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क्या दिल्ली-हरियाणा मॉडल से बिहार में BJP को जिताएगा RSS:हर गांव में 10 लोगों की टीम एक्टिव, रूठे वोटर्स को मनाएंगे

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दिल्ली/पटना,एजेंसी। सीवान जिले के कोड़ारी गांव के रहने वाले नितेश कुमार पेशे से किसान हैं। दूध का भी कारोबार है। उनके एक जानने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक यानी RSS से जुड़े हैं। एक दिन उन्होंने नितेश को घर बुलाया। वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। नितेश उन्हें नहीं जानते थे। वे उनके बीच बैठे, तो बातचीत शुरू हुई। हालचाल के बाद पॉलिटिक्स, राष्ट्रवाद और सरकार की योजनाओं पर बातें होने लगीं।

नितेश कहते हैं, ‘उनकी बातों का मुझ पर बहुत असर हुआ। मैं बाद में भी उन लोगों से मिलता रहा। एक दिन वे लोग मेरे घर आए। मैंने अपने गांव के कुछ लोगों से उन्हें मिलवाया। फिर वे बार-बार मेरे गांव आने लगे। हम चाय पर बैठते थे। वे कहते थे कि ऐसी पार्टी को वोट दो, जिसके हाथ में हमारा राज्य और देश सुरक्षित रहे।’

नितेश तक पहुंचे लोग, दरअसल बिहार में RSS की स्ट्रैटजी का हिस्सा हैं। RSS से जुड़े सोर्स बताते हैं कि संगठन के स्वयंसेवक पटना, मुजफ्फरपुर, सीवान, भागलपुर सहित सीमांचल और मगध के गांव-शहरों में एक्टिव हो गए हैं। चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं और लोगों से मिलते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं, ये अलग-अलग गांवों में जा रहे हैं।

RSS की इसी स्ट्रैटजी से BJP ने पहले हरियाणा और फिर दिल्ली में सरकार बनाई थी। RSS ने बिहार को दो प्रांत उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार में बांटा है। उत्तर बिहार का काम मुजफ्फरपुर और दक्षिण बिहार का पटना से होता है।

बिहार में कुल 16 हजार स्वयंसेवक, 2 महीने से एक्टिव

बिहार में काम कर रहे प्रांत प्रचारक स्तर के पदाधिकारी से हमने RSS की स्ट्रैटजी पर बात की। वे कहते हैं, ‘बिहार में अभी 16 हजार स्वयंसेवक इस वक्त एक्टिव हैं। RSS का काम दिखता है, उसके कार्यकर्ता नहीं। नतीजा दिखता है, तैयारी नहीं।’

हमने पूछा कि क्या बिहार में भी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जिताने वाले मॉडल पर काम हो रहा है। वे जवाब देते हैं, ‘हर राज्य की जनता अलग है, मुद्दे अलग हैं। कॉमन सिर्फ इतना है कि RSS सोशल मीडिया पर नहीं, जमीन पर उतरता है। हमारे स्वयंसेवक घर-घर पहुंचते हैं। लोगों का मन टटोलते हैं, उनसे जुड़ते हैं। हर राज्य के वोटर अलग हैं, तो रणनीति में कुछ फर्क तो होता ही है।’

रूठे वोटर को मना रहे, कन्फ्यूज वोटर्स को बता रहे अच्छी पार्टी कौन

प्रांत प्रचारक आगे कहते हैं, ‘RSS के स्वयंसेवक की एक टीम घर-घर जाकर वोटर्स की लिस्ट तैयार कर चुकी हैं। अब दूसरी टीम ने अपना काम शुरू किया है। ये टीमें उन वोटर्स को मना रही हैं, जिसके मन में BJP या NDA के लिए थोड़ी भी दुविधा है। मतलब, हम कन्फ्यूज वोटर को बिहार के लिए सही पार्टी चुनने में मदद कर रहे हैं।’

सही पार्टी मतलब? प्रांत प्रचारक कहते हैं, ‘ऐसी पार्टी, जो राज्य और लोगों का विकास कर सके। पार्टी का नाम हम कभी नहीं लेते।’

इसी बात को प्रांत स्तर के एक और प्रचारक आगे बढ़ाते हैं। वे कहते हैं, ‘घर-घर जाकर लोगों की कैटेगरी के हिसाब से लिस्ट बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। ये लिस्ट तीन हिस्सों में है। 1. BJP के पक्के वोटर 2. कन्फ्यूज वोटर 3. रूठे वोटर

यानी आपका काम खत्म हुआ? प्रचारक जवाब देते हैं, ‘नहीं, काम तो अब शुरू हुआ है। RSS की दूसरी टीमों ने लिस्ट के मुताबिक लोगों से फिर संपर्क करना शुरू किया है। ये टीमें वोटर्स को मुद्दे, उनके फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगी।’

‘किस पार्टी ने क्या वादा किया था, कितना पूरा किया, किस पार्टी ने बिहार को जंगलराज बनाया और किसने अच्छा काम किया। इन टीमों का काम कन्फ्यूज वोटर्स के दिमाग में क्लेरिटी लाना है। एक-सवा महीने बाद फिर लिस्ट को रिव्यू किया जाएगा।’

‘रूठे वोटर्स को गुस्सा निकालने का मौका दे रहे’

हम जमीन पर काम कर रहे स्वयंसेवकों से भी मिले। इनमें से एक कहते हैं, ‘RSS ने एक प्रयोग हरियाणा में किया था। NDA या BJP के नाराज वोटर्स को मनाने के लिए कुछ वरिष्ठ स्वयंसेवकों की टीमें बनाई थीं। इनका काम लोगों की शिकायतें सुनना था। वे उनसे मिलते, उनकी बातें सुनते थे। उन्हें गुस्सा उतारने देते थे। यही काम बिहार में भी कर रहे हैं।’

इस टीम का काम ही वोटर्स का गुस्सा झेलना है, जैसे परिवार के नाराज सदस्य की शिकायत सुनी जाती है। शिकायतों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। ये लिस्ट टीम अपनी लीडरशिप को दे रही हैं।

‘इस लिस्ट पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इसे दो हिस्से में बांटा है। जो काम दो महीनों के अंदर हो सकते हैं, उन्हें करवाने की कोशिश हो रही है। जिन शिकायतों को दूर करने में ज्यादा वक्त लगना है, उसके लिए भरोसा दे रहे हैं, उनकी शिकायत चुनाव के फौरन बाद दूर की जाएगी।’

किस तरह की शिकायतें हैं, जिन पर तुरंत काम करवा रहे हैं? जवाब मिला, ‘जैसे किसी गांव में सड़क खराब है, उसे ठीक करवा देना या फिर पक्की सड़क बनवा देना। किसी को PM आवास योजना के तहत घर नहीं मिला, तो उसकी प्रोसेस शुरू करवा देना, राशन कार्ड बनवा देना। ये सारे काम लिस्ट में हैं। कोशिश होगी ये सभी चुनाव से पहले करवा दें।’

महिला वोटर्स पर फोकस, उनके लिए अलग से स्ट्रैटजी बनी

RSS के एक सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में महिला वोटर निर्णायक हैं। उनके लिए अलग से रणनीति बनी है। RSS से जुड़े महिला संगठन ये काम कर रहे हैं। उनकी टीमें अलग-अलग उम्र की महिलाओं से मिल रही हैं। घरेलू और पेशेवर महिलाओं के लिए अलग टीमें हैं।’

वे आगे कहते हैं, ‘RSS एक सर्वे भी कर चुका है। कैटेगरी के साथ महिलाओं की लिस्ट तैयार है। अब उनके साथ टीमें बैठक कर रही हैं। महिलाओं से पूछा जा रहा है कि उनकी सीट पर कौन सा नेता बेहतर है। उन्हें कैसे नेता और सरकार चाहिए।’

‘महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हर चीज से प्रभावित होती हैं। घर का राशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सड़कों का माहौल, इनसे जुड़े ऐसे कुछ सवाल महिलाओं से पूछे जा रहे हैं। फिर उनके जवाब पर डिस्कशन किया जा रहा है। इससे कोई एक चेहरा या फिर उनकी पसंद की सरकार की इमेज निकल कर सामने आए। ये एक्सरसाइज टिकट के लिए कैंडिडेट चुनने में काम आएगी।’

RSS 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट देगा

सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में NDA में किसे कितनी सीटें मिलेंगी, ये तय होना है। 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट हमें तैयार करनी है। इस पर पार्टी और RSS मंथन करने के बाद फैसला लेगा।’

क्या लिस्ट में हर सीट से एक कैंडिडेट होगा? जवाब मिला, ‘नहीं, हर सीट पर तीन कैंडिडेट के नाम देंगे। हर कैंडिडेट की छवि, मजबूत और कमजोर पक्ष डिटेल में देंगे। जिस सीट पर मौजूदा विधायक कमजोर हैं, वहां नए चेहरे की तलाश करेंगे। विधायक का रिपोर्ट कार्ड भी देंगे।’

सोर्स बताते हैं,

प्रधानमंत्री की रैली से लेकर स्टार प्रचारकों की रैलियों में RSS की भूमिका होगी। कौन सा प्रचारक कहां वोटर्स को अपील करेगा, इसे ध्यान में रखते हुए RSS रैलियों और बैठकों का प्लान बना रहा है।

RSS के एक प्रांत प्रचारक बताते हैं, ‘बिहार में RSS की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां RSS की शुरुआत यानी 1925 से ही शाखाएं चल रही हैं। मार्च 2025 में RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत बिहार आए थे। यहां उन्होंने स्वयंसेवकों से बात की। इसके बाद बिहार के लिए रणनीति तैयार की गई। यह रणनीति तीन पॉइंट पर आधारित है- राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और विकास।’

स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS 2025 को शताब्दी वर्ष की तरह मना रहा है। फोटो दिल्ली में हुई बैठक की है। ये बैठक 26 से 28 अगस्त को दिल्ली में हुई थी।

स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS 2025 को शताब्दी वर्ष की तरह मना रहा है। फोटो दिल्ली में हुई बैठक की है। ये बैठक 26 से 28 अगस्त को दिल्ली में हुई थी।

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में RSS ने अलग-अलग सीटों पर 50 हजार से ज्यादा बैठकें की थीं। इनके जरिए वोटर्स को BJP के पक्ष में एकजुट किया गया। बिहार में भी इसी तरह काम हो रहा है। मुजफ्फरपुर के RSS के शाखा प्रमुख बताते हैं, हमारे 5 हजार स्थानीय स्वयंसेवक हैं। बाहर से करीब 500 स्वयंसेवक सिर्फ मुजफ्फरपुर आए हैं। वे गांव-गांव घूम रहे हैं।’

गांवों में 10 से 15 लोगों की टीम, ब्लॉक में हर हफ्ते 100 मीटिंग

ग्राउंड पर काम के तरीके पर एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम रोज 5-10 घरों में जाते हैं। लोगों से राम मंदिर, विकास की योजनाएं, जातिवाद के खिलाफ और RSS की रणनीति पर बात करते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवकों की टीम डोर-टु-डोर कैंपेन करती है।’

‘हम राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा, पाकिस्तान, हिंदुत्व, राम मंदिर, गौ-रक्षा और विकास के साथ-साथ PM किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के फायदे बताते हैं। हम ऐसे परिवार चुनते है जो हिंदू हैं, लेकिन BJP के वोटर नहीं हैं। या BJP के वोटर रहे हैं, लेकिन किसी वजह से नाराज हैं। अभी एक ब्लॉक में हर हफ्ते 100 बैठकें कर रहे हैं।’

मुस्लिम आबादी वाले एरिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस

RSS की टीमें मुद्दों के आधार पर इलाके चुन रही है। पूर्वी बिहार और सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस है। इन जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है।

यहां स्वयंसेवक राम मंदिर का जिक्र करते हैं और कहते हैं, मोदी जी ने 500 साल का सपना पूरा किया है। पश्चिमी बिहार और मगध में किसानों के मुद्दे और उनसे जुड़ी योजनाओं पर बात होती है। ग्रामीण इलाकों में जातिवाद के खिलाफ अपील की जाती है।

एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं। लोगों से बहस नहीं करते, बल्कि उन्हें समझाते हैं। बुजुर्गों से मिलते है। पहले रामायण, फिर विकास की बात करते हैं। हर जिले में प्रभारी हैं, जो इसकी रिपोर्ट नागपुर भेजते हैं।’

RSS के विचारक दिलीप देवधर बताते हैं, ‘संघ परिवार और BJP मिलकर काम कर रहे हैं। BJP जो काम अकेले कर सकती है, उसे वह करती है, बाकी मोर्चों पर संघ परिवार एक्टिव रहता है। संघ परिवार का काम इवेंट के हिसाब से नहीं होता।’

जाति जनगणना के ऐलान में भी RSS का इनपुट

केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल, 2025 को जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया था। देश में आजादी के बाद यह पहली जातीय जनगणना होगी। इस ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS चीफ मोहन भागवत के बीच मुलाकात हुई थी।

RSS के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘BJP, RSS से जातिगत जनगणना के लिए सहमति चाहती थी। RSS इस पर दुविधा में था। बिहार से संगठन के कार्यकर्ताओं से उसी वक्त इनपुट मिला कि BJP की OBC और आरक्षण विरोधी छवि को चुनाव से पहले तोड़ना होगा, नहीं तो इसका असर नतीजों पर दिखेगा।’

‘वक्त कम था, इसलिए उसी वक्त जाति जनगणना की घोषणा कर इस छवि को तोड़ने की कोशिश की गई। RSS से इस मुद्दे पर पहले से बात हो रही थी। इनपुट के बाद RSS ने सहमति दे दी क्योंकि 2015 में आरक्षण पर दिए मोहन भागवत के बयान का असर 2020 तक चुनाव में साफ दिखा था।’

गृह मंत्रालय ने 16 जून को जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्र सरकार दो फेज में जनगणना कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। 1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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