्रशिक्षण, अदालतों के आधुनिकीकरण और न्यायालयों की संख्या बढ़ाने पर कार्य कर रही है। राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण आमजन तक न्याय पहुंचाने और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के दौरान उच्च न्यायालय के यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम की शुरुआत की गयी तथा पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए लेखों के संकलन का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज के पदाधिकारी, न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

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